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धर्म की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है

यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत I
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानम सृज्याहम II

परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम I
धर्म संस्थापनार्थाय संभवामि युगे युगे II

जन्म कर्म च मे दिव्यमेवं यो वेत्ति तत्त्वत:I
त्यक्त्वा देहं पुनर्जन्म नैति मामेति सोऽर्जुन II

वीतरागभयक्रोधा मन्मया मामुपाश्रिताः:I
बहवो ज्ञानतपसा पूता मद्भावमागताः॥

ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम् |
मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्या: पार्थ सर्वश: II

काङ्क्षन्तः कर्मणां सिद्धिं यजन्त इह देवताः ।
क्षिप्रं हि मानुषे लोके सिद्धिर्भवति कर्मजा ॥

चातुर्वर्ण्यं मया सृष्टं गुणकर्मविभागशः ।
तस्य कर्तारमपि मां विद्ध्यकर्तारमव्ययम् ॥

न मां कर्माणि लिम्पन्ति न मे कर्मफले स्पृहा ।
इति मां योऽभिजानाति कर्मभिर्न स बध्यते ॥

एवं ज्ञात्वा कृतं कर्म पूर्वैरपि मुमुक्षुभिः ।
कुरु कर्मैव तस्मात्त्वं पूर्वैः पूर्वतरं कृतम् ॥

Singer : Jyoti Jajodia

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गोमाता पूज्य क्यों हैं सनातन धर्म में ? कुछ रोचक तथ्य....

1. गौ माता जिस जगह खड़ी रहकर आनंदपूर्वक चैन की सांस लेती है । वहां वास्तु दोष समाप्त हो जाते हैं ।

2. गौ माता में तैंतीस कोटी देवी देवताओं का वास है ।

3. जिस जगह गौ माता खुशी से रभांने लगे उस देवी देवता पुष्प वर्षा करते हैं ।

4. गौ माता के गले में घंटी जरूर बांधे ; गाय के गले में बंधी घंटी बजने से गौ आरती होती है ।

5. जो व्यक्ति गौ माता की सेवा पूजा करता है उस पर आने वाली सभी प्रकार की विपदाओं को गौ माता हर लेती है ।

6. गौ माता के खुर्र में नागदेवता का वास होता है । जहां गौ माता विचरण करती है उस जगह सांप बिच्छू नहीं आते ।

7. गौ माता के गोबर में लक्ष्मी जी का वास होता है ।

8. गौ माता के मुत्र में गंगाजी का वास होता है ।

9. गौ माता के गोबर से बने उपलों का रोजाना घर दूकान मंदिर परिसरों पर धुप करने से वातावरण शुद्ध होता है सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

10. गौ माता के एक आंख में सुर्य व दूसरी आंख में चन्द्र देव का वास होता है ।

11. गाय इस धरती पर साक्षात देवता है ।

12. गौ माता अन्नपूर्णा देवी है कामधेनु है । मनोकामना पूर्ण करने वाली है ।

13. गौ माता के दुध मे सुवर्ण तत्व पाया जाता है जो रोगों की क्षमता को कम करता है।

14. गौ माता की पूंछ में हनुमानजी का वास होता है । किसी व्यक्ति को बुरी नजर हो जाये तो गौ माता की पूंछ से झाड़ा लगाने से नजर उतर जाती है ।

15. गौ माता की पीठ पर एक उभरा हुआ कुबड़ होता है । उस कुबड़ में सूर्य केतु नाड़ी होती है । रोजाना सुबह आधा घंटा गौ माता की कुबड़ में हाथ फेरने से रोगों का नाश होता है ।

16. गौ माता का दूध अमृत है।

17. गौ माता धर्म की धुरी है। गौ माता के बिना धर्म कि कल्पना नहीं की जा सकती ।

18. गौ माता जगत जननी है।


19. गौ माता पृथ्वी का रूप है।

20. गौ माता सर्वो देवमयी सर्वोवेदमयी है । गौ माता के बिना देवों वेदों की पूजा अधुरी है ।

