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कर्पूर गौरव, करुणावतारं, संसारसारं, भुगेंद्रहारम !
सदा वसंतम हृदयारविन्दे, भवंभवानी सहितं नमामि !! 
मित्रों ! जय बाबा गणेश !
सिद्धिविनायक बाबा गणेश व् भगवान शिव आप सबका कल्याण करें !
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II ॐ नमः शिवाय II
Hello my sweet n dear brothers and sisters !
Namaskar.
Jai bhole nath. how are you all? Hope you all are enjoying the life well with your family and friends. These days I'm not getting proper time to talk to you all. But my best wishes and love are always with you. I wish you always the best of everything and best of luck too. May god bless you all always and inspire you to do the good deeds, the best for the nation and mankind and grant you the best of everything you wish, need and deserve in life. May each one of you shine like a star in society.

My dear brothers and sisters !

मेरी कामना है कि भोले बाबा भगवान शिव आपकी सभी उचित मनोकामनाओं को पूर्ण करें। भोले बाबा का शुभाशीष हर पल सदैव आप के साथ रहे, उनकी कृपा प्राप्त करके आप हर प्रकार के दुःख-दर्द से दूर रह कर संसार के समस्त सुखों का जीवन भर आनंद उठा सकें। भोले बाबा मेरे सभी नेट भाइयों को दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की दें और आप सभी के घर में सभी प्रकार के सुख-शांति एवं सम्पन्नता की बरसात करते रहें तथा उनकी सभी उचित मनोकामनाओं को जल्दी से जल्दी पूरा करें, ताकि मुझे भी सारा साल आप लोगों से एक के बाद एक खुशखबरियाँ मिलती रहें। भोले बाबा से मेरी यही प्रार्थना है कि वो आप के जीवन को हर तरह की खुशियों के रंगों से सदा ही सराबोर रखें।

Respect your grand-parents, parents and all elders in your relations and always try to learn from them their teachings about the real life living. On the other hand, keep it always in your mind that being among elders in the family, it's also your essential moral duty to guide the younger generation, i.e your younger brothers or sisters and kids etc. So teach them about the values of morals, rites and rituals of our great Indian culture. Teach them to respect all elders and love youngers of the society and ask them always to spread love everywhere and not hatred. Tell them about the necessity of truth, honesty and hard work in life. Remember that a nation's progress is ever dependable on it's good citizens. Don't ever forget that your age doesn't make you great, these are only your thoughts, which make you great and get you respect in society.

जय श्री कृष्ण !
मैंने तो अपने बुजुर्गों के मुख से हमेशा यही सुना है कि भगवान् का अन्जाने में लिया गया नाम भी कभी निष्फल नहीं जाता, तो जरा सोचिये कि अगर हम लोग उन्हें सच्चे मन से सिर्फ दो मिनट भी याद करलें तो यह हमें कितना फ़ायदा पहुँचा सकता हैI
(पूनम शर्मा)
N.B : I strictly believe in and follow my Indian culture only and hence I am not at all interested in making the boys my friends. As such all of my posts are addressed to my brothers and sisters on net only. In case you too consider yourself one among them, can treat me as a friendly sister(not as sisterly friend), and can address me as didi or sister while addressing me, then only you are supposed to write some comment on my posts, otherwise you not only need to keep away from my posts but also to remove my name from your circle at once. मैं केवल अपनी भारतीय सभ्यता को ही मानती और उसी पर चलती हूँ तथा वेस्टर्न कल्चर पर चलने वाली लड़कियों की तरह लड़कों से दोस्ती करने का भी मैं कोई शौक नहीं रखती। इसीलिए मेरी सभी पोस्ट्स केवल मेरे भाई-बहनों के नाम ही होती हैं। यदि आप भी खुद को मेरे उन्हीं भाई-बहनों में से ही एक समझ कर मुझे अपनी एक दोस्त जैसी बहन (बहन जैसी दोस्त नहीं) मानते हुए मुझसे बात करना चाहें तो मेरी पोस्ट्स में मुझसे केवल दीदी या सिस्टर बोलकर ही कमेंट करें, वरना ना सिर्फ मेरी सभी पोस्ट्स से दूर ही रहें, बल्कि मेरा नाम भी अपने सर्किल से तुरंत रिमूव कर दें।इसके अलावा यदि आप में से कोई मुझसे फेसबुक में भी जुड़ना चाहे तो उसके लिए मेरी प्रोफाइल में मेरी फेसबुक ID मौजूद है, जिस पर आप अपनी रिक्वेस्ट भेज सकते हैं। आपकी सुविधा के लिए मैं अपनी फेसबुक ID यहाँ भी लिख रही हूँ, जो कि इस प्रकार है : https://www.facebook.com/profile.php?id=100003981966385

प्रिय भाइयों और बहनों ! क्या आप जानते हैं कि आप में से अधिकतर लोगों की प्रोफाइल में किसी भी पोस्ट में हमारी तरह से ज्यादा लोगों के कमेंट्स, लाइक्स और शेयर ना होने का असली कारण क्या है? इसका सब से बड़ा एक ही कारण यह है कि एक तो आपको बहुत कम लोगों ने अपने सर्किल में add किया हुआ है, और ऊपर से आप सभी अपनी पोस्ट्स को प्राइवेटली शेयर करके खुद ही दूसरे लोगों को अपने साथ जुड़ने का रास्ता बंद कर देते हो, जिससे वो लोग, जो आपके सर्किल में नहीं हैं, वो आपकी पोस्ट्स को देख ही नहीं पाते। जबकि आपको शायद इस बात का मलाल भी होता होगा कि हमारी पोस्ट्स में भी ज्यादा लोग लाइक और शेयर क्यूँ नहीं करते, होता है ना? एक बात याद रखिये कि छिपाता वही है, जो कुछ गलत करता है। जब आप कुछ अच्छा करते हैं, तो उसे छिपाने की बजाए सभी को जानने दीजिये, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग आपके अच्छे विचारों को जानें और आप के साथ जुड़ें। इसलिए आगे से आप अपनी सभी पोस्ट्स को प्राइवेटली की बजाए पब्लिकली शेयर किया कीजिये अर्थात अपनी पोस्ट किसी के साथ शेयर करते वक्त नाम लिखने वाली लाइन में सबसे पहले पब्लिक पर क्लिक करें और उसके बाद उन सबके नाम add करते जाएँ, जिन्हें आप अपनी वो पोस्ट भेजना चाहते हों। I hope you can understand my suggestion well and would follow the same in future.
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प्रिय मित्रों एवं बच्चों !
ॐ नमः शिवाय ! हर हर महादेव ! भगवान शिव आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करें ! ईश्वर आपको सदा सही राह पर चलायें, जिससे आपका प्रत्येक दिन मंगलमय हो !

मित्रों व् बच्चों !
आप शायद इस बात से हैरान होंगे कि आज की मेरी इस पोस्ट में अपने हिन्दू भाइयों के हिंदुत्व और देशभक्ति को जगाने की कोशिश करता कोई मैसेज नहीं। इसका कारण यह है कि आज मैं आपके और हमारी आज की युवा पीढ़ी के सामने उस महान देशभक्तों में से एक अमर स्वतंत्रता सेनानी व् महान क्रांतिकारी देशभक्त श्री बटुकेश्वर दत्त की जीवनी के कुछ अंश रख रहा हूँ, जिससे आज की हमारी इस युवा पीढ़ी का परिचय होना बेहद जरुरी है, क्यूंकि इन्ही देशभक्तों के चलते आज हम सभी आज़ाद भारत में चेन की सांस ले पा रहे हैं, न कि अंग्रेज़ों के दलाल व् गद्दार तथाकथित स्वतंत्रता सेनानी गांधी और जवाहर लाल आदि के कारण, जिनकी गद्दारी के सारे सबूत आज सभी सोशल साइट्स पर आम हो चुके हैं। आज की हमारी युवा पीढ़ी का इन लोगो के बारे में जानना इसलिए भी बेहद जरुरी है, क्यूंकि आज की हमारी अधिकांश युवा-पीढ़ी पश्चिमी सभ्यता और ऐय्याशियों में डूबकर अपने मार्ग से भटक गई है और इस देश के गद्दार नेताओं का समर्थन करके खुद ही इस देश की जड़ें खोखला करने में लगी हैं। अपनी बात को और अधिक लम्बा न खींचते हुए मैं आज की अपनी उस युवा पीढ़ी से केवल एक ही प्रश्न पूछूंगा कि क्या ये लोग भी आप सबकी तरह घर-परिवार वाले खूबसूरत और जवां लड़के नहीं थे, फिर क्यों इन्होने अपनी जवानी आपकी तरह रास-रंग में न डुबाकर देश के नाम कर दी? अगर किसी बच्चे में इस सवाल का जवाब देने का साहस है, तो नीचे कमेंट में अवश्य लिखे !
आजाद भारत में क्या क्या सहा स्वतंत्रता सेनानी बटुकेश्वर दत्त ने जानकर निश्चित शर्मिन्दा हो जायेंगे आप !

साठ के दशक की बात है, पटना में बसों के परमिट दिए जाने थे, सैकड़ों लोगों ने आवेदन किया हुआ था। लाइन में एक पैंतालीस-पचास साल का व्यक्ति भी था। जब वो पटना के कमिश्नर से मिला और उसने अपना नाम बताया और कहा कि वो एक स्वतंत्रता सेनानी है। पटना के कमिश्नर ने पूछा कि सर, मैं ये कैसे मान लूं कि आप स्वतंत्रता सेनानी हैं, आपके पास तो स्वतंत्रता सेनानी वाला सर्टिफिकेट भी नहीं है, पहले सर्टिफिकेट लाइए, तब मानूंगा। ऐसे समय में उस व्यक्ति को भगत सिंह का लिखा वो पत्र याद आ गया, जो शहीद-ए-आजम ने उन्हें अंडमान जेल में काला पानी की सजा काटते वक्त भेजा था। भगत सिंह ने लिखा था, ‘आप दुनिया को यह दिखाएं कि क्रांतिकारी अपने आदर्शों के लिए मर ही नहीं सकते, बल्कि जीवित रहकर जेलों की अंधेरी कोठरियों में हर तरह का अत्याचार भी सहन कर सकते हैं।’ मगर उनकी कुर्बानियों का उन्हें आज ये सिला मिला था कि अपना परिचय देने के बाद भी उनसे स्वतंत्रता सेनानी होने का सर्टिफिकेट मांगा जा रहा था। हालांकि बस परमिट वाली बात का पता चलते ही देश के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉo राजेंद्र प्रसाद ने बाद में कमिश्नर के उस व्यवहार के लिए उनसे माफी मांग ली थी।

कौन था ये व्यक्ति? यह व्यक्ति वो महान क्रांतिकारी देशभक्त बटुकेश्वर दत्त था, जिसे 1929 में शहीद सुखदेव के साथ मिलकर सेंट्रल असेंबली (जो आज की संसद है) में बम फोड़ने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लेकिन आखिरी वक्त में उसके साथ सुखदेव की बजाए भगत सिंह को कर दिया गया। दोनों ने मिलकर 8 अप्रैल1929 को सेंट्रल असेंबली में दो बम फोड़े और अपनी गिरफ्तारी दी।

सोचिए कैसा लगा होगा उन्हें कि आज भगत सिंह को ही नहीं, उनके पूरे खानदान को देश जानता है। तमाम नेता उनके बच्चों के भी पैर छूते हैं और दूसरी तरफ उसी बम कांड में भगत सिंह के सहयोगी उस क्रांतिकारी देशभक्त से देश की आजादी के बाद स्वतंत्रता सेनानी होने का सर्टिफिकेट मांगा जाता है। उस समय उन्हें बहुत अफसोस हुआ कि भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु के साथ उन्हें फांसी क्यों नहीं हुई। कम से कम देश उन्हें भी याद तो रखता। वो तो उस वक्त भी बहुत निराश हुए थे कि उन्हें भी भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की भांति फांसी की सजा न सुनाकर कालापानी में उम्र कैद की सजा क्यों दी गई। तब भगत सिंह ने जेल से पत्र लिखकर उन्हें ढांढस बंधाया था और कहा था कि आपको यह साबित करना होगा कि हम क्रांतिकारी देश के लिए न केवल फांसी के फंदे पर ही झूल सकते हैं, बल्कि जीवित रहकर भी क्रांतिकारी जेल की कोठरियों में हर तरह का अत्याचार सहन कर सकते हैं।

बटुकेश्वर दत्त यूं तो बंगाली थे। बर्दवान से 22 किलोमीटर दूर 18 नवंबर 1910 को एक गांव औरी में पैदा हुए बटुकेश्वर को बीके दत्त, बट्टू और मोहन के नाम से जाना जाता था। हाईस्कूल की पढ़ाई के लिए वो कानपुर आ गए। कानपुर शहर में ही उनकी मुलाकात चंद्रशेखर आजाद से हुई। उन दिनों चंद्रशेखर आजाद झांसी, कानपुर और इलाहाबाद के इलाकों में अपनी क्रांतिकारी गतिविधियां चला रहे थे। 1924 में भगत सिंह भी वहां आए। देशप्रेम के प्रति उनके जज्बे को देखकर भगत सिंह उनको पहली मुलाकात से ही दोस्त मानने लगे थे। 1928 में जब हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी का गठन चंद्रशेखर आजाद की अगुआई में हुआ, तो बटुकेश्वर दत्त भी उसके अहम सदस्य थे। बम बनाने के लिए बटुकेश्वर दत्त ने खास ट्रेनिंग ली और इसमें महारत हासिल कर ली। एचएसआरए की कई क्रांतिकारी गतिविधियों में वो सीधे तौर पर शामिल थे।

जब क्रांतिकारी गतिविधियों के खिलाफ अंग्रेज सरकार ने डिफेंस ऑफ इंडिया एक्ट लाने की योजना बनाई, तो भगत सिंह ने उसी तरह से सेंट्रल असेंबली में बम फोड़ने का इरादा व्यक्त किया, जैसे कभी फ्रांस के चैंबर ऑफ डेपुटीज में एक क्रांतिकारी ने फोड़ा था। एचएसआरए की मीटिंग हुई, जिसमें तय हुआ कि भगत सिंह जिस समय सोवियत संघ की यात्रा पर होंगे, बटुकेश्वर दत्त असेंबली में बम फेंकेंगे और सुखदेव उनके साथ होंगे। लेकिन बाद में भगत सिंह के सोवियत संघ का दौरा रद्द हो गया और दूसरी मीटिंग में ये तय हुआ कि बटुकेश्वर दत्त बम प्लांट करेंगे, लेकिन उनके साथ सुखदेव के बजाय भगत सिंह होंगे।

इधर सांडर्स को गोली मारने के बाद भगत सिंह अपने बाल कटवा चुके थे। कई दिन तक वो और बटुकेश्वर हर रोज असेंबली में जाकर चर्चा देखते थे और मुआयना करते थे कि इस घटना को किस तरह से और कब अंजाम दिया जाएगा। चार अप्रैल को भगत सिंह ने हैट में अपना वो प्रसिद्ध फोटो खिंचवाया, योजना थी कि गिरफ्तारी के फौरन बाद वो फोटो मीडिया के जरिए लोगों तक पहुंचना चाहिए। भगत सिंह को पता था कि बम फेंकने के बाद असेंबली से बचकर निकल पाना, मुमकिन नहीं होगा, ऐसे में क्यों ना इस घटना को बड़ा बनाया जाए, इस घटना के जरिए बड़ा मैसेज दिया जाए। भगत सिंह शहादत के लिए मानो मन ही मन पूरी तरह तैयार थे। एक फोटो बटुकेश्वर दत्त का भी खिंचवाया गया था। ये फोटो कनॉट प्लेस के एक स्टूडियो में खिंचवाया गया। फिर वो पर्चे लिखे गए, जो गिरफ्तारी के वक्त असेंबली में फेंके जाने थे।

8 अप्रैल 1929 का दिन था, पब्लिक सेफ्टी बिल पेश किया जाना था। बटुकेश्वर दत्त बचते-बचाते किसी तरह भगत सिंह के साथ दो बम सेंट्रल असेंबली में अंदर ले जाने में कामयाब हो गए। जैसे ही बिल पेश हुआ, विजिटर गैलरी में मौजूद भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त उठे और दोनों बम उस तरफ उछाल दिए, जहां बेंच खाली पड़ी थी। जॉर्ज सस्टर और बी.दलाल समेत थोड़े से लोग घायल हुए, लेकिन बम ज्यादा शक्तिशाली नहीं थे, इसलिए धुआं तो भरा, लेकिन किसी की जान को कोई खतरा नहीं था। बम के साथ-साथ दोनों ने वो पर्चे भी फेंके और गिरफ्तारी से पहले दोनों ने इंकलाब जिंदाबाद, ब्रिटिश साम्राज्यवाद मुर्दाबाद जैसे नारे भी लगाए। दस मिनट के अंदर असेंबली फिर शुरू हुई और फिर स्थगित कर दी गई।

उसके बाद देश भर में बहस शुरू हो गई। भगत सिंह के चाहने वाले, जहां ये साबित करने की कोशिश कर रहे थे कि बम किसी को मारने के लिए नहीं थे, बल्कि बहरे अंग्रेजों के कान खोलने के लिए फेंके गए थे। तो वहीं अंग्रेज और अंग्रेज-परस्त गांधी जैसे लोग इसे अंग्रेजी हुकूमत पर हमला बता रहे थे। हालांकि बाद में फोरेंसिक रिपोर्ट ने ये साबित कर दिया कि बम इतने शक्तिशाली नहीं थे। बाद में भगत सिंह ने भी कोर्ट में कहा कि उन्होंने केवल अपनी आवाज रखने के लिए, बहरे अंग्रेज़ों के कान खोलने के लिए ही इस तरीके का इस्तेमाल किया था, ना कि किसी की जान लेने के लिए। लेकिन भगत सिंह के जेल जाते ही एचआरएसए के सदस्यों ने लॉर्ड इरविन की ट्रेन पर बम फेंक दिया।

