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कड़ी पत्ता यानि मीठी नीम :-
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कड़ी पत्‍ता या फिर जिसको हम मीठी नीम के नाम से भी जानते हैं, भोजन में डालने वाली सबसे अहम सामग्री मानी जाती है। यह खास तौर पर साउथ इंडिया में काफी पसंद किया जाता है। अक्‍सर लोग इसे अपनी सब्‍जियों और दाल में पड़ा देख, हाथों से उठा कर दूर कर देते हैं। पर आपको ऐसा नहीं करना चाहिये। कड़ी पत्‍ते में कई मेडिकल प्रोपर्टी छुपी हुई हैं। यह हमारे भोजन को आसानी से हजम करता है और अगर मठ्ठे में हींग और कडी़ पत्‍ते को मिला कर पीया जाए तो भोजन आसानी से हजम हो जाता है। हिमाचल में इसे गांधला कहते है। आम बोलचाल में कड़ी पत्ता के नाम से ही जानते है।

चलिए जानते हैं इसके बारे में और भी महत्‍वपूर्ण बातें-

क्‍या है इसका उपयोग-
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1. मतली और अपच जैसी समस्‍या के लिए कड़ी पत्‍ते का उपयोग बहुत लाभकारी होता है। इसको तैयार करने के लिए कड़ी पत्‍ते का रस ले कर उसमें नींबू निचोडें और उसमें थोड़ा सी चीनी मिलाकर प्रयोग करें।

2. अगर आप अपने बढ़ते हुए वजन से परेशान हैं और कोई उपाय नहीं सूझ रहा है। तो रोज कुछ पत्‍तियां कड़ी नीम की चबाएं। इससे आपको अवश्‍य फायदा होगा।

3. कड़ी पत्‍ता हमारी आंखों की ज्‍योती बढाने में भी काफी फायदेमंद है। साथ ही यह भी माना जाता है कि यह कैटरैक्‍ट जैसी भंयकर बीमारी को भी दूर करती है।

4. अगर आपके बाल झड़ रहें हों या फिर अचानक सफेद होने लग गए हों तो कड़ी पत्‍ता जरुर खाएं। अगर आपको कड़ी पत्‍ता समूचा नहीं अच्‍छा लगता तो बाजार से उसका पाउडर खरीद लें और फिर उसे अपने भोजन में डाल कर खाएं।

5. इसके साथ ही आप चाहें तो अपने हेयर ऑयल में ही कड़ी के पत्‍ते को उबाल लें। इस हेयर टॉनिक को लगाने से आपके बालों की जितनी भी समस्‍या होगी वह सब दूर हो जाएगी।

6. अगर डायबी‍टीज रोगी कड़ी के पत्‍ते को रोज सुबह तीन महीने तक लगातार खाएं तो फायदा होगा। इसके अलावा अगर डायबीटीज मोटापे की वजह से हुआ है, तो कड़ी पत्‍ता मोटापे को कम कर के मधुमेह को भी दूर कर सकता है।

7. सिर्फ कड़ी पत्‍ता ही नहीं बल्कि इसकी जड़ भी काफी उपयोगी होती है। जिन लोगों की किड़नी में दर्द रहता है, वह अगर इसका रस पिएं तो उन्‍हें अवश्‍य फायदा होगा।

प्यारे मित्रों को समर्पित पोस्ट

आपका अपना
डाँ०अमनदीप सिंह चीमाँ,पंजाब

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हार्ट अटैक: ना घबराये ......

सहज सुलभ उपाय ....
99 प्रतिशत ब्लॉकेज को भी रिमूव कर देता है पीपल का पत्ता....

पीपल के 15 पत्ते लें जो कोमल गुलाबी कोंपलें न हों, बल्कि पत्ते हरे, कोमल व भली प्रकार विकसित हों। प्रत्येक का ऊपर व नीचे का कुछ भाग कैंची से काटकर अलग कर दें।

पत्ते का बीच का भाग पानी से साफ कर लें। इन्हें एक गिलास पानी में धीमी आँच पर पकने दें। जब पानी उबलकर एक तिहाई रह जाए तब ठंडा होने पर साफ कपड़े से छान लें और उसे ठंडे स्थान पर रख दें, दवा तैयार।

इस काढ़े की तीन खुराकें बनाकर प्रत्येक तीन घंटे बाद प्रातः लें। हार्ट अटैक के बाद कुछ समय हो जाने के पश्चात लगातार पंद्रह दिन तक इसे लेने से हृदय पुनः स्वस्थ हो जाता है और फिर दिल का दौरा पड़ने की संभावना नहीं रहती। दिल के रोगी इस नुस्खे का एक बार प्रयोग अवश्य करें।

* पीपल के पत्ते में दिल को बल और शांति देने की अद्भुत क्षमता है।
* इस पीपल के काढ़े की तीन खुराकें सवेरे 8 बजे, 11 बजे व 2 बजे ली जा सकती हैं।
* खुराक लेने से पहले पेट एक दम खाली नहीं होना चाहिए, बल्कि सुपाच्य व हल्का नाश्ता करने के बाद ही लें।
* प्रयोगकाल में तली चीजें, चावल आदि न लें। मांस, मछली, अंडे, शराब, धूम्रपान का प्रयोग बंद कर दें। नमक, चिकनाई का प्रयोग बंद कर दें।
* अनार, पपीता, आंवला, बथुआ, लहसुन, मैथी दाना, सेब का मुरब्बा, मौसंबी, रात में भिगोए काले चने, किशमिश, गुग्गुल, दही, छाछ आदि लें । ......