21. एक गौ माता को चारा खिलाने से तैंतीस कोटी देवी देवताओं को भोग लग जाता है ।

22. गौ माता से ही मनुष्यों के गौत्र की स्थापना हुई है ।

23. गौ माता चौदह रत्नों में एक रत्न है ।

24. गौ माता साक्षात् मां भवानी का रूप है ।

25. गौ माता के पंचगव्य के बिना पूजा पाठ हवन सफल नहीं होते हैं ।

26. गौ माता के दूध घी मख्खन दही गोबर गोमुत्र से बने पंचगव्य हजारों रोगों की दवा है । इसके सेवन से असाध्य रोग मिट जाते हैं ।

27. गौ माता को घर पर रखकर सेवा करने वाला सुखी आध्यात्मिक जीवन जीता है । उनकी अकाल मृत्यु नहीं होती ।

28. तन मन धन से जो मनुष्य गौ सेवा करता है । वो वैतरणी गौ माता की पुछ पकड कर पार करता है। उन्हें गौ लोकधाम में वास मिलता है ।

28. गौ माता के गोबर से ईंधन तैयार होता है ।

29. गौ माता सभी देवी देवताओं मनुष्यों की आराध्य है; इष्ट देव है ।

30. साकेत स्वर्ग इन्द्र लोक से भी उच्चा गौ लोक धाम है।


31. गौ माता के बिना संसार की रचना अधुरी है ।

32. गौ माता में दिव्य शक्तियां होने से संसार का संतुलन बना रहता है ।

33. गाय माता के गौवंशो से भूमि को जोत कर की गई खेती सर्वश्रेष्ट खेती होती है ।

34. गौ माता जीवन भर दुध पिलाने वाली माता है । गौ माता को जननी से भी उच्चा दर्जा दिया गया है ।

35. जहां गौ माता निवास करती है वह स्थान तीर्थ धाम बन जाता है ।

36. गौ माता कि सेवा परिक्रमा करने से सभी तीर्थो के पुण्यों का लाभ मिलता है ।

37. जिस व्यक्ति के भाग्य की रेखा सोई हुई हो तो वो व्यक्ति अपनी हथेली में गुड़ को रखकर गौ माता को जीभ से चटाये गौ माता की जीभ हथेली पर रखे गुड़ को चाटने से व्यक्ति की सोई हुई भाग्य रेखा खुल जाती है ।

38. गौ माता के चारो चरणों के बीच से निकल कर परिक्रमा करने से इंसान भय मुक्त हो जाता है ।

39. गाय माता आनंदपूर्वक सासें लेती है; छोडती है । वहां से नकारात्मक ऊर्जा भाग जाती है और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है जिससे वातावरण शुद्ध होता है ।

40. गौ माता के गर्भ से ही महान विद्वान धर्म रक्षक गौ कर्ण जी महाराज पैदा हुए थे ।

41. गौ माता की सेवा के लिए ही इस धरा पर देवी देवताओं ने अवतार लिये हैं ।

42. जब गौ माता बछड़े को जन्म देती तब पहला दूध बांझ स्त्री को पिलाने से उनका बांझपन मिट जाता है ।

43. स्वस्थ गौ माता का गौ मूत्र को रोजाना दो तोला सात पट कपड़े में छानकर सेवन करने से सारे रोग मिट जाते हैं ।

44. गौ माता वात्सल्य भरी निगाहों से जिसे भी देखती है उनके ऊपर गौकृपा हो जाती है ।

45. गाय इस संसार का प्राण है ।

46. काली गाय की पूजा करने से नौ ग्रह शांत रहते हैं । जो ध्यानपूर्वक धर्म के साथ गौ पूजन करता है उनको शत्रु दोषों से छुटकारा मिलता है ।

47. गाय धार्मिक ; आर्थिक ; सांस्कृतिक व अध्यात्मिक दृष्टि से सर्वगुण संपन्न है ।

48. गाय एक चलता फिरता मंदिर है । हमारे सनातन धर्म में तैंतीस कोटि देवी देवता है । हम रोजाना तैंतीस कोटि देवी देवताओं के मंदिर जा कर उनके दर्शन नहीं कर सकते पर गौ माता के दर्शन से सभी देवी देवताओं के दर्शन हो जाते हैं ।

49. कोई भी शुभ कार्य अटका हुआ हो बार बार प्रयत्न करने पर भी सफल नहीं हो रहा हो तो गौ माता के कान में कहिये रूका हुआ काम बन जायेगा ।

50. जो व्यक्ति मोक्ष गौ लोक धाम चाहता हो उसे गौ व्रती बनना चाहिए ।

51. गौ माता सर्व सुखों की दातार है ।

हे मां आप अनंत ! आपके गुण अनंत ! इतना मुझमें सामर्थ्य नहीं कि मैं आपके गुणों का बखान कर सकूं ।

हरे कृष्ण 👏
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गौ माता का इतिहास !

