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आप सभी मित्रों व् बच्चों को आपके परिवार सहित माता रानी के पावन नवरात्रों व् भारतीय हिन्दू नव वर्ष विक्रमी संवत 2074 की हार्दिक बधाई एवं ढेरों शुभकामनायें।
ईश्वर आपको
🍁"ऋद्धि दें, सिद्धि दे,
वंश में वृद्धि दें,
ह्रदय में ज्ञान दें,
चित्त में ध्यान दें,
अभय वरदान दें,
दुःख को दूर करें,
सुख भरपूर करें,
आशा को संपूर्ण करें,
सज्जन जो हित दें,
कुटुंब में प्रीत दें,
जग में जीत दें,
माया दे, साया दें,
और निरोगी काया दें,
मान दें सम्मान दे,
सुख समृद्धि और ज्ञान दें,
शान्ति दें, शक्ति दें,
भक्ति भरपूर दें..."🍁
🍁आप सभी को नव वर्ष
विक्रम संवत 2074 के लिए
हार्दिक बधाई एवं ढेरों शुभकामनाएं।
🎈🎂🎈🎂🎈🎂🎈🎂🎈
- Uma Shankar Parashar.
प्रिय मित्रों एवं बच्चों !
ॐ नमः शिवाय ! हर हर महादेव ! भगवान शिव आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करें ! ईश्वर आपको सदा सही राह पर चलायें, जिससे आपका प्रत्येक दिन मंगलमय हो !
क्या आप भारत को मुस्लिम देश बनाना या बनते देखना पसंद करते हैं? यदि नहीं, तो थोथे सेकुलरिज्म के नाम पर बीजेपी द्वारा भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित करने के प्रयासों का विरोध क्यों करते हैं? आज जबकि मुस्लिम्स भारत में बहुसंख्यक नहीं हैं, तब भी भारत को मुस्लिम देश बनाने की मांग कई प्रदेशों में उठ चुकी है, जिसका कभी किसी भी मुस्लिम नेता, आम मुस्लिम, कांग्रेस व् किसी भी तथाकथित सेक्युलर पार्टियों ने विरोध नहीं किया। लेकिन भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित करने के नाम से ही इन सभी के तन बदन में मानो आग ही लग जाती है। खुद हमारे हिन्दू भाई-बहिन भी इस विचार का खुलकर विरोध करने लगते है। लेकिन यह कोई नहीं सोचता कि जब आज से 15-20 साल बाद भारत में मुस्लिम्स की जनसँख्या हिंदुओं से भी अधिक हो जायेगी, तब इन तथाकथित सेक्युलर नेताओं में से कोई भी मुस्लिम्स को भारत को मुस्लिम देश घोषित करने से नहीं रोक पायेगा। उसके बाद हम हिंदुओं का भारत में क्या भविष्य होगा, क्या उसके बारे में कश्मीर, बांग्लादेश और पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं का हश्र जानने वाले लोगों को भी फिर से बताने की जोई जरुरत बाकी है? याद रखें कि हम में से जो कोई भी हिब्दु भाई-बहन आज भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित करने का विरोधी है, वो निश्चय ही परोक्ष रूप से निकट भविष्य में भारत को मुस्लिम देश बनवाने का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।
What will happen, when muslims will be in majority in India?
आशा करता हूँ कि आपको भी मेरी भांति अपने भारत देश और हिन्दू धर्म से थोड़ा बहुत प्रेम तो अवश्य ही होगा और आप इस मैसेज को अपने से जुड़े ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचाने का यथासंभव प्रयत्न अवश्य ही करेंगे।

सत्यम शिवम् सुन्दरम ! जय हिन्द, जय भारत ! वंदे मातरम !
"विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊंचा रहे हमारा"
प्रिय मित्रों व् बच्चों !
आप लोगों से मेरी विनती है कि मेरी किसी भी पोस्ट को केवल पढ़ने के पश्चात ही लाइक या शेयर करें। मुझे अफ़सोस है कि मेरी किसी भी पोस्ट में आपके मनोरंजन की कोई भी बातें नहीं होती, बल्कि इनमें केवल अपने देश और देशभक्ति से जुड़ी हुई बातें ही होती हैं, इसलिए यदि आपने किसी मनोरंजन की तलाश में मुझे गलती से अपने सर्किल में ऐड कर लिया हो, तो आपको मेरी सलाह है मेरी इस पोस्ट के मैसेज को आगे पढ़ने में भी अपना समय बिलकुल भी व्यर्थ बर्बाद न करें, बल्कि अपने इस समय का प्रयोग भी मुझे अपने सर्किल से तुरंत रिमूव करने में ही करें। लेकिन यदि आप इस देश से ज़रा सा भी प्रेम करते हैं और यह भी मानते हैं कि इस देश का एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते इस देश के प्रति आपके भी कुछ कर्तव्य हैं, तभी मेरे मैसेज को पूरा पढ़ने के बाद ही उस पर अपनी कोई प्रतिक्रिया देंI अन्यथा मेरा समय भी व्यर्थ बर्बाद न करें ! धन्यवाद।
मित्रों व् बच्चों !
यदि आप हिन्दू हैं और यह बिलकुल नहीं चाहते कि आने वाले समय में कभी भी आपको या आपके बच्चों को जबरन मुसलमान बनना पड़े, तो मेरे इस मैसेज को खासकर इसके महत्वपूर्ण सन्देश वाले भाग को ऊपर से नीचे तक एक बार अवश्य पढ़ें। और हाँ अगर आपको मेरी बात में सच्चाई नज़र आये अथवा सही लगे, तो यह भी अवश्य ही बताएं कि इस खतरनाक आने वाले भविष्य से अपने सभी बंधु-बांधवों को भी सचेत करने के लिए क्या आप भी हमारे इस हिन्दू जन-जागृति अभियान का हिस्सा नहीं बनना चाहेंगे? अगर हाँ ! तो आप इस दिशा में क्या करेंगे? हो सकता है कि आपको मेरी यह भाषा कुछ अटपटी अवश्य लगे, लेकिन मेरी मज़बूरी है कि जिस प्रश्न ने कुछ अरसे से मेरी रातों की नींद को उड़ा रखा है, उस से हम सभी की जिंदगी के अलावा हमारी आने वाली पीढ़ियों की जिंदगी और भविष्य भी तो जुड़े हुए हैं। क्यूँकि मैं तो स्वयं ही उम्र के उस पड़ाव पर हूँ, जहाँ से उस दौर को देख पाने का मौका शायद ही मुझे मिले। इसलिए इस सन्देश को आपके अभी पढ़ने या न पढ़ने से मुझे तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन हमारी भावी पीढ़ियों का भविष्य तो फिर भी उससे जुड़ा हुआ है। वैसे भी आप मुझसे तो झूठ भी बोल सकते हैं, लेकिन क्या अपने आप से या अपनी अंतरात्मा से भी झूठ बोल पाएँगे? इसलिए इसे पढ़ने के बाद फैसला भले ही कुछ भी करें, लेकिन एक बार पूरा पढ़ें जरूर, क्यूँकि तब आप न तो किसी थोथी धर्मनिरपेक्षता के अँधेरे में जियेंगे और न ही किसी से यह कह सकेंगे कि आपको वस्तुस्थिति का ज्ञान ही नहीं था। आखिर को यह हम सभी के अस्तित्व का प्रश्न जो है?
कहा जाता है कि जब कोई बात पढ़कर अथवा बोलकर बार-बार दोहराई जाती है, तब वो बात हमारे अवचेतन मन में गहरे तक बैठ जाती है। तब क्यों न हम अपनी भारतीय संस्कृति की नीचे लिखी हुई कुछ अच्छी बातों को दोहराएं, जिससे हमारे व्यक्तित्व का उचित विकास हो और हम अपने राष्ट्र के सर्वांगीण विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकें?
