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और अब शुभरात्रि-ज्ञान में देश विभाजन के बाद की सबसे बडी हिंसात्मक घटना! जो मुझे फ़िल्म पद्मावत के कारण याद ताजा कर गई

फ़िल्म पद्मावत क्या सिर्फ राजपूतों की लड़ाई है? जब खिलजी मेवाड़ में घुसा होगा तो उसने फिर किसी की जाति देख कर तबाही नहीं की होगी! यह हम सब हिन्दुओं की लड़ाई है! यह सनातन संस्कृति के अस्तित्व की लड़ाई है! यह गलती हम एक बार बाजीराव फिल्म के समय कर चुके हैं जब इसे हमने सिर्फ मराठा से जोड़ कर देखा था! आज महान युद्ध वीर बाजीराव अब मस्तानी सरनेम के साथ जाना जाता है! क्या हम अपनी आने वाली पीढ़ी को रानी पद्मवती का वो चेहरा बना कर दिखाना चाहेगें जो संजय लीला भंसाली जैसा एक मानसिक बीमार दिखाना चाहता है!

मुझे याद आ रहा है 19 जनवरी 1990 जो भारत के इतिहास का सबसे मनहूस दिन माना गया है, जब कश्मीर के मुसलमानों ने, हिन्दुओं का कत्लेआम कर, उन्हें कश्मीर छोड़कर भागने को मजबूर किया था। उन हैवानों ने अमानवीयता की पराकाष्ठ को पार करते हुए ऐसे पोस्टर तक लगाय थे कि - जान बचाना चाहते हो तो कश्मीर से भाग जाओ, लेकिन अपनी लड़कियों को यहीं छोड़कर जाना।

उन शैतानों से अपनी बेटियों की इज्ज़त बचाने के लिए अनेकों स्वाभिमानी हिन्दुओं ने अपनी बेटियों को जहर तक दे दिया था 1989 से 1990 के दौरान फारुक अब्दुल्ला की सरकार थी। उसी दौर में मुसलमानों ने हिन्दुओं पर सर्वाधिक अत्याचार किये। अब्दुल्ला सरकार हिन्दुओं को सुरक्षा देने और दहशतगर्दों को रोकने में नाकाम रही थी।

हिंसा के कारण फारुख सरकार को बर्खास्त कर दिया गया। लेकिन राज्यपाल जगमोहन को चार्ज देने में देरी की गई। अब वहां न राज्य सरकार थी और न केंद्र सरकार। पुलिस और प्रशासन गायब था। सारी ताकत दंगाई मुसलमानों के हाथ में थी। वे जो चाहे वो कर रहे थे। यह इतना सुनियोजित था कि - घाटी का कोई हिस्सा हिंसा से अछूता नहीं था।

इस अमानवीय घटना के बाद भी, सेकुलर अपना पैदाइशी कमीनापन दिखाने से बाज नहीं आये! इस अमानवीय अत्याचार का जिक्र करते समय न तो अत्याचारियों को कभी "मुसलमान" लिखा जाता है और न ही पीड़ितों को "हिन्दू". पीड़ितों के लिए केवल "कश्मीरी पंडित" शब्द का इस्तेमाल किया जाता है और उनको मारने वाले कौन थे पता नहीं!

ऐसा केवल इसलिए किया गया, जिससे शेष भारत के हिन्दू, इसे हिन्दुओं पर मुसलमानों का अत्याचार न माने, बल्कि इसे केवल कुछ अज्ञात लोगों का, एक राज्य की, एक जाति विशेष पर हमला समझें! शेष भारत के हिन्दू इस चाल में फंस गए और इसे सारे देश की मुसीबत मानने के बजाय केवल कश्मीर के पंडितों की समस्या मानकर खामोश हो गये!

कश्मीर हिंसा केवल कुछेक आतंकियों का, आतंकी हमला नहीं था बल्कि लाखों मुसलमानों का हिन्दुओं पर सामूहिक हमला था। यदि यह मात्र आतंकी घटना होती तो कम से कम, घटना के बाद तो, अन्य मुसलमान, हिन्दूओं की हिफाजत के लिए आगे आते! यह हमला कुछेक आतंकियों ने नहीं बल्कि लाखों मुसलमानों ने अपने-अपने पड़ोसियों पर किया था!

