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भारतीय संविधान - federal or unitary, the writer here presents his own views on it

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Indian Constitution : Federal or Unitary

प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ.भीमराव अंबेडकर ने कहा था कि संविधान की संरचना तो संघात्मक है,किन्तु समिति ने संविधान में (अनुच्छेद 1 ) Federal की जगह Union शब्द का प्रयोग किया है। इसके दो लाभ हैं।

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भारत का संविधान निर्माण : प्रक्रिया
"कांग्रेस स्वतंत्र और लोकतान्त्रिक राज्य का समर्थन करती है। उसने यह प्रस्ताव किया है कि स्वतंत्र भारत का संविधान बगैर बाहरी हस्तक्षेप के ऐसी संविधान सभा द्वारा बनाया जाना चाहिए जो वयस्क मतदान के आधार पर निर्वाचित हो। " -पंडित जवाहर लाल नेहरू ( 1938 )
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भारत का संविधान : प्रस्तावना

"हम भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को :
सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त करने के लिए तथा..............
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अप्रासंगिक चाणक्य जब भी प्रयोग करता हूँ ,
अपनी बुद्धि का
पूरी निष्ठां के साथ और
बना देता हूँ -एक चन्द्रगुप्त ;
फिर हो जाता हूँ -एकाकी।

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comparison between indian and pakistani education system according to ex ambassador (pakistan) hussain haqqani

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Demonetization And Mahabharat:नोटबंदी और महाभारत कहते हैं कि वाराणसी मुक्ति का स्थल है। वहां जाकर सारे पाप धुल जाते हैं। नोटबंदी की वजह से तमाम बातें होने लगीं तो मैं बनारस की तरफ भागा। सुन रखा था की वहां प्रायः सवालों के जवाब मिल जाते हैं ,कम से कम बनारसवाले तो यही मानते हैं। सोचा कि सवालों से मुक्ति पाने का एक तरीका अपनाया जाय। मैं जब बनारस के घाट पर पहुंचा तो मुझे एक विद्वान टाइप के संत दिखे। जब लोगों से उनका नाम पूछा तो पता चला कि उनका नाम है -पंडित सेवा प्रसाद। पता ये भी चला कि विकट विद्वान हैं। मैंने आव देखा न ताव पहुंचते ही सवाल दाग दिया -गुरु जी !मोदी जी की नोटबंदी से देश परेशान है। एक दिन में सिर्फ २००० मिलने हैं और वो भी मिल नहीं पा रहे हैं। जनता दुखी है।"
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उत्तर प्रदेश का दंगल :U.P. Ka Dangal

आजकल उत्तर प्रदेश में राजनीतिक उठा पटक अपने चरम पर है। एक तरफ मुलायम सिंह यादव और शिवपाल यादव हैं, तो दूसरी तरफ अखिलेश यादव और रामगोपाल यादव। लोगों को बात समझ में नही आ रही कि मुलायम सिंह जैसा जबर खिलाडी कैसे मात खा रहा है ? जिस परिवार का प्रत्येक वयस्क व्यक्ति किसी न किसी महत्वपूर्ण पद पर है,उस परिवार के बीच इस तरह की सड़कछाप लड़ाई क्यों हो रही है ?जानकारों में झगड़े को लेकर मतभेद है। कई मत मतान्तर प्रस्तुत किये जा रहे हैं।

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1920 के दशक में Karl Mannheim ने मुक्त विचरणशील बुद्धिजीवी वर्ग की अवधारणा दी थी। अर्थात ऐसा बुद्धिजीवी जो किसी विशेष विचारधारा से बंधा हुआ न हो ,उस समय भी ये एक कठिन काम था। 95 साल बाद तो ये और कठिन लगता है। आज के समय तो आप या तो इधर हैं या उधर;और अगर आप नहीं हैं तो अपनी राय देकर देखिये फिर आपको किसी न किसी तरफ कर दिया जायेगा। अगर आप नोटबंदी के समर्थक है तो आप मोदी भक्त हैं और अगर आप नोटबंदी के विरोध में है तो आप कालेधन के दलाल या देशद्रोही हैं। ऐसा लगता है कि मध्य का कोई रास्ता ही नहीं है।
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bhupendra1981.blogspot.in


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