"श्रीमद भगवद्गीता में भगवान श्री कृष्ण ने स्पष्ट कहा है कि न्याय-अन्याय अथवा धर्म-अधर्म की लड़ाई में बीच का कोई मार्ग ही नहीं होता अर्थात कोई भी पक्ष जो न्याय का समर्थक है, तो उसे अन्याय के प्रतिकारस्वरूप पूरी तरह से न्याय के साथ खड़े होना चाहिए। इसी प्रकार जो कोई भी पक्ष धर्म या न्याय के पक्ष में नहीं है, तो उसे परोक्ष-अपरोक्ष रूप से अन्याय का समर्थन करने वाला ही मानना चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण ने आगे इस बात को भी स्पष्ट किया है कि अधर्मियों से समाज एवं धर्म की रक्षा के लिए अधर्मियों के खिलाफ किये गए किसी भी प्रकार के छल-बल एवं हिंसा के प्रयोग को पाप की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। लेकिन उसका उद्देश्य केवल और केवल धर्म की स्थापना ही होना चाहिए।"
"कोई भी धर्म राष्ट्र-धर्म अथवा देशभक्ति से बड़ा नहीं होता। किसी भी प्रकार के देशद्रोह की केवल एक ही सजा मृत्यु-दंड होनी चाहिए। जिस देश अथवा राज्य की अधिकांश जनता कायर हो, वहां विदेशी शक्तियों अपना आधिपत्य अधिक आसानी से जमा पाती हैं। अन्याय करने वाले से उस अन्याय को चुपचाप सहने वाला अधिक दोषी होता है, जिसके कारण समाज में कायरता बढ़ती है और अन्यायी को बल मिलता है। अतः अन्याय का प्रतिकार अवश्य करें व् अपने बच्चों एवं छोटे भाई-बहनों को भी अन्याय का प्रतिकार करने की ही शिक्षा दें।"
"जैसे काली से काली घटाएँ भी सूर्य के प्रकाश को बिखरने से अधिक समय तक रोक नहीं सकती, उसी प्रकार झूठ को कैसी भी चाशनी में लपेट कर परोसने या सत्य को सात तालों के भीतर कैद करने पर भी सत्य को छिपाया अथवा दबाया नहीं जा सकता। और झूठ के सारे अंधकार को चीर कर एक न एक दिन सच का सूरज निकलता जरूर है। सत्य एवं अहिंसा के पथ पर चलना कुछ कठिन भले ही हो, लेकिन केवल सत्य और अहिंसा का मार्ग ही सर्वश्रेष्ठ होता है, इसलिए सदा सत्य बोलने की कोशिश करें। सत्य को बोलने का सबसे बड़ा फायदा ये है कि आपको कोई भी बात याद नहीं रखनी पड़ती, जबकि एक झूठी बात को छिपाने के लिए कभी-कभी सैंकड़ों झूठ बोलने पड़ते हैं। लेकिन एक बात अवश्य याद रखें कि सत्य और अहिंसा कायरों के हथियार नहीं, अतः अपनी कायरता को छिपाने के लिए इनका सहारा लेकर अपने बच्चों एवं समाज को मूर्ख बनाना अपने आपको धोखा देने जैसा ही है।"
"साफ़ दिल, नेक नियत और सही इरादे से किये जाने वाले हर काम में परमात्मा स्वयँ आपके साथ रहते हैं !"
"दूसरों के साथ वो व्यवहार कभी न करें, जो आप स्वयं अपने लिए नहीं चाहते !"
"याद रखें कि हमारा चरित्र उस भव्य इमारत की भांति होता है, जिसे बनाने में तो कभी-कभी बरसों लग जाते हैं, लेकिन गिराने में केवल कुछ पल की ही देरी लगती है। ठीक उसी प्रकार चरित्र निर्माण हिमालय पर चढ़ने के समान दुर्गम है, परंतु गिरने के लिए केवल हमारा एक गलत कदम ही पर्याप्त है !"
"प्रकृति का यह नियम है कि संसार में जो कुछ भी हल्का है, वही ऊपर उठता है। इसलिए अपने उत्थान के लिए अपने अंदर के अहंकार को निकाल कर अपने आपको हल्का करें !"
"वैसे तो कुछ भी बोलकर अपने शब्द वापस लेना दोगले नेताओं का ही चलन है, फिर भी आप अपने लफ़्ज़ों को तोलकर बोलिए ! ताकि कभी वापस भी लेने पढ़ें तो वजन न लगे !"
"इस देश में पैदा होने, यहाँ की आबो-हवा में खेल-कूद कर पले बढे होने के कारण इस देश के प्रति हमारे कुछ फ़र्ज़ व् क़र्ज़ होते हैं। यदि आप के मन में अपने इस देश के प्रति प्रेम और आदर की भावना न हो, यदि यहाँ का नागरिक होने के बावजूद आप अपने उन कर्तव्यों का पालन ठीक से नहीं करते, अपने माता-पिता, बुजुर्गों एवं गुरुजनों को यथोचित सम्मान नहीं देते व् केवल दूसरों में मीन-मेख निकालकर ही आप अपना जीवन व्यतीत करते हैं, तो निश्चय ही आप इस देश की धरती पर बोझ और इंसानियत के नाम पर कलंक हैं !"
"Inactivity and idleness are the signs of a dead body ! if you have got any free time, don't just waste it. You can utilize the same for the sake of the betterment of society, mankind and work for the national interests."
"निष्क्रियता और आलस्य एक मृत शरीर की पहचान है ! यदि आप के पास खाली समय है, तो इसे व्यर्थ बर्बाद मत करो। आप अपने खाली समय का सदुपयोग समाज, मानवता की बेहतरी और राष्ट्रीय हितों के लिए काम करके भी कर सकते हैं !"
प्रिय मित्रों एवं बच्चों !
आप सभी इस बात से भली भांति परिचित हैं कि नेताओं की बातों पर आँख मूँद कर विश्वास करने वालों का हश्र सदा बुरा ही होता है। सोचो कि भगवान ने हम सभी को बुद्धि और दिमाग किसलिए दिए हैं, यदि हम उनका इस्तेमाल ही न करें? और आप सब भी तो इस बात से सहमत हैं कि विश्व के समस्त नेताओं की प्रवृति तो गिरगिट जैसी होती है, पल-पल में ही बदल जाती है। इससे ज्यादा दुखद और क्या होगा कि भारतीय नेताओं के कारण तो बेचारे गिरगिटों को भी बहुत बड़ी मात्रा में आत्महत्या करनी पड़ रही है क्यूँकि उनका कहना है कि जितनी देर उन्हें ये सोचने में लगती है कि अपना अगला रंग क्या बदलूँ, उतनी देर में तो कुछ भारतीय नेता अपना बयान तीन बार बदल लेते हैं।
भारत एक हिन्दू बहुल देश होते हुए भी यहाँ कदम कदम पर हमारे हिन्दू धर्म को अपमानित होना पड़ता है, साथ ही कुव्यवस्था के कारण यह देश भी एक बार फिर से विनाश और विभाजन की ओर अग्रसर होता प्रतीत हो रहा है। इन सब बातों के अलावा कुछ मुस्लिम देशों में पिछले कुछ समय से हिन्दू व् गैर-मुस्लिम लोगों के साथ दुर्व्यवहार, सामूहिक जन-सँहार और जबरन धर्मान्तरण की अनगिनत घटनाओं के बाद इस देश को भी एक मुस्लिम देश बनाने की उठती मांग ने हमें सकते में डाल दिया है और सोचने पर मज़बूर कर दिया है कि नेहरू और गांधी की बेवकूफी और साज़िश के कारण क्या भारत और हिंदुत्व का अस्तित्व इस दुनिया से ही खत्म होने जा रहा है?
