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आप सभी को माता जी के नवरात्रों की हार्दिक शुभ कामनाएँ ।
अष्टभुजी माता जी का तृतीय रूप माँ 'चंद्रघंटा' के नाम से जाना जाता है ।
माँ 'चंद्रघंटा' जी के बारे में जान ने के लिये नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें ...
http://worldofsaigroup.blogspot.in/2012/03/blog-post_25.html
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आप सभी को माता जी के नवरात्रों की हार्दिक शुभ कामनाएँ ।
अष्टभुजी माता जी का प्रथम रूप माँ शैलपुत्री के नाम से जाना जाता है ।
माँ शैलपुत्री जी के बारे में जानने के लिये नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें ...
http://worldofsaigroup.blogspot.in/2012/10/blog-post_1784.html
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ॐ श्री साईं राम जी
भक्त हरिभाऊ कर्णिक से सन्त नरसिंह के रूप में दक्षिणा लेना   
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उन्नीस सौ सतरह रहे गुरु पूर्णिमा होय
थे इक हरि भक्त डहाणु के भगत कहाते होय
पावन शिरडी आय के पूजन रहे कराय
दान दक्षिणा भेंटकर मस्जिद से लौटाय
साईं से आगया मिली वापस घर को जाय
शामा जी से बात सुन मन विचार आ जाय
रूपया इक अरु भेंट मैं बाबा को दे जाऊं
बिदा पाय फिर किस तरह वापस मस्जिद जाऊं
अब वह नाशिक आय के मन्दिर दर्शन जाय
मुख्य द्वार पर ही वहाँ नरसिंह सन्त लखाय
सभी भक्त को छोड़ के आय कर्णिक पास
एक रुपैया मोय दे जो है तेरे पास
कर्णिक रुपया देय के अचरज में पड़ जाय
शिरडी में जो न दिया साईं अस पा जाय
सन्तन सब ही एक हैं घटना यह बतलाय
कारज करते साथ में बाबा जी समझाय ।
॥ श्री सद्गुरु साईंनाथार्पणमस्तु । शुभं भवतु ॥
आप सभी को श्री साईं-वार की हार्दिक शुभ कामनाएं |
 
===ॐ साईं श्री साईं जय जय साईं ===
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ॐ श्री साईं राम जी
भक्त बाला बुवा सुतार - चार वर्ष पूर्व चित्र में दर्शन देना 
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सन्त एक बाला बुवा तुकाराम कहलाय
मुंबई में वासा करें भजन कीरतन गाय
सन उन्नीस सत्रह रहे वे शिरडी में आय
साईं के दर्शन करे मन में ख़ुशी समाय
बालाजी को देख के बाबा जी बतलाय
चार बरस के पूर्व ही यह मुझसे मिल जाय
बात सुने बाला बुवा अचरज में पड़ जाय
चिंतन मनवा में करें बात समझ में आय
चार बरस के पूर्व की घटना याद कराय
साईं बाबा चित्र को बाला शीश झुकाय
घटना की अब याद हो सन्त सर्वज्ञी पाय
नमस्कार कर चित्र को साईं दर्शन पाय ।         

