Post has attachment

Post has attachment
Photo

Post has attachment
लूट की सरकार , अखिलेश को ज़बरदस्ती विकास करने वाला नेता बताया जा रहा है जबकि पूरे 5 साल उसने ऐश करी और आखिरी के 6 महीने में चोर मिडिया की मदद से लोगों का चूतिया बना रहा है ।
ईमानदार अफसर का तबादला , यादव सिंह का 10000 करोड़ का भ्रष्टाचार और 2012 के दंगे कुछ भी नहीं भूले हैं हम ।

Post has shared content
ममता ,बरकती और सिग्नोरा का खुराफाती ,बीजेपी को यूपी में तीन चौथाई बहुमत दिलाएंगे.
Photo

Post has shared content
स्वामी श्रद्धानंद की हत्या सेक्युलर थी और गांधी की हत्या सांप्रदायिक ?

23 दिसंबर, 1926 को अब्दुल रशीद नामक एक उन्मादी युवक ने धोखे से गोली चलाकर स्वामी श्रद्धानंद जी की हत्या कर दी। यह युवक स्वामी जी से मिलकर इस्लाम पर चर्चा करने के लिए एक आगंतुक के रूप में नया बाज़ार, दिल्ली स्थित उनके निवास स्थान गया था। वह स्वामी जी के शुद्धि कार्यक्रम से पागलपन के स्तर तक रुष्ट था।
इस घटना से सभी दुखी थे क्योंकि स्वामी दयानन्द सरस्वती के दिखाये मार्ग पर चलने वाले इस आर्य सन्यासी ने देश एवं समाज को उसकी मूल की ओर मोड़ने का प्रयास किया था। गांधी जी, जिन्हे स्वामी श्रद्धानंद ने ‘महात्मा’ जैसे आदरयुक्त शब्द से संबोधित किया, और जो उनके नाम के साथ नियमित रूप से जुड़ गया, ने उनकी हत्या के दो दिन बाद अर्थात 25 दिसम्बर, 1926 को गोहाटी में आयोजित कांग्रेस के अधिवेशन में जारी शोक प्रस्ताव में जो कुछ कहा वह स्तब्ध करने वाला था। महात्मा गांधी के शोक प्रस्ताव के उद्बोधन का एक उद्धरण इस प्रकार है “मैंने अब्दुल रशीद को भाई कहा और मैं इसे दोहराता हूँ। मैं यहाँ तक कि उसे स्वामी जी की हत्या का दोषी भी नहीं मानता हूँ। वास्तव में दोषी वे लोग हैं जिन्होंने एक दूसरे के विरुद्ध घृणा की भावना पैदा की ।
इसलिए यह अवसर दुख प्रकट करने या आँसू बहाने का नहीं है।“ यहाँ यह बताना आवश्यक है कि स्वामी श्रद्धानन्द ने स्वेच्छा एवं सहमति के पश्चात पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मलखान राजपूतों को शुद्धि कार्यक्रम के माध्यम से हिन्दू धर्म में वापसी कराई। शासन की तरफ से कोई रोक नहीं लगाई गई थी जबकि वो ब्रिटिश काल था।
यहाँ यह विचारणीय है कि महात्मा गांधी ने एक हत्या को सही ठहराया जबकि दूसरी ओर वो अहिंसा का पाठ पढ़ाते रहे। हत्या का कारण कुछ भी हो, हत्या हत्या होती है, अच्छी या बुरी नहीं। अब्दुल रशीद को भाई मानते हुए उसे निर्दोष कहा। इतना ही नहीं गांधी ने अपने भाषण में कहा,”… मैं इसलिए स्वामी जी की मृत्यु पर शोक नहीं मना सकता।…हमें एक आदमी के अपराध के कारण पूरे समुदाय को अपराधी नहीं मानना चाहिए। मैं अब्दुल रशीद की ओर से वकालत करने की इच्छा रखता हूँ।“ उन्होने आगे कहा कि “समाज सुधारक को तो ऐसी कीमत चुकानी ही पड़ती है। स्वामी श्रद्धानन्द जी की हत्या में कुछ भी अनुपयुक्त नहीं है।“ अब्दुल रशीद के धार्मिक उन्माद को दोषी न मानते हुये गांधी ने कहा कि “…ये हम पढे, अध-पढे लोग हैं जिन्होने अब्दुल रशीद को उन्मादी बनाया।…स्वामी जी की हत्या के पश्चात हमे आशा है कि उनका खून हमारे दोष को धो सकेगा, हृदय को निर्मल करेगा और मानव परिवार के इन दो शक्तिशाली विभाजन को मजबूत कर सकेगा।“(यंग इण्डिया, दिसम्बर 30, 1926)। संभवतः इन्हीं दो परिवारों (हिन्दू एवं मुस्लिम) को मजबूत करने के लिए गांधी जी के आदर्श विचार को मानते हुए उनके पुत्र हरीलाल और पोते कांति ने हिन्दू धर्म को त्याग कर इस्लाम स्वीकार कर लिया। महात्मा जी का कोई प्रवचन इन दोनों को धर्मपरिवर्तन करने से रोकने में सफल नहीं हो पाया। सर्वप्रथम महर्षि दयानन्द सरस्वती ने ही शुद्धि कार्यक्रम आयोजित कर देहरादून के एक युवक को वैदिक धर्म में प्रवेश कराया। बाद में स्वामी श्रद्धानन्द ने इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाया। गांधी के सेक्युलरिज़्म के हिसाब से यह कार्यक्रम मुस्लिम विरोधी था इसलिए वे स्वामी श्रद्धानन्द की हत्या को न्यायोचित ठहराने लगे। सत्य और न्याय दोनो शब्द पर्यायवाची हैं। जहां सत्य है, वहीं न्याय है और जहां न्याय है, वहीं सत्य है। फिर गांधी की हत्या को न्योचित ठहरना और हत्यारे को निर्दोष मानना उनके सत्य एवं न्याय के सिद्धान्त के दावे को खोखला साबित करता है। अहिंसा के पुजारी यदि सेक्युलरिज़्म के नाम पर हिंसा को न्यायोचित ठहराएँ तो उनके प्रवचन का क्या अर्थ। गांधी के लिए अपने विचार सही हो सकते हैं लेकिन यह जरूरी तो नहीं की सभी के लिए हों। नाथूराम के अपने विचार थे। देश का धर्म के आधार पर विभाजन की पीड़ा असहनीय थी। मुसलमानों के प्रति विशेष झुकाव के कारण हिन्दू समर्थक गोडसे की गांधी से मतभिन्नता थी। जिसके परिणामस्वरूप गांधी जी हत्या हुई। इस हत्या को भी किसी तरह से न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता, लेकिन यदि हम गांधी जी के चश्मे से देखे तो नाथूराम को भी दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अपने विचार से गोडसे ने भी हिन्दू समुदाय एवं राष्ट्रहित में यह कार्य किया था। उसके समर्थक मूर्ति स्थापित करना चाहते हैं तो क्या समस्या है। यदि स्वामी श्रद्धानन्द का हत्यारा निर्दोष है तो गांधी का हत्यारा भी निर्दोष है। यह तो नहीं हो सकता कि स्वामी जी की हत्या सेक्युलर थी और गांधी की हत्या साम्प्रदायिक?
Post via #WhatsApp
Photo Sabhar - Raman Bharti https://www.facebook.com/VishvaGuruMeraBharat/posts/951532184946196
Photo

