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जिला बिजनौर, नजीबाबाद क्षेत्र में मध्यप्रदेश से आए तीर्थ यात्रियों (जो तीर्थाटन के लिए हरिद्वार जा रहे थे) की बस पलट गई | दुर्घटना के कारण काफी संख्या में तीर्थ यात्री घायल व हताहत हुए | ज्यादा घायल यात्रियों को बिजनौर रेफर कर दिया गया तथा कम घायल यात्रियों को नजीबाबाद के समीपुर राजकीय अस्पताल में भर्ती कराया गया |
अचानक आई इस विपदा में तीर्थ यात्रियों के खाने पीने की व्यवस्था हिंदू युवा वाहिनी तथा छत्रिय समाज सभा द्वारा की गई |
http://hinduyuvavahininjb.rainrays.com/2017/08/17/food-arrangements-for-3-4-days-of-the-injured/

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" সেক্ষেত্রে তুলসীদাসের (১৫৩৩-১৬২৪) হিন্দী রামায়ণ (তুলসীদাসী রামায়ণ বা রামচরিত মানস) বিশেষভাবে উল্লেখযোগ্য। এটি উত্তর ভারতে বহুল প্রচলিত ও জনপ্রিয়।

উপরিউক্ত বাংলা রামায়ণগুলি সংস্কৃত রামায়ণের অনুবাদ হলেও রচয়িতার প্রতিভা, জীবন, জগৎ ও সমাজ সম্পর্কে অভিজ্ঞতা, রচনারীতি ইত্যাদি কারণে নতুন সৃষ্টির মর্যাদা লাভ করেছে। বিশেষ করে কৃত্তিবাসী রামায়ণ স্বমহিমায় উজ্জ্বল। মূলের সঙ্গে বিষয়গত অনেক পার্থক্য থাকলেও বাঙালি হিন্দুসমাজে এর ব্যাপক প্রভাব আছে।"

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For Ma Baglamukhi Mantra Diksha & Sadhana Guidance email to sumitgirdharwal@yahoo.com, shaktisadhna@yahoo.com or call us on 9410030994/9540674788. 

भगवती बगलामुखी की उपासना कलियुग में सभी कष्टों एवं दुखों से मुक्ति प्रदान करने वाली है। संसार में कोई कष्ट अथवा दुख ऐसा नही है जो भगवती पीताम्बरा की सेवा एवं उपासना से दूर ना हो सकता हो, बस साधकों को चाहिए कि धैर्य पूर्वक प्रतिक्षण भगवती की सेवा करते रहें।

भगवती बगलामुखी का यह भक्त मंदार मंत्र साधकों की हर मनोकामनां पूर्णं करने वाला है। इस मंत्र का विशेष प्रभाव यह है कि इसे करने वाले साधक को कभी भी धन का अभाव नही होता। भगवती की कृपा से वह सभी प्रकार की धन सम्पत्ति का स्वामी बन जाता है।  आज के युग में धन के अभाव में व्यक्ति का कोई भी कार्य पूर्ण नही होता। धन का अभाव होने पर ना ही उसका कोई मित्र होता है और ना ही समाज में उसे सम्मान प्राप्त होता है। इस मंत्र के प्रभाव से धीरे-धीरे साधक को अपने सभी कार्यो में सफलता मिलनी प्रारम्भ  हो जाती है एवं धन का आगमन होना प्रारम्भ हो जाता है।

ऐसा भी देखने में आता है कि कुछ लोग धन तो बहुत अधिक कमातें हैं लेकिन उनके पास बचता कुछ भी नही है, बिना वजह उनके धन का नाश होता है। ऐसे लोगो की जब हम कुण्डली देखते हैं तो षष्ठ(कर्ज) एवं द्वादश (व्यय) भाव शुभ ग्रहों द्वारा प्रभावित होते हैं अथवा एकादश (लाभ) भाव का स्वामी द्वादश (व्यय) भाव में अथवा द्वादश भाव के स्वामी के प्रभाव में होता है, जिस कारण वो जितना भी धन कमाते हैं उतना ही किसी ना किसी रूप में व्यय हो जाता है।

भगवती पीताम्बरा इस सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को चलाने वाली शक्ति हैं। नवग्रहों को भगवती के द्वारा ही विभिन्न कार्य सौपे गये हैं जिनका वो पालन करते हैं। नवग्रह स्वयं भगवती की सेवा में सदैव उपस्थित रहते हैं। जब साधक भगवती की उपसना करता है तो उसे नवग्रहों की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यदि साधक को उसके कर्मानुसार कहीं पर दण्ड भी मिलना होता है तो वह दण्ड भी भगवती की कृपा से न्यून हो जाता है एवं जगदम्बा अपने प्रिय भक्त को इतना साहस प्रदान करती हैं कि वह दण्ड साधक को प्रभवित नही कर पाता। इस सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में कोई भी इतना शक्तिवान नही है जो जगदम्बा कें भक्तो का एक बाल भी बांका कर सके। कहने का तात्पर्य यह है कि कारण चाहें कुछ भी हो भगवती बगलामुखी की उपासना आपको किसी भी प्रकार की समस्या से मुक्त करा सकती है।

मां की कृपा को वही जान पाया है जो उनकी शरण में गया है, इसीलिए अपने शब्दों को यही पर विराम देते हुए मां भगवती से प्रार्थना करता हूं कि आप सभी को भगवती अपनी शरण प्रदान करें एवं आपका कल्याण करे।
http://blog.anusthanokarehasya.com/2015/07/26/ma-baglamukhi-unnisakshara-mantra-sadhana-vidhi-pitambara-bhakt-mandaar-mantra-for-money-wealth/ 

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