यह बात मात्र कपोल-कल्पना समझ कर सिर्फ लापरवाही में हंसी में ही उड़ा देने की नहीं है, अपितु इस पर ठन्डे दिमाग से बैठ कर मंथन करने की आवश्यकता है। क्यूँकि दुनिया का इतिहास इस बात का गवाह है कि दुनिया के नक़्शे में पहले जितने भी हिन्दू धर्म पर चलने वाले देश थे, भारत और नेपाल जैसे इक्का दुक्का देश के अलावा उन सभी का अस्तित्व आज खतम हो चूका है और वो सभी न सिर्फ आज कट्टर इस्लामिक में गिने जाते हैं, बल्कि जो देश हिन्दू जनसँख्या की बहुलता से हिन्दू देशो की श्रेणी में गिने जाते थे, आज वहाँ हिन्दू ढूंढने से भी नहीं मिलते, क्यूँकि वहां न सिर्फ हिन्दू सभ्यता और संस्कृति के प्रतीकों ही नष्ट किया गया, बल्कि वहाँ के मूल निवासी हिन्दुओं का अस्तित्व भी समाप्त कर दिया गया है। जो कुछ थोड़े बहुत अपनी जान बचाने में कामयाब भी हुए, उन्हें अपने अस्तित्व को बचाने के लिए अपने ही देश से अपनी समस्त चल-अचल संपत्ति को त्याग कर पलायन करना और संसार के विभिन्न हिस्सों में जा कर बसना पड़ा है।
कांग्रेस और उसके सहयोगियों की कुनीतियों, मुस्लिम चाटुकारिता और दुर्व्यवस्था के कारण न सिर्फ मुस्लिम समाज के अपराधी प्रवृति के लोगों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं, जिसका सीधा असर हमारे हिन्दू समाज और उस की बहु-बेटियों की सामाजिक सुरक्षा पर पड़ रहा है। आये दिन देश में बढ़ते जा रहे सामूहिक बलात्कार के किस्से और थोड़े थोड़े अंतराल पर देश के विभिन्न भागों में होते दंगे इसके ज्वलंत उद्दाहरण हैं।
महत्वपूर्ण सन्देश
भारत का एक जल्द से जल्द एक हिन्दू राष्ट्र बनना जरुरी क्यों?
क्या आप नहीं जानते कि आज़ादी के बाद से आज तक भारत के छह करोड़ से भी अधिक हिन्दुओं को जोर-जबरदस्ती से या लालच देकर मुस्लिम अथवा क्रिश्चियन बनाया जा चूका है?
क्या कीजियेगा, आज से 20-30 साल बाद जब भारत भी एक इस्लामिक देश बन जायेगा? आप अपनी जान देंगे, विदेश चले जायेंगे या कि अपने बच्चों सहित मुस्लिम बन जायेंगे? लेकिन तब भी सुरक्षा की क्या गारंटी है, क्यूँकि जो सुन्नी मुस्लिम लोग आज अपने ही उस शिया समुदाय को भी ठिकाने लगाने पर तुले हुए हैं, जो उन्हीं के इस्लाम का सदियों पुराना हिस्सा है, फिर क्या भरोसा कि कल को वो धर्म परिवर्तन से अपनी जान बचाने वालों को भी जिन्दा छोड़ेंगे या नहीं?
क्या आप नहीं जानते कि हिन्दू बहुल भारत होते हुए भी झारखण्ड के पहले से नक्सली पीड़ित रहे ख़ास भाग में आतंकवादियों द्वारा वहाँ रहने वाले हिन्दुओं को इलाका खाली करने या जान माल से हाथ धोने की धमकी भरे सन्देश भेजे जा चुके हैं, जिसकी चर्चा न्यूज़ चैनल की भी सुर्खियां बनी?
क्या कश्मीर को २५ साल पहले ही हिन्दुओं से खाली नहीं कराया जा चूका है? क्या आप नहीं जानते कि आज अरुणाचल और आसाम आदि राज्यों के कुछ मुस्लिम बहुल खास इलाकों में से भी लाखों की संख्या में हिन्दुओं का पलायन जारी है?
क्या आप पश्चिम बंगाल, केरल, अरुणाचल और आसाम के कुछ मुस्लिम बहुल खास इलाकों में रहने वाले हिन्दुओं की सैंकड़ों-हज़ारों की संख्या में आगजनी आदि से हुई जान माल की क्षति की अनगिनत बार की घटनाओं से वाकिफ नहीं, जिसके कारण आज केरल में हिन्दू नाममात्र ही बचे हैं?
क्या आप नहीं जानते कि बांग्लादेश बनने अर्थात 1971 से भारत के बहुसंख्यक हिन्दू समुदाय को अल्प संख्या में लाने और बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठियों द्वारा यहाँ भारत में मुस्लिम जनसँख्या को बढ़ाने की एक सोची समझी साज़िश चल रही है, जिसके तहत बांग्लादेश बनने अर्थात 1971 से अब तक इसी साज़िश को अंजाम देने के लिए बांग्लादेश से सात करोड़ से भी अधिक मुसलमानों को अनाधिकृत रूप से भारत में प्रवेश कराया जा चूका है, जिसका साथ लालू,मुलायम और मायावती और ममता बैनर्जी के अलावा सम्पूर्ण कांग्रेस के नेता भी बखूबी दे रहें हैं। इसीलिए ये सभी अक्सर ही उन बांग्लादेशी घुसपैठियों को वापस बांग्लादेश भेजने के प्रश्न पर भड़क जाते हैं, क्यूँकि उनमें से अधिकांश को तो अपना वोट बैंक बढ़ाने की खातिर ये लोग पहले ही भारत की नागरिकता दे भी चुके हैं। यदि बांग्लादेशी घुसपैठियों की वापसी पर सख्ती से अमल होता है, तो इन सबकी ये साज़िश भी सामने आ जाएगी।
क्या आप नहीं जानते कि बांग्लादेश में वहाँ रहने वाले बंगाली हिन्दुओं पर कैसे कैसे कहर ढाये जा रहे हैं, जिसके कारण वो लोग भी वहाँ से पलायन करने पर मज़बूर हैं?
क्या आप नहीं जानते कि पाकिस्तान में अपनी चल-अचल धन-संपत्ति छोड़कर अपनी जान बचाने की खातिर वहाँ के हिन्दुओं को लाखों की संख्या में भारत के राजस्थान आदि में शरण लेनी पड़ी है, जो किसी भी कीमत पर वापस पाकिस्तान जाने को तैयार नहीं? उन लाखों हिन्दुओं को तो यहाँ के मूल निवासी होने पर भी आज तक भारत की नागरिकता नहीं दी गई है, जबकि इन लालू, मुलायम मायावती और ममता बैनर्जी आदि के शासनकाल में और कांग्रेस शासित प्रदेशों में कांग्रेस के इशारे पर करोड़ों की संख्या में बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठियों को यहाँ की नागरिकता दे दी गई है, आखिर क्यों?