Post has shared content
#bhojayjobhomiyo#bsr KUTCHH KESHRI
पीएम मोदी ने इस्लामिक बैंकिंग के लिए खोले दरवाजे
सऊदी_अरब के जेद्दाह का इस्लामिक_डेवलपमेंट_बैंक (#आईडीबी) भारत के गुजरात से अपनी पहली भारतीय ब्रांच खोलने की तैयारी कर चुका है। गौरतलब है कि मुस्लिम समुदाय के उत्थान के लिए काम करने वाला आईडीबी बैंक इस्लामिक शरिया कानून के अनुसार काम करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अप्रैल में यूएई दौरे के दौरान भारत के एक्सिम बैंक ने आईडीबीके साथ एमओयू साइन किया था। आईडीबी ने ग्रामीण भारत में मेडिकल केयर के लिए राष्ट्रीय इंस्टीट्यूट ऑफ स्किल एंड एजुकेशन (राइज) के साथ 55 मिलियन डॉलर पैक्ट भी साइन किया था। आईडीबी के अलावा सऊदी अरब की सरकार भारत कीमदद से सऊदी की महिलाओं के लिए बीपीओ खोलने की कोशिश भी कर रही है। 1969 में रबात में हुए #इस्लामिक देशों के प्रमुखों के सम्मेलन में यह निर्णय किया गया थाकि विश्व में इस्लाम के प्रचार प्रसार के लिए बैंकिंग व्यवस्था का भी इस्तेमाल किया जाए। इस फैसले के बाद जेद्दाह (सउदी_अरब) में पहला इस्लामिक विकास बैंक स्थापित किया गया। इस्लामिक बैंकों की गतिविधियों की निगरानी करने के लिए एक मुस्लिम धार्मिक विद्वानों का शरई बोर्ड है जो इस बात का फैसला करता है कि इस्लाम के प्रचार-प्रसार के लिए इन बैंकों द्वारा कौन से तरीके अपनाए जायें। इस्लामिक विकास बैंक सउदी अरब का सरकारी बैंक है। इससे जो लाभ प्राप्त होता है उसका इस्तेमाल इस्लाम के प्रचार प्रसार और धर्मांतरण के लिए किया जाता है। दस वर्ष पूर्व इस्लामिक विकास बैंक के निर्देशक मंडल की एक बैठक दुबई में हुई थी जिसमें यह मत व्यक्त किया गया था कि विश्व में भारत ऐसा देश है जिसमें गैर-मुसलमानों की संख्या सबसे अधिक है। इसलिए भारत में इस्लाम के प्रचार-प्रसार और धर्मांतरण की सबसे ज्यादा संभावनाएं हैं। इस बैंक ने देश में इस्लाम के प्रचार के लिए एक कार्यक्रम भी बनाया था।
अर्थथास्त्रियों के अनुमानों को सही माना जाए तो अगले पांच बरसों में दुनिया का इकॉनमिक सिस्टम इस्लामी और गैर इस्लामी में पूरी तरह बंट जाएगा। आज जब इस्लामी कट्टरता ने बहुत से लोगों की नींद उड़ा रखी है तो यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या इस्लामी बैंकिंग किसी खतरे को जन्म देगी? इस्लामिक बैंक का ज्यादातर कारोबार अचल सम्पत्ति पर ही निर्भर है। यदि भारत में सभी जगहोंपर इस्लामिक बैंक शुरू होते हैं तो यहां भी वे दुकान, मकान और अन्य भूखंडों को खरीदकर अपने पास रखेंगे। क्या इससे देश की एकता के लिए खतरा माना नहीं जाना चाहिए? इस्लामिक डिवेलपमेंट बैंक मुस्लिम समुदाय की विकास के लिए काम करता है। तो क्या ऋण का इस्तेमाल गैर-मुलसमानों के इस्लाम कबूल करने के लिए प्रलोभन के रुप में नहीं किया जाएगा? क्या इससे देश में धर्मांतान्तरण को बढ़ावा नहीं मिलेगा? क्या प्रलोभन द्वारा धर्मांतान्तरण करना देश की एकता के लिए खतरनाक नहीं होगा? क्या इस्लामी बैंकों की शाखाओं का इस्तेमाल आतंकवादियों को फंड उपलब्ध कराने के लिएतो नहीं होगा?