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ख्वाहिशें अक्सर बुझदिल बना देती है इंसानी फिदरत को,
बस जमीर जिन्दा रख बहुत से हैं जो तुझसे उम्मीद लगाएं है।
याद रख वख्त तो आजमाईश लेता ही रहेगा मुसाफिर,
तेरी मंजिल ही है जो नए जंहा की तलाश पर खत्म होगी।
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मै इश्क में हूं यारो मुझे तन्हा छोड़ दो
में इबादत में हूं यारो मुझे तन्हा छोड़ दो।
तड़फता रहा हूं जिसके लिए ,
उसकी यादो में हूं मुझे तन्हा छोड़ दो,
किसी का हो चूका हूँ आज अपने मे नही हूँ मुझे तन्हा छोड़ दो।
दुनियां बह रही अपनी रफ्तार मे, पर में ठहरा हू ,मेरा इंतजार ना करो मै इश्क में हूँ,
वो डूबे हे जिनकी यादो में मुझको क्या,मै उनके इश्क में हूं मुझे तन्हा छोड़ दो।
वो मुस्करा रहें हैं बैठे कर अपनों के बीच में, मुझे भीड़ मे बैठ कर उनको निहारने दो, मै कब से उनके इश्क में हूं।
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तेरी किस्मत तू जाने, मै अपनी किस्मत का सताया हूं
ख्वाब देखना छोड़ दिया,अब ख्वाबो की वजह का मारा हूं,

चार कदम चलने की हिम्मत क्या की अपने वजूद के साथ,
जमानेभर की दुश्मनियां उधार ले ली मैने,

जिधर निकलता हूँ बस अपनापन ढूंढता हुँ,
गेरो की बस्ती में खोया अपना घर ढूंढता हूं।

जिगर वाला हूं हार कर भी जीतना जानता हूँ।
विषधर हूं जहर पी कर भी जीना जानता हू
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