तो अब समझ आया, भगवान ने पीपल के पत्तों को हार्टशेप क्यों बनाया..
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शिवलिंगी खाये और सन्तान पाये,,,,, ( जादा से जादा सेयेर करे,)
येसे बहोत लोग है जिनको सन्तान नहीं है और परेशान है,

भारत के वनांचलों, खेत खलिहानों, आँगन के बाडों आदि में इसे प्रचुरता से उगता हुआ देखा जा सकता है। इसके बीजों को देखने से स्पष्ठरूप से शिवलिंग की रचना दिखाई देती है और इसी वजह से इसे शिवलिंगी कहते हैं। बाजार में अक्सर इसके बीजों को चमत्कारिक गुणों वाला बीज बोलकर बेचा जाता है। वैसे अनेक रोगों के निवारण के लिए महत्वपूर्ण मानी जाने वाली इस बूटी को आदिवासी मुख्यत: संतान प्राप्ति के लिए उपयोग में लाते हैं। शिवलिंगी का वानस्पतिक नाम ब्रयोनोप्सिस लेसिनियोसा होता है।

चलिए जानते हैं आदिवासी किस तरह से शिवलिंगी को हर्बल चिकित्सा के रूप में अपनाते हैं।पातालकोट के गोंड और भारिया जनजाति के लोग इस पौधे को पूजते है, इन आदिवासियों का मानना है कि संतानविहीन दंपत्ती के लिये ये पौधा एक वरदान है। पातालकोट के आदिवासी हर्बल जानकारों के अनुसार महिला को मासिक धर्म समाप्त होने के 4 दिन बाद प्रतिदिन सात दिनों तक संजीवनी के 5 बीज खिलाए जाए तो महिला के गर्भधारण की संभावनांए बढ जाती है।इन आदिवासीयों द्वारा शिवलिंगी के बीजों को तुलसी और गुड के साथ पीसकर संतानविहीन महिला को खिलाया जाता है, महिला को जल्द ही संतान सुख की प्राप्ति होती है।आदिवासी महिलाएं इसकी पत्तियों की चटनी बनाती है, इनके अनुसारे ये टॉनिक की तरह काम करती है। जिन महिलाओं को संतानोत्पत्ति के लिए इसके बीजों का सेवन कराया जाता है उन्हें विशेषरूप से इस चटनी का सेवन कराया जाता हैपत्तियों को बेसन के साथ मिलाकर सब्जी के रूप में भी खाया जाता है, आदिवासी भुमकाओं (हर्बल जानकार) के अनुसार इस सब्जी का सेवन गर्भवती महिलाओं को करना चाहिए जिससे होने वाली संतान तंदुरुस्त पैदा होती है।

इन आदिवासियों का भी मानना है कि शिवलिंगी न सिर्फ साधारण रोगों में उपयोग में लायी जाती है अपितु ये नर संतान प्राप्ति के लिये भी कारगर है, हलाँकि इस तरह के दावों को आधुनिक विज्ञान नकार सकता है लेकिन इन आदिवासी हर्बल जानकारों के दावों को एकदम नकारना ठीक नही।इन आदिवासियों का भी मानना है कि शिवलिंगी न सिर्फ साधारण रोगों में उपयोग में लायी जाती है अपितु ये नर संतान प्राप्ति के लिये भी कारगर है, हलाँकि इस तरह के दावों को आधुनिक विज्ञान नकार सकता है लेकिन इन आदिवासी हर्बल जानकारों के दावों को एकदम नकारना ठीक नही।

डाँग- गुजरात के आदिवासी शिवलिंगी के बीजों का उपयोग कर एक विशेष फार्मुला तैयार करते हैं ताकि जन्म लेने वाला बच्चा चुस्त, दुरुस्त और तेजवान हो। शिवलिंगी, पुत्रंजीवा, नागकेशर और पारस पीपल के बीजों की समान मात्रा लेकर चूर्ण बना लिया जाता है और इस चूर्ण का आधा चम्मच गाय के दूध में मिलाकर सात दिनों तक उस महिला को दिया जाता है जिसने गर्भधारण किया होता है।डाँगी आदिवासी इसके बीजों के चूर्ण को बुखार नियंत्रण और बेहतर सेहत के लिए उपयोग में लाते हैं। अनेक हिस्सों में इसके बीजों के चूर्ण को त्वचा रोगों को ठीक करने के लिए भी इस्तमाल किया जाता है।
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इन 6 बीमारियों से रहना चाहते है दूर तो ये चीज खाइये जरूर।
#आइये जाने #
सर्दियों में भुनी हुई लहसुन का सेवन करने से शरीर को काफी फायदा मिलता है। इसमें बहुत से एंटी बायोटिक तत्व पाए जाते हैं जो शरीर की कई आवश्यकताओं पूरा करते हैं। इसका सेवन करने से आप कई समस्याओं से निजात पा सकते हैं। आज हम आपको भुनी हुई लहसुन के फायदों के बारे में बताएंगे जिसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे।

