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आगरा सिविल एन्क्लेव की जमीन का मार्ग प्रशस्त
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अंतत: सि‍वि‍ल एन्‍कलेव की जमीन को धन मि‍ल ही गया

(Rajeev Saxena, Editor www.agrasamachar.com
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आगरा के नया सि‍वि‍ल एन्‍कलेव के लि‍ये उ प्र सरकार ने अंतत: जारी कर ही दि‍या धन,कि‍न्‍तु इस योजना को लटकाये रखने में भारतीय जनता पार्टी की एन सी आर लॉबी और प्रदेश मंत्रिमंडल में आगरा मंडल से संबधि‍त एक मंत्री जि‍तनी खि‍लाफत लखनऊ में कर सकते थे उतनी की। इनका इरादा आगरा मंडल के कि‍सी अन्‍य जनपद में सि‍वि‍ल एयरपोर्ट को लेजाने का था। जैबर के खि‍लाडि‍यों को भी उस समय हद नि‍राशा हुई जबकि‍ ग्रीनफील्‍ड प्रोजेक्‍ट और कैबीनेट की स्‍वीकृति‍ होने के बावजूद एक भी नि‍जि‍ क्षेत्र का नि‍वेशक नहीं ढूढा जा सका। यही नहीं इस प्राइवेट फंडि‍ंग वाले प्राजेक्‍ट को नि‍वेशक न मि‍लने के कारण राज्‍य सरकार पर अपने स्‍तर से कर्ज लेकर इसे बनवाने के लि‍ये दबाव डाला जाने लगा। पता नहीं एन सी आर के उ प्र वाले इलाके में जैबर लावी कि‍तने जयजय कारे लगवापायी कि‍न्‍तु आगरा में इसके कारनामों से लगातार भाजपाईयों की कि‍रकि‍री हुई। वि‍धायक तो लगभग जन उपहास का पात्र बन कर रह गये। डि‍प्‍टी सी एम स्‍तर के नेता तक प्रेस वालों को समझा नही पा रहे थे कि‍ भाजपा सरकार सूबे की अखि‍लेश यादव की सपा सरकार के नक्‍शे कदम पर क्‍यों चलने को वि‍वश है।
जहां तक गोतम बुद्ध नगर , बुलंद शहर के वि‍कास का सवाल है , जब तक गुंडागर्दी नहीं रुकेगी तब तक नि‍वेशक आने को सहज तैयार नहीं होंगे। जेपी के फार्मूला वन, इंटरनेशनल क्रि‍क्रेट स्‍टेडि‍यम ,स्पोर्ट कॉप्‍लैक्‍स फेल हो चुके हैं। संजय खान थीम पार्क जैसे महत्‍वकांक्षी प्रोजेक्‍ट से पीछा छुडा कर सपा सरकार के द्वारा लीज की गयी एक हजार एकड जमीन लौटा चुके हैं।
जैबर एयरपोर्ट का नोटि‍फि‍केशन हो जाने से प्रौपर्टी सैक्‍टर के दि‍न बदलने की जो उम्‍मीद थी वह भी खरी नहीं उतरी।सबसे कष्‍टकारी यह है कि‍ पहले सैफई और अब जैवर में बडे नि‍वेशों के चक्‍कर में पूरे प्रदेश का वि‍कास ठप्प सा हो गया। सपा, बसपा और भाजपा की प्रदेश मे रही सरकारों के काल का अगर आंकलन कि‍या जाये तो बीस साल से प्रदेश के डव्‍लपमेंट एटलस में ठहराव आया हुआ है। सड़कें ढंग की न तो बना पा रहे हैं और नाही पुरानी बनी का मेंटीनेंस ही कर पा रही है सरकार। नहरों के रकवे लगातार सीमि‍त होते जा रहे हैं। न तो नहरो की ढंग से सफाई ही हो पा रही है और नाही उनपर होने वाले अति‍क्रमण ही हटवाए जा सके हैं।
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