लगभग 5100 वर्ष पूर्व महाराजाधिराज श्रीकृष्णचन्द्रजी
ने वैर भाव से भजने वाले जरासन्ध की कामना पूरी करने
के उद्देश्य से मथुरा का त्याग किया था।

अपने सहचर व परिकर सभी राजपुरूषों का निवास राजधानी में ही रखा गया था।
परन्तु भगवान श्रीकृष्ण की प्राण स्वरूपा गायें व गोपालकों के लिए तो समुद्र के मध्य कोई स्थान नहीं था।
ऐसी स्थिति में गायें तथा गोपालकों से भगवान दूर हो गये।

अपने को निराश्रित मानकर भगवान श्रीकृष्ण जिस दिशा से पधारे थे उसी दिशा में गायें तथा गोपालक भी बड़ी दयनीय तथा दुःखी अवस्था में चल पड़े।

कई दिन निराश्रित तथा वियोग की पीड़ा सहने के बाद भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन गायों तथा गोपालकों के लिए एक महान कार्य तथा जाल के जंगलों में सामने आते हुए हुआ।

भगवान श्रीकृश्ण के दर्शन कर गाय व गोपालक इतने आनन्द विभोर हो गए कि उनकों रात दिन का भी ध्यान नहीं रहा।

इसी प्रकार तीन दिन बीत गये,तब उद्धव जी ने उनको याद दिलाया कि गोवंश तथा गोपालकों की देख-रेख
तथा सेवा कार्य अनिरूद्ध को ही सौंपा जावे।

आपके अन्य धर्म कार्य अधूरे पड़े है,उनको गति प्रदान करने के लिए कृपया आप इस भावावस्था से उतरिये।

तब भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि भैया इस पवित्र भूमि पर जब मैंने गायों व गोपालको को देखा तो ऐसे महान आनंद की अनुभूति हुई कि मुझे दिन रात का ध्यान ही नहीं रहा।

ऐसा आनंद वृदांवन में भी प्राप्त नहीं हुआ था।
वास्तव में यहाँ तो आनन्द ही आनन्द है।
यह वन ही आनंद का है।
यहाँ आनंद के अतिरिक्त दूसरा कुछ नही यह
आनंदवन है।
इस प्रकार इस भूमि का नाम आनंदवन पड़ा था।

अब पुनः इस भूमि को आनंदवन नाम का सम्बोधन
प्राप्त हुआ है।

भगवान श्रीकृष्ण की आज्ञा अनुसार प्रधुम्न के पुत्र अनिरूद्ध ने आनंदवन को केन्द्र बनाकर,मारवाड़,
काठीयाबाड़,थारपारकर अर्थात मेवाड़ से लेकर
गिरनार तक सिन्धु नदी,सरस्वती नदी तथा बनास
नदी के किनारे गोपालकों तथा गोवंश को लेकर
विकेन्द्रित कर दिया,जहाँ विस्तृत चारागाह थे।

हजारों कोसों में गोचर ही गोचर पड़ा था।
गोपालकों ने इन नदियों के किनारे गोसंरक्षण,
गोपालन एवं गोसंवर्धन का महान कार्य प्रारम्भ किया।

सुरभि,नन्दिनी व कामधेनु की संतान पुनःभगवान
श्रीकृष्ण का सानिध्य पाकर निर्भय व सन्तुष्ट हो गई।

दोनों तरफ सिन्धु तथा बनास नदियों का प्रवाह,भूगर्भ में सरस्वती तथा पश्चिम में अथाह समुद्र,इसके बीच में सहस्रों योजन गोचर भूमि जहाँ सेवण,भुरट, कुरी, झेरण, भरकड़ी गाठीया आदि विपुल मात्रा में प्राकृतिक घास तथा गेहूँ,
बाजरा,ज्वार,मक्का,जौ,मोठ,मूंग,मतीरा आदि की मौसमी पैदावार से गायों व गोपालक किसानों की सम्पूर्ण आवश्यकता सहज ही पूरी हो जाती थी।