गांधीजी ने इसके विरोध में आर्टिकल लिखा, कल्ट ऑफ बम। जवाब में भगवती चरण बोहरा ने फिलॉसफी ऑफ बम लिखकर साबरमती आश्रम के बाहर चिपका दिया। भगवती भगत सिंह को जेल से छुड़ाने के लिए बम तैयार करते वक्त बम फटने का शिकार होकर स्वर्गवासी हो गए, तो चंद्रशेखर आजाद अलफ्रेड पार्क, इलाहाबाद में शहीद हो गए। सुखदेव, राजगुरु को गिरफ्तार कर लिया गया। इस तरह से पूरा एचएसआरए भगत सिंह की गिरफ्तारी के बाद से ही बिखरने लगा था।

इधर कनॉट प्लेस के जिस फोटोग्राफर ने भगत सिंह के फोटो खींचे थे, उसके पास पुलिस का भी काम था। उसने वो फोटो पुलिस को भी उपलब्ध करवा दिए। भगत सिंह के बाकी साथी उन तस्वीरों को अखबारों के कई दफ्तरों में भी चुपके से देकर आए, ताकि भगत सिंह की ये इच्छा पूरी हो सके कि उनकी गिरफ्तारी के बाद उनका हैट वाला फोटो छपे। लेकिन क्यूंकि पुलिस को इसका पहले ही पता चल चुका था, इसलिए सारे अखबारों को दबे ढके चेतावनी दी जा रही थी।

इधर, कई दिनों के बाद वंदेमातरम नाम के अखबार ने पहली बार वो फोटो छापा, लेकिन एक पंपलेट के रूप में अखबार के अंदर रखकर वितरित किया, ना कि अखबार के हिस्से के रूप में। तब जाकर लोगों को पहली बार पता लगा कि उनके हीरो देखने में कैसे लगते हैं। भगत सिंह के साथियों ने ये ध्यान रखा था कि भगत सिंह का फोटो बटुकेश्वर दत्त के मुकाबले बड़ा हो और ऊपर हो, वैसा ही हुआ।

जनता के बीच उन तस्वीरों को देखकर ये मैसेज गया कि जब इतना बांका, हैटधारी युवा देश के लिए अपनी जान कुर्बान कर सकता है, तो हम क्यों नहीं, हमारे बच्चे क्यों नहीं? भगत सिंह की उस तस्वीर ने वाकई कमाल कर दिया। उनकी वो तस्वीर लोगों के दिलों में ऐसी छपी कि धीरे-धीरे उस केस का नाम जो पहले भगत सिंह, बटुकेश्वर दत्त, सुखदेव, राजगुरु और अन्य बनाम सरकार कहा जाता था, वो अब भगत सिंह और अन्य बनाम सरकार हो गया।

हालांकि मोटे तौर पर कोर्ट ने ये मान लिया कि बम किसी की जान लेने के इरादे से नहीं फेंका गया था। ऐसे में बटुकेश्वर दत्त को काला पानी की सजा हुई, लेकिन भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के सर पर तो सांडर्स की हत्या का इल्जाम भी था, इसलिए उन्हें फांसी की सजा सुना दी गई। बटुकेश्वर दत्त इस फैसले से बहुत निराश हो गए कि उन्हें भी भगत सिंह जैसे फांसी की सजा क्यों नहीं दी गई। उन्होंने अपनी यह बात भगत सिंह तक भी पहुंचाई थी कि वतन पर शहीद होना ज्यादा फख्र की बात है, तब भगत सिंह ने उनको ये पत्र लिखा कि वे दुनिया को ये दिखाएं कि क्रांतिकारी अपने आदर्शों के लिए मर ही नहीं सकते, बल्कि जीवित रहकर जेलों की अंधेरी कोठरियों में हर तरह का अत्याचार भी सहन कर सकते हैं।

भगत सिंह ने उनकी बहन को भी एक पत्र लिखकर ढांढस बंधाया था। बटुकेश्वर ने काला पानी की सजा में काफी अत्याचार सहन किए, जो पल-पल फांसी के समान थे। जेल में ही बटुकेश्वर को टीबी की बीमारी ने घेर लिया। उस वक्त इतना अच्छा इलाज भी नहीं था। 1933 और 1937 में उन्होंने जेल के अंदर ही अमानवीय अत्याचारों के चलते दो बार भूख हड़ताल भी की। अखबारों में खबर छपी, तो 1937 में उन्हें बिहार के बांकीपुर केंद्रीय कारागार में शिफ्ट कर दिया गया और अगले साल रिहा भी कर दिया गया।

एक तो टीबी की बीमारी और दूसरे उनके सारे साथी भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, भगवती चरण बोहरा, राजगुरु, सुखदेव सभी एक-एक करके दुनिया से विदा हो चुके थे। ऐसे में पहले उन्होंने इलाज करवाया, और फिर से कूद पड़े देश की आजादी के आंदोलन में। लेकिन इस बार कोई क्रांतिकारी साथ नहीं था। बटुकेश्वर ने भारत छोड़ो आंदोलन में हिस्सा लिया और गिरफ्तार हो गए। 1945 में उन्हें जेल से रिहाई मिली।

आधी से ज्यादा जिंदगी देश की लड़ाई में गुजर चुकी थी। हौसला बढ़ाने वाले सारे साथी साथ छोड़ चुके थे। देश आजाद हुआ तो अब कोई मकसद भी सामने नहीं था। बटुकेश्वर ने शादी कर ली और एक नई लड़ाई शुरू हो गई, गृहस्थी जमाने की। आजादी की खातिर 15 साल जेल की सलाखों के पीछे गुजारने वाले बटुकेश्वर दत्त को आजाद भारत में रोजगार मिला, एक सिगरेट कंपनी में एजेंट का। जिससे वह पटना की सड़कों पर खाक छानने को विवश हो गए। बाद में उन्होंने बिस्कुट और डबलरोटी का एक छोटा सा कारखाना भी खोला, लेकिन उसमें काफी घाटा हो गया और जल्द ही वह बंद हो गया। कुछ समय तक टूरिस्ट एजेंट एवं बस परिवहन का काम भी किया, परंतु एक के बाद एक कामों में असफलता ही उनके हाथ लगी। तब उनकी पत्नी अंजली को भी एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाना पड़ा।

उन्होंने किसी से सरकारी मदद नहीं मांगी, लेकिन 1963 में उन्हें विधान परिषद सदस्य बना दिया गया। लेकिन उनके हालात में कोई फर्क नहीं आया। बटुकेश्वर को 1964 में अचानक बीमार होने के बाद गंभीर हालत में पटना के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस पर उनके मित्र चमनलाल आजाद ने एक लेख में लिखा, क्या दत्त जैसे क्रांतिकारी को भारत में जन्म लेना चाहिए? परमात्मा ने इतने महान शूरवीर को हमारे देश में जन्म देकर भारी भूल की है। खेद की बात है कि जिस व्यक्ति ने देश को स्वतंत्र कराने के लिए प्राणों की बाजी लगा दी और जिसे अपनी फांसी न होने पर भी अफ़सोस रहा, वह आज नितांत दयनीय स्थिति में अस्पताल में पड़ा एड़ियां रगड़ रहा है और सत्ता के गलियारों से कोई उसे पूछने वाला भी उसके पास नहीं है।

इस लेख से सत्ता के गलियारों में हड़कंप मच गया और अबुल कलाम आजाद केंद्रीय गृहमंत्री गुलजारी लाल नंदा और पंजाब के मंत्री भीमलाल सच्चर से मिले। पंजाब सरकार ने एक हजार रुपये का चैक बिहार सरकार को भेजकर, वहां के मुख्यमंत्री केबी सहाय को लिखा कि यदि वे उनका इलाज कराने में सक्षम नहीं हैं, तो वह उनका दिल्ली या चंडीगढ़ में इलाज का व्यय वहन करने को तैयार हैं।

भगत सिंह की मां विद्यावती का भी बटुकेश्वर पर बहुत प्रभाव था, जो भगत सिंह के जाने के बाद उन्हें बेटा ही मानती थीं। बटुकेश्वर लगातार उनसे मिलते रहते थे। बिहार सरकार अब हरकत में आई और पटना मेडिकल कॉलेज में सीनियर डॉक्टर मुखोपाध्याय ने दत्त का इलाज शुरू किया। मगर उनकी हालत बिगड़ती गई, क्योंकि उन्हें सही इलाज नहीं मिल पाया था और 22 नवंबर 1964 को उन्हें दिल्ली लाया गया। दिल्ली पहुंचने पर उन्होंने पत्रकारों से कहा था-मुझे स्वप्न में भी ख्याल न था कि मैं उस दिल्ली में जहां मैने बम डाला था, एक अपाहिज की तरह स्ट्रेचर पर लाया जाऊंगा। बाद में पता चला कि दत्त बाबू को कैंसर है।

दत्त को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती किया गया। पीठ में असहनीय दर्द के इलाज के लिए किए जाने वाले कोबाल्ट ट्रीटमेंट की व्यवस्था केवल एम्स में थी, लेकिन वहां भी कमरा मिलने में देरी हुई। 23 नवंबर को पहली दफा उन्हें कोबाल्ट ट्रीटमेंट दिया गया और 11 दिसंबर को उन्हें एम्स में भर्ती किया गया। पंजाब के मुख्यमंत्री रामकिशन जब बटुकेश्वर दत्त से मिलने पहुंचे और उन्होंने पूछ लिया, हम आपको कुछ देना चाहते हैं, जो भी आपकी इच्छा हो मांग लीजिए। छलछलाई आंखों और फीकी मुस्कान के साथ उन्होंने कहा, मुझे कुछ नहीं चाहिए। बस मेरी यही अंतिम इच्छा है कि मेरा दाह संस्कार मेरे मित्र भगत सिंह की समाधि के बगल में किया जाए।

लाहौर षडयंत्र केस के किशोरीलाल अंतिम व्यक्ति थे, जिन्हें उन्होंने पहचाना था। उनकी बिगड़ती हालत देखकर भगत सिंह की मां विद्यावती पंजाब से उनसे मिलने आईं। 17 जुलाई को वह कोमा में चले गए और 20 जुलाई 1965 की रात 1 बजकर 50 मिनट पर बटुकेश्वर इस दुनिया से विदा हो गए। उनका अंतिम संस्कार उनकी इच्छा के मुताबिक भारत-पाक सीमा के करीब हुसैनीवाला में भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की समाधि के निकट ही किया गया। लेकिन यह कितने शर्म की बात है कि आज भी कोई नेता वहां जाता है, तो उन तीनों की समाधि पर श्रद्धांजलि देने के बाद ही वापस लौट आता है, लेकिन बटुकेश्वर की समाधि आज भी उन्हीं की तरह उपेक्षित रहती है।

उपेक्षा का भाव इस कदर है कि अगर आज बटुकेश्वर, सुखदेव और राजगुरु की तस्वीरें एक साथ रख दी जाएं, तो कोई तीनों को अलग-अलग करके नहीं पहचान पाएगा, आज की पीढ़ी तो बिलकुल नहीं।