===ॐ साईं श्री साईं जय जय साईं ===
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ॐ श्री साईं राम जी
अप्पा साहेब कुलकर्णी के घर जाकर नवधा भक्ति का ज्ञान कराना  
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उन्नीस सतरा साल में अप्पा शुभ दिन पाय
ठाणे में बदली हुई बाबा चित्र लगाय
साईं बाबा चित्र की पूजा नित्य कराय
श्रद्धा से पूजन करें आरत,भोग लगाय
हरि दर्शन की प्रार्थना मन में करता जाय
उत्सुकता से चित्र में ईश्वर दर्शन पाय
जब वे ठाणे में रहे भ्रमण भिवन्डी होय
हफ्ते भर के वास्ते शासन कारज होय
उनके घर तीजे दिवस एक फकीरा आय
साईं बाबा होय जस ऐसे रहें लखाय
पत्नी और बच्चे सभी बात करें अस कोय
शिरडी के साईं दिखे आप कहीं ना होय
सेवक हूँ मैं साईं का आज्ञा उनकी पाय
उनकी आज्ञा मान कर कुशल क्षेम पुछवाय
बाबा चाहे दक्षिणा रुपिया एक रखाय
ऊदी पुड़िया देय कर लौट फकीरा जाय
वापस अप्पा शाम को अपने घर आ जाय 
घोड़ा पड़े बीमार तो आगे को ना जाय
पत्नी के मुह बात सुन समाचार सब पाय
आय साईं द्वार पर दर्शन न कर पाय
एक रुपैया दान दे मन को नहीं सुहाय
देंऊँ दस तो कमसकम फकीरा खोजूं जाय
भूखे ढूँढन चल दिये मिल ना सके फकीर
भूखे पेट ना भक्ति हो कहते साईं पीर
इसीलिये वे ना मिले अप्पा घर आ जाय
अब वे भोजन पाय कर मित्रं संगे जाय
वहीं पास जाते हुए वे फकीर मिल जाय
शिरडी साईं चित्र सी सूरत नहीं दिखाय
फकीरा मांगे दक्षिणा अपना हाथ बढ़ाय
अप्पा जी आगे बढ़े इक रुपिया दे जाय
वह फकीर बहुतइ हठी और माँगते जाय
अप्पा उसी फ़कीर को नौ रुपये दे जाय
फिर भी वे सन्तुष्ट ना और माँगते जाय
अब अप्पा कहने लगे पूरे दस ले जाय
दस रुपये का नोट था वह फकीर पा जाय
नौ रुपये लौटाय कर साईं राह दिखाय
हाथ छुवाय नौ रुपये बाबा जी दे जाय
यह जो नौ का आंकड़ा नवधा भक्ति कहाय
साईं के अन्तिम समय लक्ष्मी भी नौ पाय
अपने प्यारे भक्त को नवधा भक्ति सिखाय
ऊदी पुड़िया खोल के अप्पा मन हर्षाय
फूल सहित चावल मिले साईं कृपा कराय
जब वे शिरडी में गये बाबा केसन पाय
'ऊदी-केस' ताबीज रख अपने साथ रखाय
वेतन जो चालीस था कई गुणा हो जाय
ऊदी की महिमा बड़ी सब सम्मान दिलाय
लाभ मिले आध्यात्म का भौतिक सुख पा जाय
शिरडी साईं भक्ति से भक्त अमर हो जाय
प्रातः उठ अस्नान कर मस्तक ऊदी लगाय
जल में ऊदी घोल कर चरणामृत पी जाय
कारज तेरे सब सधें सभी रोग मिट जाय
श्रद्धा और सबुरी से भवसागर तर जाय । 

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ॐ श्री साईं राम जी
भक्त नारायणराव  
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श्री नारायणराव को दर्शन तीन कराय
महा समाधी बाद भी दर्शन करने जाय
दर्शन का तो मन बना तन स्वस्थ नहीं होय
इसीलिए घर में रहें लाभ न कोई होय
एक रात को स्वप्न में साईं नाथ दिखाय
बोले कल आराम हो चलने भी लग जाय
जैसा साईं ने कहा वैसा ही वह पाय
सात दिवस के बीतते पूर्ण स्वस्थ हो जाय
अब विचार मन में उठे बाबा शिरडी साय
देह रूप जीवित रहे देह त्याग मर जाय
न ऐसा न हो सके साईं अमर स्वरूप
जीवन मृत्यु से परे वे ईश्वर के रूप
भक्तन भक्ति भाव से बाबा शरणन जाय
साईं चाहे हो कहीं उनकी मिले सहाय
सदा रहें वे साथ में कई रूप में आय
प्रगट होय साईं प्रभो इच्छा पूरण कराय ।     

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