इन गायों में से भगवान श्रीकृष्ण एक लाख गायों का
दान अन्य गोपालक राजा व ब्राह्मणों को दिया करते थे।

भगवान श्रीकृष्ण के इस धरा धरती से तिरोहित होने पर नाना प्रकार के प्राकृतिक उपद्रव हुए।

वायु तथा अग्नि ने अपनी मर्यादा का त्याग कर दिया।
परिणाम स्वरूप समुद्र के मध्य स्थापित द्वारकापुरी तथा सिन्धु व बनास के मध्य समुद्र के किनारे पर सम्पूर्ण गोचर जलमग्न हो गया।

इसके बाद लगभग दो हजार वर्ष बाद पुनः इसी भूमि पर गोसंरक्षण,गोसंवर्धन का पुनीत कार्य श्रीकृष्ण के वंशज तथा ब्राह्मणों द्वारा प्रारम्भ हुआ।

थार में भाटी व सोढ़ा राजपूतों ने मारवाड़ में राजपुरोहितों तथा चैधरियों ने और काठीयावाड़ मेंअहीर,भरवाड़,कच्छी तथा पटेलों सहित विभिन्न गोपालक किसानों ने प्रति परिवार हजारों लाखों की संख्या में गोसंरक्षण गोपालन
व गोसंवर्धन के महत्वशाली कार्य को विराट रूप प्रदान किया।

गावो विश्वस्य मातरः

आज भारत वर्ष मे ही नहीं पूरे विश्व मे सभी मानव सुखी है पर जीव मात्र की माता कहलाने का अधिकार रखने वाली वेदों द्वारा पूज्यनीय, देवताओं को भी भोग और मोक्ष प्रदान करने की शक्ति रखने वाली गौ माता आज सड़कों पर मल,गन्दगी,प्लास्टिक खाने को मजबूर है |

भगवान श्री कृष्ण की कृपा से आज भी भारत वर्ष मे ही नहीं पूरे विश्व मे कुछ ऐसे पुण्यवान,भामाशाह और अपनी माँ के कोख को धन्य करने वाले गौ भक्त भी है,जिनके सहयोग से आज भी लाखो गौवंश गौशालाओं मे, किसानों के यहाँ, अपने घर पर ही सुरक्षित है |

क्या ये गौभक्त, जिनकी वजह से पूरी सृष्टी का संतुलन बना हुआ है,आगे भी इसी प्रकार गौ – सेवा में संलग्न रह सकेंगे ?

शेष मानव जाति को जिनको परमात्मा ने सोचने के लिए बुद्धि दे रखी है का भी कर्तव्य बनता है कि इस गो संवर्धन को उठाने मे,इस राम सेतु को बनाने मे ग्वाल -बालो एवं गिलहरी की तरह थोडा – थोडा यथा योग्य योगदान दे |

जब हम थोडा-थोडा योगदान देंगे तो हम सभी गौभक्तों
के लिए कुछ भी दुर्लभ नहीं रहेगा |

शास्त्र कहता है — गौ भक्त जिस-जिस वस्तु की इच्छा करता है वह सब उसे प्राप्त होती है |

स्त्रियों मे भी जो गौओं की भक्त है,वे मनोवांछित कामनाएं प्राप्त कर लेती है |

पुत्रार्थी पुत्र पाता है,कन्यार्थी कन्या,धनार्थी धन,धर्मार्थी धर्म,विद्यार्थी विद्या और सुखार्थी सुख पा जाता है |

विश्व भर मे कही भी गौभक्त को कुछ भी दुर्लभ नहीं है |
यहाँ तक की मोक्ष भी बिना गाय के पूंछ पकडे संभव
नहीं |

वैतरणी पर यमराज एवं उसके गण भयभीत होकर
गाय के पूंछ पकडे जीव को प्रणाम करते है |

देवताओं और दानवो के द्वारा समुद्र मंथन के वक्त
५ गायें उत्पन्न हुई,इनका नाम था- नंदा,सुभद्रा,सुरभि,सुशीला और बहुला |

ये सभी गायें भगवान की आज्ञा से देवताओं और दानवों ने महर्षि जमदग्नि,भारद्वाज,वशिष्ट,असित और गौतम मुनि को समर्पित कर दीं |

आज जितने भी देशी गौवंश भारत एवं इतर देशो मे है,
वह सब इन्ही ५ गौओं की संताने है और हमारे पूर्वजो
एवं ऋषियों का यह महाधन है |

क्या हम सिर्फ गोत्र बताने के लिए ही अपने ऋषियों की
संताने हैं?