जब बटुकेश्वर आजीवन कारावास से रिहा हुए, तो सबसे पहले दिल्ली में उस जगह पहुंचे जहां उन्हें और भगत सिंह को असेंबली बम कांड के फौरन बाद गिरफ्तार करके हिरासत में रखा गया था। दिल्ली में खूनी दरवाजा वाली जेल में, बच्चे वहां बैडमिंटन खेल रहे थे। बच्चों ने उन्हें वहां चुपचाप खड़े देखा, तो पूछा कि क्या आप बैडमिंटन खेलना चाहते हैं, उन्होंने मना किया तो पूछा, कि फिर आप क्या देख रहे हैं? बटुकेश्वर ने जवाब दिया कि मैं उस जगह को देख रहा हूं जहां कभी भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त जेल में बंद थे। बच्चों ने पूछा कौन भगत सिंह और कौन बटुकेश्वर दत्त? सोचिए उन पर क्या गुजरी होगी, उस समय। खैर वैसे भी उस दौर में पढ़े-लिखे लोग कम ही थे, कम्युनिकेशन के साधन भी कम थे, बच्चों के स्कूल की किताबों में राष्ट्रीय साहित्य तो था ही नहीं। लेकिन आज तो है, आज की पीढ़ी भी उन्हें ना जाने, तो क्या उनको अपनी कुर्बानी व्यर्थ ही नहीं लगेगी??? ज़रा सोचिये !!!!
- Uma Shankar Parashar.
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सत्यम शिवम् सुन्दरम ! जय हिन्द, जय भारत ! वंदे मातरम !
"विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊंचा रहे हमारा"
प्रिय मित्रों व् बच्चों !
आप लोगों से मेरी विनती है कि मेरी किसी भी पोस्ट को केवल पढ़ने के पश्चात ही लाइक या शेयर करें। मुझे अफ़सोस है कि मेरी किसी भी पोस्ट में आपके मनोरंजन की कोई भी बातें नहीं होती, बल्कि इनमें केवल अपने देश और देशभक्ति से जुड़ी हुई बातें ही होती हैं, इसलिए यदि आपने किसी मनोरंजन की तलाश में मुझे गलती से अपने सर्किल में ऐड कर लिया हो, तो आपको मेरी सलाह है मेरी इस पोस्ट के मैसेज को आगे पढ़ने में भी अपना समय बिलकुल भी व्यर्थ बर्बाद न करें, बल्कि अपने इस समय का प्रयोग भी मुझे अपने सर्किल से तुरंत रिमूव करने में ही करें। लेकिन यदि आप इस देश से ज़रा सा भी प्रेम करते हैं और यह भी मानते हैं कि इस देश का एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते इस देश के प्रति आपके भी कुछ कर्तव्य हैं, तभी मेरे मैसेज को पूरा पढ़ने के बाद ही उस पर अपनी कोई प्रतिक्रिया देंI अन्यथा मेरा समय भी व्यर्थ बर्बाद न करें ! धन्यवाद।
प्रिय मित्रों एवं बच्चों !
ॐ नमः शिवाय ! हर हर महादेव ! भगवान शिव आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करें ! ईश्वर आपको सदा सही राह पर चलायें, जिससे आपका प्रत्येक दिन मंगलमय हो !
मित्रों व् बच्चों !
यदि आप हिन्दू हैं और यह बिलकुल नहीं चाहते कि आने वाले समय में कभी भी आपको या आपके बच्चों को जबरन मुसलमान बनना पड़े, तो मेरे इस मैसेज को खासकर इसके महत्वपूर्ण सन्देश वाले भाग को ऊपर से नीचे तक एक बार अवश्य पढ़ें। और हाँ अगर आपको मेरी बात में सच्चाई नज़र आये अथवा सही लगे, तो यह भी अवश्य ही बताएं कि इस खतरनाक आने वाले भविष्य से अपने सभी बंधु-बांधवों को भी सचेत करने के लिए क्या आप भी हमारे इस हिन्दू जन-जागृति अभियान का हिस्सा नहीं बनना चाहेंगे? अगर हाँ ! तो आप इस दिशा में क्या करेंगे? हो सकता है कि आपको मेरी यह भाषा कुछ अटपटी अवश्य लगे, लेकिन मेरी मज़बूरी है कि जिस प्रश्न ने कुछ अरसे से मेरी रातों की नींद को उड़ा रखा है, उस से हम सभी की जिंदगी के अलावा हमारी आने वाली पीढ़ियों की जिंदगी और भविष्य भी तो जुड़े हुए हैं। क्यूँकि मैं तो स्वयं ही उम्र के उस पड़ाव पर हूँ, जहाँ से उस दौर को देख पाने का मौका शायद ही मुझे मिले। इसलिए इस सन्देश को आपके अभी पढ़ने या न पढ़ने से मुझे तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन हमारी भावी पीढ़ियों का भविष्य तो फिर भी उससे जुड़ा हुआ है। वैसे भी आप मुझसे तो झूठ भी बोल सकते हैं, लेकिन क्या अपने आप से या अपनी अंतरात्मा से भी झूठ बोल पाएँगे? इसलिए इसे पढ़ने के बाद फैसला भले ही कुछ भी करें, लेकिन एक बार पूरा पढ़ें जरूर, क्यूँकि तब आप न तो किसी थोथी धर्मनिरपेक्षता के अँधेरे में जियेंगे और न ही किसी से यह कह सकेंगे कि आपको वस्तुस्थिति का ज्ञान ही नहीं था। आखिर को यह हम सभी के अस्तित्व का प्रश्न जो है?
कहा जाता है कि जब कोई बात पढ़कर अथवा बोलकर बार-बार दोहराई जाती है, तब वो बात हमारे अवचेतन मन में गहरे तक बैठ जाती है। तब क्यों न हम अपनी भारतीय संस्कृति की नीचे लिखी हुई कुछ अच्छी बातों को दोहराएं, जिससे हमारे व्यक्तित्व का उचित विकास हो और हम अपने राष्ट्र के सर्वांगीण विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकें?
"श्रीमद भगवद्गीता में भगवान श्री कृष्ण ने स्पष्ट कहा है कि न्याय-अन्याय अथवा धर्म-अधर्म की लड़ाई में बीच का कोई मार्ग ही नहीं होता अर्थात कोई भी पक्ष जो न्याय का समर्थक है, तो उसे अन्याय के प्रतिकारस्वरूप पूरी तरह से न्याय के साथ खड़े होना चाहिए। इसी प्रकार जो कोई भी पक्ष धर्म या न्याय के पक्ष में नहीं है, तो उसे परोक्ष-अपरोक्ष रूप से अन्याय का समर्थन करने वाला ही मानना चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण ने आगे इस बात को भी स्पष्ट किया है कि अधर्मियों से समाज एवं धर्म की रक्षा के लिए अधर्मियों के खिलाफ किये गए किसी भी प्रकार के छल-बल एवं हिंसा के प्रयोग को पाप की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। लेकिन उसका उद्देश्य केवल और केवल धर्म की स्थापना ही होना चाहिए।"
"कोई भी धर्म राष्ट्र-धर्म अथवा देशभक्ति से बड़ा नहीं होता। किसी भी प्रकार के देशद्रोह की केवल एक ही सजा मृत्यु-दंड होनी चाहिए। जिस देश अथवा राज्य की अधिकांश जनता कायर हो, वहां विदेशी शक्तियों अपना आधिपत्य अधिक आसानी से जमा पाती हैं। अन्याय करने वाले से उस अन्याय को चुपचाप सहने वाला अधिक दोषी होता है, जिसके कारण समाज में कायरता बढ़ती है और अन्यायी को बल मिलता है। अतः अन्याय का प्रतिकार अवश्य करें व् अपने बच्चों एवं छोटे भाई-बहनों को भी अन्याय का प्रतिकार करने की ही शिक्षा दें।"
"जैसे काली से काली घटाएँ भी सूर्य के प्रकाश को बिखरने से अधिक समय तक रोक नहीं सकती, उसी प्रकार झूठ को कैसी भी चाशनी में लपेट कर परोसने या सत्य को सात तालों के भीतर कैद करने पर भी सत्य को छिपाया अथवा दबाया नहीं जा सकता। और झूठ के सारे अंधकार को चीर कर एक न एक दिन सच का सूरज निकलता जरूर है। सत्य एवं अहिंसा के पथ पर चलना कुछ कठिन भले ही हो, लेकिन केवल सत्य और अहिंसा का मार्ग ही सर्वश्रेष्ठ होता है, इसलिए सदा सत्य बोलने की कोशिश करें। सत्य को बोलने का सबसे बड़ा फायदा ये है कि आपको कोई भी बात याद नहीं रखनी पड़ती, जबकि एक झूठी बात को छिपाने के लिए कभी-कभी सैंकड़ों झूठ बोलने पड़ते हैं। लेकिन एक बात अवश्य याद रखें कि सत्य और अहिंसा कायरों के हथियार नहीं, अतः अपनी कायरता को छिपाने के लिए इनका सहारा लेकर अपने बच्चों एवं समाज को मूर्ख बनाना अपने आपको धोखा देने जैसा ही है।"
"साफ़ दिल, नेक नियत और सही इरादे से किये जाने वाले हर काम में परमात्मा स्वयँ आपके साथ रहते हैं !"
"दूसरों के साथ वो व्यवहार कभी न करें, जो आप स्वयं अपने लिए नहीं चाहते !"
"याद रखें कि हमारा चरित्र उस भव्य इमारत की भांति होता है, जिसे बनाने में तो कभी-कभी बरसों लग जाते हैं, लेकिन गिराने में केवल कुछ पल की ही देरी लगती है। ठीक उसी प्रकार चरित्र निर्माण हिमालय पर चढ़ने के समान दुर्गम है, परंतु गिरने के लिए केवल हमारा एक गलत कदम ही पर्याप्त है !"
"प्रकृति का यह नियम है कि संसार में जो कुछ भी हल्का है, वही ऊपर उठता है। इसलिए अपने उत्थान के लिए अपने अंदर के अहंकार को निकाल कर अपने आपको हल्का करें !"
"वैसे तो कुछ भी बोलकर अपने शब्द वापस लेना दोगले नेताओं का ही चलन है, फिर भी आप अपने लफ़्ज़ों को तोलकर बोलिए ! ताकि कभी वापस भी लेने पढ़ें तो वजन न लगे !"
"इस देश में पैदा होने, यहाँ की आबो-हवा में खेल-कूद कर पले बढे होने के कारण इस देश के प्रति हमारे कुछ फ़र्ज़ व् क़र्ज़ होते हैं। यदि आप के मन में अपने इस देश के प्रति प्रेम और आदर की भावना न हो, यदि यहाँ का नागरिक होने के बावजूद आप अपने उन कर्तव्यों का पालन ठीक से नहीं करते, अपने माता-पिता, बुजुर्गों एवं गुरुजनों को यथोचित सम्मान नहीं देते व् केवल दूसरों में मीन-मेख निकालकर ही आप अपना जीवन व्यतीत करते हैं, तो निश्चय ही आप इस देश की धरती पर बोझ और इंसानियत के नाम पर कलंक हैं !"
"Inactivity and idleness are the signs of a dead body ! if you have got any free time, don't just waste it. You can utilize the same for the sake of the betterment of society, mankind and work for the national interests."
"निष्क्रियता और आलस्य एक मृत शरीर की पहचान है ! यदि आप के पास खाली समय है, तो इसे व्यर्थ बर्बाद मत करो। आप अपने खाली समय का सदुपयोग समाज, मानवता की बेहतरी और राष्ट्रीय हितों के लिए काम करके भी कर सकते हैं !"
प्रिय मित्रों एवं बच्चों !
आप सभी इस बात से भली भांति परिचित हैं कि नेताओं की बातों पर आँख मूँद कर विश्वास करने वालों का हश्र सदा बुरा ही होता है। सोचो कि भगवान ने हम सभी को बुद्धि और दिमाग किसलिए दिए हैं, यदि हम उनका इस्तेमाल ही न करें? और आप सब भी तो इस बात से सहमत हैं कि विश्व के समस्त नेताओं की प्रवृति तो गिरगिट जैसी होती है, पल-पल में ही बदल जाती है। इससे ज्यादा दुखद और क्या होगा कि भारतीय नेताओं के कारण तो बेचारे गिरगिटों को भी बहुत बड़ी मात्रा में आत्महत्या करनी पड़ रही है क्यूँकि उनका कहना है कि जितनी देर उन्हें ये सोचने में लगती है कि अपना अगला रंग क्या बदलूँ, उतनी देर में तो कुछ भारतीय नेता अपना बयान तीन बार बदल लेते हैं।
भारत एक हिन्दू बहुल देश होते हुए भी यहाँ कदम कदम पर हमारे हिन्दू धर्म को अपमानित होना पड़ता है, साथ ही कुव्यवस्था के कारण यह देश भी एक बार फिर से विनाश और विभाजन की ओर अग्रसर होता प्रतीत हो रहा है। इन सब बातों के अलावा कुछ मुस्लिम देशों में पिछले कुछ समय से हिन्दू व् गैर-मुस्लिम लोगों के साथ दुर्व्यवहार, सामूहिक जन-सँहार और जबरन धर्मान्तरण की अनगिनत घटनाओं के बाद इस देश को भी एक मुस्लिम देश बनाने की उठती मांग ने हमें सकते में डाल दिया है और सोचने पर मज़बूर कर दिया है कि नेहरू और गांधी की बेवकूफी और साज़िश के कारण क्या भारत और हिंदुत्व का अस्तित्व इस दुनिया से ही खत्म होने जा रहा है?
यह बात मात्र कपोल-कल्पना समझ कर सिर्फ लापरवाही में हंसी में ही उड़ा देने की नहीं है, अपितु इस पर ठन्डे दिमाग से बैठ कर मंथन करने की आवश्यकता है। क्यूँकि दुनिया का इतिहास इस बात का गवाह है कि दुनिया के नक़्शे में पहले जितने भी हिन्दू धर्म पर चलने वाले देश थे, भारत और नेपाल जैसे इक्का दुक्का देश के अलावा उन सभी का अस्तित्व आज खतम हो चूका है और वो सभी न सिर्फ आज कट्टर इस्लामिक में गिने जाते हैं, बल्कि जो देश हिन्दू जनसँख्या की बहुलता से हिन्दू देशो की श्रेणी में गिने जाते थे, आज वहाँ हिन्दू ढूंढने से भी नहीं मिलते, क्यूँकि वहां न सिर्फ हिन्दू सभ्यता और संस्कृति के प्रतीकों ही नष्ट किया गया, बल्कि वहाँ के मूल निवासी हिन्दुओं का अस्तित्व भी समाप्त कर दिया गया है। जो कुछ थोड़े बहुत अपनी जान बचाने में कामयाब भी हुए, उन्हें अपने अस्तित्व को बचाने के लिए अपने ही देश से अपनी समस्त चल-अचल संपत्ति को त्याग कर पलायन करना और संसार के विभिन्न हिस्सों में जा कर बसना पड़ा है।
कांग्रेस और उसके सहयोगियों की कुनीतियों, मुस्लिम चाटुकारिता और दुर्व्यवस्था के कारण न सिर्फ मुस्लिम समाज के अपराधी प्रवृति के लोगों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं, जिसका सीधा असर हमारे हिन्दू समाज और उस की बहु-बेटियों की सामाजिक सुरक्षा पर पड़ रहा है। आये दिन देश में बढ़ते जा रहे सामूहिक बलात्कार के किस्से और थोड़े थोड़े अंतराल पर देश के विभिन्न भागों में होते दंगे इसके ज्वलंत उद्दाहरण हैं।
महत्वपूर्ण सन्देश
भारत का एक जल्द से जल्द एक हिन्दू राष्ट्र बनना जरुरी क्यों?
क्या आप नहीं जानते कि आज़ादी के बाद से आज तक भारत के छह करोड़ से भी अधिक हिन्दुओं को जोर-जबरदस्ती से या लालच देकर मुस्लिम अथवा क्रिश्चियन बनाया जा चूका है?
क्या कीजियेगा, आज से 20-30 साल बाद जब भारत भी एक इस्लामिक देश बन जायेगा? आप अपनी जान देंगे, विदेश चले जायेंगे या कि अपने बच्चों सहित मुस्लिम बन जायेंगे? लेकिन तब भी सुरक्षा की क्या गारंटी है, क्यूँकि जो सुन्नी मुस्लिम लोग आज अपने ही उस शिया समुदाय को भी ठिकाने लगाने पर तुले हुए हैं, जो उन्हीं के इस्लाम का सदियों पुराना हिस्सा है, फिर क्या भरोसा कि कल को वो धर्म परिवर्तन से अपनी जान बचाने वालों को भी जिन्दा छोड़ेंगे या नहीं?
क्या आप नहीं जानते कि हिन्दू बहुल भारत होते हुए भी झारखण्ड के पहले से नक्सली पीड़ित रहे ख़ास भाग में आतंकवादियों द्वारा वहाँ रहने वाले हिन्दुओं को इलाका खाली करने या जान माल से हाथ धोने की धमकी भरे सन्देश भेजे जा चुके हैं, जिसकी चर्चा न्यूज़ चैनल की भी सुर्खियां बनी?
क्या कश्मीर को २५ साल पहले ही हिन्दुओं से खाली नहीं कराया जा चूका है? क्या आप नहीं जानते कि आज अरुणाचल और आसाम आदि राज्यों के कुछ मुस्लिम बहुल खास इलाकों में से भी लाखों की संख्या में हिन्दुओं का पलायन जारी है?
क्या आप पश्चिम बंगाल, केरल, अरुणाचल और आसाम के कुछ मुस्लिम बहुल खास इलाकों में रहने वाले हिन्दुओं की सैंकड़ों-हज़ारों की संख्या में आगजनी आदि से हुई जान माल की क्षति की अनगिनत बार की घटनाओं से वाकिफ नहीं, जिसके कारण आज केरल में हिन्दू नाममात्र ही बचे हैं?
क्या आप नहीं जानते कि बांग्लादेश बनने अर्थात 1971 से भारत के बहुसंख्यक हिन्दू समुदाय को अल्प संख्या में लाने और बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठियों द्वारा यहाँ भारत में मुस्लिम जनसँख्या को बढ़ाने की एक सोची समझी साज़िश चल रही है, जिसके तहत बांग्लादेश बनने अर्थात 1971 से अब तक इसी साज़िश को अंजाम देने के लिए बांग्लादेश से सात करोड़ से भी अधिक मुसलमानों को अनाधिकृत रूप से भारत में प्रवेश कराया जा चूका है, जिसका साथ लालू,मुलायम और मायावती और ममता बैनर्जी के अलावा सम्पूर्ण कांग्रेस के नेता भी बखूबी दे रहें हैं। इसीलिए ये सभी अक्सर ही उन बांग्लादेशी घुसपैठियों को वापस बांग्लादेश भेजने के प्रश्न पर भड़क जाते हैं, क्यूँकि उनमें से अधिकांश को तो अपना वोट बैंक बढ़ाने की खातिर ये लोग पहले ही भारत की नागरिकता दे भी चुके हैं। यदि बांग्लादेशी घुसपैठियों की वापसी पर सख्ती से अमल होता है, तो इन सबकी ये साज़िश भी सामने आ जाएगी।