कश्मीर में हिन्दुओं पर जो अमानवीय अत्याचार हुए उन पर सेकुलर मीडिया हमेशा खामोश रहता है। फेसबुक पर दिन रात 2002 का रोना रोने वाले मुसलमानों ने भी, आजतक कभी 19 जनवरी 1990 की उस घटना पर कोई पोस्ट नहीं लिखकर निंदा नहीं की है। उसके बाबजूद अनेकों हिन्दू सेकुलरता के नाम पर बेबकूफ बनते आ रहे हैं।

हिंसा ठीक नहीं होती। इससे गरीब, निर्दोष और मानवता का बहुत नुकसान होता है। जौहर का मतलब अगर समझाना है तो विरोध करने का सबसे बढ़िया तरीका है कि वो फ़िल्म देखी न जाये। आज देश के कई भागों से हिसा की खबरें आ रही है। रेल-सड़क जाम की खबरें हैं। छिट-पुट खबरे तीन दिन पहले से ही आनी शुरू हो गई थीं। इसको रोकना होगा। कलाकारों को भी सोचना होगा। इतिहास को तोड़-मरोड़ कर न दिखाएं।
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〰〰दुमछल्ला●●●●✍

हाथ जोड़कर नमन जो करते,
मत समझो कि कमजोर हैं हम●●●


उठाओ कथायें इतिहास की
तो छाये हुए हर ओर हैं हम●●●
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🌃🌃🌃 शुभ रात्रि 🌃🌃🌃
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पीडी एजेंडा ???

केन्या में जन्म लेने वाले और फिर भारत की सर्वोच्च संस्था पर मलाई चाटने के बाद आज हिंदुत्व को बदनाम करने और मुस्लिम ईसाई पर प्यार बरस रहा है ???

हिंदुत्व की राजनीति देश के वैश्विक शक्ति बनने की राह में बाधा हो सकती है।भारत वैश्विक शक्ति बनने की आकांक्षा रखता है ! : पूर्व मिलंड

वैश्विक परिदृश्य में अगर आप मुस्लिम देशों के साथ मित्रता का हाथ बढ़ाना चाहते हैं तो आप वापस अपने देश में मुस्लिम विरोधी नहीं बन सकते। : पूर्व मिलंड

अगर आप ईसाई देशों के साथ मजबूत संबंध चाहते हैं तो आप ईसाई-विरोधी नहीं बन सकते।' : पूर्व मिलंड

congress gaddar party

१. कांग्रेस के बड़े नेता चिदम्बरम ने कल ही पाकिस्तानी भाषा बोलते हुए कहा की कश्मीर
कोआज़ाद कर देनी चाहिए?
भारत एक आज़ाद मुल्क है और काश्मीर उसका एक
अभिन्न अंग तो काश्मीर गुलाम कैसे?
कहीं ये "कांग्रेस पार्टी" पाकिस्तान की तो नहीं?

२. कांग्रेसी राज में, पाकिस्तानी सेना हमारे सरहद में घुसकर हमारे सैनिकों का सर काट कर ले जाती थी और "कांग्रेसी रक्षा मंत्री" पाकिस्तानी सेना का बचाव करते हुए दोष किसी और पर लगाते थे, क्यों?

३. समाचारों के अनुसार २०१२ के आसपास कई हजार पाकिस्तानी (जो कि आतंकवादी हो सकते है) "नकली वीसा" के ज़रिये 'भारत' आकर गायब हो गए थे, और सरकारी तंत्र मरणासन्न, क्यों?

४. ९०,००० पाकिस्तानी युद्घ बंदियों को १९७२ में "इंदिरा" ने मुफ्त में छोड़ दिया था। जबकि
उनके बदले हम काश्मीर इत्यादि कई सम्स्याओं का निराकरण कर सकते थे, पर नहीं किया, क्यों?

५. गुजरात में चुनाव के वक़्त ISIS के दो आतंकी पकडे गए। उनमें से एक वहीं के एक निजी
अस्पताल, जिसका सम्बन्ध 'कांग्रेसी नेता' और 'सोनिया गांधी' के करीबी "अहमद पटेल" से बताया जा रहा है, में कार्यरत है, क्या गुंजरत में फिर किसी दंगे की तैयारी थी?

६. 'सोनिया गाँधी', हिंदुओं से घृणा करती है?
पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखेर्जी की पुस्तक ”Coalition
years" से क्या यह निष्कर्ष नहीं निकलता? झुठे और घिनौने आरोप लगाकर "शंकाराचार्य" की
गिरफ्तारी, मोदी और शाह पर झूटे केस, निराधार आरोपों के चलते कर्नल पुरोहित, साध्वी
प्रज्ञा सिंह इत्यादिकी गिरफ्तारी, जोकी आरोपों के अनुसार पाकिस्तान के ISIS के इशारे पर हुआ।

देशहित में क्या इन तथ्यों और ऐसे ही अनेक तथ्यों की संपूर्ण उच्च-स्तरीय जांच नहीं होनी चाहिए?

देशद्रोही कांग्रेस !! ✋ 👿
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