“होली का त्यौहार बड़ा निराला है"
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होली का त्यौहार खुशियां लेकर आया है,
अपना लें सबको कौन अपना,कौन पराया है.
पूरे वर्ष के अंत में,जाड़े की ऋतु बसंत,
जाड़े को कर विदा गर्मी का लेते आनंद.
पशु-पक्षी,पेड़-पौधे,जीव-जंतु,कीड़े-मकोड़े,
खुश होते है सब देखकर क़ुदरत की सुंदरता.
सारे रंग देते दिखाई अवनि से अम्बर तक,
सूर्य भी अपनी छटा बिखेरे कोने-कोने तक.
विभिन्न रंगों की तितलियाँ एक फूल से उड़कर,
पहुँच जाती है क्षणभर में ही दूसरे फूल पर.
पेड़ सज जाते हैं बौर-पराग से,पौधे भी हैं वहीं पर,
मनमोहक रंगों के फूलों से सज-धज कर.
रंग-बिरंगें पक्षी भी दीखते हैं 'गर डाले एक नजर,
विहंगम दृश्य चित्त हर लेता है,जब देखें नीचे-ऊपर .
मानव-मन भी रंग बिखेरे यत्र-तत्र खुश होकर .
रंग देना चाहता है स्वयं को भी क़ुदरत के जैसा,
मना रहा है रंगों का त्यौहार होलिका कहकर.
रंगों से सराबोर होकर फिर स्नान करते है ,
तो खूबसूरत दीखते हैं सबके चेहरे आते निखर.
तो भला कहो क्यों न हम होली खेलें सब मिलकर,
रंग दे सारी दुनिया को प्रेम-सद्भाव से रंगकर.
आओ होली का त्यौहार मनाएं सब मिलकर,
विश्वास जगाएं सबमें कि यही है हितकर .
होली की बधाई सबको,रहें सब हिले-मिले,
भूलकर सारे बैर-भाव परस्पर गले मिलें ."

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