1. कॉलेस्ट्रॉल - सुबह खाली पेट भुने हुए लहसुन का सेवन करने से कॉलेस्ट्रॉल का लेवल कम होता है और हार्ट से जुड़ी समस्याओं को भी खत्म करता है।
2. वजन कम करें - वजन कम करने भी यह काफी मददगार है। इसका सेवन करने से बॉडी का फैट तेजी से बर्न होता है जिससे कि वजन कम होने लगता है।
3. सर्दी-जुकाम - लहसुन की तासीर गर्म होती है इसलिए इसे भुनकर खाने से सर्दी-जुकाम में राहत मिलती है और साथ ही साथ शरीर में गर्माहट भी पैदा होती है।
4. ब्लडप्रैशर - भुनी हुई लहसुन का सेवन करने से ब्लडप्रैशर भी सामान्य रहता है और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में भी मदद करता है।
5. एनर्जी बढ़ाए - लहसुन में कई कार्बोहाइड्रेट मौजूद होते है जो शरीर की कमजोरी को दूर करते है और शरीर को उर्जा प्रदान करते हैं।
6. कब्ज - भुनी हुई लहसुन का सेवन करने से पाचन शक्ति दुरूस्त रहती है और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत मिलती है।
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मधुमेह/Diabetes का आयुर्वेदिक इलाज विजयसार से

विजयसार नाम से एक लकड़ी है ये हमारे भारत में मध्य प्रदेश से लेकर पूरे दक्षिण भारत मे पाया जाता है। इसकी लकड़ी के टुकड़े हर जड़ी बूटी बेचने वाले या पन्सारी की दुकान से आसानी से मिल जाते है। इसकी लकड़ी का रंग हल्का लाल रंग से गहरे लाल रंग का होता है। यह दवा नये मधुमेह रोगियों के लिये तो प्रभावी है ही, साथ में उन रोगियों जिन्हें मधुमेह रोधी दवा खाने से दवा खाने से कोई लाभ नहीं होता, उनके लिये भी अचूक है।

विजयसार को ना केवल आयुर्वेद बल्कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी डायबिटीज में बहुत उपयोगी मानता है इसके लिए विजयसार की लकड़ी से बने गिलास में रात में पानी भर कर रख दिया जाता है सुबह भूखे पेट इस पानी को पी लिया जाता है विजयसार की लकड़ी में पाये जाने वाले तत्व रक्त में इन्सुलिन के स्राव को बढ़ाने में सहायता करते हैं .

विजयसार की लकड़ी के टुकड़े बाजार से ले आए, जिसमे घुन ना लगा हो। इसे सूखे कपड़े से साफ कर ले। अगर टुकड़े बड़े है तो उन्हे तोड़ कर छोटे- छोटे- 1/4 -1/2 सेंटीमीटर या और भी छोटे टुकड़े बना ले।फिर आप एक मिट्टी का बर्तन ले और इस लकड़ी के छोटे छोटे टुकड़े लगभग पच्चीस ग्राम रात को दो कप या एक गिलास पानी में डाल दे । सुबह तक पानी का रंग लाल गहरा हो जाएगा ये पानी आप खाली पेट छानकर पी ले और दुबारा आप उसी लकड़ी को उतने ही पानी में डाल दे शाम को इस पानी को उबाल कर छान ले। फिर इसे ठंडा होने पर पी ले।

इसकी मात्रा रोग के अनुसार घटा या बढ़ा भी सकते है अगर आप अग्रेजी दवा का प्रयोग कर रहे है तो एक दम न बंद करे बस धीरे -धीरे कम करते जाए अगर आप इंस्युलीन के इंजेक्शन प्रयोग करते है वह 1 सप्ताह बाद इंजेक्शन की मात्रा कम कर दे। हर सप्ताह मे इंस्युलीन की मात्रा 2-3 यूनिट कम कर दे। विजयसार की लकड़ी में पाये जाने वाले तत्व रक्त में इन्सुलिन के स्राव को बढ़ाने में सहायता करते हैं l

http://www.drnuskhe.com/diabetes-ka-gharelu-upchar-vijaysar-se/

औषधीय गुण :
- मधुमेह को नियन्त्रित करने में सहायता करता है।
- उच्च रक्त-चाप को नियन्त्रित करने में सहायता करता है।
- अम्ल-पित्त में भी लाभ देता है।
- जोडों के दर्द में लाभ देता है।
- हाथ-पैरों के कम्पन में भी बहुत लाभदायक है।
- शरीर में बधी हुई चर्बी को कम करके, वजन और मोटापे को भी कम करने में सहायक है।
- त्वचा के कई रोगों, जैसे खाज-खुजली, बार-2 फोडे-फिंसी होते हों, उनमें भी लाभ देता है।
- इसके नियमित सेवन से जोड़ों की कड़- कड़ बंद होती है . अस्थियाँ मजबूत होती है.

