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और मुझसे पूछा जाये तो मै यही कहूँगा कि गर्दिश के दिन से पहले ऐसा कुछ मैंने कभी नहीं पढ़ा था. हरिशंकर परसाई जी की यह कृति स्वजीवन-संघर्ष, निराशा से उबरने की प्रेरक आत्मकथा है, जिसमे बेबाक सच्चाई और गहरी आध्यात्मिकता छुपी हुई है. #GardishKeDin

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