आप चाहे लड़कें हों या लड़की हों, आदमी हों या औरत हों, जवान हों या बूढ़े हों, अमीर हों या गरीब हों, नेता हों या अभिनेता हों, कर्मचारी हों या व्यापारी हों, जज हों या वकील हों, भले ही हम लोग कितने भी पढ़े लिखे हों या बिलकुल अनपढ़ हों लेकिन यदि हम हिन्दू हैं तो क्या यह हमारा फ़र्ज़ नहीं बनता कि हम अपने अपने लेवल पर हम में से हर एक का यह कर्तव्य बनता है कि अपने से मिलने जुलने वाले हर एक व्यक्ति से संसार के सभी 56 हिन्दू देशों के इस्लामिक देश बनने और वहां के मुस्लिम्स के द्वारा वहां उन देशों में रहने वाले हिन्दुओं के ऊपर किये जा रहे जुल्मों-सितम व् अत्याचारों के बारे में बातचीत अवश्य करें, क्यूँकि यह न केवल आपके और आपकी ही बल्कि उन सभी की आने वाली पीढ़ियों की भी जिंदगी का प्रश्न है, जिनसे आप इस बारे में बातचीत करेंगे।
कभी यहाँ की भोली भाली जवान व् खूबसूरत लड़कियों की मासूमियत और नासमझी/अनभिज्ञता का लाभ उठाकर उन्हें लव-जेहाद जैसे हथकंडों में फंसाया जाता है, जिसमें कभी कभी तो अपने आपको जरुरत से ज्यादा मॉडर्न व् समझदार समझने वाली पढ़ी-लिखी मगर हकीकत में निहायत ही बेवकूफ किस्म की लड़कियां भी फंस जाती हैं, जिनका परिणाम अक्सर ही समाचार-पत्रों में चर्चा का विषय बन जाया करता है तो कभी कभी उनकी यह आधुनिकता भरी समझ उन्हें आत्महत्या की कगार तक भी पहुँचा देती है।
कभी इन लोगों के द्वारा कभी यहाँ हिन्दुओं के गरीब व् अनपढ़ तबके खासकर पिछड़ी जाति के लोगों को ऊँची जाति के लोगों के खिलाफ भड़काया जाता है। मुसीबत तो यह है कि इन तथाकथित पिछड़ी जातियों के पढ़े-लिखे लोग भी बिना कुछ सोचे समझे ही इन लोगो की हाँ में हाँ मिला देते हैं, जिसका परिणाम यह होता है कि उस समय वहाँ मौजूद अन्य गरीब व् अनपढ़ लोग उनकी बात को सही समझकर खुद अपने ही हिन्दू धर्म की जड़ें खोदने का काम शुरू कर देते हैं।
कभी सोचा है कि ऐसा सिर्फ हिन्दू धर्म के लोगों के साथ ही क्यों किया जाता है? क्या आपको पता है कि समस्त संसार के अधिकांश देश या तो क्रिश्चियन हैं या इस्लामिक अथवा मुस्लिम देश। जबकि हमारा सनातन हिन्दू धर्म संसार में तीसरा सबसे अधिक माना जाने वाला धर्म होते हुए भी बहुसंख्यक हिन्दुओं का इकलौता देश यह भारत ही है या नाममात्र का छोटा सा गरीब देश नेपाल। इस्लाम व् क्रिश्चयन दोनों ही धर्म किसी भी प्रकार से समस्त संसार के ताकतवर देशो पर अपनी हुकूमत चाहते हैं, ताकि संसार के बाकी कमज़ोर देशों को अपनी आधीन कर सकें या इच्छानुसार चला सकें। और यही इच्छा इन दोनों धर्मों की भारत के बारे में भी है।
इसलिए अभी से सोच लीजिये कि आपको भविष्य में हिन्दू बनना है या क्रिश्चियन। मुसलमान आपको मार-मार कर मुस्लिम बनाएंगे और क्रिश्चियन लालच देकर। लेकिन फायदा क्रिश्चियन बनने में है, क्यूँकि क्रिश्चियन देश लूटते भले ही हों, लेकिन वो किसी को जान से नहीं मारते। वो बात अलग है कि वो आपको लालच देकर क्रिश्चियन बनाने की कोशिश करेंगे। बन गए तो ठीक वर्ना मुसलमान आपको मुसलमान बना देंगे या मार देंगे। लेकिन भारत में रह कर हिन्दू आप किसी भी हालत में नहीं रहेंगे, क्यूंकि तब तक तो यह एक इस्लामिक देश बन चुका होगा। जिसका सबसे बड़ा सबूत संसार के सभी हिन्दू 56 देशों का पहले ही इस्लामिक देशों में तब्दील होना है और पिछले साल 15 अगस्त को भारत को एक इस्लामिक देश बनाने की मांग केरल में उठ भी चुकी है, जिसके फोटोज आप मेरी पुरानी पोस्ट्स में भी देख सकते हैं।
इनका केवल एक ही मकसद है कि किसी भी प्रकार से यहाँ के बहुसंख्यक हिन्दू आपस में लड़ें, कमज़ोर हों और उनका हिन्दू धर्म से मोह भंग हो सके और वो यहाँ के बहुसंख्यक हिन्दुओं को अल्प संख्यक बना सकें, ताकि अपनी सुविधानुसार जब जी चाहे इसे एक क्रिश्चियन या इस्लामिक देश में परिवर्तित किया जा सके। जबकि अमीर गरीब या ऊँच-नीच की ये जातिगत विसंगतियाँ किस धर्म में नहीं हैं? क्या क्रिश्चियन व् इस्लाम में नहीं हैं? क्या क्रिश्चियन धर्म में रोमन कैथोलिक व् प्रूटेस्टेंट नहीं होते? क्या उनमें आपस में शादियाँ आसानी से हो जाती हैं, फिर यह तोहमत केवल हिन्दू धर्म पर ही क्यों लगायी जाती है? क्या इस्लाम में शिया-सुन्नी नहीं होते, जिनमें संसार के सभी कोनों में अक्सर ही मुठभेड़ भी होती रहती हैं?
क्या उनमें विभिन्न जातियां नहीं होती? और तो और जो लोग धर्म परिवर्तन करके मुसलमान बन भी जाते हैं, उन्हें भी इस्लाम को शुरू में ही अपनाने वाले लोग भी दोयम दर्जे का मुसलमान यांनी मुहाजिर कहते हैं। मुस्लिम वर्ग के लोग दिल्ली तो इन मुठभेड़ों का खास गवाह रहा है, जब कुछ साल पहले तक भी मुहर्रम के अवसर पर इस्लाम के इन दोनों वर्गों के लोग ताजिये निकलते वक्त अक्सर ही भिड़ जाया करते थे।
क्रिश्चियन देशों में और मुस्लिम देशों में सबसे बड़ा अंतर यही है कि क्रिश्चियन धर्म वाले देश अन्य गरीब देशों के लोगों को अपरोक्ष रूप से लूट-लूट कर अमीर बनना चाहते हैं, तो मुस्लिम धर्मानुयायी अपराध के रस्ते दूसरे धर्मानुयायियों की धन-संपत्ति आदि को हड़प कर के अमीर बनना चाहते हैं, जिसका सबसे बड़ा उद्दाहरण कश्मीर, बांग्लादेश और पाकिस्तान सहित सभी मुस्लिम देशों में गैर-मुस्लिम लोगों खासकर हिन्दुओं को मार-पीट कर, उन्हें मारकर अथवा वहां से खदेड़ कर उनकी संपत्ति पर कब्ज़ा किया जाना है।
भारत के कश्मीर से हिन्दू 25 साल पहले ही भगा दिए गए, जो आज तक देश के विभिन्न भागों में खानाबदोशों की जिंदगी बसर कर रहे हैं। केरल, आंध्र आदि में ओवैसी भाइयों की दादागिरी तो जगजाहिर है ही, इसके अलावा पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश व् महाराष्ट्र आदि राज्यों के बहुत बड़े भागों को आजकल वहाँ रहने वाले हिन्दुओं ने ही मिनी पाकिस्तान का नाम भी दे दिया है, क्यूँकि वहां केवल मुस्लिम्स की ही हुकूमत चलती है।
कश्मीर पहले ही खाली करवा चुके हैं, झारखण्ड के बहुत बड़े भाग में तो ISIS के आतंकवादियों द्वारा हिन्दुओं को घर छोड़कर चले जाने की धमकी के पर्चे भी समाचारों में आ ही चुके हैं और अरुणाचल एवं आसाम आदि में से भी कश्मीर की तर्ज पर हिन्दुओं का पलायन लगातार जारी है।
अब यह फैसला आपको करना है कि आप मुसलमान बनना चाहते हैं या क्रिश्चियन, क्यूँकि आपको जिन्दा रहने के लिए या तो आपको किसी क्रिश्चियन देश में जा कर बसना होगा या आपको इन दोनों में से एक को तो अवश्य ही चुनना होगा। वर्ना आने वाले 30 साल के बाद तो आपकी भावी पीढ़ी का अंत तय है।
इस सबसे बचने का केवल एक ही मार्ग है कि न सिर्फ इस समस्या के बारे में अपने सभी जानकारों, मित्रों व् रिश्तेदारों आदि से अक्सर चर्चा ही करेंगे, बल्कि हम सभी आज से ही ये प्रण करें कि ये हालात काबू में आने और इस देश को हिन्दू राष्ट्र घोषित होने तक आज के बाद भारत के किसी भी हिस्से में होने वाले सभी प्रकार के स्थानीय निकायों, वहाँ की विधान सभाओं और केंद्र सरकार के लिए लोकसभा के सभी चुनावों में केवल अपने देशभक्त हिन्दू नेताओं और अपने हिन्दू संगठनों जैसे - भाजपा, शिव-सेना, विश्व हिन्दू परिषद, आरएसएस, बजरंगदल आदि के नेताओं को ही अपना वोट देकर चुनेंगे। ताकि हमारे इन हिन्दू संगठनो के हाथ मज़बूत हों और इनके ज़रिये हम इस देश को वो विषम एवं दुखदायी परिस्थितियां आने से पहले ही जल्दी से जल्दी भारत को एक हिन्दू राष्ट्र घोषित करवा सकें।
इससे पहले कि मुस्लिम मैजोरिटी में आकर यहाँ उत्पात मचाएं और इस देश को एक इस्लामिक देश बना पाएं, उससे पहले ही हम सबकी यह कोशिश होनी चाहिए कि अपने सभी जानकारों को यह मैसेज और सन्देश देकर समस्त भारत में भाजपा की सरकार बनाकर इस देश को भाजपा के ज़रिये एक हिन्दू राष्ट्र में ही बदल दिया जाएँ, क्यूँकि इस बात को तो सभी जानते हैं कि भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने का सपना केवल भाजपा, आरएसएस और अन्य हिन्दू संगठन ही देखते हैं।
आप यह भी सोच सकते हैं कि कहीं मैं कोई भाजपा समर्थक तो नहीं? हकीकत तो यही है कि मैं कोई भाजपा समर्थक नहीं हूँ, लेकिन अगर होता भी उससे क्या फर्क पड़ जाता? अगर मैं मुस्लिम संगठनो को भी समर्थन करूँ, तो उससे भविष्य में हिन्दुओं और हिंदुस्तान पर आने वाला यह संकट क्या टल जायेगा?