कभी सोचा है की प्रभु श्री राम के दादा परदादा का नाम क्या था?
नहीं तो जानिये-
1 - ब्रह्मा जी से मरीचि हुए,
2 - मरीचि के पुत्र कश्यप हुए,
3 - कश्यप के पुत्र विवस्वान थे,
4 - विवस्वान के वैवस्वत मनु हुए.वैवस्वत मनु के समय जल प्रलय हुआ था,
5 - वैवस्वतमनु के दस पुत्रों में से एक का नाम इक्ष्वाकु था, इक्ष्वाकु ने अयोध्या को अपनी राजधानी बनाया और इस प्रकार इक्ष्वाकु कुलकी स्थापना की |
6 - इक्ष्वाकु के पुत्र कुक्षि हुए,
7 - कुक्षि के पुत्र का नाम विकुक्षि था,
8 - विकुक्षि के पुत्र बाण हुए,
9 - बाण के पुत्र अनरण्य हुए,
10- अनरण्य से पृथु हुए,
11- पृथु से त्रिशंकु का जन्म हुआ,
12- त्रिशंकु के पुत्र धुंधुमार हुए,
13- धुन्धुमार के पुत्र का नाम युवनाश्व था,
14- युवनाश्व के पुत्र मान्धाता हुए,
15- मान्धाता से सुसन्धि का जन्म हुआ,
16- सुसन्धि के दो पुत्र हुए- ध्रुवसन्धि एवं प्रसेनजित,
17- ध्रुवसन्धि के पुत्र भरत हुए,
18- भरत के पुत्र असित हुए,
19- असित के पुत्र सगर हुए,
20- सगर के पुत्र का नाम असमंज था,
21- असमंज के पुत्र अंशुमान हुए,
22- अंशुमान के पुत्र दिलीप हुए,
23- दिलीप के पुत्र भगीरथ हुए, भागीरथ ने ही गंगा को पृथ्वी पर उतारा था। भागीरथ के पुत्र ककुत्स्थ थे |
24- ककुत्स्थ के पुत्र रघु हुए, रघु के अत्यंत तेजस्वी और पराक्रमी नरेश होने के कारण उनके बाद इस वंश का नाम रघुवंश हो गया, तब से श्री राम के कुल को रघु कुल भी कहा जाता है |
25- रघु के पुत्र प्रवृद्ध हुए,
26- प्रवृद्ध के पुत्र शंखण थे,
27- शंखण के पुत्र सुदर्शन हुए,
28- सुदर्शन के पुत्र का नाम अग्निवर्ण था,
29- अग्निवर्ण के पुत्र शीघ्रग हुए,
30- शीघ्रग के पुत्र मरु हुए,
31- मरु के पुत्र प्रशुश्रुक थे,
32- प्रशुश्रुक के पुत्र अम्बरीष हुए,
33- अम्बरीष के पुत्र का नाम नहुष था,
34- नहुष के पुत्र ययाति हुए,
35- ययाति के पुत्र नाभाग हुए,
36- नाभाग के पुत्र का नाम अज था,
37- अज के पुत्र दशरथ हुए,
38- दशरथ के चार पुत्र राम, भरत, लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न हुए |
इस प्रकार ब्रह्मा की उन्चालिसवी (39) पीढ़ी में श्रीराम का जन्म हुआ |
नोट : -अपने बच्चों को बार बार पढ़वाये और स्वयं भी जानकारी रखे धर्म को जानना हमरा कर्तव्य है। शेयर करे ताकि हर सनातनी इस जानकारी को जाने.

