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अखंड भारत दिवस (14 अगस्त) विशेष
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अखण्ड भारत महज सपना नहीं, श्रद्धा है, निष्ठा है। जिन आंखों ने भारत को भूमि से अधिक माता के रूप में देखा हो, जो स्वयं को इसका पुत्र कहकर उसकी रज को माथे से लगाता हो, वन्देमातरम् जिनका राष्ट्रघोष और राष्ट्रगान हो, ऐसे असंख्य अंत:करण मातृभूमि के विभाजन की वेदना को नहीं भूल सकते हैं, अखण्ड भारत के संकल्प को नहीं त्याग सकते हैं।

अखण्ड भारत भारत के प्राचीन समय के अविभाजित स्वरूप को कहा जाता है। प्राचीन काल में भारत बहुत विस्तृत था जिसमें अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, बर्मा, थाइलैंड आदि शामिल थे। कुछ देश जहाँ बहुत पहले के समय में अलग हो चुके थे वहीं पाकिस्तान, बांग्लादेश आदि अंग्रेजों से स्वतन्त्रता के काल में अलग हुये। 1947 में विशाल भारतवर्ष का पिछले दो हजार पांच सौ सालों में हुआ 24वां भौगोलिक और राजनीतिक विभाजन था। 1857 से 1947 के बीच अंग्रेजों ने तो भारत को सात बार ही तोड़ा।

पिछले दो सौ सालों में अपनी एक तिहाई जमीन खो चुके भारत देश को कुछ लोगों ने ईरान, वियतनाम, कंबोड़िया, मलेशिया, फिलीपींस, श्रीलंका, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, तिब्बत, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान और बर्मा से जोड़ा है। वहीं धार्मिक मिजाज के लोग अखंड भारत के तौर पर वाल्मिकी रामायण के 'नवद्वीप भारत' की कल्पना करते हैं।

विचारधारा और राजनीति का यह भावुक नहीं बल्कि भावनात्मक प्रश्न होते हुए भी यह विचार और प्रचार के लायक है। यह पूरी तरह व्यावहारिक और निश्चित साकार होने वाला सपना है। साल 1857 में भारत का क्षेत्रफल 83 लाख वर्ग कि.मी. था। वर्तमान भारत का क्षेत्रफल 33 लाख वर्ग कि.मी. है। नौ पड़ोसी देशों का क्षेत्रफल 50 लाख वर्ग कि.मी. बनता है।

सार्वकालिक और सर्वश्रेष्ठ आध्यात्मिक विभुतियों में से एक श्री अरविंद ने अपने जन्मदिन और भारत की आजादी के समय 15 अगस्त 1947 के शुरुआती लम्हों में ही रेडियो त्रिची से अपने संबोधन में विभाजन को कृत्रिम मानते हुए अगले 100 वर्ष में दोबारा एकीकरण को स्वाभाविक और अपरिहार्य होने की भविष्यवाणी की थी।



अमेरिका के किसी एयरपोर्ट पर कोई नँगा शख्स दिख जाए तो वो आजम खान या शाहरुख़ खान हो सकता है :-एफबीआई द्वारा जनहित में जारी

जब हम जम्मू-कश्मीर की बात करते हैं, हमें जम्मू-कश्मीर राज्य के 4 भागों की बात करनी चाहिए: जम्मू, कश्मीर-घाटी, लद्दाख और पाक-अधिकृत कश्मीर|


कटा इस कदर एक बेजुबान
ऑर खून सारा नाली में बह गया........
पत्थर दिल था कोई
जो बहते खून को देखकर भी
ईद मुबारक कह गया... 😟😞😔

बडा डर लगता है साहब
फेसबुक पर आयी हुई छाेटे बच्चों की रिक्वेस्ट से इधर एड किया ऊधर फाेटाे टेग कर देते हैं !

यहां कल से NSG का मौसम थम नही रहा है और उस पर भिन्न भिन्न सूचनाओ, आरोपो और लानातों का बाजार गर्म है। हालत यह है जिन्हें इस महीने से पहले ( कुछ को अभी तक) NSG का मतलब नही मालूम था वह लोग मोदी जी को भरपूर चुनिंदा शब्दों से नवाज़ रहे है। अब क्योंकि NSG की बन्द कमरे में चली गुफ्तगू की सारी जानकारी छन कर बाहर आगयी है, इसलिए ठंडे दिमाग से वह लोग इस पोस्ट को जरूर पढ़े जिनका मन अभी भी मोदी जी को गाली देने से भरा नही है और NSG के कारण जिनके घर ईद की सिवइयां बन रही है।