क्या आप नहीं जानते कि बांग्लादेश में वहाँ रहने वाले बंगाली हिन्दुओं पर कैसे कैसे कहर ढाये जा रहे हैं, जिसके कारण वो लोग भी वहाँ से पलायन करने पर मज़बूर हैं?
क्या आप नहीं जानते कि पाकिस्तान में अपनी चल-अचल धन-संपत्ति छोड़कर अपनी जान बचाने की खातिर वहाँ के हिन्दुओं को लाखों की संख्या में भारत के राजस्थान आदि में शरण लेनी पड़ी है, जो किसी भी कीमत पर वापस पाकिस्तान जाने को तैयार नहीं? उन लाखों हिन्दुओं को तो यहाँ के मूल निवासी होने पर भी आज तक भारत की नागरिकता नहीं दी गई है, जबकि इन लालू, मुलायम मायावती और ममता बैनर्जी आदि के शासनकाल में और कांग्रेस शासित प्रदेशों में कांग्रेस के इशारे पर करोड़ों की संख्या में बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठियों को यहाँ की नागरिकता दे दी गई है, आखिर क्यों?
आप चाहे लड़कें हों या लड़की हों, आदमी हों या औरत हों, जवान हों या बूढ़े हों, अमीर हों या गरीब हों, नेता हों या अभिनेता हों, कर्मचारी हों या व्यापारी हों, जज हों या वकील हों, भले ही हम लोग कितने भी पढ़े लिखे हों या बिलकुल अनपढ़ हों लेकिन यदि हम हिन्दू हैं तो क्या यह हमारा फ़र्ज़ नहीं बनता कि हम अपने अपने लेवल पर हम में से हर एक का यह कर्तव्य बनता है कि अपने से मिलने जुलने वाले हर एक व्यक्ति से संसार के सभी 56 हिन्दू देशों के इस्लामिक देश बनने और वहां के मुस्लिम्स के द्वारा वहां उन देशों में रहने वाले हिन्दुओं के ऊपर किये जा रहे जुल्मों-सितम व् अत्याचारों के बारे में बातचीत अवश्य करें, क्यूँकि यह न केवल आपके और आपकी ही बल्कि उन सभी की आने वाली पीढ़ियों की भी जिंदगी का प्रश्न है, जिनसे आप इस बारे में बातचीत करेंगे।
कभी यहाँ की भोली भाली जवान व् खूबसूरत लड़कियों की मासूमियत और नासमझी/अनभिज्ञता का लाभ उठाकर उन्हें लव-जेहाद जैसे हथकंडों में फंसाया जाता है, जिसमें कभी कभी तो अपने आपको जरुरत से ज्यादा मॉडर्न व् समझदार समझने वाली पढ़ी-लिखी मगर हकीकत में निहायत ही बेवकूफ किस्म की लड़कियां भी फंस जाती हैं, जिनका परिणाम अक्सर ही समाचार-पत्रों में चर्चा का विषय बन जाया करता है तो कभी कभी उनकी यह आधुनिकता भरी समझ उन्हें आत्महत्या की कगार तक भी पहुँचा देती है।
कभी इन लोगों के द्वारा कभी यहाँ हिन्दुओं के गरीब व् अनपढ़ तबके खासकर पिछड़ी जाति के लोगों को ऊँची जाति के लोगों के खिलाफ भड़काया जाता है। मुसीबत तो यह है कि इन तथाकथित पिछड़ी जातियों के पढ़े-लिखे लोग भी बिना कुछ सोचे समझे ही इन लोगो की हाँ में हाँ मिला देते हैं, जिसका परिणाम यह होता है कि उस समय वहाँ मौजूद अन्य गरीब व् अनपढ़ लोग उनकी बात को सही समझकर खुद अपने ही हिन्दू धर्म की जड़ें खोदने का काम शुरू कर देते हैं।
कभी सोचा है कि ऐसा सिर्फ हिन्दू धर्म के लोगों के साथ ही क्यों किया जाता है? क्या आपको पता है कि समस्त संसार के अधिकांश देश या तो क्रिश्चियन हैं या इस्लामिक अथवा मुस्लिम देश। जबकि हमारा सनातन हिन्दू धर्म संसार में तीसरा सबसे अधिक माना जाने वाला धर्म होते हुए भी बहुसंख्यक हिन्दुओं का इकलौता देश यह भारत ही है या नाममात्र का छोटा सा गरीब देश नेपाल। इस्लाम व् क्रिश्चयन दोनों ही धर्म किसी भी प्रकार से समस्त संसार के ताकतवर देशो पर अपनी हुकूमत चाहते हैं, ताकि संसार के बाकी कमज़ोर देशों को अपनी आधीन कर सकें या इच्छानुसार चला सकें। और यही इच्छा इन दोनों धर्मों की भारत के बारे में भी है।
इसलिए अभी से सोच लीजिये कि आपको भविष्य में हिन्दू बनना है या क्रिश्चियन। मुसलमान आपको मार-मार कर मुस्लिम बनाएंगे और क्रिश्चियन लालच देकर। लेकिन फायदा क्रिश्चियन बनने में है, क्यूँकि क्रिश्चियन देश लूटते भले ही हों, लेकिन वो किसी को जान से नहीं मारते। वो बात अलग है कि वो आपको लालच देकर क्रिश्चियन बनाने की कोशिश करेंगे। बन गए तो ठीक वर्ना मुसलमान आपको मुसलमान बना देंगे या मार देंगे। लेकिन भारत में रह कर हिन्दू आप किसी भी हालत में नहीं रहेंगे, क्यूंकि तब तक तो यह एक इस्लामिक देश बन चुका होगा। जिसका सबसे बड़ा सबूत संसार के सभी हिन्दू 56 देशों का पहले ही इस्लामिक देशों में तब्दील होना है और पिछले साल 15 अगस्त को भारत को एक इस्लामिक देश बनाने की मांग केरल में उठ भी चुकी है, जिसके फोटोज आप मेरी पुरानी पोस्ट्स में भी देख सकते हैं।
इनका केवल एक ही मकसद है कि किसी भी प्रकार से यहाँ के बहुसंख्यक हिन्दू आपस में लड़ें, कमज़ोर हों और उनका हिन्दू धर्म से मोह भंग हो सके और वो यहाँ के बहुसंख्यक हिन्दुओं को अल्प संख्यक बना सकें, ताकि अपनी सुविधानुसार जब जी चाहे इसे एक क्रिश्चियन या इस्लामिक देश में परिवर्तित किया जा सके। जबकि अमीर गरीब या ऊँच-नीच की ये जातिगत विसंगतियाँ किस धर्म में नहीं हैं? क्या क्रिश्चियन व् इस्लाम में नहीं हैं? क्या क्रिश्चियन धर्म में रोमन कैथोलिक व् प्रूटेस्टेंट नहीं होते? क्या उनमें आपस में शादियाँ आसानी से हो जाती हैं, फिर यह तोहमत केवल हिन्दू धर्म पर ही क्यों लगायी जाती है? क्या इस्लाम में शिया-सुन्नी नहीं होते, जिनमें संसार के सभी कोनों में अक्सर ही मुठभेड़ भी होती रहती हैं?
क्या उनमें विभिन्न जातियां नहीं होती? और तो और जो लोग धर्म परिवर्तन करके मुसलमान बन भी जाते हैं, उन्हें भी इस्लाम को शुरू में ही अपनाने वाले लोग भी दोयम दर्जे का मुसलमान यांनी मुहाजिर कहते हैं। मुस्लिम वर्ग के लोग दिल्ली तो इन मुठभेड़ों का खास गवाह रहा है, जब कुछ साल पहले तक भी मुहर्रम के अवसर पर इस्लाम के इन दोनों वर्गों के लोग ताजिये निकलते वक्त अक्सर ही भिड़ जाया करते थे।
क्रिश्चियन देशों में और मुस्लिम देशों में सबसे बड़ा अंतर यही है कि क्रिश्चियन धर्म वाले देश अन्य गरीब देशों के लोगों को अपरोक्ष रूप से लूट-लूट कर अमीर बनना चाहते हैं, तो मुस्लिम धर्मानुयायी अपराध के रस्ते दूसरे धर्मानुयायियों की धन-संपत्ति आदि को हड़प कर के अमीर बनना चाहते हैं, जिसका सबसे बड़ा उद्दाहरण कश्मीर, बांग्लादेश और पाकिस्तान सहित सभी मुस्लिम देशों में गैर-मुस्लिम लोगों खासकर हिन्दुओं को मार-पीट कर, उन्हें मारकर अथवा वहां से खदेड़ कर उनकी संपत्ति पर कब्ज़ा किया जाना है।
भारत के कश्मीर से हिन्दू 25 साल पहले ही भगा दिए गए, जो आज तक देश के विभिन्न भागों में खानाबदोशों की जिंदगी बसर कर रहे हैं। केरल, आंध्र आदि में ओवैसी भाइयों की दादागिरी तो जगजाहिर है ही, इसके अलावा पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश व् महाराष्ट्र आदि राज्यों के बहुत बड़े भागों को आजकल वहाँ रहने वाले हिन्दुओं ने ही मिनी पाकिस्तान का नाम भी दे दिया है, क्यूँकि वहां केवल मुस्लिम्स की ही हुकूमत चलती है।
कश्मीर पहले ही खाली करवा चुके हैं, झारखण्ड के बहुत बड़े भाग में तो ISIS के आतंकवादियों द्वारा हिन्दुओं को घर छोड़कर चले जाने की धमकी के पर्चे भी समाचारों में आ ही चुके हैं और अरुणाचल एवं आसाम आदि में से भी कश्मीर की तर्ज पर हिन्दुओं का पलायन लगातार जारी है।
अब यह फैसला आपको करना है कि आप मुसलमान बनना चाहते हैं या क्रिश्चियन, क्यूँकि आपको जिन्दा रहने के लिए या तो आपको किसी क्रिश्चियन देश में जा कर बसना होगा या आपको इन दोनों में से एक को तो अवश्य ही चुनना होगा। वर्ना आने वाले 30 साल के बाद तो आपकी भावी पीढ़ी का अंत तय है।
इस सबसे बचने का केवल एक ही मार्ग है कि न सिर्फ इस समस्या के बारे में अपने सभी जानकारों, मित्रों व् रिश्तेदारों आदि से अक्सर चर्चा ही करेंगे, बल्कि हम सभी आज से ही ये प्रण करें कि ये हालात काबू में आने और इस देश को हिन्दू राष्ट्र घोषित होने तक आज के बाद भारत के किसी भी हिस्से में होने वाले सभी प्रकार के स्थानीय निकायों, वहाँ की विधान सभाओं और केंद्र सरकार के लिए लोकसभा के सभी चुनावों में केवल अपने देशभक्त हिन्दू नेताओं और अपने हिन्दू संगठनों जैसे - भाजपा, शिव-सेना, विश्व हिन्दू परिषद, आरएसएस, बजरंगदल आदि के नेताओं को ही अपना वोट देकर चुनेंगे। ताकि हमारे इन हिन्दू संगठनो के हाथ मज़बूत हों और इनके ज़रिये हम इस देश को वो विषम एवं दुखदायी परिस्थितियां आने से पहले ही जल्दी से जल्दी भारत को एक हिन्दू राष्ट्र घोषित करवा सकें।
इससे पहले कि मुस्लिम मैजोरिटी में आकर यहाँ उत्पात मचाएं और इस देश को एक इस्लामिक देश बना पाएं, उससे पहले ही हम सबकी यह कोशिश होनी चाहिए कि अपने सभी जानकारों को यह मैसेज और सन्देश देकर समस्त भारत में भाजपा की सरकार बनाकर इस देश को भाजपा के ज़रिये एक हिन्दू राष्ट्र में ही बदल दिया जाएँ, क्यूँकि इस बात को तो सभी जानते हैं कि भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने का सपना केवल भाजपा, आरएसएस और अन्य हिन्दू संगठन ही देखते हैं।
आप यह भी सोच सकते हैं कि कहीं मैं कोई भाजपा समर्थक तो नहीं? हकीकत तो यही है कि मैं कोई भाजपा समर्थक नहीं हूँ, लेकिन अगर होता भी उससे क्या फर्क पड़ जाता? अगर मैं मुस्लिम संगठनो को भी समर्थन करूँ, तो उससे भविष्य में हिन्दुओं और हिंदुस्तान पर आने वाला यह संकट क्या टल जायेगा?
हम आपको कोई आतंकवादी बनने के लिए तो नहीं कह रहे न? बल्कि हम तो आपको केवल इस बात का एहसास कराना चाहते हैं कि इस तथाकथित थोथी धर्मनिरपेक्षता की नीति में क्या रखा है? जबकि प्रथम तो धर्मनिरपेक्षता का अर्थ ही सभी धर्मों को एक समान अधिकार एवं एक समान न्याय देना ही होता है, लेकिन क्या भारत में कभी वास्तव में ऐसा होता भी है?
नहीं होता, उसके दो ही कारण हैँ - पहला कारण कि मुस्लिम खुद ही इसे कभी नहीं मानते और दूसरा कारण यह कि अपने आपको धर्मनिरपेक्ष कहने वाले कांग्रेस और उसके सभी सहयोगी दलों के मुस्लिमपरस्त नेताओं ने इस धर्मनिरपेक्षता की नीति को केवल मुस्लिम तुष्टिकरण और हिन्दुओं के अपमान का ही जरिया बनाकर छोड़ दिया है।
फिर क्या दिया है हमें इस धर्मनिरपेक्षता की नीति ने? केवल हम हिन्दुओं को अपने हिन्दू भाइयों से उन थोथे सिद्धांतों के लिए लड़कर अपने ही हिन्दू धर्म और अपने ही देश की जड़ें खोदना ही सिखाया है, वरना न तो यह देश कभी किसी का ग़ुलाम बनता और न ही ये विषम परिस्थितियां कभी हमारे व् हमारे बच्चों के सामने आती?
हम आपसे कोई यह तो कह नहीं रहे कि आइये ! हम और आप सभी हिन्दू एकजुट होकर मुसलमानों का कत्लेआम करेंगे? हमारे हिन्दू धर्म और हमारे घर-परिवारों में यह नीचता या बर्बरता तो कभी भी सिखाई नहीं जाती। लेकिन कम से कम मौजूदा हालात में हम सभी एकजुट होकर ऊपर बताये हुए इस उपाय पर अमल करके इसके ज़रिये अपने देश में आने वाले संकट से तो निपट सकते हैं ना?
और हाँ एक बात यह भी याद रखियेगा कि अकेले मोदी जी भी इस विषय में कुछ खास नहीं कर पाएंगे, जब तक कि आप उन जैसे ही कुछ कट्टर देशभक्त और कट्टर हिन्दू नेताओं को उनका इस मुहीम में साथ देने के लिए नहीं चुनते। क्यूँकि हो सकता है कि भारत को एक हिन्दू देश बनाने की घोषणा होते ही मुसलमान सारे भारत में एक बार जोर-शोर से दंगा फैलाने की कोशिश करें? जिसको काबू करने के लिए सारे भारत में सशक्त भाजपा और कट्टर पंथी हिन्दू नेताओं के हाथ में वहां की सत्ता अवश्य होनी चाहिए, खासकर उन प्रदेशों में, जिनमें वहाँ के लोग बड़े भाग को मिनी पाकिस्तान का नाम पहले ही दे चुके हैं, ताकि किसी भी समुदाय के जान-माल की ज्यादा हानि न हो सके।
अपने मुस्लिम मित्रों को भी आप यह कहकर भारत को एक हिन्दू राष्ट्र बनाने की इस मुहीम में भाजपा का साथ देने के लिए संतुष्ट कर सकते हैं कि हमारा इतिहास भी इस बात का गवाह है कि प्राचीन काल से आज तक कभी किसी भी हिन्दू राजा ने गैर हिन्दुओं पर अत्याचार नहीं किये, वरना यहाँ कभी कोई दूसरा धर्म पनप ही नहीं पाता, जबकि बाबर, महमूद गजनवी, चंगेज़ खान, तैमूरलंग, मुहम्मद गौरी और औरंगज़ेब समेत न जाने कितने ही मुस्लिम बादशाहों के द्वारा हिन्दू मंदिरों को तोड़ने, उन्हें लूटने और यहाँ की हिन्दू प्रजा पर जुल्मो-सितम के किस्से तो इतिहास में भरे पड़े हैं।
उन्हें इस बात का भरोसा दिलाइये कि हिन्दू राष्ट्र बनने के बाद भी उनके साथ किसी किस्म का कोई भेदभाव नहीं किया जायेगा। अगर मेरी बात आपको ठीक से समझ में आ पायी हो, तो आप इसे आगे भी शेयर कर सकते हैं। आप मेरी किसी भी पोस्ट के व्यूज को देखकर सुनिश्चित कर सकते हैं, कि मेरी हर पोस्ट को हज़ारों लोग अवश्य देखते हैं। इसलिए अपने इस मैसेज को इस पोस्ट के ज़रिये हज़ारों लोगों को भेज कर अपने हिस्से का अपना काम मैं तो कर चुका हूँ।
आगे का काम आपका है कि यह मैसेज आप अपने आगे के हज़ारों लोगों को कैसे भेज पाते हैं अथवा उन्हें भी यह हकीकत कैसे समझा पाते हैं? चाहें तो इसके लिए आप इस मैसेज के हज़ारों प्रिंट छपवा कर भी यह काम आसानी से कर सकते हैं। लेकिन सावधान ! कांग्रेस व् अन्य राजनीतिक पार्टियों से जुड़े हुए लोगों और कट्टर मुसलमानों से बचकर, क्यूँकि इससे उनकी इस देश को मुस्लिम देश बनाने की साज़िश नाकाम जो हो सकती है, तो ज़ाहिर है कि मेरी तरह आप भी उनकी नज़रों में खटक सकते हैं।
क्या आप नहीं जानते कि भारत में भाजपा व् अन्य हिन्दू संगठनो के नेताओं को छोड़कर अन्य सभी नेता, मीडिया, अन्य वर्गों/धर्मों के लोग व् मुस्लिम समुदाय सहित समाज के सभी ताकतवर तबके न केवल कदम कदम पर हिन्दू धर्म के बारे में तरह तरह की उल-जुलूल बातें फैलाने की भरसक कोशिश ही करते हैं, बल्कि अक्सर यह भी देखने में आता है कि ये सभी लोग व् नेता जब कभी उन्हें हिन्दुओं को किसी भी बात पर नीचा दिखाने और अपमान करने का मौका मिलता है, तो उसमें अपनी तरफ से कोई कसर भी बाकी नहीं छोड़ते? इसका भी एक कारण है कि इनमें से अधिकाँश नेता व् मीडिया कर्मी या तो मुसलमान बन ही चुके हैं या बनने को तैयार बैठे हैं, जिसका खुलासा हम पहले की कई पोस्ट्स में भी कर चुके हैं। लेकिन फैसला तुरंत अवश्य करें, वरना देर होने पर तो पछताने का भी कोई फायदा नहीं होगा।
- उमा शंकर पराशर
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मित्रों ! बीच में मुझे एक बार यह शिकायत भी सुनने को मिली थी कि मेरे मैसेज में दिए गए सरफ़रोश देशभक्त के वेब एड्रेस पर क्लिक करने से कभी कभी 404 error भी शो कर देता है, उस अवस्था में आप मेरी प्रोफाइल को ओपन करके उसके अबाउट में लिंक में सरफ़रोश देशभक्त लिखे हुए पर क्लिक कर दें। जिससे वो कम्युनिटी अपने आप ओपन हो जाएगी। 
