मोहब्बत रूह में उतरा हुआ मौसम है जनाब,
ताल्लुक कम करने से मोहब्बत कम नही होती..!!

देखा तो मेरा साया भी मुझ से जुदा मिला
सोचा तो हर किसी से मेरा सिलसिला मिला

शहर-ए-वफ़ा में अब किसे अहल-ए-वफ़ा कहें
हम से गले मिला तो वो ही बेवफ़ा मिला

फ़ुरसत किसे थी जो मेरे हालात पूछता
हर शख़्स अपने बारे में कुछ सोचता मिला

उस ने तो ख़ैर अपनों से मोड़ा था मुँह 'अयाज़'
मैंने ये क्या किया के मैं ग़ैरों से जा मिला...

- #अयाज़_झांसवी

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नही है हमारा हाल,
कुछ तुम्हारे हाल से अलग,
बस फ़र्क है इतना,
कि तुम याद करते हो,
और हम भूल नही पाते.”
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ना मालुम सी नामुकुल सा
जिन्दगी का सफर हो गया
....तेरे. अहसास का अकूत बंधन
मेरी तन्हा चाहत का मौन बन्धन
जीवन के ना खिले से ज़ज़्जबातो का
पंखुरियों सूर्य रश्मियों को देख
खिलने को आतुर होता जाना
पर कहां आज भी बिन खिले पुष्पों
की तरह निरूत्तर सा नारी मन मेरा
तरस रहा है, खिलने को तुम्हारे
समीप होने की प्रतीक्षा में
तुम्हारे होने की अनुभूति के लिए
अहसासों का ये ग्रंथ
सजता है संवरता है और बिखर जाता है
फिर भी उलट लेती हूं कुछ पन्नों को
आपके निकट होने का अहसास लिए
मौन भी अलंकृत करता है मुझे
तुम्हारे पास होने की मात्र अनुभूति से।
"कुमुद वर्मा,,"
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ना ताज सुन्दर है,
ना मीनार ऊची है।
जल गयी जो जौहर मे,
वह मुठ्ठी भर राँख ऊची है।

जिस्म फरोसी के दरिन्दे,
क्या जाने स्वाभीमान को?
जल गयी जो ज्वाला मे,
उस चितौड की शान ऊची है।

जली को आग कहते है,
दहकने को अँगार कहते है।
उस दहकते अगारे से जो सिन्दूर बनता है,
उसे पदमावती का श्रृँगार कहते है।

चितकबरे पर्दे पर फूहड बैचने वालो,
वीरोे के खून से लिखे गीतो को।
चितौड का ईतिहास कहते है।

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ये जिस्म क्या है, कोई पैरहन उधार का
यहीं सम्भाल कर पहना, यहीं उतार चले।
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शुभ प्रभात
प्यार का जब कोई भी मौसम नहीं..
मैं अगर बिखरी हूँ इसका ग़म नहीं ;

मेरी होकर भी सितम करती है ये..
कैसे कह दूँ ज़िंदगी बरहम नहीं ;

ज़िन्दगी के ज़ख्म जो भर देगा अब...
चारागर के पास वो मरहम नहीं ;
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झूठी शान के परिंदे ही ज्यादा फड़फड़ाते हैं … ......... बाज़ की उडान में कभी आवाज़ नहीं होती..... ......

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अकेले चलना ही है, जब तो डर कैसा
जीवन है धुंध तो क्यों मन हो कुन्द
राह की मुश्किलों से ना दामन बचा
जीवन को बोझ मान मर जाना कैसा
मानव है फहरायेंगे परचम लहराया अपना
मानवता का अमृत है ,खुशबू से सरो बार
चल चला चल राही, मुश्किलो में सपनों
को कर साकार, अरि पर कर वार
रास्तों की धुंद,नमी की वजह से
तेरा मन भयभीत पंछी की तरह
ना कर छुपने का प्रयास ये जीवन
कुछ कांटे कुछ जहर के प्याले है।
सुखों की धुप की चाहत के
इश्को आहसास के नाले है
ना डर किसी की बन्दिशों से
अपने जीवन को जीता चल।
स्व रचित
" कुमुद वर्मा"






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खूबसूरत है #जिंदगी
#ख्वाब की तरह
जाने कब #टूट जाये
#काँच की तरह
मुझे ना #भुलाना किसी
बात की #तरह
अपने #दिल में ही रखना.
#खूबसूरत याद की तरह•••••💞•••••💞••••••💞•••••!!!!
💕🍃🌹🍃💕
💕.•°``°•.¸.•°``°•.💕
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💕`•.¸ 💗 ¸.•` 💕
💕° •.¸¸.•° 💕
💕💕
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इज़हार-ए-इश्क करो उस से, जो हक़दार हो इसका...
बड़ी नायाब शय है ये इसे ज़ाया नहीं करते...
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