उनकी सम्पति गौ धन को बचाना हमारा कर्तव्य नहीं |

आज भारत वर्ष मे ही करोड़ों लोग सुबह – शाम देवालयों मे माथा टेक कर भगवान से मनोकामनाएँ मांगते है,पर इन मे से लाखों लोगो को यह तक भी मालूम नहीं है की जिस देवता से वे याचना कर रहे है उन्हें कुछ भी दे देने
की शक्ति तभी आएगी जब हवन द्वारा अग्नि के मुख से देवताओं तक शुद्ध गौ घृत पहुंचेगा |

जब हम हवन में गाय के घी से मिश्रित चरू देवताओं को
अर्पण करते है |

उस उत्तम हविष्य से देवता बलिष्ट एवं पुष्ट होते है |
जब देवता शक्तिशाली होगा तभी अपनी शक्ती के बल
पर आपकी-हमारी मनोकामनाएं पूरी करने मे समर्थ होंगे |

पर जब गौवंश ही नहीं रहेगा तो शुद्ध गौ घृत कहा से आएगा?

और शुद्ध गौ घृत नहीं होगा तो हवन कहा से होगा?
और हवन नहीं होंगे तो देवता पुष्ट कैसे होंगे?

और देवता पुष्ट नहीं होंगे तो शक्तिहीन देवता मनोकामनाएं पूर्ण कैसे करेँगे ?

आज हम लोग पेड़ लगा देते है पानी खाद नहीं डालेंगे
तो फल कहा से लगेंगे?
यह प्रकृति के नियम के विरुद्ध है |

आज जितने भी कथाएं होती है,यज्ञ,अनुष्टान होते हैं,
जप-तप होते है उनमें नाम-जप का कुछ प्रभाव पड़ता
हो पर अंत मे जो यज्ञ होता है वह सफल कितने होते है यह राम को ही मालूम |

क्योंकि इन यज्ञों मे शुद्ध गौ घृत का उपयोग नहीं के बराबर होता है |

आज भारत वर्ष मे पूर्व की अपेक्षा यज्ञ,धर्म,कर्म अधिक हो रहे है पर फल नहीं मिलता, यज्ञ सफल नहीं होते।
क्या कारण है?

इसके मूल मे यही है की जिस धरती पर गौ,ब्राहमण, साधू-संत,स्त्री दुखी होते है वहां पर पुण्य कर्म फल नहीं देते |

गऊ वंदे मातरम !!

नमो गोभ्य: श्रीमतीभ्य:सौरभेयीभ्य एव च।
नमो ब्रह्मसुताभ्यश्च पवित्राभ्यो नमो नम:।।
यया सर्वमिदं व्याप्तं जगत स्थावरजंगमम्।
तांधेनुंशिरसा वंदे भूतभव्यस्य मातरम्।।

पञ्च गाव: समुत्पन्ना मथ्यमाने महोदधौ।
तासां मथ्ये तु या नंदा तस्यै देव्यै नमो नम:।।
सर्वकामदुधे देवि सर्वतीर्थाभिषेचिनि।
पावनि सुरभिश्रेष्ठे देवि तुभ्यं नमो नम:।।

गऊ ग्रास नैवेद्य मन्त्र --

सुरभिस्त्वं जगान्मातेर्देवि विष्णुपदे स्थिता ।
सर्वदेवमयी ग्रासं मया दत्तामिमं।।

गऊ प्रदक्षिणा मन्त्र --

गवां दृष्ट्वा नमस्कृत्य कुर्याच्वैव प्रदक्षिणम्।
प्रदक्षिणीकृता तेन सप्तद्वीपा वसुंधरा।।
मातर: सर्वभूतानां गाव: सर्वसुखप्रदा:।
वृद्धिमाकान्गाक्ष्ता पुंसा नित्यं कार्या प्रदक्षिणा।।

गऊ माता की पूजा करें,,
गऊ माता की सेवा करें,,
गऊ माता का संरक्षण करें,,

गऊ माता की पूजा,नैवेद्य एवं प्रदक्षिणा अर्पण
से समस्त देवी देवताओं की पूजा हो जाती है।
#साभार_संकलित;;

