तेरी दोस्ती को कुछ ईसतरह निभाएँगें .....तुम रोज रुठना हम रोज मनाएँगे .....पर मनाने से मानभी जाना तुम ...वरना ईन भीगी पलकों को लेकर ईस दुनिया मे कंहा जाएँगे हम.....
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