हम आपको कोई आतंकवादी बनने के लिए तो नहीं कह रहे न? बल्कि हम तो आपको केवल इस बात का एहसास कराना चाहते हैं कि इस तथाकथित थोथी धर्मनिरपेक्षता की नीति में क्या रखा है? जबकि प्रथम तो धर्मनिरपेक्षता का अर्थ ही सभी धर्मों को एक समान अधिकार एवं एक समान न्याय देना ही होता है, लेकिन क्या भारत में कभी वास्तव में ऐसा होता भी है?
नहीं होता, उसके दो ही कारण हैँ - पहला कारण कि मुस्लिम खुद ही इसे कभी नहीं मानते और दूसरा कारण यह कि अपने आपको धर्मनिरपेक्ष कहने वाले कांग्रेस और उसके सभी सहयोगी दलों के मुस्लिमपरस्त नेताओं ने इस धर्मनिरपेक्षता की नीति को केवल मुस्लिम तुष्टिकरण और हिन्दुओं के अपमान का ही जरिया बनाकर छोड़ दिया है।
फिर क्या दिया है हमें इस धर्मनिरपेक्षता की नीति ने? केवल हम हिन्दुओं को अपने हिन्दू भाइयों से उन थोथे सिद्धांतों के लिए लड़कर अपने ही हिन्दू धर्म और अपने ही देश की जड़ें खोदना ही सिखाया है, वरना न तो यह देश कभी किसी का ग़ुलाम बनता और न ही ये विषम परिस्थितियां कभी हमारे व् हमारे बच्चों के सामने आती?
हम आपसे कोई यह तो कह नहीं रहे कि आइये ! हम और आप सभी हिन्दू एकजुट होकर मुसलमानों का कत्लेआम करेंगे? हमारे हिन्दू धर्म और हमारे घर-परिवारों में यह नीचता या बर्बरता तो कभी भी सिखाई नहीं जाती। लेकिन कम से कम मौजूदा हालात में हम सभी एकजुट होकर ऊपर बताये हुए इस उपाय पर अमल करके इसके ज़रिये अपने देश में आने वाले संकट से तो निपट सकते हैं ना?
और हाँ एक बात यह भी याद रखियेगा कि अकेले मोदी जी भी इस विषय में कुछ खास नहीं कर पाएंगे, जब तक कि आप उन जैसे ही कुछ कट्टर देशभक्त और कट्टर हिन्दू नेताओं को उनका इस मुहीम में साथ देने के लिए नहीं चुनते। क्यूँकि हो सकता है कि भारत को एक हिन्दू देश बनाने की घोषणा होते ही मुसलमान सारे भारत में एक बार जोर-शोर से दंगा फैलाने की कोशिश करें? जिसको काबू करने के लिए सारे भारत में सशक्त भाजपा और कट्टर पंथी हिन्दू नेताओं के हाथ में वहां की सत्ता अवश्य होनी चाहिए, खासकर उन प्रदेशों में, जिनमें वहाँ के लोग बड़े भाग को मिनी पाकिस्तान का नाम पहले ही दे चुके हैं, ताकि किसी भी समुदाय के जान-माल की ज्यादा हानि न हो सके।
अपने मुस्लिम मित्रों को भी आप यह कहकर भारत को एक हिन्दू राष्ट्र बनाने की इस मुहीम में भाजपा का साथ देने के लिए संतुष्ट कर सकते हैं कि हमारा इतिहास भी इस बात का गवाह है कि प्राचीन काल से आज तक कभी किसी भी हिन्दू राजा ने गैर हिन्दुओं पर अत्याचार नहीं किये, वरना यहाँ कभी कोई दूसरा धर्म पनप ही नहीं पाता, जबकि बाबर, महमूद गजनवी, चंगेज़ खान, तैमूरलंग, मुहम्मद गौरी और औरंगज़ेब समेत न जाने कितने ही मुस्लिम बादशाहों के द्वारा हिन्दू मंदिरों को तोड़ने, उन्हें लूटने और यहाँ की हिन्दू प्रजा पर जुल्मो-सितम के किस्से तो इतिहास में भरे पड़े हैं।
उन्हें इस बात का भरोसा दिलाइये कि हिन्दू राष्ट्र बनने के बाद भी उनके साथ किसी किस्म का कोई भेदभाव नहीं किया जायेगा। अगर मेरी बात आपको ठीक से समझ में आ पायी हो, तो आप इसे आगे भी शेयर कर सकते हैं। आप मेरी किसी भी पोस्ट के व्यूज को देखकर सुनिश्चित कर सकते हैं, कि मेरी हर पोस्ट को हज़ारों लोग अवश्य देखते हैं। इसलिए अपने इस मैसेज को इस पोस्ट के ज़रिये हज़ारों लोगों को भेज कर अपने हिस्से का अपना काम मैं तो कर चुका हूँ।
आगे का काम आपका है कि यह मैसेज आप अपने आगे के हज़ारों लोगों को कैसे भेज पाते हैं अथवा उन्हें भी यह हकीकत कैसे समझा पाते हैं? चाहें तो इसके लिए आप इस मैसेज के हज़ारों प्रिंट छपवा कर भी यह काम आसानी से कर सकते हैं। लेकिन सावधान ! कांग्रेस व् अन्य राजनीतिक पार्टियों से जुड़े हुए लोगों और कट्टर मुसलमानों से बचकर, क्यूँकि इससे उनकी इस देश को मुस्लिम देश बनाने की साज़िश नाकाम जो हो सकती है, तो ज़ाहिर है कि मेरी तरह आप भी उनकी नज़रों में खटक सकते हैं।
क्या आप नहीं जानते कि भारत में भाजपा व् अन्य हिन्दू संगठनो के नेताओं को छोड़कर अन्य सभी नेता, मीडिया, अन्य वर्गों/धर्मों के लोग व् मुस्लिम समुदाय सहित समाज के सभी ताकतवर तबके न केवल कदम कदम पर हिन्दू धर्म के बारे में तरह तरह की उल-जुलूल बातें फैलाने की भरसक कोशिश ही करते हैं, बल्कि अक्सर यह भी देखने में आता है कि ये सभी लोग व् नेता जब कभी उन्हें हिन्दुओं को किसी भी बात पर नीचा दिखाने और अपमान करने का मौका मिलता है, तो उसमें अपनी तरफ से कोई कसर भी बाकी नहीं छोड़ते? इसका भी एक कारण है कि इनमें से अधिकाँश नेता व् मीडिया कर्मी या तो मुसलमान बन ही चुके हैं या बनने को तैयार बैठे हैं, जिसका खुलासा हम पहले की कई पोस्ट्स में भी कर चुके हैं। लेकिन फैसला तुरंत अवश्य करें, वरना देर होने पर तो पछताने का भी कोई फायदा नहीं होगा।
- उमा शंकर पराशर
Note : If you agree with our views, then don't just like/share this post but also join us at google+ in 'Sarfrosh Deshbhakt' community : (https://plus.google.com/u/0/communities/117687291425332274527 ) at the earliest. मित्रों व् बच्चों ! क्या आप हमारे इन विचारों से सहमत हैं? क्या आप अपने क्षेत्र के असामाजिक तत्वों से परेशान हैं और ऐसे लोगोँ से अपने इलाके को सुरक्षित करना चाहते हैं? क्या आप के अंदर देश व् समाज के लिए कुछ अपनी तरफ से कुछ करने की भी आग भरी है? यदि आपका जवाब 'हाँ' में हैं, तो अति शीघ्र हमसे जुड़ें !
