Post has attachment
Photo

Post has shared content
Originally shared by ****
बहुत कोशिशें की थीं उसने
खुद को बदलने की.....
मौका मिलने पर जो आज अपनी
औकात दिखा गया.....😥😥
Photo

भरोसा एक जानलेवा बिमारी है- जब भी कोई गंभीर समस्याओं या तनावपूर्ण परिस्थितियों का सामना करता है तो उसे प्रोत्साहित और आराम देने के लिए लोग कहते हैं।सब ठीक हो जाएगा विश्वास रखें.लेकिन विश्वास देखा नहीं जा सकता सिर्फ महसूस होता है. किसी ब्यक्ति या चीज मे विश्वास, दूसरे की क्षमता मे विश्वास ये सब विश्वास प्रमाण पर आधारित नहीं होते हैं बिना समझ के भरोसा हो ही नहीं सकता. आप भावुकता और बुध्दिमानी दोनों से विश्वास कर सकते हैं. विश्वास की प्रकृति मे अगर एक ब्यक्ति कोई चीज पर विश्वास करता है तो उसे प्रमाण देना होता है. विश्वास मे संदेह भी शामिल है. विश्वास को अंधा नहीं होना चाहिए. भरोसा या विश्वास कर के हमारा काम होगा, कैसे होगा?ये कोई नहीं जानता. भगवान आपको सपने आपके बजट के हिसाब से नहीं देते हैं वो आपका बैंक अकाउंट चैक नहीं करते हैं. आपका विश्वास-भरोसा चेक करते हैं. विश्वास को हमेशा अपने डर से बड़ा होने दें कुछ लोगों ने तर्क दिया कि कई विश्वास सबूतों से तय नहीं किये जा सकते. आप चिकित्सक या अपने शिक्षक पर विश्वास करेंगे तो ही आपका भला होगा. जहाँ विश्वास ग्यान के आधार पर होता है और ग्यान हमको दर्द, निराशा, भय, क्रोध और नफरत जैसी भावनाओं को संभालने के लायक बनाता है.ये सोच लेकर अतीत पहले ही चला गया है. भविष्य अभी आया नहीं है. हम जानते भी नहीं हैं क्या होगा. तब हमारे पास बचता है वर्तमान तो पूरा अभ्यास आज को जीने मे लगायें तो ये साबित हुआ कि हमें किसी बात पर ज्यादा भरोसा नहीं करना हैं. भरोसा करने से हमभावनाओं के जाल मे फंसते चले जायेगें. अपनी तैयारी पूरी रखें जो होगा अच्छा ही होगा सोचने से मन में कड़वाहट, नफरत, निराशा,दुख का प्रतिशत कम आयेगा और आप भरोसे का यही मतलब जान लेंगे कि भरोसा एक जानलेवा बीमारी नहीं है..... संकलित
Wait while more posts are being loaded