🕉हवन चिकित्सा 🕉

एक वेबसाइट रिपोर्ट के अनुसार फ़्रांस के ट्रेले नामक वैज्ञानिक ने हवन पर रिसर्च की। जिसमे उन्हें पता चला की हवन मुख्यतः आम की लकड़ी पर किया जाता है। जब आम की लकड़ी जलती है तो फ़ॉर्मिक एल्डिहाइड नमक गैस उत्पन्न होती है जो की खतरनाक बैक्टीरिया और जीवाणुओ को मरती है तथा वातावरण को शुद्द करती है। इस रिसर्च के बाद ही वैज्ञानिकों को इस गैस और इसे बनाने का तरीका पता चला। गुड़ को जलने पर भी ये गैस उत्पन्न होती है।
(२) टौटीक नामक वैज्ञानिक ने हवन पर की गयी अपनी रिसर्च में ये पाया की यदि आधे घंटे हवन में बैठा जाये अथवा हवन के धुएं से शरीर का सम्पर्क हो तो टाइफाइड जैसे खतरनाक रोग फ़ैलाने वाले जीवाणु भी मर जाते हैं और शरीर शुद्ध हो जाता है।
(३) हवन की मत्ता देखते हुए राष्ट्रीय वनस्पति अनुसन्धान संस्थान लखनऊ के वैज्ञानिकों ने भी इस पर एक रिसर्च करी की क्या वाकई हवन से वातावरण शुद्द होता है और जीवाणु नाश होता है अथवा नही. उन्होंने ग्रंथो. में वर्णित हवन सामग्री जुटाई और जलने पर पाया की ये विषाणु नाश करती है। फिर उन्होंने विभिन्न प्रकार के धुएं पर भी काम किया और देखा की सिर्फ आम की लकड़ी १ किलो जलने से हवा में मौजूद विषाणु बहुत कम नहीं हुए पर जैसे ही उसके ऊपर आधा किलो हवन सामग्री डाल कर जलायी गयी एक घंटे के भीतर ही कक्ष में मौजूद बॅक्टेरिया का स्तर ९४ % कम हो गया। यही नही. उन्होंने आगे भी कक्ष की हवा में मौजुद जीवाणुओ का परीक्षण किया और पाया की कक्ष के दरवाज़े खोले जाने और सारा धुआं निकल जाने के २४ घंटे बाद भी जीवाणुओ का स्तर सामान्य से ९६ प्रतिशत कम था। बार बार परीक्षण करने पर ज्ञात हुआ की इस एक बार के धुएं का असर एक माह तक रहा और उस कक्ष की वायु में विषाणु स्तर 30 दिन बाद भी सामान्य से बहुत कम था। यह रिपोर्ट एथ्नोफार्माकोलोजी के शोध पत्र (resarch journal of Ethnopharmacology 2007) में भी दिसंबर २००७ में छप चुकी है। रिपोर्ट में लिखा गया की हवन के द्वारा न सिर्फ मनुष्य बल्कि वनस्पतियों फसलों को नुकसान पहुचाने वाले बैक्टीरिया का नाश होता है। जिससे फसलों में रासायनिक खाद का प्रयोग कम हो सकता है।
क्या हो हवन की समिधा (जलने वाली लकड़ी):-
समिधा के रूप में आम की लकड़ी सर्वमान्य है परन्तु अन्य समिधाएँ भी विभिन्न कार्यों हेतु प्रयुक्त होती हैं। सूर्य की समिधा मदार की, चन्द्रमा की पलाश की, मङ्गल की खैर की, बुध की चिड़चिडा की, बृहस्पति की पीपल की, शुक्र की गूलर की, शनि की शमी की, राहु दूर्वा की और केतु की कुशा की समिधा कही गई है।
मदार की समिधा रोग को नाश करती है, पलाश की सब कार्य सिद्ध करने वाली, पीपल की प्रजा (सन्तति) काम कराने वाली, गूलर की स्वर्ग देने वाली, शमी की पाप नाश करने वाली, दूर्वा की दीर्घायु देने वाली और कुशा की समिधा सभी मनोरथ को सिद्ध करने वाली होती है।
हव्य (आहुति देने योग्य द्रव्यों) के प्रकार
प्रत्येक ऋतु में आकाश में भिन्न-भिन्न प्रकार के वायुमण्डल रहते हैं। सर्दी, गर्मी, नमी, वायु का भारीपन, हलकापन, धूल, धुँआ, बर्फ आदि का भरा होना। विभिन्न प्रकार के कीटणुओं की उत्पत्ति, वृद्धि एवं समाप्ति का क्रम चलता रहता है। इसलिए कई बार वायुमण्डल स्वास्थ्यकर होता है। कई बार अस्वास्थ्यकर हो जाता है। इस प्रकार की विकृतियों को दूर करने और अनुकूल वातावरण उत्पन्न करने के लिए हवन में ऐसी औषधियाँ प्रयुक्त की जाती हैं, जो इस उद्देश्य को भली प्रकार पूरा कर सकती हैं।
होम द्रव्य
------------ होम-द्रव्य अथवा हवन सामग्री वह जल सकने वाला पदार्थ है जिसे यज्ञ (हवन/होम) की अग्नि में मन्त्रों के साथ डाला जाता है।
(१) सुगन्धित : केशर, अगर, तगर, चन्दन, इलायची, जायफल, जावित्री छड़ीला कपूर कचरी बालछड़ पानड़ीआदि
(२) पुष्टिकारक : घृत, गुग्गुल ,सूखे फल, जौ, तिल, चावल शहद नारियल आदि
(३) मिष्ट - शक्कर, छूहारा, दाख आदि
(४) रोग नाशक -गिलोय, जायफल, सोमवल्ली ब्राह्मी तुलसी अगर तगर तिल इंद्रा जव आमला मालकांगनी हरताल तेजपत्र प्रियंगु केसर सफ़ेद चन्दन जटामांसी आदि
उपरोक्त चारों प्रकार की वस्तुएँ हवन में प्रयोग होनी चाहिए। अन्नों के हवन से मेघ-मालाएँ अधिक अन्न उपजाने वाली वर्षा करती हैं। सुगन्धित द्रव्यों से विचारों शुद्ध होते हैं, मिष्ट पदार्थ स्वास्थ्य को पुष्ट एवं शरीर को आरोग्य प्रदान करते हैं, इसलिए चारों प्रकार के पदार्थों को समान महत्व दिया जाना चाहिए। यदि अन्य वस्तुएँ उपलब्ध न हों, तो जो मिले उसी से अथवा केवल तिल, जौ, चावल से भी काम चल सकता है।
सामान्य हवन सामग्री
--------------------------- तिल, जौं, सफेद चन्दन का चूरा , अगर , तगर , गुग्गुल, जायफल, दालचीनी, तालीसपत्र , पानड़ी , लौंग , बड़ी इलायची , गोला , छुहारे नागर मौथा , इन्द्र जौ , कपूर कचरी , आँवला ,गिलोय, जायफल, ब्राह्मी