तो ऐसे में सवाल खड़ा होता है की भारत में इस्लामिक बैंक कितना सही ? जेद्दा (सउदी अरब) के इस्लामिक डेवेलपमेंट बैंक (आईडीबी) की शाखा प्रधानमंत्री के गृह राज्य गुजरात में खुलेगी| इस बैंक के 56 इस्लामिक देश सदस्य हैं। भारत एक मात्र गैर- मुस्लिम देश होगा जिसमें इस्लामिक बैंकिग व्यवस्था शुरु की जा रही है। इस्लामिक बैंक शून्य ब्याज दर पर लोन देता है और बचत राशि परभी कोई ब्याज नहीं देता, इस्लामिक बैंक पिछले दरवाजे से सूद लेते हैं। इस्लामिक बैंक अपने यहां जमा धन से अचल सम्पत्ति खरीदते हैं। मकान, दुकान, घर बनाने वाले भूखंडों आदि पर निवेश करते हैं। इससे जो फायदा होता है उसमें वह बराबर का हिस्सेदार होता है ।भारत में इस्लामिक बैंक की रघुराम_राजन समिति की एक सिफारिश से हुई थी । २०१२ में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक_आयोग के तत्कालीन चेयरमैन वजाहत हबीबुल्लाह ने वित्त मंत्रालय के समक्ष इस्लामिक बैंकिंग की पैरवी की थी । कट्टरवादी मुसलमान इस्लामिक बैंकिंग व्यवस्था को देश में लागू करने की पैरवी करने लगे । संसद में मनमोहन सिंह सरकार के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री ए रहमान खान ने इस्लामी बैंकिंग को देश में लागू करने वकालत की तो उनका साथ सभी मुस्लिम सांसदों ने दिया।हाल ही में केरल हाईकोर्ट ने राज्य में पहला इस्लामी बैंक खोले जाने की अनुमति दी है। केरल में इस्लामीकरण की आँधी तेजी से बढ़ रही है। इस इस्लामीकरण की आंधी में वामपंथी औरकांग्रेस दोनों दल अल्पसंख्यक वोट के लिये कुछ भीकरने को तैयार हैं। जब केरल की कांग्रेस सरकार नेकेरल में इस्लामी बैंक की स्थापना के लिए एक त्रिपक्षीय निगम गठित करने का प्रयास शुरु किया तो सुब्रह्मण्यम स्वामी ने इसका डटकर विरोध किया था। डॉ स्वामी का तर्क था कि इस्लामिक फाइनैंस की अनुमति देना राजनीतिक और आर्थिक दोनों रूप से भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए खतरनाक होगा। इन बैंकों द्वारा इस्लामी उग्रवाद की ज्वाला को भड़काने के लिए विदेशों से भारी मात्रा में आर्थिक सहायता प्राप्त हो सकती है। जानकारों का मानना है कि इससे आतंकवादियों को “वैध” तरीके से फण्डिंग उपलब्ध करवाने में आसानी होगी। साथ ही दुबई के हवालाऑपरेटरों को इससे बढ़ावा मिलेगा। तो सवाल उठता हैकि भारत जैसे धर्म निरपेक्ष देश में इस्लामीक बैंक को लागू करना किसी साजिश का हिस्सा है या फिर वोट बैंक की राजनीति? भारत में खोली जाने वाली इस्लामिक बैंक कई प्रकार की कानूनों और संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन करती है। फिर भी इसे खोलने के लिए सरकार जी जान से लगी हुई है। पार्टनरशिप एक्ट 1932 का उल्लंघन। भारतीय संविदा कानून 1872 की धारा 30 का उल्लंघन। बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 के सेक्शन 5 (इ), (ब), 9 और 21 का उल्लंघन। आरबीआई कानून 1934 का उल्लंघन। नेगोशियेबल इंस्ट्रूमेण्ट एक्ट 1881 का उल्लंघन। को-ऑपरेटिव सोसायटी एक्ट 1961 का उल्लंघन। संविधान की धारा 14 का उल्लंघन।