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प्यार के तरानों से लेकर,उत्कर्ष गानों,भक्ति की सरिता से जन जागृति,
ओज की कविताओं से लेकर,करुण रस की रचनाये, उत्कर्ष कहानियां
सनातन हिंदी परम्परा में उत्कर्ष का लघु प्रयास अवश्य पढ़ियेगा...

उत्कर्ष छन्द : रोला, वर्षा http://nkutkarsh.blogspot.com/2017/08/blog-post_55.html
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उत्कर्ष छन्द : पञ्चचामर http://nkutkarsh.blogspot.com/2017/08/blog-post_14.html

छंद : पञ्चचामर
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उठा कृपाण, वीर जो, अधर्म देह चीर दो
रहे मनुष्य सृष्टि पे,यथार्थ ना अधीर हो
धरा प्रतीक पे करें, गुमान और देश भी
कुमार्ग पे चलो नहीं, कहें यही उमेश भी

✍नवीन श्रोत्रिय “उत्कर्ष”
श्रोत्रिय निवास बयाना

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