👉स्वामी धर्मबंधु जी , गुजरात से साभार

चित्रकूट आश्रम ,लखनऊ

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➡ सिर्फ 7 दीन में सफ़ेद दाग (श्वेत कुष्ठ) खत्म होगी : दिवान हकीम परमानन्द जी के द्वारा अनभूत प्रयोग

➡ आवश्यक सामग्री :
25 ग्राम देशी कीकर (बबूल) के सूखे पते
25 ग्राम पान की सुपारी (बड़े आकार की)
25 ग्राम काबली हरड का छिलका

➡ बनाने की विधि :
उपरोक्त तीन वस्तुएँ लेकर दवा बनाये। कही से देशी कीकर (काटे वाला पेड़ जिसमे पीले फुल लगते है ) के ताजे पत्ते (डंठल रहित ) लाकर छाया में सुखाले कुछ घंटो में पत्ते सुख जायेगे बबूल के इन सूखे पत्तो को काम में ले पान वाली सुपारी बढिया ले इसका पावडर बना ले कबाली हरड को भी जौ कुट कर ले और इन सभी चीजो को यानि बबूल , सुपारी , काबली हरड का छिलका (बड़ी हरड) सभी को 25-25 ग्राम की अनुपात में ले कुल योग 75 ग्राम और 500 मिली पानी में उबाले पानी जब 125 मिली बचे तब उतर कर ठंडा होने दे और छान कर पी ले ये दवा एक दिन छोड़ कर दुसरे दिन पीनी है अर्थात मान लीजिये आज आप ने दवा ली तो कल नहीं लेनी है और इस काढ़े में 2 चमच खांड या मिश्री मिला ले (10 ग्राम) और ये निहार मुह सुबह –सुबह पी ले और 2 घंटे तक कुछ भी खाना नहीं है दवा के प्रभाव से शरीर शुद्धि हो और उलटी या दस्त आने लगे परन्तु दवा बन्द नहीं करे 14 दीन में सिर्फ 7 दिन लेनी है और फीर दवा बन्द कर दे कुछ महीने में घिरे –घिरे त्वचा काली होने लगेगी हकीम साहब का दावा है की ये साल भर में सिर्फ एक बार ही लेने से रोग निर्मूल (ख़त्म) हो जाता है अगर कुछ रह जाये तो दुसरे साल ये प्रयोग एक बार और कर ले नहीं तो दुबारा इसकी जरूरत नहीं पडती। www.allayurvedic.org

➡ पूरक उपचार
एक निम्बू, एक अनार और एक सेब तीनो का अलग – अलग ताजा रस निकालने के बाद अच्छी तरह परस्पर मिलाकर रोजाना सुबह शाम या दिन में किसी भी समय एक बार नियम पूर्वक ले। यह फलो का ताजा रस कम से कम दवा सेवन के प्रयोग आगे 2-3 महीने तक जारी रख सके तो अधिक लाभदायक रहेगा।