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सत्यम शिवम् सुन्दरम ! जय हिन्द, जय भारत ! वंदे मातरम !
"विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊंचा रहे हमारा"
प्रिय मित्रों व् बच्चों !
आप लोगों से मेरी विनती है कि मेरी किसी भी पोस्ट को केवल पढ़ने के पश्चात ही लाइक या शेयर करें। मुझे अफ़सोस है कि मेरी किसी भी पोस्ट में आपके मनोरंजन की कोई भी बातें नहीं होती, बल्कि इनमें केवल अपने देश और देशभक्ति से जुड़ी हुई बातें ही होती हैं, इसलिए यदि आपने किसी मनोरंजन की तलाश में मुझे गलती से अपने सर्किल में ऐड कर लिया हो, तो आपको मेरी सलाह है मेरी इस पोस्ट के मैसेज को आगे पढ़ने में भी अपना समय बिलकुल भी व्यर्थ बर्बाद न करें, बल्कि अपने इस समय का प्रयोग भी मुझे अपने सर्किल से तुरंत रिमूव करने में ही करें। लेकिन यदि आप इस देश से ज़रा सा भी प्रेम करते हैं और यह भी मानते हैं कि इस देश का एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते इस देश के प्रति आपके भी कुछ कर्तव्य हैं, तभी मेरे मैसेज को पूरा पढ़ने के बाद ही उस पर अपनी कोई प्रतिक्रिया देंI अन्यथा मेरा समय भी व्यर्थ बर्बाद न करें ! धन्यवाद।
प्रिय मित्रों एवं बच्चों !
ॐ नमः शिवाय ! हर हर महादेव ! भगवान शिव आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करें ! ईश्वर आपको सदा सही राह पर चलायें, जिससे आपका प्रत्येक दिन मंगलमय हो !
मित्रों व् बच्चों !
यदि आप हिन्दू हैं और यह बिलकुल नहीं चाहते कि आने वाले समय में कभी भी आपको या आपके बच्चों को जबरन मुसलमान बनना पड़े, तो मेरे इस मैसेज को खासकर इसके महत्वपूर्ण सन्देश वाले भाग को ऊपर से नीचे तक एक बार अवश्य पढ़ें। और हाँ अगर आपको मेरी बात में सच्चाई नज़र आये अथवा सही लगे, तो यह भी अवश्य ही बताएं कि इस खतरनाक आने वाले भविष्य से अपने सभी बंधु-बांधवों को भी सचेत करने के लिए क्या आप भी हमारे इस हिन्दू जन-जागृति अभियान का हिस्सा नहीं बनना चाहेंगे? अगर हाँ ! तो आप इस दिशा में क्या करेंगे? हो सकता है कि आपको मेरी यह भाषा कुछ अटपटी अवश्य लगे, लेकिन मेरी मज़बूरी है कि जिस प्रश्न ने कुछ अरसे से मेरी रातों की नींद को उड़ा रखा है, उस से हम सभी की जिंदगी के अलावा हमारी आने वाली पीढ़ियों की जिंदगी और भविष्य भी तो जुड़े हुए हैं। क्यूँकि मैं तो स्वयं ही उम्र के उस पड़ाव पर हूँ, जहाँ से उस दौर को देख पाने का मौका शायद ही मुझे मिले। इसलिए इस सन्देश को आपके अभी पढ़ने या न पढ़ने से मुझे तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन हमारी भावी पीढ़ियों का भविष्य तो फिर भी उससे जुड़ा हुआ है। वैसे भी आप मुझसे तो झूठ भी बोल सकते हैं, लेकिन क्या अपने आप से या अपनी अंतरात्मा से भी झूठ बोल पाएँगे? इसलिए इसे पढ़ने के बाद फैसला भले ही कुछ भी करें, लेकिन एक बार पूरा पढ़ें जरूर, क्यूँकि तब आप न तो किसी थोथी धर्मनिरपेक्षता के अँधेरे में जियेंगे और न ही किसी से यह कह सकेंगे कि आपको वस्तुस्थिति का ज्ञान ही नहीं था। आखिर को यह हम सभी के अस्तित्व का प्रश्न जो है?
कहा जाता है कि जब कोई बात पढ़कर अथवा बोलकर बार-बार दोहराई जाती है, तब वो बात हमारे अवचेतन मन में गहरे तक बैठ जाती है। तब क्यों न हम अपनी भारतीय संस्कृति की नीचे लिखी हुई कुछ अच्छी बातों को दोहराएं, जिससे हमारे व्यक्तित्व का उचित विकास हो और हम अपने राष्ट्र के सर्वांगीण विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकें?
"श्रीमद भगवद्गीता में भगवान श्री कृष्ण ने स्पष्ट कहा है कि न्याय-अन्याय अथवा धर्म-अधर्म की लड़ाई में बीच का कोई मार्ग ही नहीं होता अर्थात कोई भी पक्ष जो न्याय का समर्थक है, तो उसे अन्याय के प्रतिकारस्वरूप पूरी तरह से न्याय के साथ खड़े होना चाहिए। इसी प्रकार जो कोई भी पक्ष धर्म या न्याय के पक्ष में नहीं है, तो उसे परोक्ष-अपरोक्ष रूप से अन्याय का समर्थन करने वाला ही मानना चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण ने आगे इस बात को भी स्पष्ट किया है कि अधर्मियों से समाज एवं धर्म की रक्षा के लिए अधर्मियों के खिलाफ किये गए किसी भी प्रकार के छल-बल एवं हिंसा के प्रयोग को पाप की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। लेकिन उसका उद्देश्य केवल और केवल धर्म की स्थापना ही होना चाहिए।"
"कोई भी धर्म राष्ट्र-धर्म अथवा देशभक्ति से बड़ा नहीं होता। किसी भी प्रकार के देशद्रोह की केवल एक ही सजा मृत्यु-दंड होनी चाहिए। जिस देश अथवा राज्य की अधिकांश जनता कायर हो, वहां विदेशी शक्तियों अपना आधिपत्य अधिक आसानी से जमा पाती हैं। अन्याय करने वाले से उस अन्याय को चुपचाप सहने वाला अधिक दोषी होता है, जिसके कारण समाज में कायरता बढ़ती है और अन्यायी को बल मिलता है। अतः अन्याय का प्रतिकार अवश्य करें व् अपने बच्चों एवं छोटे भाई-बहनों को भी अन्याय का प्रतिकार करने की ही शिक्षा दें।"
"जैसे काली से काली घटाएँ भी सूर्य के प्रकाश को बिखरने से अधिक समय तक रोक नहीं सकती, उसी प्रकार झूठ को कैसी भी चाशनी में लपेट कर परोसने या सत्य को सात तालों के भीतर कैद करने पर भी सत्य को छिपाया अथवा दबाया नहीं जा सकता। और झूठ के सारे अंधकार को चीर कर एक न एक दिन सच का सूरज निकलता जरूर है। सत्य एवं अहिंसा के पथ पर चलना कुछ कठिन भले ही हो, लेकिन केवल सत्य और अहिंसा का मार्ग ही सर्वश्रेष्ठ होता है, इसलिए सदा सत्य बोलने की कोशिश करें। सत्य को बोलने का सबसे बड़ा फायदा ये है कि आपको कोई भी बात याद नहीं रखनी पड़ती, जबकि एक झूठी बात को छिपाने के लिए कभी-कभी सैंकड़ों झूठ बोलने पड़ते हैं। लेकिन एक बात अवश्य याद रखें कि सत्य और अहिंसा कायरों के हथियार नहीं, अतः अपनी कायरता को छिपाने के लिए इनका सहारा लेकर अपने बच्चों एवं समाज को मूर्ख बनाना अपने आपको धोखा देने जैसा ही है।"
"साफ़ दिल, नेक नियत और सही इरादे से किये जाने वाले हर काम में परमात्मा स्वयँ आपके साथ रहते हैं !"
"दूसरों के साथ वो व्यवहार कभी न करें, जो आप स्वयं अपने लिए नहीं चाहते !"
"याद रखें कि हमारा चरित्र उस भव्य इमारत की भांति होता है, जिसे बनाने में तो कभी-कभी बरसों लग जाते हैं, लेकिन गिराने में केवल कुछ पल की ही देरी लगती है। ठीक उसी प्रकार चरित्र निर्माण हिमालय पर चढ़ने के समान दुर्गम है, परंतु गिरने के लिए केवल हमारा एक गलत कदम ही पर्याप्त है !"
"प्रकृति का यह नियम है कि संसार में जो कुछ भी हल्का है, वही ऊपर उठता है। इसलिए अपने उत्थान के लिए अपने अंदर के अहंकार को निकाल कर अपने आपको हल्का करें !"
"वैसे तो कुछ भी बोलकर अपने शब्द वापस लेना दोगले नेताओं का ही चलन है, फिर भी आप अपने लफ़्ज़ों को तोलकर बोलिए ! ताकि कभी वापस भी लेने पढ़ें तो वजन न लगे !"
"इस देश में पैदा होने, यहाँ की आबो-हवा में खेल-कूद कर पले बढे होने के कारण इस देश के प्रति हमारे कुछ फ़र्ज़ व् क़र्ज़ होते हैं। यदि आप के मन में अपने इस देश के प्रति प्रेम और आदर की भावना न हो, यदि यहाँ का नागरिक होने के बावजूद आप अपने उन कर्तव्यों का पालन ठीक से नहीं करते, अपने माता-पिता, बुजुर्गों एवं गुरुजनों को यथोचित सम्मान नहीं देते व् केवल दूसरों में मीन-मेख निकालकर ही आप अपना जीवन व्यतीत करते हैं, तो निश्चय ही आप इस देश की धरती पर बोझ और इंसानियत के नाम पर कलंक हैं !"
"Inactivity and idleness are the signs of a dead body ! if you have got any free time, don't just waste it. You can utilize the same for the sake of the betterment of society, mankind and work for the national interests."
"निष्क्रियता और आलस्य एक मृत शरीर की पहचान है ! यदि आप के पास खाली समय है, तो इसे व्यर्थ बर्बाद मत करो। आप अपने खाली समय का सदुपयोग समाज, मानवता की बेहतरी और राष्ट्रीय हितों के लिए काम करके भी कर सकते हैं !"
प्रिय मित्रों एवं बच्चों !
आप सभी इस बात से भली भांति परिचित हैं कि नेताओं की बातों पर आँख मूँद कर विश्वास करने वालों का हश्र सदा बुरा ही होता है। सोचो कि भगवान ने हम सभी को बुद्धि और दिमाग किसलिए दिए हैं, यदि हम उनका इस्तेमाल ही न करें? और आप सब भी तो इस बात से सहमत हैं कि विश्व के समस्त नेताओं की प्रवृति तो गिरगिट जैसी होती है, पल-पल में ही बदल जाती है। इससे ज्यादा दुखद और क्या होगा कि भारतीय नेताओं के कारण तो बेचारे गिरगिटों को भी बहुत बड़ी मात्रा में आत्महत्या करनी पड़ रही है क्यूँकि उनका कहना है कि जितनी देर उन्हें ये सोचने में लगती है कि अपना अगला रंग क्या बदलूँ, उतनी देर में तो कुछ भारतीय नेता अपना बयान तीन बार बदल लेते हैं।
भारत एक हिन्दू बहुल देश होते हुए भी यहाँ कदम कदम पर हमारे हिन्दू धर्म को अपमानित होना पड़ता है, साथ ही कुव्यवस्था के कारण यह देश भी एक बार फिर से विनाश और विभाजन की ओर अग्रसर होता प्रतीत हो रहा है। इन सब बातों के अलावा कुछ मुस्लिम देशों में पिछले कुछ समय से हिन्दू व् गैर-मुस्लिम लोगों के साथ दुर्व्यवहार, सामूहिक जन-सँहार और जबरन धर्मान्तरण की अनगिनत घटनाओं के बाद इस देश को भी एक मुस्लिम देश बनाने की उठती मांग ने हमें सकते में डाल दिया है और सोचने पर मज़बूर कर दिया है कि नेहरू और गांधी की बेवकूफी और साज़िश के कारण क्या भारत और हिंदुत्व का अस्तित्व इस दुनिया से ही खत्म होने जा रहा है?
यह बात मात्र कपोल-कल्पना समझ कर सिर्फ लापरवाही में हंसी में ही उड़ा देने की नहीं है, अपितु इस पर ठन्डे दिमाग से बैठ कर मंथन करने की आवश्यकता है। क्यूँकि दुनिया का इतिहास इस बात का गवाह है कि दुनिया के नक़्शे में पहले जितने भी हिन्दू धर्म पर चलने वाले देश थे, भारत और नेपाल जैसे इक्का दुक्का देश के अलावा उन सभी का अस्तित्व आज खतम हो चूका है और वो सभी न सिर्फ आज कट्टर इस्लामिक में गिने जाते हैं, बल्कि जो देश हिन्दू जनसँख्या की बहुलता से हिन्दू देशो की श्रेणी में गिने जाते थे, आज वहाँ हिन्दू ढूंढने से भी नहीं मिलते, क्यूँकि वहां न सिर्फ हिन्दू सभ्यता और संस्कृति के प्रतीकों ही नष्ट किया गया, बल्कि वहाँ के मूल निवासी हिन्दुओं का अस्तित्व भी समाप्त कर दिया गया है। जो कुछ थोड़े बहुत अपनी जान बचाने में कामयाब भी हुए, उन्हें अपने अस्तित्व को बचाने के लिए अपने ही देश से अपनी समस्त चल-अचल संपत्ति को त्याग कर पलायन करना और संसार के विभिन्न हिस्सों में जा कर बसना पड़ा है।
कांग्रेस और उसके सहयोगियों की कुनीतियों, मुस्लिम चाटुकारिता और दुर्व्यवस्था के कारण न सिर्फ मुस्लिम समाज के अपराधी प्रवृति के लोगों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं, जिसका सीधा असर हमारे हिन्दू समाज और उस की बहु-बेटियों की सामाजिक सुरक्षा पर पड़ रहा है। आये दिन देश में बढ़ते जा रहे सामूहिक बलात्कार के किस्से और थोड़े थोड़े अंतराल पर देश के विभिन्न भागों में होते दंगे इसके ज्वलंत उद्दाहरण हैं।
महत्वपूर्ण सन्देश
भारत का एक जल्द से जल्द एक हिन्दू राष्ट्र बनना जरुरी क्यों?
क्या आप नहीं जानते कि आज़ादी के बाद से आज तक भारत के छह करोड़ से भी अधिक हिन्दुओं को जोर-जबरदस्ती से या लालच देकर मुस्लिम अथवा क्रिश्चियन बनाया जा चूका है?
क्या कीजियेगा, आज से 20-30 साल बाद जब भारत भी एक इस्लामिक देश बन जायेगा? आप अपनी जान देंगे, विदेश चले जायेंगे या कि अपने बच्चों सहित मुस्लिम बन जायेंगे? लेकिन तब भी सुरक्षा की क्या गारंटी है, क्यूँकि जो सुन्नी मुस्लिम लोग आज अपने ही उस शिया समुदाय को भी ठिकाने लगाने पर तुले हुए हैं, जो उन्हीं के इस्लाम का सदियों पुराना हिस्सा है, फिर क्या भरोसा कि कल को वो धर्म परिवर्तन से अपनी जान बचाने वालों को भी जिन्दा छोड़ेंगे या नहीं?
क्या आप नहीं जानते कि हिन्दू बहुल भारत होते हुए भी झारखण्ड के पहले से नक्सली पीड़ित रहे ख़ास भाग में आतंकवादियों द्वारा वहाँ रहने वाले हिन्दुओं को इलाका खाली करने या जान माल से हाथ धोने की धमकी भरे सन्देश भेजे जा चुके हैं, जिसकी चर्चा न्यूज़ चैनल की भी सुर्खियां बनी?
क्या कश्मीर को २५ साल पहले ही हिन्दुओं से खाली नहीं कराया जा चूका है? क्या आप नहीं जानते कि आज अरुणाचल और आसाम आदि राज्यों के कुछ मुस्लिम बहुल खास इलाकों में से भी लाखों की संख्या में हिन्दुओं का पलायन जारी है?
क्या आप पश्चिम बंगाल, केरल, अरुणाचल और आसाम के कुछ मुस्लिम बहुल खास इलाकों में रहने वाले हिन्दुओं की सैंकड़ों-हज़ारों की संख्या में आगजनी आदि से हुई जान माल की क्षति की अनगिनत बार की घटनाओं से वाकिफ नहीं, जिसके कारण आज केरल में हिन्दू नाममात्र ही बचे हैं?
क्या आप नहीं जानते कि बांग्लादेश बनने अर्थात 1971 से भारत के बहुसंख्यक हिन्दू समुदाय को अल्प संख्या में लाने और बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठियों द्वारा यहाँ भारत में मुस्लिम जनसँख्या को बढ़ाने की एक सोची समझी साज़िश चल रही है, जिसके तहत बांग्लादेश बनने अर्थात 1971 से अब तक इसी साज़िश को अंजाम देने के लिए बांग्लादेश से सात करोड़ से भी अधिक मुसलमानों को अनाधिकृत रूप से भारत में प्रवेश कराया जा चूका है, जिसका साथ लालू,मुलायम और मायावती और ममता बैनर्जी के अलावा सम्पूर्ण कांग्रेस के नेता भी बखूबी दे रहें हैं। इसीलिए ये सभी अक्सर ही उन बांग्लादेशी घुसपैठियों को वापस बांग्लादेश भेजने के प्रश्न पर भड़क जाते हैं, क्यूँकि उनमें से अधिकांश को तो अपना वोट बैंक बढ़ाने की खातिर ये लोग पहले ही भारत की नागरिकता दे भी चुके हैं। यदि बांग्लादेशी घुसपैठियों की वापसी पर सख्ती से अमल होता है, तो इन सबकी ये साज़िश भी सामने आ जाएगी।
क्या आप नहीं जानते कि बांग्लादेश में वहाँ रहने वाले बंगाली हिन्दुओं पर कैसे कैसे कहर ढाये जा रहे हैं, जिसके कारण वो लोग भी वहाँ से पलायन करने पर मज़बूर हैं?
क्या आप नहीं जानते कि पाकिस्तान में अपनी चल-अचल धन-संपत्ति छोड़कर अपनी जान बचाने की खातिर वहाँ के हिन्दुओं को लाखों की संख्या में भारत के राजस्थान आदि में शरण लेनी पड़ी है, जो किसी भी कीमत पर वापस पाकिस्तान जाने को तैयार नहीं? उन लाखों हिन्दुओं को तो यहाँ के मूल निवासी होने पर भी आज तक भारत की नागरिकता नहीं दी गई है, जबकि इन लालू, मुलायम मायावती और ममता बैनर्जी आदि के शासनकाल में और कांग्रेस शासित प्रदेशों में कांग्रेस के इशारे पर करोड़ों की संख्या में बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठियों को यहाँ की नागरिकता दे दी गई है, आखिर क्यों?