सनातन हिंदू धर्म का पालन करें,,
देश को समृद्ध बनायें,,
गऊ माता को किसी भांति भी कष्ट पहुंचाने
वाले जन्म जन्मांतर के लिए पीढ़ियों तक
शापित हो जाते हैं,,
सदा दुःख पाते हैं।

जयति पुण्य सनातन संस्कृति,,
जयति पुण्य भूमि भारत,,,

सदा सर्वदा सुमंगल,,,
वंदेगऊमातरम्,,,
जय श्री कृष्ण,,
जय राधे भवानी,,,
जय श्री राम,,
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Voice Of Heart Music New #Haryanvi #Culture Song "Gau Mata Ke Rakhwale" with Jeetu Lohar (Kala) and Deepak Dangi, TR.

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JAI GAU MATA

गो-वध बंद करो जल्दी अब, गो-वध बंद करो,
भाई ! इस स्वतंत्र भारत में, गो-वध बंद करो ।

महापुरुष उस बाल कृष्ण का, याद करो तुम गोचारण
नाम पड़ा गोपाल कृष्ण का, याद करो तुम किस कारण
माखन-चोर उसे कहते हो, याद करो तुम किस कारण
जग-सिर-मौर उसे कहते हो, याद करो तुम किस कारण ।

मान रहे हो देव तुल्य, उससे तो तनिक डरो,
गो-वध बंद करो जल्दी अब, गो-वध बंद करो ।

समझाया ऋषि दयानंद ने, गो-वध भारी पातक है
समझाया बापू ने गो-वध, राम राज्य का घातक है
सब जीवों को स्वतंत्रता से, जीने का पूरा हक है
नर-पिशाच अब उनकी निर्मम हत्या करते नाहक है ।

सत्य-अहिंसा का अब तो, जन-जन में भाव भरो,
गो-वध बंद करो जल्दी अब, गो-वध बंद करो ।

जिस माता के बैलों द्वारा, अन्न-वस्त्र तुम पाते हो
जिसके दही-दूध-मक्खन से, बलशाली बन जाते हो
जिसके बल पर रंगरलियाँ करते हो, मौज़ उड़ाते हो
अरे ! उसी माता की गर्दन पर तुम छुरी चलाते हो ।

गो-हत्यारों ! चुल्लू भर पानी में तुम डूब मरो,
गो-वध बंद करो जल्दी अब, गो-वध बंद करो ।

बहती थी जिस पुण्य भूमि पर, दही-दूध की सरितायें
आज वहीं निधड़क कटती है, दीन-हीन लाखों गायें
कटता है कठोर दिल भी, सुन उनकी दर्द भरी आहें
आज हमारी अपनी यह, सरकार जरा कुछ शरमाए ।

पुण्य-शिखर पर चढ़ो, पाप के खंदक में न गिरो,
गो-वध बंद करो जल्दी अब, गो-वध बंद करो ।

आज यहाँ के शासक, निष्ठुर म्लेच्छ यवन क्रिस्तान नहीं
आज यहाँ पर किसी और की, सत्ता नहीं - विधान नहीं
आज यहाँ सब कुछ है अपना, पर गौ का कल्याण नहीं
गो-वध रोके कौन ! तनिक, इस ओर किसी का ध्यान नहीं ।

गो-रक्षा, गो-सेवा कर , भारत का कष्ट हरो,
गो-वध बंद करो जल्दी अब, गो-वध बंद करो 
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#भारतीय #संस्कृति के अनुसार #धर्म गुरुओं, संत #महापुरषों ने गाय को माता का दर्जा दिया है क्यूंकि इसमें अनेक गुण हैं भारतीय #जीवन शैली में #गाय का #दूध केवल #आहार ही नहीं बल्कि हमारे सांस्कृतिक जीवन और संस्कारों का भी अनिवार्य अंग रहा है |
@@Jai #Gau #Mata@@
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Watch "G.S.D Ambulances #बीमार वा घायल गौ माता को - इस एम्बुलेंस के ज़रिये गौ सेवा धाम हॉस्पिटल लाया जाता है" :)

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Devi Ji Short Message - Samaj Mai Gau Mata Ki Dasha !! गौ माता की सुन लो पुकार #Devi Chitralekhaji

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जय हो गौ माता की
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