२००७ में भी आरबीआई ने तत्कालीन ऐग्जिक्युटिव_डायरेक्टर आनंद सिन्हा के नेतृत्वमें एक वर्किंग ग्रुप ने देश में इस्लामिक बैंक कोखोलने के प्रस्ताव को खारिज किया था । रिजर्व_बैंक के पूर्व गवर्नर डी. सुब्बाराव पहले ही कह चुके है कि इस्लामिक बैंक भारत जैसे धर्म निरपेक्ष देश में लागू करना संभव नहीं है। राजीव_गांधी सरकार ने अल्पसंख्यकों के आर्थिक उत्थान के लिए राष्ट्रीयकृत बैंकों के निर्देशक मंडलों को यह निर्देश दिया गया था कि वह ऋण देते समय अल्पसंख्यक समुदाय का विशेष ध्यान रखें। इसी नीति पर मोदी सरकार भी चल रही है। अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री डा. नजमा हेपतुल्ला ने राष्ट्रीयकृत बैंकों को यह निर्देश दिया है कि मुसलमानों को स्वरोजगार शुरु करने के लिए ज्यादासे ज्यादा कर्ज दिया जाए वह भी बहुत कम ब्याज पर।साफ है कि सभी पार्टियाँ मुस्लिम वोट प्राप्त करने के लिए जानबूझकर सभी कायदे-कानूनों और नियमों को ताक पर रखने पर तुली हुई है। मुस्लिम वोट बटोरने के मोह में वह भारतीय समाज को सांप्रदायिक आधार पर विभाजित करने का प्रयास कर रही है, जो कि देश के लिए बेहद खतरनाक है।जिन नरेद्र_मोदी ने मुख्यमंत्री रहते हुए मुसलमानों द्वारा अपना सम्मान करते समय उनकी टोपी पहनने से मना कर दिया था आज उसी गुजरात के अहमदाबाद में इस्लामिक विकास बैंक की पहली शाखा खोली जा रही है। इस्लामी देश भारत की अर्थव्यवस्था में घुसपैठक करने के लिए गत दो दशकों से इसका प्रयास कर रहे थे। खास बात यह है कि कांग्रेस की मनमोहन_सिंह सरकार देश में जिस बैंकिग व्यवस्था को लागू करने के लिए तैयार नहीं हुई थी उसे मोदी सरकार ने हरी झंडी दे दी।आल_इंडिया_मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड तथा मुस्लिम हितों के लिए सक्रिय संगठनों, नेताओं ने इस्लामी बैंक खोलने का स्वागत किया है। संघ परिवार देश में इस्लामी बैंकिग व्यवस्था को शुरु करने का जबर्दस्त विरोध कर रहा था अब उसने देश में इस्लामी बैंक की शाखाएं खोलने के बारे में अपनी जुबान क्यों बंद कर रखी है? क्या अब संघ परिवार के लिए राष्ट्रहितों की बजाय राजनीतिक हित सर्वोपरि हो गए हैं? चुनावों में अल्पसंख्यकों के मत बटोरने केउद्देश्य से सभी पार्टियों ने जिस तरह से खुलेआम मुस्लिम तुष्टीकरण का अभियान शुरू किया है उसके कारण देश और समाज के टुकड़े-टुकड़े होने का खतरा पैदा हो गया है। ऐसा प्रतीत होता है कि सभी पार्टियों व स्वार्थी संगठनों को देश की एकता और सांप्रदायिक सद्भाव से कोई सरोकार नहीं है। भारत को विभाजित करने की जो नींव रखी जा रही है वह बेहद खतरनाक है। अगर देश नहीं चेता तो भविष्य में इसके खतरनाक परिणाम होंगे।बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने रिज़र्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन पर जो आरोप लगाए थे उनमें से एक आरोप ये भी था कि वो भारत में इस्लामी बैंकिंग लाना चाहते हैं।
जागो हिन्दुस्तानी
Photo