आप चाहे लड़कें हों या लड़की हों, आदमी हों या औरत हों, जवान हों या बूढ़े हों, अमीर हों या गरीब हों, नेता हों या अभिनेता हों, कर्मचारी हों या व्यापारी हों, जज हों या वकील हों, भले ही हम लोग कितने भी पढ़े लिखे हों या बिलकुल अनपढ़ हों लेकिन यदि हम हिन्दू हैं तो क्या यह हमारा फ़र्ज़ नहीं बनता कि हम अपने अपने लेवल पर हम में से हर एक का यह कर्तव्य बनता है कि अपने से मिलने जुलने वाले हर एक व्यक्ति से संसार के सभी 56 हिन्दू देशों के इस्लामिक देश बनने और वहां के मुस्लिम्स के द्वारा वहां उन देशों में रहने वाले हिन्दुओं के ऊपर किये जा रहे जुल्मों-सितम व् अत्याचारों के बारे में बातचीत अवश्य करें, क्यूँकि यह न केवल आपके और आपकी ही बल्कि उन सभी की आने वाली पीढ़ियों की भी जिंदगी का प्रश्न है, जिनसे आप इस बारे में बातचीत करेंगे।
कभी यहाँ की भोली भाली जवान व् खूबसूरत लड़कियों की मासूमियत और नासमझी/अनभिज्ञता का लाभ उठाकर उन्हें लव-जेहाद जैसे हथकंडों में फंसाया जाता है, जिसमें कभी कभी तो अपने आपको जरुरत से ज्यादा मॉडर्न व् समझदार समझने वाली पढ़ी-लिखी मगर हकीकत में निहायत ही बेवकूफ किस्म की लड़कियां भी फंस जाती हैं, जिनका परिणाम अक्सर ही समाचार-पत्रों में चर्चा का विषय बन जाया करता है तो कभी कभी उनकी यह आधुनिकता भरी समझ उन्हें आत्महत्या की कगार तक भी पहुँचा देती है।
कभी इन लोगों के द्वारा कभी यहाँ हिन्दुओं के गरीब व् अनपढ़ तबके खासकर पिछड़ी जाति के लोगों को ऊँची जाति के लोगों के खिलाफ भड़काया जाता है। मुसीबत तो यह है कि इन तथाकथित पिछड़ी जातियों के पढ़े-लिखे लोग भी बिना कुछ सोचे समझे ही इन लोगो की हाँ में हाँ मिला देते हैं, जिसका परिणाम यह होता है कि उस समय वहाँ मौजूद अन्य गरीब व् अनपढ़ लोग उनकी बात को सही समझकर खुद अपने ही हिन्दू धर्म की जड़ें खोदने का काम शुरू कर देते हैं।
कभी सोचा है कि ऐसा सिर्फ हिन्दू धर्म के लोगों के साथ ही क्यों किया जाता है? क्या आपको पता है कि समस्त संसार के अधिकांश देश या तो क्रिश्चियन हैं या इस्लामिक अथवा मुस्लिम देश। जबकि हमारा सनातन हिन्दू धर्म संसार में तीसरा सबसे अधिक माना जाने वाला धर्म होते हुए भी बहुसंख्यक हिन्दुओं का इकलौता देश यह भारत ही है या नाममात्र का छोटा सा गरीब देश नेपाल। इस्लाम व् क्रिश्चयन दोनों ही धर्म किसी भी प्रकार से समस्त संसार के ताकतवर देशो पर अपनी हुकूमत चाहते हैं, ताकि संसार के बाकी कमज़ोर देशों को अपनी आधीन कर सकें या इच्छानुसार चला सकें। और यही इच्छा इन दोनों धर्मों की भारत के बारे में भी है।
इसलिए अभी से सोच लीजिये कि आपको भविष्य में हिन्दू बनना है या क्रिश्चियन। मुसलमान आपको मार-मार कर मुस्लिम बनाएंगे और क्रिश्चियन लालच देकर। लेकिन फायदा क्रिश्चियन बनने में है, क्यूँकि क्रिश्चियन देश लूटते भले ही हों, लेकिन वो किसी को जान से नहीं मारते। वो बात अलग है कि वो आपको लालच देकर क्रिश्चियन बनाने की कोशिश करेंगे। बन गए तो ठीक वर्ना मुसलमान आपको मुसलमान बना देंगे या मार देंगे। लेकिन भारत में रह कर हिन्दू आप किसी भी हालत में नहीं रहेंगे, क्यूंकि तब तक तो यह एक इस्लामिक देश बन चुका होगा। जिसका सबसे बड़ा सबूत संसार के सभी हिन्दू 56 देशों का पहले ही इस्लामिक देशों में तब्दील होना है और पिछले साल 15 अगस्त को भारत को एक इस्लामिक देश बनाने की मांग केरल में उठ भी चुकी है, जिसके फोटोज आप मेरी पुरानी पोस्ट्स में भी देख सकते हैं।
इनका केवल एक ही मकसद है कि किसी भी प्रकार से यहाँ के बहुसंख्यक हिन्दू आपस में लड़ें, कमज़ोर हों और उनका हिन्दू धर्म से मोह भंग हो सके और वो यहाँ के बहुसंख्यक हिन्दुओं को अल्प संख्यक बना सकें, ताकि अपनी सुविधानुसार जब जी चाहे इसे एक क्रिश्चियन या इस्लामिक देश में परिवर्तित किया जा सके। जबकि अमीर गरीब या ऊँच-नीच की ये जातिगत विसंगतियाँ किस धर्म में नहीं हैं? क्या क्रिश्चियन व् इस्लाम में नहीं हैं? क्या क्रिश्चियन धर्म में रोमन कैथोलिक व् प्रूटेस्टेंट नहीं होते? क्या उनमें आपस में शादियाँ आसानी से हो जाती हैं, फिर यह तोहमत केवल हिन्दू धर्म पर ही क्यों लगायी जाती है? क्या इस्लाम में शिया-सुन्नी नहीं होते, जिनमें संसार के सभी कोनों में अक्सर ही मुठभेड़ भी होती रहती हैं?
क्या उनमें विभिन्न जातियां नहीं होती? और तो और जो लोग धर्म परिवर्तन करके मुसलमान बन भी जाते हैं, उन्हें भी इस्लाम को शुरू में ही अपनाने वाले लोग भी दोयम दर्जे का मुसलमान यांनी मुहाजिर कहते हैं। मुस्लिम वर्ग के लोग दिल्ली तो इन मुठभेड़ों का खास गवाह रहा है, जब कुछ साल पहले तक भी मुहर्रम के अवसर पर इस्लाम के इन दोनों वर्गों के लोग ताजिये निकलते वक्त अक्सर ही भिड़ जाया करते थे।
क्रिश्चियन देशों में और मुस्लिम देशों में सबसे बड़ा अंतर यही है कि क्रिश्चियन धर्म वाले देश अन्य गरीब देशों के लोगों को अपरोक्ष रूप से लूट-लूट कर अमीर बनना चाहते हैं, तो मुस्लिम धर्मानुयायी अपराध के रस्ते दूसरे धर्मानुयायियों की धन-संपत्ति आदि को हड़प कर के अमीर बनना चाहते हैं, जिसका सबसे बड़ा उद्दाहरण कश्मीर, बांग्लादेश और पाकिस्तान सहित सभी मुस्लिम देशों में गैर-मुस्लिम लोगों खासकर हिन्दुओं को मार-पीट कर, उन्हें मारकर अथवा वहां से खदेड़ कर उनकी संपत्ति पर कब्ज़ा किया जाना है।
भारत के कश्मीर से हिन्दू 25 साल पहले ही भगा दिए गए, जो आज तक देश के विभिन्न भागों में खानाबदोशों की जिंदगी बसर कर रहे हैं। केरल, आंध्र आदि में ओवैसी भाइयों की दादागिरी तो जगजाहिर है ही, इसके अलावा पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश व् महाराष्ट्र आदि राज्यों के बहुत बड़े भागों को आजकल वहाँ रहने वाले हिन्दुओं ने ही मिनी पाकिस्तान का नाम भी दे दिया है, क्यूँकि वहां केवल मुस्लिम्स की ही हुकूमत चलती है।
कश्मीर पहले ही खाली करवा चुके हैं, झारखण्ड के बहुत बड़े भाग में तो ISIS के आतंकवादियों द्वारा हिन्दुओं को घर छोड़कर चले जाने की धमकी के पर्चे भी समाचारों में आ ही चुके हैं और अरुणाचल एवं आसाम आदि में से भी कश्मीर की तर्ज पर हिन्दुओं का पलायन लगातार जारी है।
अब यह फैसला आपको करना है कि आप मुसलमान बनना चाहते हैं या क्रिश्चियन, क्यूँकि आपको जिन्दा रहने के लिए या तो आपको किसी क्रिश्चियन देश में जा कर बसना होगा या आपको इन दोनों में से एक को तो अवश्य ही चुनना होगा। वर्ना आने वाले 30 साल के बाद तो आपकी भावी पीढ़ी का अंत तय है।
इस सबसे बचने का केवल एक ही मार्ग है कि न सिर्फ इस समस्या के बारे में अपने सभी जानकारों, मित्रों व् रिश्तेदारों आदि से अक्सर चर्चा ही करेंगे, बल्कि हम सभी आज से ही ये प्रण करें कि ये हालात काबू में आने और इस देश को हिन्दू राष्ट्र घोषित होने तक आज के बाद भारत के किसी भी हिस्से में होने वाले सभी प्रकार के स्थानीय निकायों, वहाँ की विधान सभाओं और केंद्र सरकार के लिए लोकसभा के सभी चुनावों में केवल अपने देशभक्त हिन्दू नेताओं और अपने हिन्दू संगठनों जैसे - भाजपा, शिव-सेना, विश्व हिन्दू परिषद, आरएसएस, बजरंगदल आदि के नेताओं को ही अपना वोट देकर चुनेंगे। ताकि हमारे इन हिन्दू संगठनो के हाथ मज़बूत हों और इनके ज़रिये हम इस देश को वो विषम एवं दुखदायी परिस्थितियां आने से पहले ही जल्दी से जल्दी भारत को एक हिन्दू राष्ट्र घोषित करवा सकें।
इससे पहले कि मुस्लिम मैजोरिटी में आकर यहाँ उत्पात मचाएं और इस देश को एक इस्लामिक देश बना पाएं, उससे पहले ही हम सबकी यह कोशिश होनी चाहिए कि अपने सभी जानकारों को यह मैसेज और सन्देश देकर समस्त भारत में भाजपा की सरकार बनाकर इस देश को भाजपा के ज़रिये एक हिन्दू राष्ट्र में ही बदल दिया जाएँ, क्यूँकि इस बात को तो सभी जानते हैं कि भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने का सपना केवल भाजपा, आरएसएस और अन्य हिन्दू संगठन ही देखते हैं।
आप यह भी सोच सकते हैं कि कहीं मैं कोई भाजपा समर्थक तो नहीं? हकीकत तो यही है कि मैं कोई भाजपा समर्थक नहीं हूँ, लेकिन अगर होता भी उससे क्या फर्क पड़ जाता? अगर मैं मुस्लिम संगठनो को भी समर्थन करूँ, तो उससे भविष्य में हिन्दुओं और हिंदुस्तान पर आने वाला यह संकट क्या टल जायेगा?
हम आपको कोई आतंकवादी बनने के लिए तो नहीं कह रहे न? बल्कि हम तो आपको केवल इस बात का एहसास कराना चाहते हैं कि इस तथाकथित थोथी धर्मनिरपेक्षता की नीति में क्या रखा है? जबकि प्रथम तो धर्मनिरपेक्षता का अर्थ ही सभी धर्मों को एक समान अधिकार एवं एक समान न्याय देना ही होता है, लेकिन क्या भारत में कभी वास्तव में ऐसा होता भी है?
नहीं होता, उसके दो ही कारण हैँ - पहला कारण कि मुस्लिम खुद ही इसे कभी नहीं मानते और दूसरा कारण यह कि अपने आपको धर्मनिरपेक्ष कहने वाले कांग्रेस और उसके सभी सहयोगी दलों के मुस्लिमपरस्त नेताओं ने इस धर्मनिरपेक्षता की नीति को केवल मुस्लिम तुष्टिकरण और हिन्दुओं के अपमान का ही जरिया बनाकर छोड़ दिया है।
फिर क्या दिया है हमें इस धर्मनिरपेक्षता की नीति ने? केवल हम हिन्दुओं को अपने हिन्दू भाइयों से उन थोथे सिद्धांतों के लिए लड़कर अपने ही हिन्दू धर्म और अपने ही देश की जड़ें खोदना ही सिखाया है, वरना न तो यह देश कभी किसी का ग़ुलाम बनता और न ही ये विषम परिस्थितियां कभी हमारे व् हमारे बच्चों के सामने आती?
हम आपसे कोई यह तो कह नहीं रहे कि आइये ! हम और आप सभी हिन्दू एकजुट होकर मुसलमानों का कत्लेआम करेंगे? हमारे हिन्दू धर्म और हमारे घर-परिवारों में यह नीचता या बर्बरता तो कभी भी सिखाई नहीं जाती। लेकिन कम से कम मौजूदा हालात में हम सभी एकजुट होकर ऊपर बताये हुए इस उपाय पर अमल करके इसके ज़रिये अपने देश में आने वाले संकट से तो निपट सकते हैं ना?
और हाँ एक बात यह भी याद रखियेगा कि अकेले मोदी जी भी इस विषय में कुछ खास नहीं कर पाएंगे, जब तक कि आप उन जैसे ही कुछ कट्टर देशभक्त और कट्टर हिन्दू नेताओं को उनका इस मुहीम में साथ देने के लिए नहीं चुनते। क्यूँकि हो सकता है कि भारत को एक हिन्दू देश बनाने की घोषणा होते ही मुसलमान सारे भारत में एक बार जोर-शोर से दंगा फैलाने की कोशिश करें? जिसको काबू करने के लिए सारे भारत में सशक्त भाजपा और कट्टर पंथी हिन्दू नेताओं के हाथ में वहां की सत्ता अवश्य होनी चाहिए, खासकर उन प्रदेशों में, जिनमें वहाँ के लोग बड़े भाग को मिनी पाकिस्तान का नाम पहले ही दे चुके हैं, ताकि किसी भी समुदाय के जान-माल की ज्यादा हानि न हो सके।
अपने मुस्लिम मित्रों को भी आप यह कहकर भारत को एक हिन्दू राष्ट्र बनाने की इस मुहीम में भाजपा का साथ देने के लिए संतुष्ट कर सकते हैं कि हमारा इतिहास भी इस बात का गवाह है कि प्राचीन काल से आज तक कभी किसी भी हिन्दू राजा ने गैर हिन्दुओं पर अत्याचार नहीं किये, वरना यहाँ कभी कोई दूसरा धर्म पनप ही नहीं पाता, जबकि बाबर, महमूद गजनवी, चंगेज़ खान, तैमूरलंग, मुहम्मद गौरी और औरंगज़ेब समेत न जाने कितने ही मुस्लिम बादशाहों के द्वारा हिन्दू मंदिरों को तोड़ने, उन्हें लूटने और यहाँ की हिन्दू प्रजा पर जुल्मो-सितम के किस्से तो इतिहास में भरे पड़े हैं।
उन्हें इस बात का भरोसा दिलाइये कि हिन्दू राष्ट्र बनने के बाद भी उनके साथ किसी किस्म का कोई भेदभाव नहीं किया जायेगा। अगर मेरी बात आपको ठीक से समझ में आ पायी हो, तो आप इसे आगे भी शेयर कर सकते हैं। आप मेरी किसी भी पोस्ट के व्यूज को देखकर सुनिश्चित कर सकते हैं, कि मेरी हर पोस्ट को हज़ारों लोग अवश्य देखते हैं। इसलिए अपने इस मैसेज को इस पोस्ट के ज़रिये हज़ारों लोगों को भेज कर अपने हिस्से का अपना काम मैं तो कर चुका हूँ।
आगे का काम आपका है कि यह मैसेज आप अपने आगे के हज़ारों लोगों को कैसे भेज पाते हैं अथवा उन्हें भी यह हकीकत कैसे समझा पाते हैं? चाहें तो इसके लिए आप इस मैसेज के हज़ारों प्रिंट छपवा कर भी यह काम आसानी से कर सकते हैं। लेकिन सावधान ! कांग्रेस व् अन्य राजनीतिक पार्टियों से जुड़े हुए लोगों और कट्टर मुसलमानों से बचकर, क्यूँकि इससे उनकी इस देश को मुस्लिम देश बनाने की साज़िश नाकाम जो हो सकती है, तो ज़ाहिर है कि मेरी तरह आप भी उनकी नज़रों में खटक सकते हैं।
क्या आप नहीं जानते कि भारत में भाजपा व् अन्य हिन्दू संगठनो के नेताओं को छोड़कर अन्य सभी नेता, मीडिया, अन्य वर्गों/धर्मों के लोग व् मुस्लिम समुदाय सहित समाज के सभी ताकतवर तबके न केवल कदम कदम पर हिन्दू धर्म के बारे में तरह तरह की उल-जुलूल बातें फैलाने की भरसक कोशिश ही करते हैं, बल्कि अक्सर यह भी देखने में आता है कि ये सभी लोग व् नेता जब कभी उन्हें हिन्दुओं को किसी भी बात पर नीचा दिखाने और अपमान करने का मौका मिलता है, तो उसमें अपनी तरफ से कोई कसर भी बाकी नहीं छोड़ते? इसका भी एक कारण है कि इनमें से अधिकाँश नेता व् मीडिया कर्मी या तो मुसलमान बन ही चुके हैं या बनने को तैयार बैठे हैं, जिसका खुलासा हम पहले की कई पोस्ट्स में भी कर चुके हैं। लेकिन फैसला तुरंत अवश्य करें, वरना देर होने पर तो पछताने का भी कोई फायदा नहीं होगा।
- उमा शंकर पराशर
Note : If you agree with our views, then don't just like/share this post but also join us at google+ in 'Sarfrosh Deshbhakt' community : (https://plus.google.com/u/0/communities/117687291425332274527 ) at the earliest. मित्रों व् बच्चों ! क्या आप हमारे इन विचारों से सहमत हैं? क्या आप अपने क्षेत्र के असामाजिक तत्वों से परेशान हैं और ऐसे लोगोँ से अपने इलाके को सुरक्षित करना चाहते हैं? क्या आप के अंदर देश व् समाज के लिए कुछ अपनी तरफ से कुछ करने की भी आग भरी है? यदि आपका जवाब 'हाँ' में हैं, तो अति शीघ्र हमसे जुड़ें !
मित्रों ! बीच में मुझे एक बार यह शिकायत भी सुनने को मिली थी कि मेरे मैसेज में दिए गए सरफ़रोश देशभक्त के वेब एड्रेस पर क्लिक करने से कभी कभी 404 error भी शो कर देता है, उस अवस्था में आप मेरी प्रोफाइल को ओपन करके उसके अबाउट में लिंक में सरफ़रोश देशभक्त लिखे हुए पर क्लिक कर दें। जिससे वो कम्युनिटी अपने आप ओपन हो जाएगी। 
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नमस्कार मित्रों एवं बच्चों ! 
      ॐ नमः शिवाय ! हर हर महादेव.
          भगवान शिव आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करें !!!
                                   और
               ईश्वर आपको सदा सही राह पर चलायें,
             जिससे आपका प्रत्येक दिन मंगलमय हो 
                                          - उमा शंकर पराशर 