➡औषधियों की प्रयोग विधि :
दवा के सेवन काल के 14 दिनों में मक्खन घी दूध अधिक लेना हितकर है क्योकि दवा खुश्क है।
चौदह दिन दवा लेने के बाद कोई बिशेस परहेज पालन की जरुरत नहीं है श्वेत कुष्ठ के दुसरे इलाजो में कठीन परहेज पालन होती है परन्तु इस ईलाज में नातो सफेद चीजो का परहेज है और ना खटाई आदि का फीर भी आप मछली मांस अंडा नशीले पदार्थ शराब तम्बाकू आदि और अधिक मिर्च मसले तेल खटाई आदि का परहेज पालन कर सके तो अच्छा रहेगा।
दवा सेवन के 14 दिनों में कभी –कभी उलटी या दस्त आदि हो सकता है इससे घबराना नहीं चाहिए बल्कि उसे शारीरिक शुध्धी के द्वारा आरोग्य प्राप्त होनेका संकेत समझना चाहिए।
रोग दूर होने के संकेत हकीम साहब के अनुसार दवा के सेवन के लगभग 3 महीने बाद सफेद दागो के बीच तील की तरह काले भूरे या गुलाबी धब्धे ( तील की तरह धब्बे ) के रूप में चमड़ी में रंग परिवर्तन दिखाई देगा और साल भर में धीरे –धीरे सफेद दाग या निसान नष्ट हो कर त्वचा पहले जयसी अपने स्वभाविक रंग में आ जाएगी फीर भी यदि कुछ कसर रह जाये तो एक साल बीत जाने के बाद दवा की सात खुराके इसी तरह दुबारा ले सकते है। www.allayurvedic.org
दिवान हकीम साहब का दावा है की उतर्युक्त ईलाज से उनके 146 श्वेत कुष्ठ के रोगियों में से 142 रोगी पूर्णत : ठीक अथवा लाभान्वित हुये है कुछ सम्पूर्ण शरीर में सफेद रोगी भी ठीक हुये है निर्लोभी परोपकारी दीवान हकीम परमानन्द जी की अनुमति से बिस्तार से यह अनमोल योग मानव सेवा भावना के साथ जनजन तक पहुचा रहा हु इस आशा और उदात भावना के साथ की पाठक निश्वार्थ भावना से तथा बिना किसी लोभ के जनजन तक जरुर पहुचाये।
स्रोत : स्वदेशी चिकित्सा के चमत्कार लेख दीवान हकीम परमानन्द नई दिल्ली द्वारा अनभूत प्रयोग। अपने नजदीकी कुशल वैद्य या चिकित्सक की सलाह अवश्य ले तथा उनकी देख रेख में कोई कदम उठाएं।
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💥 Double Strength Callus - Stem cell treatment 💥
हमे सारे भारत वासियों को यह बताते हुवे बहूत आनंद हो राहा है कि सन 2015 से डॉ. हेमंत अग्रवाल ( M.S.) सर जो Double Strength Callus treatment भारत मे लाने का प्रयास कर रहें थे उनको सन 2016 में इसकी सफलता प्राप्त हुई। सर्वप्रथम डॉ. अग्रवाल सहाब ने इस ट्रीटमेंट का प्रयोग पूना शहर में शुरु किया और उन्हें बहुत असाधारण रिजल्ट प्राप्त हुवे। और आज संपूर्ण भारत मैं डॉ. सहाब कि टीम यह कार्य कर रही है।
💥क्या है ये ट्रीटमेंट? क्या है ये उपचार पद्धती?💥
जानिए विस्तार से
यह एक ऐसी संजीवनी हैं जो आज 140 बीमारी से भी ज्यादा पर काम करती है और उस रोग से आपको जड़ से निजात दिलाती है।
स्विट्ज़रलैंड के प्राकृतिक जंगलो में २०० साल पुराने ग्रीन एप्पल ( Green Swiss Apple) के पेड़ है जिसके एप्पल, पेड़ से निचे गिरने के बाद ३.१/२ महीनो तक पेड़ से अलग होने के बावजूद भी ताज़ा फ्रेश रहते है. इसका कारण जानने के लिए शोध किया गया है।
🍏 शोध में पाया गया की इस Swiss Green Apple में वही Embryonic stem cells है जो गर्भ में पल रहे बच्चे की नाड़ में होता है , जो माता से गर्भ में बच्चे से जुड़ा होता है. नाड़ में वो Embryonic stem cells होते है, जिससे गर्भ में पूर्ण बच्चे का विकास और उसके अवयवो का निर्माण होता है !
🍏� आज भारत में नवजात बच्चो की stem cells की नाड़ जन्म के बाद सुरक्षित रखने का काम हो रहा है।
ताकि उस बच्चे को बड़े होने पर यदि कोई बीमारी होती है तो उस बच्चे की नाड़ जो सुरक्षित रखी गयी है उसमे से Embryonic stem cells निकालकर उसके शरीर में डाल सके क्योंकि Embryonic stem cells में इतनी ताकत होती है की उससे उसी व्यक्ति के पूर्ण अवयव या कह सकते है की उसीका पूर्ण शरीर बनाया जा सकता है।