मित्रों ! बीच में मुझे एक बार यह शिकायत भी सुनने को मिली थी कि मेरे मैसेज में दिए गए सरफ़रोश देशभक्त के वेब एड्रेस पर क्लिक करने से कभी कभी 404 error भी शो कर देता है, उस अवस्था में आप मेरी प्रोफाइल को ओपन करके उसके अबाउट में लिंक में सरफ़रोश देशभक्त लिखे हुए पर क्लिक कर दें। जिससे वो कम्युनिटी अपने आप ओपन हो जाएगी। 
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28/03/2017
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     सत्यम शिवम् सुन्दरम !  
      जय हिन्द, जय भारत !   
               वंदे मातरम !

प्रिय मित्रों एवं बच्चों !
               ॐ नमः शिवाय ! हर हर महादेव ! भगवान शिव आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करें ! और
     ईश्वर आपको सदा सही राह पर चलायें,
   जिससे आपका प्रत्येक दिन मंगलमय हो !

    विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, 
         झंडा ऊंचा रहे हमारा !

मित्रों व् बच्चों ! 
                   आप सभी भाई-बहनों, मित्रों एवं बच्चों को परिवार सहित दीपावली के पावन पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं ! लक्ष्मी माता, गणपति बाबा, भगवान शिव और माता रानी आप सभी को सपरिवार यथायोग्य संयम, साहस, संस्कार, सफलता, बल-बुद्धि, ऋद्धि-सिद्धि, धन-संपत्ति के साथ साथ सभी प्रकार का मानसिक, शारीरिक व् पारिवारिक सुख-शांति प्रदान करें और आप सभी के सपनो को साकार करें।  

मित्रों !
                   कहा जाता है कि जब कोई बात पढ़कर अथवा बोलकर बार-बार दोहराई जाती है, तब वो बात हमारे अवचेतन मन में गहरे तक बैठ जाती है। तब क्यों न हम अपनी भारतीय संस्कृति की नीचे लिखी हुई कुछ अच्छी बातों को दोहराएं, जिससे हमारे व्यक्तित्व का उचित विकास हो और हम अपने राष्ट्र के सर्वांगीण विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकें?
                   श्रीमद भगवद्गीता में भगवान श्री कृष्ण ने स्पष्ट कहा है कि न्याय-अन्याय अथवा धर्म-अधर्म की लड़ाई में बीच का कोई मार्ग ही नहीं होता अर्थात कोई भी पक्ष जो न्याय का समर्थक है, तो उसे अन्याय के प्रतिकारस्वरूप पूरी तरह से न्याय के साथ खड़े होना चाहिए। इसी प्रकार जो कोई भी पक्ष धर्म या न्याय के पक्ष में नहीं है, तो उसे परोक्ष-अपरोक्ष रूप से अन्याय का समर्थन करने वाला ही मानना चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण ने आगे इस बात को भी स्पष्ट किया है कि अधर्मियों  से समाज एवं धर्म की रक्षा के लिए अधर्मियों के खिलाफ किये गए किसी भी प्रकार के छल-बल एवं हिंसा के प्रयोग को पाप की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। लेकिन उसका उद्देश्य केवल और केवल धर्म की स्थापना ही होना चाहिए।
                   "कोई भी धर्म राष्ट्र-धर्म अथवा देशभक्ति से बड़ा नहीं होता। किसी भी प्रकार के देशद्रोह की केवल एक ही सजा मृत्यु-दंड होनी चाहिए। जिस देश अथवा राज्य की अधिकांश जनता कायर हो, वहां विदेशी शक्तियों अपना आधिपत्य अधिक आसानी से जमा पाती  हैं। अन्याय करने वाले से उस अन्याय को चुपचाप सहने वाला अधिक दोषी होता है, जिसके कारण समाज में कायरता बढ़ती है और अन्यायी को बल मिलता है। अतः अन्याय का प्रतिकार अवश्य करें व् अपने बच्चों एवं छोटे भाई-बहनों को भी अन्याय का प्रतिकार करने की ही शिक्षा दें।" 
                   "जैसे काली से काली घटाएँ भी सूर्य के प्रकाश को बिखरने से अधिक समय तक रोक नहीं सकती, उसी प्रकार झूठ को कैसी भी चाशनी में लपेट कर परोसने या सत्य को सात तालों के भीतर कैद करने पर भी सत्य को छिपाया अथवा दबाया नहीं जा सकता। और झूठ के सारे अंधकार को चीर कर एक न एक दिन सच का सूरज निकलता जरूर है। सत्य एवं अहिंसा के पथ पर चलना कुछ कठिन भले ही हो, लेकिन केवल सत्य और अहिंसा का मार्ग ही सर्वश्रेष्ठ होता है, इसलिए सदा सत्य बोलने की कोशिश करें। सत्य को बोलने का सबसे बड़ा फायदा ये है कि आपको कोई भी बात याद नहीं रखनी पड़ती, जबकि एक झूठी बात को छिपाने के लिए कभी-कभी सैंकड़ों झूठ बोलने पड़ते हैं। लेकिन एक बात अवश्य याद रखें कि सत्य और अहिंसा कायरों के हथियार नहीं, अतः अपनी कायरता को छिपाने के लिए इनका सहारा लेकर अपने बच्चों एवं समाज को मूर्ख बनाना अपने आपको धोखा देने जैसा ही है।"
                    " साफ़ दिल, नेक नियत और सही इरादे से किये जाने वाले हर काम में परमात्मा स्वयँ आपके साथ रहते हैं !" 
                    "दूसरों के साथ वो व्यव्हार कभी न करें, जो आप स्वयं अपने लिए नहीं चाहते !"             
                    "याद रखें कि हमारा चरित्र उस भव्य इमारत की भांति होता है, जिसे बनाने में तो कभी-कभी बरसों लग जाते हैं, लेकिन गिराने में केवल कुछ पल की ही देरी लगती है। ठीक उसी प्रकार चरित्र निर्माण हिमालय पर चढ़ने के समान दुर्गम है, परंतु गिरने के लिए केवल हमारा एक गलत कदम ही पर्याप्त है !"
                    "प्रकृति का यह नियम है कि संसार में जो कुछ भी हल्का है, वही ऊपर उठता है। इसलिए अपने उत्थान के लिए अपने अंदर के अहंकार को निकाल कर अपने आपको हल्का करें !" 
                     "वैसे तो कुछ भी बोलकर अपने शब्द वापस लेना दोगले नेताओं का ही चलन है, फिर भी आप अपने लफ़्ज़ों को तोलकर बोलिए ! ताकि कभी वापस भी लेने पढ़ें तो वजन न लगे !"
                     "इस देश में पैदा होने, यहाँ की आबो-हवा में खेल-कूद कर पले बढे होने के कारण इस देश के प्रति हमारे कुछ फ़र्ज़ व् क़र्ज़ होते हैं। यदि आप के मन में अपने इस देश के प्रति प्रेम और आदर की भावना न हो, यदि यहाँ का नागरिक होने के बावजूद आप अपने उन कर्तव्यों का पालन ठीक से नहीं करते, अपने माता-पिता, बुजुर्गों एवं गुरुजनों को यथोचित सम्मान नहीं देते व् केवल दूसरों में मीन-मेख निकालकर ही आप अपना जीवन व्यतीत करते हैं, तो निश्चय ही आप इस देश की धरती पर बोझ और इंसानियत के नाम पर कलंक हैं !"
                     "Inactivity and idleness is the sign of a dead body ! if you have got any free time, don't waste it. You can utilize the same for the sake of the betterment of society, mankind and work for the national interests."  