Post has shared content
#bhojayjobhomiyo#bsr KUTCHH KESHRI
यह कोई भी मीडिया नहीं दिखाएगी, यह है असली हालात कश्मीर के. इसे इतना शेयर करो के मीडिया मजबूर हो जाये और इसी लाइव टीवी पर दिखाए.
PhotoPhotoPhotoPhoto
15/09/2016
4 Photos - View album

Post has shared content
#bhojayjobhomiyo#bsr KUTCHH KESHRI
सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार और चुनाव आयोग से राय मांगी है कि क्‍या दोषी नेताओं पर लाइफ टाइम बैन लगा दिया जाए? पढ़ें पूरी खबर और आप भी दें अपनी राय.

Post has shared content
#bhojayjobhomiyo#bsr KUTCHH KESHRI
First stamp after Independence
India has a long and varied postal history and has produced a large number of postage stamps.India's independence saw the postal department issue its first stamp on 21 Nov 1947 depicting the Indian flag, Lion Capital of Ashoka and Aircraft.
The stamp issues continued to be in Annas till 1957, when the Indian rupee was decimalized.

#interestingfacts   #vintageindia   #india  
Photo

Post has shared content
#bhojayjobhomiyo#bsr KUTCHH KESHRI
Hyderabad, capital of Telangana - was historically known as a pearl and diamond trading centre, and it continues to be known as the City of Pearls.
Archaeologists excavating near the city have unearthed Iron Age sites that may date from 500 BCE and the region comprising modern Hyderabad and its surroundings was known as Golkonda.

Image below: Main street in Hyderabad, looking towards the Charminar, in the 1880s.


image credit https://en.wikipedia.org/wiki/Lala_Deen_Dayal
#hyderabad   #india   #vintageindia  
Photo
Wait while more posts are being loaded