 

पहली बात तो यह समझ लीजिये की भारत का NSG का सदस्य बनाने का विरोध सिर्फ और सिर्फ एक राष्ट्र द्वारा किया गया था। जो कल से 4/5/6 देशो के विरोध की बात चल रही है, वह बकवास है। भारत का विरोध सिर्फ चीन ने किया था।


दूसरी बात यह की मीटिंग के शुरू में 5 राष्ट्रों, जिसमे अमेरिका, फ्रांस और रूस शामिल थे, ने नए सदस्य राष्ट्र की भर्ती के लिए प्रस्तावना बनाई थी जिसमे, भारत की अहर्ता को देखते हुए NPT पर हस्ताक्षर की मुख्य शर्त की जगह, NPT के प्रविधानो  के अनुरूप राष्ट्र को प्रस्तावित किया गया था। भारत 2008 में ही NPT के प्रविधानो को पूरा कर चुका है।


तीसरी बात यह की चीन ने मीटिंग में इस तरह के प्रस्ताव को रखने या उस पर बात करने को यह कह कर वीटो किया था की इस सम्बन्ध में बात तभी हो सकती है जब किसी राष्ट्र को NSG का सदस्य बनाये जाने की बात नही होगी। विमर्श हो सकता है लेकिन कोई नया सदस्य नही बनाया जायेगा।


चौथी बात यह की पाकिस्तान का किसी भी तरह का जिक्र मीटिंग में नही हुआ था और न ही उसके आवेदन पर शामिल किये जाने की प्रस्तावना ही बनी थी। यहां तक की चीन ने भी पाकिस्तान के आवेदन पर सदस्य राष्ट्रों से विचार करने की कोई बात की थी।


पांचवी महत्वपूर्ण बात यह की NSG और MTCR के सदस्य बनने की भारत की अहर्ता 2008 में ही पूरी हो गयी थी लेकिन मनमोहन सिंह/ सोनिया गांधी की यूपीए सरकार ने अपने कार्यकाल में, इनका सदस्य बनने के लिए कोई भी आवेदन नही दिया था। इसके विपरीत, मोदी जी की एनडीए की सरकार ने MTCR के लिए 2015 में आवेदन दिया था और NSG के लिए मई 2016 में दिया था।


अब जब पांचवी बात को पढ़ेंगे तो आप समझ जायेंगे की मोदी जी के नेतृत्व में जहाँ भारत सिर्फ एक साल के भीतर ही MTCR का सदस्य बन गया है वहीं 2 महीने की मेहनत में 48 राष्ट्रों के समूह में चीन को एक अपवाद बना दिया है। NSG में हुयी घटना ने अंतराष्ट्रीय जगत को चीन वर्सस भारत में बाट दिया है, जो एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। 


अब जिन लोगों को कांग्रेसी, आपिये, वामपंथियों और सेकुलरो की ईद खराब करनी हो वह ऊपर की पांचवी बात को उनके मुँह पर इत्मिनान से मार सकते है। यह भारत की धर्मनिरपेक्षिता और लोकतन्त्र की विडंबना है की जो लोग चीन के हाथो या तो बिके हुए थे या फिर डरे हुए थे, उनकी तो 2008 से लेकर 2014 तक MTCR और NSG के सपने देखने की भी हिम्मत नही थी लेकिन वही लोग आज मोदी जी की विदेश नीति और कुटनीति पर जुमले और तंज़ कस रहे है! भारत को मिली सफलता को असफलता बता रहे है! 

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वीर शिरोमणि हिन्दू हृदय सम्राट महाराणा प्रताप की जन्म जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं !

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आदरणीय प्रधानमंत्री Narendra Modi जी
आप पांच दिन में दक्षिण एशिया से लेकर खाड़ी देश फिर यूरोप की यात्रा करने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री होने जा रहे हैं...
आप पहले प्रधानमंत्री होंगे जो दो रात प्लेन में सोयेगा..ओह!
मुझे आज तक समझ में नहीं आया की इतना हाय!हाय! क्यों कर रहे आप...?
अपने किस माँ,बहन,भाई,बेटी,दामाद, के लिये ?
कभी-कभी तो मन में आता है कि पूछूँ क्या उखाड़ लेंगे आप...?
अरे आराम से नाना प्रकार के देशों में लंच,डिनर करते..दर्शनीय स्थल घूमते..फिलिम-सिलिम देखते..मजा-पानी करते।
क्या जरूरत है इ सब करने की।?
साला माथा खराब हो जाता है जब इस प्रकार की न्यूज सुनते हैं की..."भारत के इतिहास में अब तक के पहले पीएम होंगे जो.."
भक्क महराज..इतिहास की ऐसी की तैसी..
अरे आपको अरब का सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिले या अफगानिस्तान का..या कल आपको शांति का नोबेल ही मिल जाय..
आप दोहा में भारतीय मजदूरों के साथ मीटिंग करें या स्विटजरलैंड में भारतीय वैज्ञानिकों के कन्धे पर हाथ रख हाल-चाल पूछें.
अमेरिकन संसद का दिल जीत लें...या अमेरिका वाले मोदी जैसा प्रेसिडेंट की मांग करने लगें..
आप देश को एफडीआई में एक नम्बर बना दें या फिर जीडीपी 7.9 हो जाये...
यहां तो बस रात को एसी की कूलिंग बढ़ा के करवट बदलते हुये आपको फेसबुक से लेकर सेमिनारों और डिबेट में फेंकू,हत्यारा,कहने वाले तैयार बैठे हैं...
अरे आप इनकी सुनते क्यों नहीं.. ?ये बेचारे आज दस बारह साल से अनवरत बोल रहे हैं।
इनका ग्रोथ क्यों नही हो रहा ये मेरी समझ से बाहर है..लेकिन इनका कष्ट मुझसे नहीं देखा जा रहा...
आप इनके लिए भी कोई योजना जरूर लांच करें।
जैसे 'मोदी निंदक योजना' टाइप्स।
और हाँ...हम आपसे नाराज हैं...हमें आप जैसा पीएम बिलकुल नही चाहिये...हमें मनमोहन जैसा पीएम चाहिये..ताकि कब,कहाँ जाते हों, कब क्या बोलते हों. कभी कुछ समझ में न आये।
हमें आप जैसा समय बचाने वाला नहीं..हमें तो केजरीवाल जैसा पीएम चाहिए..जो तीन-तीन घण्टा फ़िल्म देखकर ट्वीट करे..wow...awesome movi..
हमें एक भी दिन अवकाश न लेने वाला पीएम नहीं, हमें तो राहुल गांधी जैसा पीएम चाहिए..जो संसद सत्र शुरू होने से पहले बिना बताये देश से गायब हो जाये..
बहुत दिक्कत हो रही आपके कारण।
इसलिए आदरणीय..आप तुरन्त इस्तीफा दें।
नही तो आकर दो चार ताबड़तोड़ घोटाला करें....अब बहुत हुआ..हत्यारा,फेंकू,15 लाख,असहिष्णुता, मन नही कर रहा ये सब सुनने का...
अरे 2G,जीजा जी,कॉमनवेल्थ,कोयला, जैसे शब्द सुनने को तो कान तरस गये हैं।
उम्मीद है आप मेरी बात सुनेंगे। और ये पढ़ने के बाद आराम से सो जाएंगे...देश साठ साल में नहीं बदला तो आप 2 साल में बदल देंगे...
काहें बेवकूफ बना रहे हैं। ?
कुछ लोगों को आपकी ईमानदारी रास नहीँ आ रही !

बीफ की खबर पर भारी
सन्नाटा है। सारे चैनल कन्नी काटकर निकल रहे
हैं। औपचारिकतावश कहीं-कहीं खबर
को 30 सेकण्ड से लेकर 1 मिनट में निपटाया जा रहा है। जिस
खबर को लेकर दिन-दिनभर स्पेशल एपिसोड चलाए गए, अब वो
खबर धोती से लंगोट में परिवर्तित हो
चुकी है। स्क्रीन काली
करने वाले खोजे नहीं मिल रहे। बीफ
पार्ट वन जबर्दस्त हिट थी लेकिन इसके
सीक्वल में भीड़ क्यों नहीं
जुट रही। इस मामले को लेकर कपड़े फाड़ देने वाले
सरदेसाई साहब कहाँ है। वो हत्या नहीं वध था

इसीलिए अख़लाक़ के सभी सदस्य केंद्र द्वारा दी जा रही CBI जाँच के लिए मना कर रहे थे, और मना ही क्यूँ बल्कि विरोध कर रहे थे।
और फिर इतनी खैरात कैसे मिलती, इन्हें तो पाप करने पर ही जन्नत मिल गयी।
मेरे ख्याल से यह इतिहास का पहला केस था, जिसमे पीड़ित को CBI पर नही लोकल पुलिस पर पूरा भरोसा था।

वाह !!!! मेरे देश की राजनीति निर्दोष जेल में हत्यारे मौज मे वो भी पूरी शान के साथ।
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