क्या एक औरत अगली पीढ़ी को जन्म इसलिए देती है कि उसी की औलाद बुढ़ापे में उसे दुत्कार दे? 

कोई ४-५ वर्ष पहले की बात है कि मैं कालका मेल से कलकत्ता से दिल्ली आ रहा था। बीच में मुगलसराय जंक्शन पर ट्रेन काफी देर तक रूकती है। लिहाजा मैं प्लेटफार्म पर एक बुक स्टाल से कुछ मैगज़ीन देखने लगा कि तभी बूढी माँ ने जो करीब ७०-७५ साल की रही होंगी, मुझसे चाय पीने के लिए २ रूपये मांगे। पहले तो मैंने अपनी जेब में कुछ सिक्के ढूंढे तो पाया कि खुले पैसे के नाम पर मेरे पर्स में सिर्फ एक दस का नोट ही बाकी था, शेष सभी नोट बड़ी करेंसी यानि १०० और ५०० या १००० के ही थे। लेकिन क्यूंकि मैं ये भी जानता था कि २ रूपये में उसे कोई चाय नहीं मिलेगी, इसलिए मैंने उसे अपने पर्स में रखा वो इकलौता दस का नोट निकाल कर दे दिया। तभी एक युवा औरत जिसकी गोद में एक रोता हुआ बच्चा भी था, तेजी से मेरे पास आई और मुझसे बच्चे के दूध के लिए कुछ पैसे मांगने लगी। मैंने उससे कहा भी कि मेरे पास और खुले पैसे नहीं हैं, लेकिन फिर भी वह वहां से नहीं हटी और उसका गिडगिडाना जारी रहा। खुले पैसे न होने से मैं भी मजबूर था। तभी वहां घटी घटना ने मुझे झकझोर दिया। अचानक उस बूढी माँ ने उस औरत को अपने पास बुलाया और दस रूपये का वो नोट जो मैंने उसे दिया था, उस औरत को पकड़ा कर बोली - जा जल्दी से अपने बच्चे को दूध लेकर पिला दे। मैंने उस बूढी माँ से पूछा कि आपने तो खुद मुझसे चाय के लिए पैसे मांगे थे, तब चाय के पैसे उस औरत को क्यूँ दे दिए? तो उस बूढी माँ ने कहा कि मैं अगर सारा दिन भी कुछ नहीं खाऊँगी, तो भी नहीं मरूंगी। लेकिन अगर उस बच्चे को दूध न मिलता, तो वो जरुर मर जाता। मैं ये देख कर हतप्रभ रह गया कि जिसके अपने कपड़े फटे हुए थे और जिसके पास खुद की चाय पीने के लिए भी पैसे नहीं थे, उस बूढी माँ के अन्दर इतनी ममता? मेरे मन ने कहा कि ये कोई साधारण भिखारिन नहीं, बल्कि किसी संभ्रांत परिवार की लगती हैं। लिहाजा मैंने उस बूढी माँ से पूछा कि क्या आपके परिवार में कोई नहीं। तो उस माँ की आँखों में आंसू आ गए और उसने बताया कि उसके पति का मुगलसराय के पास ही के एक कसबे में अच्छा-खासा कारोबार था और जमीन-जायदाद थी और उसके तीन बेटे और दो बेटियां हैं। सभी बच्चों की शादी हो चुकी थी। सभी कुछ ठीक-ठाक चल रहा था कि पिछले साल बड़े बेटे ने कारोबार में कुछ घपला किया और इसी कारण उसके पति का दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। पति की मृत्यु होने से वो भी बीमार पड़ गई। कुछ ही दिन बाद बेटों ने कुछ कागजों पर उससे दस्तखत और अंगूठे लगवा कर सारी जमीन-जायदाद व् कारोबार पर कब्ज़ा कर लिया और इलाज का बहाना बना कर उसे एक खैराती अस्पताल में भर्ती करवा दिया। अस्पताल से छुट्टी मिलने पर जब वो घर पहुंची तो किसी ने भी घर में घुसने ही नहीं दिया। उसने आगे कहा "मेरी इस उम्र और कमज़ोर शरीर को देख कर मुझे किसी ने काम भी नहीं दिया, इसलिए तभी से यहाँ मुगलसराय स्टेशन पर भीख मांग कर ही अपना पेट भर रही हूँ।" मेरी आखें छलछला उठी और मैंने अपने पर्स में से सौ का एक नोट निकाला और उस माँ को दे कर अपनी छलछलाती आखों को छिपाने की कोशिश करते हुए ट्रेन में अपनी बर्थ पर आ कर बैठ गया। मैं समझ चूका था कि आज भी उस माँ को प्रत्येक छोटे बच्चे में अपने बच्चों की सूरत नज़र आती है, लेकिन मेरी मन आज भी इस सवाल का जवाब नहीं पा सका है कि क्या एक औरत अगली पीढ़ी को जन्म इसलिए देती है कि उसी की औलाद बुढ़ापे में उसे दुत्कार दे? अगर आपके पास मेरे इस सवाल का कोई जवाब हो तो कृपया मुझे भी बताएं !!! 
                                                    - उमा शंकर पराशर   
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सत्यम शिवम् सुन्दरम ! जय हिन्द, जय भारत ! वंदे मातरम ! 
          "विजयी विश्व तिरंगा प्यारा,  झंडा ऊंचा रहे हमारा"
प्रिय मित्रों व् बच्चों ! 
                 आप लोगों से मेरी विनती है कि मेरी किसी भी पोस्ट को केवल पढ़ने के पश्चात ही लाइक या शेयर करें। मुझे अफ़सोस है कि मेरी किसी भी पोस्ट में आपके मनोरंजन की कोई भी बातें नहीं होती, बल्कि इनमें केवल अपने देश और देशभक्ति से जुड़ी हुई बातें ही होती हैं, इसलिए यदि आपने किसी मनोरंजन की तलाश में मुझे गलती से अपने सर्किल में ऐड कर लिया हो, तो आपको मेरी सलाह है मेरी इस पोस्ट के मैसेज को आगे पढ़ने में भी अपना समय बिलकुल भी व्यर्थ बर्बाद न करें, बल्कि अपने इस समय का प्रयोग भी मुझे अपने सर्किल से तुरंत रिमूव करने में ही करें। लेकिन यदि आप इस देश से ज़रा सा भी प्रेम करते हैं और यह भी मानते हैं कि इस देश का एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते इस देश के प्रति आपके भी कुछ कर्तव्य हैं, तभी मेरे मैसेज को पूरा पढ़ने के बाद ही उस पर अपनी कोई प्रतिक्रिया देंI अन्यथा मेरा समय भी व्यर्थ बर्बाद न करें ! धन्यवाद।
प्रिय मित्रों एवं बच्चों ! 
                            ॐ नमः शिवाय ! हर हर महादेव ! भगवान शिव आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करें ! ईश्वर आपको सदा सही राह पर चलायें, जिससे आपका प्रत्येक दिन मंगलमय हो ! 
मित्रों व् बच्चों ! 
                         यदि आप हिन्दू हैं और यह बिलकुल नहीं चाहते कि आने वाले समय में कभी भी आपको या आपके बच्चों को जबरन मुसलमान बनना पड़े, तो मेरे इस मैसेज को खासकर इसके महत्वपूर्ण सन्देश वाले भाग को ऊपर से नीचे तक एक बार अवश्य पढ़ें। और हाँ अगर आपको मेरी बात में सच्चाई नज़र आये अथवा सही लगे, तो यह भी अवश्य ही बताएं कि इस खतरनाक आने वाले भविष्य से अपने सभी बंधु-बांधवों को भी सचेत करने के लिए क्या आप भी हमारे इस हिन्दू जन-जागृति अभियान का हिस्सा नहीं बनना चाहेंगे? अगर हाँ ! तो आप इस दिशा में क्या करेंगे? हो सकता है कि आपको मेरी यह भाषा कुछ अटपटी अवश्य लगे, लेकिन मेरी मज़बूरी है कि जिस प्रश्न ने कुछ अरसे से मेरी रातों की नींद को उड़ा रखा है, उस से हम सभी की जिंदगी के अलावा हमारी आने वाली पीढ़ियों की जिंदगी और भविष्य भी तो जुड़े हुए हैं। क्यूँकि मैं तो स्वयं ही उम्र के उस पड़ाव पर हूँ, जहाँ से उस दौर को देख पाने का मौका शायद ही मुझे मिले। इसलिए इस सन्देश को आपके अभी पढ़ने या न पढ़ने से मुझे तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन हमारी भावी पीढ़ियों का भविष्य तो फिर भी उससे जुड़ा हुआ है। वैसे भी आप मुझसे तो झूठ भी बोल सकते हैं, लेकिन क्या अपने आप से या अपनी अंतरात्मा से भी झूठ बोल पाएँगे? इसलिए इसे पढ़ने के बाद फैसला भले ही कुछ भी करें, लेकिन एक बार पूरा पढ़ें जरूर, क्यूँकि तब आप न तो किसी थोथी धर्मनिरपेक्षता के अँधेरे में जियेंगे और न ही किसी से यह कह सकेंगे कि आपको वस्तुस्थिति का ज्ञान ही नहीं था। आखिर को यह हम सभी के अस्तित्व का प्रश्न जो है?
                 कहा जाता है कि जब कोई बात पढ़कर अथवा बोलकर बार-बार दोहराई जाती है, तब वो बात हमारे अवचेतन मन में गहरे तक बैठ जाती है। तब क्यों न हम अपनी भारतीय संस्कृति की नीचे लिखी हुई कुछ अच्छी बातों को दोहराएं, जिससे हमारे व्यक्तित्व का उचित विकास हो और हम अपने राष्ट्र के सर्वांगीण विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकें?
                 "श्रीमद भगवद्गीता में भगवान श्री कृष्ण ने स्पष्ट कहा है कि न्याय-अन्याय अथवा धर्म-अधर्म की लड़ाई में बीच का कोई मार्ग ही नहीं होता अर्थात कोई भी पक्ष जो न्याय का समर्थक है, तो उसे अन्याय के प्रतिकारस्वरूप पूरी तरह से न्याय के साथ खड़े होना चाहिए। इसी प्रकार जो कोई भी पक्ष धर्म या न्याय के पक्ष में नहीं है, तो उसे परोक्ष-अपरोक्ष रूप से अन्याय का समर्थन करने वाला ही मानना चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण ने आगे इस बात को भी स्पष्ट किया है कि अधर्मियों से समाज एवं धर्म की रक्षा के लिए अधर्मियों के खिलाफ किये गए किसी भी प्रकार के छल-बल एवं हिंसा के प्रयोग को पाप की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। लेकिन उसका उद्देश्य केवल और केवल धर्म की स्थापना ही होना चाहिए।"
                "कोई भी धर्म राष्ट्र-धर्म अथवा देशभक्ति से बड़ा नहीं होता। किसी भी प्रकार के देशद्रोह की केवल एक ही सजा मृत्यु-दंड होनी चाहिए। जिस देश अथवा राज्य की अधिकांश जनता कायर हो, वहां विदेशी शक्तियों अपना आधिपत्य अधिक आसानी से जमा पाती हैं। अन्याय करने वाले से उस अन्याय को चुपचाप सहने वाला अधिक दोषी होता है, जिसके कारण समाज में कायरता बढ़ती है और अन्यायी को बल मिलता है। अतः अन्याय का प्रतिकार अवश्य करें व् अपने बच्चों एवं छोटे भाई-बहनों को भी अन्याय का प्रतिकार करने की ही शिक्षा दें।" 
                "जैसे काली से काली घटाएँ भी सूर्य के प्रकाश को बिखरने से अधिक समय तक रोक नहीं सकती, उसी प्रकार झूठ को कैसी भी चाशनी में लपेट कर परोसने या सत्य को सात तालों के भीतर कैद करने पर भी सत्य को छिपाया अथवा दबाया नहीं जा सकता। और झूठ के सारे अंधकार को चीर कर एक न एक दिन सच का सूरज निकलता जरूर है। सत्य एवं अहिंसा के पथ पर चलना कुछ कठिन भले ही हो, लेकिन केवल सत्य और अहिंसा का मार्ग ही सर्वश्रेष्ठ होता है, इसलिए सदा सत्य बोलने की कोशिश करें। सत्य को बोलने का सबसे बड़ा फायदा ये है कि आपको कोई भी बात याद नहीं रखनी पड़ती, जबकि एक झूठी बात को छिपाने के लिए कभी-कभी सैंकड़ों झूठ बोलने पड़ते हैं। लेकिन एक बात अवश्य याद रखें कि सत्य और अहिंसा कायरों के हथियार नहीं, अतः अपनी कायरता को छिपाने के लिए इनका सहारा लेकर अपने बच्चों एवं समाज को मूर्ख बनाना अपने आपको धोखा देने जैसा ही है।"
               "साफ़ दिल, नेक नियत और सही इरादे से किये जाने वाले हर काम में परमात्मा स्वयँ आपके साथ रहते हैं !" 
               "दूसरों के साथ वो व्यवहार कभी न करें, जो आप स्वयं अपने लिए नहीं चाहते !" 
               "याद रखें कि हमारा चरित्र उस भव्य इमारत की भांति होता है, जिसे बनाने में तो कभी-कभी बरसों लग जाते हैं, लेकिन गिराने में केवल कुछ पल की ही देरी लगती है। ठीक उसी प्रकार चरित्र निर्माण हिमालय पर चढ़ने के समान दुर्गम है, परंतु गिरने के लिए केवल हमारा एक गलत कदम ही पर्याप्त है !"
               "प्रकृति का यह नियम है कि संसार में जो कुछ भी हल्का है, वही ऊपर उठता है। इसलिए अपने उत्थान के लिए अपने अंदर के अहंकार को निकाल कर अपने आपको हल्का करें !" 
               "वैसे तो कुछ भी बोलकर अपने शब्द वापस लेना दोगले नेताओं का ही चलन है, फिर भी आप अपने लफ़्ज़ों को तोलकर बोलिए ! ताकि कभी वापस भी लेने पढ़ें तो वजन न लगे !"
               "इस देश में पैदा होने, यहाँ की आबो-हवा में खेल-कूद कर पले बढे होने के कारण इस देश के प्रति हमारे कुछ फ़र्ज़ व् क़र्ज़ होते हैं। यदि आप के मन में अपने इस देश के प्रति प्रेम और आदर की भावना न हो, यदि यहाँ का नागरिक होने के बावजूद आप अपने उन कर्तव्यों का पालन ठीक से नहीं करते, अपने माता-पिता, बुजुर्गों एवं गुरुजनों को यथोचित सम्मान नहीं देते व् केवल दूसरों में मीन-मेख निकालकर ही आप अपना जीवन व्यतीत करते हैं, तो निश्चय ही आप इस देश की धरती पर बोझ और इंसानियत के नाम पर कलंक हैं !"
               "Inactivity and idleness is the sign of a dead body ! if you have got any free time, don't waste it. You can utilize the same for the sake of the betterment of society, mankind and work for the national interests." 
               "निष्क्रियता और आलस्य एक मृत शरीर की पहचान है ! यदि आप के पास खाली समय है, तो इसे व्यर्थ बर्बाद मत करो। आप अपने खाली समय का सदुपयोग समाज, मानवता की बेहतरी और राष्ट्रीय हितों के लिए काम करके भी कर सकते हैं !" 
प्रिय मित्रों एवं बच्चों ! 
                आप सभी इस बात से भली भांति परिचित हैं कि नेताओं की बातों पर आँख मूँद कर विश्वास करने वालों का हश्र सदा बुरा ही होता है। सोचो कि भगवान ने हम सभी को बुद्धि और दिमाग किसलिए दिए हैं, यदि हम उनका इस्तेमाल ही न करें? और आप सब भी तो इस बात से सहमत हैं कि विश्व के समस्त नेताओं की प्रवृति तो गिरगिट जैसी होती है, पल-पल में ही बदल जाती है। इससे ज्यादा दुखद और क्या होगा कि भारतीय नेताओं के कारण तो बेचारे गिरगिटों को भी बहुत बड़ी मात्रा में आत्महत्या करनी पड़ रही है क्यूँकि उनका कहना है कि जितनी देर उन्हें ये सोचने में लगती है कि अपना अगला रंग क्या बदलूँ, उतनी देर में तो कुछ भारतीय नेता अपना बयान तीन बार बदल लेते हैं। 
                भारत एक हिन्दू बहुल देश होते हुए भी यहाँ कदम कदम पर हमारे हिन्दू धर्म को अपमानित होना पड़ता है, साथ ही कुव्यवस्था के कारण यह देश भी एक बार फिर से विनाश और विभाजन की ओर अग्रसर होता प्रतीत हो रहा है। इन सब बातों के अलावा कुछ मुस्लिम देशों में पिछले कुछ समय से हिन्दू व् गैर-मुस्लिम लोगों के साथ दुर्व्यवहार, सामूहिक जन-सँहार और जबरन धर्मान्तरण की अनगिनत घटनाओं के बाद इस देश को भी एक मुस्लिम देश बनाने की उठती मांग ने हमें सकते में डाल दिया है और सोचने पर मज़बूर कर दिया है कि नेहरू और गांधी की बेवकूफी और साज़िश के कारण क्या भारत और हिंदुत्व का अस्तित्व इस दुनिया से ही खत्म होने जा रहा है? 
                यह बात मात्र कपोल-कल्पना समझ कर सिर्फ लापरवाही में हंसी में ही उड़ा देने की नहीं है, अपितु इस पर ठन्डे दिमाग से बैठ कर मंथन करने की आवश्यकता है। क्यूँकि दुनिया का इतिहास इस बात का गवाह है कि दुनिया के नक़्शे में पहले जितने भी हिन्दू धर्म पर चलने वाले देश थे, भारत और नेपाल जैसे इक्का दुक्का देश के अलावा उन सभी का अस्तित्व आज खतम हो चूका है और वो सभी न सिर्फ आज कट्टर इस्लामिक में गिने जाते हैं, बल्कि जो देश हिन्दू जनसँख्या की बहुलता से हिन्दू देशो की श्रेणी में गिने जाते थे, आज वहाँ हिन्दू ढूंढने से भी नहीं मिलते, क्यूँकि वहां न सिर्फ हिन्दू सभ्यता और संस्कृति के प्रतीकों ही नष्ट किया गया, बल्कि वहाँ के मूल निवासी हिन्दुओं का अस्तित्व भी समाप्त कर दिया गया है। जो कुछ थोड़े बहुत अपनी जान बचाने में कामयाब भी हुए, उन्हें अपने अस्तित्व को बचाने के लिए अपने ही देश से अपनी समस्त चल-अचल संपत्ति को त्याग कर पलायन करना और संसार के विभिन्न हिस्सों में जा कर बसना पड़ा है। 
                  कांग्रेस और उसके सहयोगियों की कुनीतियों, मुस्लिम चाटुकारिता और दुर्व्यवस्था के कारण न सिर्फ मुस्लिम समाज के अपराधी प्रवृति के लोगों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं, जिसका सीधा असर हमारे हिन्दू समाज और उस की बहु-बेटियों की सामाजिक सुरक्षा पर पड़ रहा है। आये दिन देश में बढ़ते जा रहे सामूहिक बलात्कार के किस्से और थोड़े थोड़े अंतराल पर देश के विभिन्न भागों में होते दंगे इसके ज्वलंत उद्दाहरण हैं।