🍏 बच्चे की नाड़ सुरक्षित रखने के लिये स्टेम सेल बँक होती है जिसकी व्यवस्था बडे बडे अस्पतालोमें होति है। Stem cells सुरक्षित (Preserve) करने का खर्च काफी ज्यादा होता है।
🍏 हर व्यक्ति की नाड़ सिर्फ उसी के लिए उपयोग में लायी जा सकती है क्योकि सभी का DNA अलग अलग होता है।
🍏� अब जिनके पास अपनी नाड़ अम्ब्रियनिक स्टेमसेल्स सुरक्षित करके रखी हुई नहीं है उनके लिए क्या ?
स्वीत्झरलँड के एक सायंटिस्ट ने वहां के जंगलों मैं ऐसे Green Apple पाये जिनकेे स्टेमसेल्स Embryonic stem cells जैसेंही हैं, और इसके पेड़ में खुद को ठीक HEAL करने की अद्भुत क्षमता है। इन Swiss Green Apple का लगातार research किया गया और बहुत हि बढिया शोध कार्य संपन्न हूवा, इसी शोध कार्य के माध्यम से डबल स्ट्रेंथ कॅलस - स्टेमसेल्स थेरेपी सामने आई जिससे खराब हो चुके सेल्स के अवयवो का पुनः निर्माण होता है। यह आज तक की सबसे बड़ी खोज है जिसका पेटेंट किया गया है।(Swiss Quality Formula - Double Strength Callus. Dehydrated Fruit Powder)
🍏 इसका सेवन करने से मनुष्य के शरीर के 80% cells Activate और Regenerate होते है I
डबल स्ट्रेंथ कॅलस- स्टेम सेल्स शरीर को Vitality , त्वचा के cells को सुरक्षा , बाहरी वातावरण और तनाव से बचाव और बढती उम्र के प्रभाव से बचाता है और स्किन को Younger बनाता है।
और पूर्ण रूप से सारे cells का regeneration करता है।�
🍏 आपके अवयवो के बेकार हो गए सेल्स का पुनः निर्माण करता है। जिससे आपके अवयव पूर्णरूप से ठीक होकर ठीक से काम करने लगते है और बिमारी का नामोनिशान मिट जाता है।
�🍏 कॅन्सर, किडनी, HIV, डायबेटीज, प्यारलीसेस, अस्थमा, हार्ट कि बीमारी थायरॉइड, बाँझपान, सफेद दाग, पार्किन्सन, मोटापा, सोरायसीस,हाय कोलेस्ट्रॉल, लंग इन्फेक्शन, ग्यासट्रिक, स्लिप डिस्क,जॉइंट पेन, माइग्रेन जैसी अन्य सभी गंभीर बीमारियो से मुक्ति पाने के लिए डबल स्ट्रेंथ कॅलस - Stem Cell पूर्ण रूप से कारगर है। आप खुद ही इसके सेवन से 72 घंटो में बदलाव महसूस करेंगेI Diabetes से सड़ चुके घाव के कारण पैर काटने पड सकते थे पर डबल स्ट्रेंथ कॅलस - Stem cell के सेवन से 48 घंटो में घाव भरने की प्रक्रिया शुरू हो गयी और रुग्ण पैर कटवाने से बच गया तथा Diabetes के कई रोगियों को इन्सुलिन से छुटकारा मिलगया।
🍏 �विश्व की नं. 3 कीं सायंटिफिक लैब ( मायबेल बायोकेमिस्ट्री ) जो स्वित्झरलँड मै है यंहा पर सन 2001 से 2008 तक दुनियाके जाने माने सायंटिस्टोने इस Swiss Green Apple पर research किया और डबल स्ट्रेंथ कॅलस का न्यानो टेक्नॉलॉजिसे निर्माण किया गया जिसे दुनियाके सभी देशोंने और वैग्यानिकोने मान्यता दि है।
🍏 डबल स्ट्रेंथ कॅलस इस प्रोडक्ट को वर्ल्ड मार्केट में लाने की जिम्मेवारी 💐दातोश्री 💐किताब प्राप्त हुवे मा. दातोश्री लाई टेक पेंग इन्होंने ली, और आज करीबन 19 देशोमें डबल स्ट्रेंथ कॅलस थेरपी ट्रीटमेंट का लाभ मरीज ले रहें हैं।💐डॉ. हेमंत अग्रवाल सर💐 सन 2015 से डबल स्ट्रेंथ कॅलस थेरपी इंडिया में लाने की कोशिश में थे, और सन 2016 में उन्हें ये कमियाबी हासिल हुई।
🍏 डबल स्ट्रेंथ कॅलस - स्टेमसेल को fssai, FDA का सर्टिफिकेट प्राप्त है, और तो और इसे सन 2008 ,सन 2014 का बेस्ट इनोव्हेशन अवोर्ड मिलचुका है। यह 100% वेजिटरीयन और न्याचरल है।
🍏 अधिक जानकारी के लिये डॉ. हेमंत अग्रवाल साहाब कि टीमसे संपर्क करें क्योंकि 💥Precaution is Better Than Cure.💥 1) DR PURUSHOTTAM MISHRA - 09835060779
2) Y.R. BILAYE - 09322157979
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