                     "निष्क्रियता और आलस्य एक मृत शरीर की पहचान है ! यदि आप के पास खाली समय है, तो इसे व्यर्थ बर्बाद मत करो। आप अपने खाली समय का सदुपयोग समाज, मानवता की बेहतरी और राष्ट्रीय हितों के लिए काम करके भी कर सकते हैं ! "   
            प्रिय मित्रों एवं बच्चों ! आप सभी इस बात से भली भांति परिचित हैं कि कांग्रेस और उसके सहयोगियों की कुनीतियों, मुस्लिम चाटुकारिता और दुर्व्यवस्था के कारण न सिर्फ मुस्लिम समाज के अपराधी प्रवृति के लोगों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं, जिसका सीधा असर हमारे हिन्दू समाज और उस की बहु-बेटियों की सामाजिक सुरक्षा पर पड़ रहा है। आये दिन देश में बढ़ते जा रहे सामूहिक बलात्कार के किस्से और थोड़े थोड़े अंतराल पर देश के विभिन्न भागों में होते दंगे इसके ज्वलंत उद्दाहरण हैं।
            हमारे हिन्दू धर्म को हिन्दू बहुल भारत होते हुए भी कदम कदम अपमानित होना पड़ता है, साथ ही ये देश भी कुव्यवस्था के कारण एक बार फिर से विनाश और विभाजन की ओर अग्रसर होता प्रतीत हो रहा है। इन सब बातों के अलावा पिछले कुछ समय से कुछ मुस्लिम देशों में गैर-मुस्लिम लोगों के साथ दुर्व्यवहार, सामूहिक जन-सँहार और जबरन धर्मान्तरण की अनगिनत घटनाओं के बाद इस देश को भी एक मुस्लिम देश बनाने की उठती मांग ने हमें सकते में डाल दिया है और सोचने पर मज़बूर कर दिया है कि नेहरू और गांधी की बेवकूफी और साज़िश के कारण क्या भारत और हिंदुत्व का अस्तित्व इस दुनिया से ही खत्म होने जा रहा है?
            यह बात मात्र कपोल-कल्पना समझ कर सिर्फ लापरवाही में हंसी में ही उड़ा देने की नहीं है, अपितु इस पर ठन्डे दिमाग से बैठ कर मंथन करने की आवश्यकता है। क्यूँकि दुनिया का इतिहास इस बात का गवाह है कि दुनिया के नक़्शे में पहले जितने भी हिन्दू धर्म पर चलने वाले देश थे, भारत और नेपाल जैसे इक्का दुक्का देश के अलावा उन सभी का अस्तित्व आज खतम हो चूका है और वो सभी न सिर्फ आज कट्टर इस्लामिक में गिने जाते हैं, बल्कि जो देश हिन्दू जनसख्या की बहुलता से हिन्दू देशो की श्रेणी में गिने जाते थे, आज वहाँ हिन्दू ढूंढने से भी नहीं मिलते, क्यूँकि वहां न सिर्फ हिन्दू सभ्यता और संस्कृति के प्रतीकों ही नष्ट किया गया, बल्कि वहाँ के मूल निवासी हिन्दुओं का अस्तित्व भी समाप्त कर दिया गया है। जो कुछ थोड़े बहुत अपनी जान बचाने में कामयाब भी हुए, उन्हें अपने अस्तित्व को बचाने के लिए अपने ही देश से अपनी समस्त चल-अचल संपत्ति को त्याग कर पलायन करना और संसार के विभिन्न हिस्सों में जा कर बसना पड़ा है।
           नेताओं की बातों पर आँख मूँद कर विश्वास करने वालों का सदा यही हश्र होता है। सोचो कि भगवान ने हम सभी को बुद्धि और दिमाग किसलिए दिए हैं, यदि हम उनका इस्तेमाल ही न करें? और आप सब भी तो इस बात से सहमत हैं कि विश्व के समस्त नेताओं की प्रवृति तो गिरगिट जैसी होती है, पल-पल में ही बदल जाती है। इससे ज्यादा दुखद और क्या होगा कि भारतीय नेताओं के कारण तो बेचारे गिरगिटों को भी बहुत बड़ी मात्रा में आत्महत्या करनी पड़ रही है क्यूँकि उनका कहना है कि जितनी देर उन्हें ये सोचने में लगती है कि अपना अगला रंग क्या बदलूँ, उतनी देर में तो कुछ भारतीय नेता अपना बयान तीन बार बदल लेते हैं।
           हमारी कम्युनिटी 'सरफ़रोश देशभक्त' और 'अखिल भारतीय गौ-रक्षा समिति' का गठन केवल सोशल साइट पर अपने आसपास के उन सभी लोगों को एकजुट करने के लिए ही किया गया है, जिनके दिल के अंदर इस देश और हिन्दू धर्म के लिए कुछ भी कर गुजरने की आग भरी है। जैसे ही हमारी सदस्य संख्या निश्चित स्तर को पार करेगी, उसके पश्चात आगे के कार्यक्रम की रूपरेखा और उन पर कार्यवाही करने की प्रणाली पर विचार-विमर्श किया जायेगा। तब तक के लिए आप सभी ज्यादा से ज्यादा ऐसे लोगों को यहाँ लाने का प्रयास करते रहें, जिनमें इस देश और हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए आप जैसा ही जज्बा और आग भरे हों। इसके अलावा आप सभी सदस्यों से अनुरोध है कि इस कम्युनिटी में ऐसी कोई पोस्ट शेयर न करें, जो आने वाले किसी भी अन्य सदस्य की नज़र में हमें विषय की गंभीरता के प्रति लापरवाह, गैर-जिम्मेदार या छिछोरी प्रवृति का दर्शाये। अतः यहाँ केवल वही पोस्ट शेयर करें, जिसमें देशभक्ति की भावना कूट कूट कर भरी हो या हिन्दू धर्म के प्रति आस्था का समावेश हो।

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                                  - Uma Shankar Parashar.
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जय हिन्द !               जय भारत !           वन्दे मातरम ! 

मेरे प्रिय मित्रों एवं बच्चों !
                          ॐ नमः शिवाय ! हर हर महादेव.
          भगवान शिव आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करें !!!
                                            और
                     ईश्वर आपको सदा सही राह पर चलायें,
                   जिससे आपका प्रत्येक दिन मंगलमय हो !
                   " साफ़ दिल, नेक नियत और सही इरादे से किये जाने वाले हर काम में परमात्मा स्वयँ आपके साथ रहते हैं !" 
                    "दूसरों के साथ वो व्यव्हार कभी न करें, जो आप स्वयं अपने लिए नहीं चाहते !"             
                    "याद रखें कि हमारा चरित्र उस भव्य इमारत की भांति होता है, जिसे बनाने में तो कभी-कभी बरसों लग जाते हैं, लेकिन गिराने में केवल कुछ पल की ही देरी लगती है। ठीक उसी प्रकार चरित्र निर्माण हिमालय पर चढ़ने के समान दुर्गम है, परंतु गिरने के लिए केवल हमारा एक गलत कदम ही पर्याप्त है !"
                    "प्रकृति का यह नियम है कि संसार में जो कुछ भी हल्का है, वही ऊपर उठता है। इसलिए अपने उत्थान के लिए अपने अंदर के अहंकार को निकाल कर अपने आपको हल्का करें !" 
                     "वैसे तो कुछ भी बोलकर अपने शब्द वापस लेना दोगले नेताओं का ही चलन है, फिर भी आप अपने लफ़्ज़ों को तोलकर बोलिए ! ताकि कभी वापस भी लेने पढ़ें तो वजन न लगे !"
                     "इस देश में पैदा होने, यहाँ की आबो-हवा में खेल-कूद कर पले बढे होने के कारण इस देश के प्रति हमारे कुछ फ़र्ज़ व् क़र्ज़ होते हैं। यदि आप के मन में अपने इस देश के प्रति प्रेम और आदर की भावना न हो, यदि यहाँ का नागरिक होने के बावजूद आप अपने उन कर्तव्यों का पालन ठीक से नहीं करते, अपने माता-पिता, बुजुर्गों एवं गुरुजनों को यथोचित सम्मान नहीं देते व् केवल दूसरों में मीन-मेख निकालकर ही आप अपना जीवन व्यतीत करते हैं, तो निश्चय ही आप इस देश की धरती पर बोझ और इंसानियत के नाम पर कलंक हैं !"  

मित्रों एवं बच्चों ! 
                     भोले बाबा का ये अति पवित्र श्रावण-मास आप सभी के लिए  शुभ फलदायक हो एवं त्रिलोकीनाथ सर्वेश्वर भगवान शिव आपकी सभी उचित इच्छाओं की पूर्ति करें !
