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कार्थीकायी नामक तमिल हिन्दुओं का त्यौहार शिव वंदना का काफी बड़ा त्यौहार माना जाता है जो फिलहाल चल रहा है, इस त्यौहार का एक अंश होता है महादीपम् जिसमे हर घर में दीपोत्सब मनाया जाता है, और शहर के सबसे ऊंचे स्थान पर विशालकाय दीप प्रज्ज्वलन किया जाता है और जहाँ लोग शिव पूजन करने जाते हैं |

मदुरै में तिरुपररणकुंदरम नामक पहाड़ी है, उस पहाड़ी पर कुधिराई सुनाई थित्तु नामक एक विशालकाय शिला है, जहाँ पौराणिक काल से लेकर पिछले साल तक महादीपम् स्थापित किया जाता था, अब पहाड़ी की तलहटी में एक दरगाह भी है जहाँ के शान्तिप्रियों ने पिछले साल अचानक काफिरों के इस त्यौहार पर विवाद खड़ा कर महादीपम् बंद करवा दिया, इस वर्ष भी हाई कोर्ट ने उस प्रतिबन्ध को जारी रखा ये कहकर की शांति में बाधा डालने वाले किसी त्यौहार की इजाज़त नहीं मिलेगी |

प्रश्न ये नहीं है की विवाद क्या है, प्रश्न ये है की विवाद क्यों है, क्या जहाँ जहाँ भी शातिर तरीके से षड्यंत्र खड़े कर विवाद पनपा दिए जायेंगे वहाँ सेक्युलर न्यायाधीश प्रतिबन्ध लगाते जायेंगे ? अगर ऐसा रहा तो धीरे धीरे देश में एक भी धार्मिक स्थल विवाद मुक्त नहीं बचेगा ? फिर इस देश की पुलिस और न्यायालय क्या करेंगी ? सेक्युलरिस्म की रक्षा करने वाले ये लोग भूल गए हैं की कानून का काम कानून का राज स्थापित करना है नाकि कानून टूट जाने का भय बताकर देश में हर परम्परा पर ताले लगवाने का |

स्थिति और भयावह तब होगी जब दो पीढ़ियों बाद पैदा हुए सेक्युलर बच्चे ऐसे क्रतिम विवादित स्थानों पर अस्पताल बनवाने जैसी मांगे करने लगेंगे और साथ में उलाहना देंगे की "come on . . let's not fight with each other . . let's focus on development"

सरकार एंव न्यायालय से मेरा एक प्रश्न है :- क्या कभी किसी जगह नमाज या किसी चर्च मे प्रार्थना बन्द कराई गई है ?
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चमत्कारिक भूतेश्वर नाथ शिवलिंग - हर साल बढ़ती है इसकी लम्बाई

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के मरौदा गांव में घने जंगलों बीच एक प्राकर्तिक शिवलिंग है जो की भूतेश्वर नाथ के नाम से प्रसिद्ध है। यह विशव का सबसे बड़ा प्राकर्तिक शिवलिंग है।  सबसे बड़ी आश्चर्य की बात यह है की यह शिवलिंग अपने आप बड़ा और मोटा होता जा रहा है। यह जमीन से लगभग 18 फीट उंचा एवं 20 फीट गोलाकार है। राजस्व विभाग व्दारा प्रतिवर्ष इसकी उचांई नापी जाती है जो लगातार 6 से 8 इंच बढ रही है। 

इस शिवलिंग के बारे में बताया जाता है कि आज से सैकडो वर्ष पूर्व जमीदारी प्रथा के समय पारागांव निवासी शोभासिंह जमींदार की यहां पर खेती बाडी थी। शोभा सिंह शाम को जब अपने खेत मे घुमने जाता था तो उसे खेत के पास एक विशेष आकृति नुमा टीले से सांड के हुंकारने (चिल्लानें) एवं शेर के दहाडनें की आवाज आती थी। अनेक बार इस आवाज को सुनने के बाद शोभासिंह ने उक्त बात ग्रामवासियों को बताई। ग्राम वासियो ने भी शाम को उक्त आवाजे अनेक बार सुनी। तथा आवाज करने वाले सांड अथवा शेर की आसपास खोज की। परतु दूर दूर तक किसी जानवर के नहीं मिलने पर इस टीले के प्रति लोगो की श्रद्वा बढने लगी। और लोग इस टीले को शिवलिंग के रूप में मानने लगे। इस बारे में पारा गावं के लोग बताते है कि पहले यह टीला छोटे रूप में था। धीरे धीरे इसकी उचाई एवं गोलाई बढती गई। जो आज भी जारी है। इस शिवलिंग में प्रकृति प्रदत जललहरी भी दिखाई देती है। जो धीरे धीरे जमीन के उपर आती जा रही है।

      यहीं स्थान भुतेश्वरनाथ, भकुरा महादेव के नाम से जाना जाता है। इस शिवलिंग का पौराणिक महत्व सन 1959 में गोरखपुर से प्रकाषित धार्मिक पत्रिका कल्याण के वार्षिक अंक के पृष्ट क्रमांक 408 में उल्लेखित है जिसमें इसे विश्व का एक अनोखा महान एवं विशाल शिवलिंग बताया गया है।

यह भी किंवदंती है कि इनकी पूजा बिंदनवागढ़ के छुरा नरेश के पूर्वजों द्वारा की जाती थी। दंत कथा है कि भगवान शंकर-पार्वती ऋषि मुनियों के आश्रमों में भ्रमण करने आए थे, तभी यहां शिवलिंग के रूप में स्थापित हो गए।
घने जंगलों के बीच स्तिथ होने के बावजूद यहाँ पर सावन में कावड़ियों का हुजूम उमड़ता है। इसके अलावा शिवरात्री पर भी यहाँ विशाल मेला भरता ह



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11/27/14
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शिवपुराण में वर्णित है मृत्यु के ये 12 संकेत

धर्म ग्रंथों में भगवान शिव को महाकाल भी कहा गया है। महाकाल का अर्थ है काल यानी मृत्यु भी जिसके अधीन हो। भगवान शिव जन्म-मृत्यु से मुक्त हैं। अनेक धर्म ग्रंथों में भगवान शंकर को अनादि व अजन्मा बताया गया है। भगवान शंकर से संबंधित अनेक धर्मग्रंथ प्रचलित हैं, लेकिन शिवपुराण उन सभी में सबसे अधिक प्रामाणिक माना गया है। इस ग्रंथ में भगवान शिव से संबंधित अनेक रहस्यमयी बातें बताई गई हैं। इसके अलावा इस ग्रंथ में ऐसी अनेक बातें लिखी हैं, जो आमजन नहीं जानते। शिवपुराण में भगवान शिव ने माता पार्वती को मृत्यु के संबंध में कुछ विशेष संकेत बताए हैं। इन संकेतों को समझकर यह जाना जा सकता है कि किस व्यक्ति की मौत कितने समय में हो सकती है। ये संकेत इस प्रकार हैं- .....

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Namo Namo Baba Dhurjati.. ..

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Lord Shiva is worshiped in the form of ‘Shivling’ by the devotees. The Parad #Shivling is about 150 kg, located in Kankhal. It is approximate 7 kilometers from Hari ki Pauri’.. 
भगवान शिव भक्तों द्वारा शिवलिंग 'के रूप में पूजे जाते हैं. पारद शिवलिंग कनखल में स्थित है और यह लगभग 150 किलो का है. यह 'हरि की पौड़ी से लगभग 7 किलोमीटर की दूरी पर है.. हर हर महादेव!!
know more- http://goo.gl/Lty8UW #haridwar #allinharidwar #kankhal
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