साल बीते, नैना तरसे, तरसे हम हर बात को।
क्या बसंत, क्या पतझड़ और क्या दिन और क्या रात को।
क्या बेकारी, क्या बेकरारी, तुम्हारे-मेरे साथ को।
नींदों से जागे हम आधी-आधी रात को।
सोए भी तो क्या सोए सुकुनों वाली रात को।
फिर भी न तुम समझ सके इस जज्बात को।
हर पल तुमको याद किया, महसूस किया न जाने किस बात को, मुलाकात को।
लेकिन तुमको क्या, तूम भूल बैठे हर याद को।
हर बात को, हर हर्फ को, हर शब्द को हर याद को।
बस इतना है कहना कि कभी याद करना हमारे अल्हड़पन को।
कभी याद करना बचपन को, प्यार को, सबक को, इश्क़ को, समझ को।
तब शायद तुम्हे ज्ञात हो वक़्त का, आभास हो प्यार का और समझ सको उस अंतिम मुलाकात को।

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This is love😍
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Have a fantastic day, friends🤘👍🌼🌈
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Have a great time💞🌈👑
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