                     मित्रों ! हम सभी ने अक्सर ही साधु-महात्माओं और धर्माचार्यों के मुँह से यही सुना है कि मनुष्य योनि हमें चौरासी (84) लाख प्रकार के जीव-जंतुओं की योनियों में सभी प्रकार के कष्ट को भोगने के बाद ही प्राप्त होती है। फिर भी अधिकतर सभी मनुष्य मूर्खता में अपने बड़े-बुजुर्गों और धर्मशास्त्रों के बताये सरल और उत्तम मार्ग को छोड़ कर प्रभु की इच्छा के विपरीत फिर से उन्हीं चौरासी लाख योनियों में भटकने के लिए नाना प्रकार के पाप-कर्मों में लिप्त रहते हैं।  
                     परमात्मा अपनी किसी भी संतान अर्थात मनुष्य से भेद-भाव नहीं करते, बल्कि वो तो अपनी सबसे उत्तम रचना मानव से बेहद प्यार करते हैं और चाहते हैं कि उनकी ये रचना अपनी अच्छाईयों और ईश्वर भक्ति द्वारा देवतुल्य हो अर्थात देवत्व को प्राप्त करे, तभी तो उसने हम सभी मनुष्यों को अच्छे बुरे कर्म को समझने की तीव्र शक्ति बुद्धि प्रचुर मात्रा में दी है।
                      हमारे धर्मशास्त्र इस बात के गवाह हैं कि हमारे पूर्वजों में से कितने ही लोगों ने अपनी भक्ति और पुण्य-कार्यों से किस प्रकार स्वयं देवेन्द्र अर्थात देवताओं के राजा देवराज इंद्र के पद को भी प्राप्त कर स्वर्ग-सुख भोगा। लेकिन अफ़सोस तो इस बात का है कि केवल थोड़ा सा धन और शक्ति प्राप्त होते ही अधिकांश मनुष्यों के मन में सबसे पहले अहंकार घर करता है।
                      यदि समय रहते इस अहंकार की जड़ें न काटी जाएँ तो इसे एक विशाल वृक्ष का रूप लेने में अधिक समय नहीं लगता, जिसके दुष्परिणाम से मनुष्य में असुरी प्रवृति पनपने लगती हैं और वो बजाए पुण्य-कर्मों के पाप-कर्म की तरफ आकृष्ट होकर संसार में नाना प्रकार के कष्टों को सहते हुए नरकगामी बनता है और हमारा इतिहास इस बात का भी साक्षी रहा है कि बड़े से बड़ी आसुरी शक्तियां मिलकर भी कभी सत्य और देवत्व का मुकाबला अधिक समय तक नहीं कर पायी और अंततः काल के गाल में ही समा गई।  
                      अक्सर ही हम सभी लोग अपने जीवन या किसी अपने के जीवन में अचानक आए  किसी भी प्रकार के दुःख या कष्ट के लिए हम उस परमपिता परमात्मा को ही दोषी ठहरा देते हैं, जिसे किसी भी दृष्टि से उचित नहीं ठहराया जा सकता। जबकि इस जीवन में हमें जो भी सुख-दुःख प्राप्त होते हैं, वो सभी केवल हमारे पिछले जन्म के पुण्य या पाप-कर्मों के प्रतिफल के रूप में ही हमें प्राप्त होते हैं।
                      यहाँ तक कि हम किस प्रकार के कुल, गरीब अथवा अमीर घर-परिवार में जन्म लेंगे, हमारा भाग्य सौभाग्य अथवा दुर्भाग्य कैसा होगा या हम किस प्रकार के शारीरिक अथवा मानसिक कष्ट या सुख-दुःख को भोगते हुए अपना जीवन व्यतीत करेंगे, ये सब भी केवल हमारे पूर्व-जन्मों के कर्म ही निर्धारित करते हैं।                               परमात्मा तो केवल  हमारे प्रत्येक कार्य को पाप-पुण्य के तराजू में तौलकर उसके लिए सजा या ईनाम का निर्धारण ठीक उसी प्रकार से करते हैं, जैसे न्यायालय अथवा अदालत में बैठा कोई न्यायाधीश तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर अपना फैसला सुनाता है।
                      इंसानी अदालतों में वकीलों द्वारा तथ्यों और साक्ष्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किये जाने से भले ही न्याय में कुछ त्रुटि रह जाती होंगी, लेकिन उस परमपिता परमात्मा के न्याय में किंचित मात्र भी भेद-भाव या अन्याय नहीं होता। क्यूँकि वहाँ उसकी अदालत में थोड़े से पैसे के लिए अपने ज़मीर को बेचकर तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने वाले  वकीलों के लिए कोई स्थान नहीं होता। उसकी अदालत में तो सदा दूध का दूध और पानी का पानी ही किया जाता है।
                     कभी कभी आपने ये भी देखा होगा कि कोई मनुष्य इस जीवन में सभी प्रकार के सत्कर्म करते हुए अपना जीवन व्यतीत कर रहा होता है, लेकिन फिर भी उसके साथ कुछ ऐसा घटित हो जाता है कि हम सभी के मुंह से अक्सर यही निकलता है कि परमात्मा ने उसके साथ बहुत अन्याय किया। जबकि यही तो हमारी इस अवधारणा को और भी मज़बूती देता है कि किसी भी मनुष्य के पिछले जन्मों के पाप कर्म भी कभी उसका पीछा नहीं छोड़ते और उनके कारण हमें इस जीवन में कभी कोई भी कष्ट उठाना पड़ सकता है, तो हम क्यों इस जीवन में भी बुरे कर्मों के द्वारा अपने आने वाले जन्मों को भी जान-बूझ कर कष्टमय बनायें?       
                     हम किसी भी प्रकार से अपने पिछले जन्मों में किये गए दुष्कृत्यों अर्थात पापों के दुष्परिणामों से बच तो नहीं सकते, लेकिन अपनी बुद्धि को उचित प्रयोग करके परमात्मा और बड़े-बुजर्गों के बताये हुए सही मार्ग को अपना कर इस जीवन में सत्कर्म करते हुए कम से कम अपने आने वाले जन्मों को अवश्य ही सुधार सकते हैं या फिर अपने सत्कर्मों और प्रभु-भक्ति के मिश्रण से परमात्मा को प्रसन्न करके जीवन-मरण के इस चक्र से सदा के लिए छुटकारा पाते हुए परमात्मा में विलीन हो सकते हैं अर्थं मोक्ष को प्राप्त कर सकते हैं।
                     मनुष्य के द्वारा किये गए किसी भी पाप के दुष्परिणामों अर्थात सजा से बचने का केवल एक ही मार्ग है कि उसके लिए सच्चे मन से प्रायश्चित किया जाए और सच्ची भावना से प्रभु भक्ति द्वारा परमात्मा से अपनी उस दुष्कृत्य के लिए क्षमा प्रार्थना की जाए। केवल तभी ईश्वर हमें उस दुष्कृत्य के लिए क्षमादान देते हैं या फिर वो हमारे कष्टों को कुछ कम कर देते हैं, क्यूँकि ईश्वर का मकसद हमें बेफिजूल कष्ट देना नहीं, वरन हमारे मन में आए हुए सभी प्रकार के विकारों को दूर करके हमारी आत्मा को शुद्ध एवं पवित्र रखना ही है।
                     इसलिए हम सभी को किसी भी परिस्थिति या परिवेश में सभी प्रकार के पाप-कर्मों से बचते हुए, प्राणी-मात्र पर दया-भाव रखते हुए और एक-दूजे के दुःख दुःख में सहयोग करते हुए ही अपना जीवन व्यतीत करना चाहिए, जिससे न सिर्फ हमारा अपना ही भला होगा, बल्कि समस्त प्राणियों के उद्धार के साथ साथ स्वयं ये धरती माँ भी वास्तव में ही स्वर्ग से भी सुन्दर प्रतीत होगी। परमात्मा आप सभी को अच्छे-बुरे में अंतर करने की सद्बुद्धि दें !
             जय श्री कृष्णा  
                   " बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय !     
                     जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय !!"  
                      "बोया पेड़ बबूल का, तो आम कहाँ से खाय"
                                      -  Uma Shankar Parashar.
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