Post has shared content

Post has attachment
Photo

मदद

आज मीना स्कूल थोड़ी देर से पहुँची।बहिन जी द्वारा देर से आने का कारण पूँछने पर मीना ने बताया की उसने स्कूल के रास्ते में पड़ने वाले हैण्डपम्प पर दीनू काका की पानी से भरी बाल्टी उठाने में मदद की।शोभा ने जब मदद के बदले इनाम की बात पूँछी तो मीना ने जवाब दिया ,'मैंने इनाम के लिए मदद नहीं की।'
बहिनजी बच्चों से कहती हैं कि,किसी की मदद करेंगे और कल उसे कॉपी में लिखकर लायेंगे।और जिसकी मदद सबसे उत्तम होगी उसके लिए तालियाँ बजबाई जाएँगी।

अगले दिन......बहिन जी बारी बारी से सबकी कापियाँ देखती हैं....
√ सुनील ने गोलू भैया की 'भूरी' बकरी ढूँढने में मदद की।
√ दीपू ने पोंगाराम चाचा की,आम तुड़वाने और गिनवाने में मदद की।
√ मीना ने शन्नो चाची के बेटे गुल्लू को 'चिड़िया और उल्लू' नामक कहानी पढ़कर सुनाई।
√ सोमा ने मुर्गी की मदद की.....सरपंच जी के घर के बाहर लगे तारों से मुर्गी को सुरक्षित बाहर निकाला।

बच्चों द्वारा पूँछने पर कि 'यह कैसी मदद ?' इस पर बहिनजी ने बच्चों को समझाया कि मदद मदद होती है चाहे जानवर की हो या इंसान की।

√ मोनू ने कल स्कूल के रास्ते में पड़ने वाले हैण्डपम्प के आस-पास साफ सफाई की ।
इस तरह मोनू द्वारा की गयी मदद से सभी गाँव वालों को लाभ मिला, नल के आस पास गंदगी नहीं रहेगी और बीमारियाँ नहीं फैलेंगी।बहिनजी ने उसके लिए कक्षा में तालियाँ बजबाई।

एक दर्जी बस पर चढ़ा ही था ,
और तभी उसका फोन बजा ,,

उसने फोन उठाया और बस.....
इतना बोला तुम हाथ काटो

गला मैं आकर काटूंगा

बस इतना कहते ही
लोग खिड़की से बाहर कूद गए।
😂😁😎😁😁😁

Post has attachment
Photo

दुश्मनों की जफा का खौफ नहीं मुझे ,
मैं दोस्तों की वफा से डरती हूँ



♥ ♥ ♥



बातों से सीखा है मैंने आदमी को पहचानने का तरीका,

जो हल्के लोग होते है वह अक्सर बातें भारी करते हैं...!!!



♥ ♥ ♥


मुझे नफ़रत पसंद है
लेकिन दिखावे का प्यार se

कबीरवाणीः प्रभु नाम का स्मरण के लिए समय नहीं, भाव चाहिए

एक बार संत कबीर से किसे ने पूछा, आप दिनभर कपड़ा बुनते हैं तो भगवान का स्मरण कब करते हैं? कबीर उसे लेकर झोपड़ी से बाहर आ गए और कहा कि यहां खड़े रहो। 

तुम्हारे सवाल का जबाव शायद में न दे सकूं, लेकिन उसे दिखा सकता हूं। कबीर ने दिखाया कि एक औरत पानी की गागर सिर पर रखकर लौट रही थी। उसके चेहरे पर प्रसन्नता थी। गागर को उसने बिल्कुल छोड़ रखा था। 

फिर भी वह पूरी तरह संभली हुई थी। कबीर ने कहा- इस औरत को देखो। वह कोई गीत गुनगुना रही है। शायद कोई प्रियजन घर आया होगा। वह प्यासा होगा, उसके लिए पानी लेकर जा रही है। मैं तुमसे जानना चाहता हूं कि उसे गागर की यदा होगी या नहीं। 

उस आदमी ने कहा- याद नहीं होती तो शायद गागर अभी तक रिस से गिर चुकी होती। कबीर बोले, यह साधारण सी औरत रास्ता पार करती है, गीत गाती है, फिर भी गागर का ध्यान रखती है। 

ठीक इसी तरह में प्रभु का स्मरण करता हूं। कपड़ा बुनने के काम में शरीर लगा रहता है और मेरा ध्यान ईश्वर की ओर रहता है। 

संक्षेप में 

भगवान के नाम का जप करने के लिए समय नहीं भाव की जरूरत होती है, निर्भर करता है कि आप किस समय उन्हें याद कर रहे हैं। 




Post has attachment
Photo

Post has attachment
Photo

Post has attachment
Photo
Wait while more posts are being loaded