                                         महत्वपूर्ण सन्देश 
                 भारत का एक जल्द से जल्द एक हिन्दू राष्ट्र बनना जरुरी क्यों?
क्या आप नहीं जानते कि आज़ादी के बाद से आज तक भारत के छह करोड़ से भी अधिक हिन्दुओं को जोर-जबरदस्ती से या लालच देकर मुस्लिम अथवा क्रिश्चियन बनाया जा चूका है? 
                क्या कीजियेगा, आज से 20-30 साल बाद जब भारत भी एक इस्लामिक देश बन जायेगा? आप अपनी जान देंगे, विदेश चले जायेंगे या कि अपने बच्चों सहित मुस्लिम बन जायेंगे? लेकिन तब भी सुरक्षा की क्या गारंटी है, क्यूँकि जो सुन्नी मुस्लिम लोग आज अपने ही उस शिया समुदाय को भी ठिकाने लगाने पर तुले हुए हैं, जो उन्हीं के इस्लाम का सदियों पुराना हिस्सा है, फिर क्या भरोसा कि कल को वो धर्म परिवर्तन से अपनी जान बचाने वालों को भी जिन्दा छोड़ेंगे या नहीं? 
               क्या आप नहीं जानते कि हिन्दू बहुल भारत होते हुए भी झारखण्ड के पहले से नक्सली पीड़ित रहे ख़ास भाग में आतंकवादियों द्वारा वहाँ रहने वाले हिन्दुओं को इलाका खाली करने या जान माल से हाथ धोने की धमकी भरे सन्देश भेजे जा चुके हैं, जिसकी चर्चा न्यूज़ चैनल की भी सुर्खियां बनी?
               क्या कश्मीर को २५ साल पहले ही हिन्दुओं से खाली नहीं कराया जा चूका है? क्या आप नहीं जानते कि आज अरुणाचल और आसाम आदि राज्यों के कुछ मुस्लिम बहुल खास इलाकों में से भी लाखों की संख्या में हिन्दुओं का पलायन जारी है? 
               क्या आप पश्चिम बंगाल, केरल, अरुणाचल और आसाम के कुछ मुस्लिम बहुल खास इलाकों में रहने वाले हिन्दुओं की सैंकड़ों-हज़ारों की संख्या में आगजनी आदि से हुई जान माल की क्षति की अनगिनत बार की घटनाओं से वाकिफ नहीं, जिसके कारण आज केरल में हिन्दू नाममात्र ही बचे हैं?
               क्या आप नहीं जानते कि बांग्लादेश बनने अर्थात 1971 से भारत के बहुसंख्यक हिन्दू समुदाय को अल्प संख्या में लाने और बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठियों द्वारा यहाँ भारत में मुस्लिम जनसँख्या को बढ़ाने की एक सोची समझी साज़िश चल रही है, जिसके तहत बांग्लादेश बनने अर्थात 1971 से अब तक इसी साज़िश को अंजाम देने के लिए बांग्लादेश से सात करोड़ से भी अधिक मुसलमानों को अनाधिकृत रूप से भारत में प्रवेश कराया जा चूका है, जिसका साथ लालू,मुलायम और मायावती और ममता बैनर्जी के अलावा सम्पूर्ण कांग्रेस के नेता भी बखूबी दे रहें हैं। इसीलिए ये सभी अक्सर ही उन बांग्लादेशी घुसपैठियों को वापस बांग्लादेश भेजने के प्रश्न पर भड़क जाते हैं, क्यूँकि उनमें से अधिकांश को तो अपना वोट बैंक बढ़ाने की खातिर ये लोग पहले ही भारत की नागरिकता दे भी चुके हैं। यदि बांग्लादेशी घुसपैठियों की वापसी पर सख्ती से अमल होता है, तो इन सबकी ये साज़िश भी सामने आ जाएगी।
                क्या आप नहीं जानते कि बांग्लादेश में वहाँ रहने वाले बंगाली हिन्दुओं पर कैसे कैसे कहर ढाये जा रहे हैं, जिसके कारण वो लोग भी वहाँ से पलायन करने पर मज़बूर हैं?
                क्या आप नहीं जानते कि पाकिस्तान में अपनी चल-अचल धन-संपत्ति छोड़कर अपनी जान बचाने की खातिर वहाँ के हिन्दुओं को लाखों की संख्या में भारत के राजस्थान आदि में शरण लेनी पड़ी है, जो किसी भी कीमत पर वापस पाकिस्तान जाने को तैयार नहीं? उन लाखों हिन्दुओं को तो यहाँ के मूल निवासी होने पर भी आज तक भारत की नागरिकता नहीं दी गई है, जबकि इन लालू, मुलायम मायावती और ममता बैनर्जी आदि के शासनकाल में और कांग्रेस शासित प्रदेशों में कांग्रेस के इशारे पर करोड़ों की संख्या में बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठियों को यहाँ की नागरिकता दे दी गई है, आखिर क्यों? 
                आप चाहे लड़कें हों या लड़की हों, आदमी हों या औरत हों, जवान हों या बूढ़े हों, अमीर हों या गरीब हों, नेता हों या अभिनेता हों, कर्मचारी हों या व्यापारी हों, जज हों या वकील हों, भले ही हम लोग कितने भी पढ़े लिखे हों या बिलकुल अनपढ़ हों लेकिन यदि हम हिन्दू हैं तो क्या यह हमारा फ़र्ज़ नहीं बनता कि हम अपने अपने लेवल पर हम में से हर एक का यह कर्तव्य बनता है कि अपने से मिलने जुलने वाले हर एक व्यक्ति से संसार के सभी 56 हिन्दू देशों के इस्लामिक देश बनने और वहां के मुस्लिम्स के द्वारा वहां उन देशों में रहने वाले हिन्दुओं के ऊपर किये जा रहे जुल्मों-सितम व् अत्याचारों के बारे में बातचीत अवश्य करें, क्यूँकि यह न केवल आपके और आपकी ही बल्कि उन सभी की आने वाली पीढ़ियों की भी जिंदगी का प्रश्न है, जिनसे आप इस बारे में बातचीत करेंगे। 
                कभी यहाँ की भोली भाली जवान व् खूबसूरत लड़कियों की मासूमियत और नासमझी/अनभिज्ञता का लाभ उठाकर उन्हें लव-जेहाद जैसे हथकंडों में फंसाया जाता है, जिसमें कभी कभी तो अपने आपको जरुरत से ज्यादा मॉडर्न व् समझदार समझने वाली पढ़ी-लिखी मगर हकीकत में निहायत ही बेवकूफ किस्म की लड़कियां भी फंस जाती हैं, जिनका परिणाम अक्सर ही समाचार-पत्रों में चर्चा का विषय बन जाया करता है तो कभी कभी उनकी यह आधुनिकता भरी समझ उन्हें आत्महत्या की कगार तक भी पहुँचा देती है। 
                कभी इन लोगों के द्वारा कभी यहाँ हिन्दुओं के गरीब व् अनपढ़ तबके खासकर पिछड़ी जाति के लोगों को ऊँची जाति के लोगों के खिलाफ भड़काया जाता है। मुसीबत तो यह है कि इन तथाकथित पिछड़ी जातियों के पढ़े-लिखे लोग भी बिना कुछ सोचे समझे ही इन लोगो की हाँ में हाँ मिला देते हैं, जिसका परिणाम यह होता है कि उस समय वहाँ मौजूद अन्य गरीब व् अनपढ़ लोग उनकी बात को सही समझकर खुद अपने ही हिन्दू धर्म की जड़ें खोदने का काम शुरू कर देते हैं। 
                 कभी सोचा है कि ऐसा सिर्फ हिन्दू धर्म के लोगों के साथ ही क्यों किया जाता है? क्या आपको पता है कि समस्त संसार के अधिकांश देश या तो क्रिश्चियन हैं या इस्लामिक अथवा मुस्लिम देश। जबकि हमारा सनातन हिन्दू धर्म संसार में तीसरा सबसे अधिक माना जाने वाला धर्म होते हुए भी बहुसंख्यक हिन्दुओं का इकलौता देश यह भारत ही है या नाममात्र का छोटा सा गरीब देश नेपाल। इस्लाम व् क्रिश्चयन दोनों ही धर्म किसी भी प्रकार से समस्त संसार के ताकतवर देशो पर अपनी हुकूमत चाहते हैं, ताकि संसार के बाकी कमज़ोर देशों को अपनी आधीन कर सकें या इच्छानुसार चला सकें। और यही इच्छा इन दोनों धर्मों की भारत के बारे में भी है। 
                 इसलिए अभी से सोच लीजिये कि आपको भविष्य में हिन्दू बनना है या क्रिश्चियन। मुसलमान आपको मार-मार कर मुस्लिम बनाएंगे और क्रिश्चियन लालच देकर। लेकिन फायदा क्रिश्चियन बनने में है, क्यूँकि क्रिश्चियन देश लूटते भले ही हों, लेकिन वो किसी को जान से नहीं मारते। वो बात अलग है कि वो आपको लालच देकर क्रिश्चियन बनाने की कोशिश करेंगे। बन गए तो ठीक वर्ना मुसलमान आपको मुसलमान बना देंगे या मार देंगे। लेकिन भारत में रह कर हिन्दू आप किसी भी हालत में नहीं रहेंगे, क्यूंकि तब तक तो यह एक इस्लामिक देश बन चुका होगा। जिसका सबसे बड़ा सबूत संसार के सभी हिन्दू 56 देशों का पहले ही इस्लामिक देशों में तब्दील होना है और पिछले साल 15 अगस्त को भारत को एक इस्लामिक देश बनाने की मांग केरल में उठ भी चुकी है, जिसके फोटोज आप मेरी पुरानी पोस्ट्स में भी देख सकते हैं। 
                इनका केवल एक ही मकसद है कि किसी भी प्रकार से यहाँ के बहुसंख्यक हिन्दू आपस में लड़ें, कमज़ोर हों और उनका हिन्दू धर्म से मोह भंग हो सके और वो यहाँ के बहुसंख्यक हिन्दुओं को अल्प संख्यक बना सकें, ताकि अपनी सुविधानुसार जब जी चाहे इसे एक क्रिश्चियन या इस्लामिक देश में परिवर्तित किया जा सके। जबकि अमीर गरीब या ऊँच-नीच की ये जातिगत विसंगतियाँ किस धर्म में नहीं हैं?                   क्या क्रिश्चियन व् इस्लाम में नहीं हैं? क्या क्रिश्चियन धर्म में रोमन कैथोलिक व् प्रूटेस्टेंट नहीं होते? क्या उनमें आपस में शादियाँ आसानी से हो जाती हैं, फिर यह तोहमत केवल हिन्दू धर्म पर ही क्यों लगायी जाती है? क्या इस्लाम में शिया-सुन्नी नहीं होते, जिनमें संसार के सभी कोनों में अक्सर ही मुठभेड़ भी होती रहती हैं? 
                क्या उनमें विभिन्न जातियां नहीं होती? और तो और जो लोग धर्म परिवर्तन करके मुसलमान बन भी जाते हैं, उन्हें भी इस्लाम को शुरू में ही अपनाने वाले लोग भी दोयम दर्जे का मुसलमान यांनी मुहाजिर कहते हैं। मुस्लिम वर्ग के लोग दिल्ली तो इन मुठभेड़ों का खास गवाह रहा है, जब कुछ साल पहले तक भी मुहर्रम के अवसर पर इस्लाम के इन दोनों वर्गों के लोग ताजिये निकलते वक्त अक्सर ही भिड़ जाया करते थे। 
               क्रिश्चियन देशों में और मुस्लिम देशों में सबसे बड़ा अंतर यही है कि क्रिश्चियन धर्म वाले देश अन्य गरीब देशों के लोगों को अपरोक्ष रूप से लूट-लूट कर अमीर बनना चाहते हैं, तो मुस्लिम धर्मानुयायी अपराध के रस्ते दूसरे धर्मानुयायियों की धन-संपत्ति आदि को हड़प कर के अमीर बनना चाहते हैं, जिसका सबसे बड़ा उद्दाहरण कश्मीर, बांग्लादेश और पाकिस्तान सहित सभी मुस्लिम देशों में गैर-मुस्लिम लोगों खासकर हिन्दुओं को मार-पीट कर, उन्हें मारकर अथवा वहां से खदेड़ कर उनकी संपत्ति पर कब्ज़ा किया जाना है। 
                  भारत के कश्मीर से हिन्दू 25 साल पहले ही भगा दिए गए, जो आज तक देश के विभिन्न भागों में खानाबदोशों की जिंदगी बसर कर रहे हैं। केरल, आंध्र आदि में ओवैसी भाइयों की दादागिरी तो जगजाहिर है ही, इसके अलावा पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश व् महाराष्ट्र आदि राज्यों के बहुत बड़े भागों को आजकल वहाँ रहने वाले हिन्दुओं ने ही मिनी पाकिस्तान का नाम भी दे दिया है, क्यूँकि वहां केवल मुस्लिम्स की ही हुकूमत चलती है। 
                 कश्मीर पहले ही खाली करवा चुके हैं, झारखण्ड के बहुत बड़े भाग में तो ISIS के आतंकवादियों द्वारा हिन्दुओं को घर छोड़कर चले जाने की धमकी के पर्चे भी समाचारों में आ ही चुके हैं और अरुणाचल एवं आसाम आदि में से भी कश्मीर की तर्ज पर हिन्दुओं का पलायन लगातार जारी है। 
                 अब यह फैसला आपको करना है कि आप मुसलमान बनना चाहते हैं या क्रिश्चियन, क्यूँकि आपको जिन्दा रहने के लिए या तो आपको किसी क्रिश्चियन देश में जा कर बसना होगा या आपको इन दोनों में से एक को तो अवश्य ही चुनना होगा। वर्ना आने वाले 30 साल के बाद तो आपकी भावी पीढ़ी का अंत तय है। 
                 इस सबसे बचने का केवल एक ही मार्ग है कि न सिर्फ इस समस्या के बारे में अपने सभी जानकारों, मित्रों व् रिश्तेदारों आदि से अक्सर चर्चा ही करेंगे, बल्कि हम सभी आज से ही ये प्रण करें कि ये हालात काबू में आने और इस देश को हिन्दू राष्ट्र घोषित होने तक आज के बाद भारत के किसी भी हिस्से में होने वाले सभी प्रकार के स्थानीय निकायों, वहाँ की विधान सभाओं और केंद्र सरकार के लिए लोकसभा के सभी चुनावों में केवल अपने देशभक्त हिन्दू नेताओं और अपने हिन्दू संगठनों जैसे - भाजपा, शिव-सेना, विश्व हिन्दू परिषद, आरएसएस, बजरंगदल आदि के नेताओं को ही अपना वोट देकर चुनेंगे। ताकि हमारे इन हिन्दू संगठनो के हाथ मज़बूत हों और इनके ज़रिये हम इस देश को वो विषम एवं दुखदायी परिस्थितियां आने से पहले ही जल्दी से जल्दी भारत को एक हिन्दू राष्ट्र घोषित करवा सकें। 
                 इससे पहले कि मुस्लिम मैजोरिटी में आकर यहाँ उत्पात मचाएं और इस देश को एक इस्लामिक देश बना पाएं, उससे पहले ही हम सबकी यह कोशिश होनी चाहिए कि अपने सभी जानकारों को यह मैसेज और सन्देश देकर समस्त भारत में भाजपा की सरकार बनाकर इस देश को भाजपा के ज़रिये एक हिन्दू राष्ट्र में ही बदल दिया जाएँ, क्यूँकि इस बात को तो सभी जानते हैं कि भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने का सपना केवल भाजपा, आरएसएस और अन्य हिन्दू संगठन ही देखते हैं। 
                आप यह भी सोच सकते हैं कि कहीं मैं कोई भाजपा समर्थक तो नहीं? हकीकत तो यही है कि मैं कोई भाजपा समर्थक नहीं हूँ, लेकिन अगर होता भी उससे क्या फर्क पड़ जाता? अगर मैं मुस्लिम संगठनो को भी समर्थन करूँ, तो उससे भविष्य में हिन्दुओं और हिंदुस्तान पर आने वाला यह संकट क्या टल जायेगा? 
                हम आपको कोई आतंकवादी बनने के लिए तो नहीं कह रहे न? बल्कि हम तो आपको केवल इस बात का एहसास कराना चाहते हैं कि इस तथाकथित थोथी धर्मनिरपेक्षता की नीति में क्या रखा है? जबकि प्रथम तो धर्मनिरपेक्षता का अर्थ ही सभी धर्मों को एक समान अधिकार एवं एक समान न्याय देना ही होता है, लेकिन क्या भारत में कभी वास्तव में ऐसा होता भी है? 
                नहीं होता, उसके दो ही कारण हैँ - पहला कारण कि मुस्लिम खुद ही इसे कभी नहीं मानते और दूसरा कारण यह कि अपने आपको धर्मनिरपेक्ष कहने वाले कांग्रेस और उसके सभी सहयोगी दलों के मुस्लिमपरस्त नेताओं ने इस धर्मनिरपेक्षता की नीति को केवल मुस्लिम तुष्टिकरण और हिन्दुओं के अपमान का ही जरिया बनाकर छोड़ दिया है। 
                फिर क्या दिया है हमें इस धर्मनिरपेक्षता की नीति ने? केवल हम हिन्दुओं को अपने हिन्दू भाइयों से उन थोथे सिद्धांतों के लिए लड़कर अपने ही हिन्दू धर्म और अपने ही देश की जड़ें खोदना ही सिखाया है, वरना न तो यह देश कभी किसी का ग़ुलाम बनता और न ही ये विषम परिस्थितियां कभी हमारे व् हमारे बच्चों के सामने आती? 
                 हम आपसे कोई यह तो कह नहीं रहे कि आइये ! हम और आप सभी हिन्दू एकजुट होकर मुसलमानों का कत्लेआम करेंगे? हमारे हिन्दू धर्म और हमारे घर-परिवारों में यह नीचता या बर्बरता तो कभी भी सिखाई नहीं जाती। लेकिन कम से कम मौजूदा हालात में हम सभी एकजुट होकर ऊपर बताये हुए इस उपाय पर अमल करके इसके ज़रिये अपने देश में आने वाले संकट से तो निपट सकते हैं ना? 
                और हाँ एक बात यह भी याद रखियेगा कि अकेले मोदी जी भी इस विषय में कुछ खास नहीं कर पाएंगे, जब तक कि आप उन जैसे ही कुछ कट्टर देशभक्त और कट्टर हिन्दू नेताओं को उनका इस मुहीम में साथ देने के लिए नहीं चुनते। क्यूँकि हो सकता है कि भारत को एक हिन्दू देश बनाने की घोषणा होते ही मुसलमान सारे भारत में एक बार जोर-शोर से दंगा फैलाने की कोशिश करें? जिसको काबू करने के लिए सारे भारत में सशक्त भाजपा और कट्टर पंथी हिन्दू नेताओं के हाथ में वहां की सत्ता अवश्य होनी चाहिए, खासकर उन प्रदेशों में, जिनमें वहाँ के लोग बड़े भाग को मिनी पाकिस्तान का नाम पहले ही दे चुके हैं, ताकि किसी भी समुदाय के जान-माल की ज्यादा हानि न हो सके। 
                अपने मुस्लिम मित्रों को भी आप यह कहकर भारत को एक हिन्दू राष्ट्र बनाने की इस मुहीम में भाजपा का साथ देने के लिए संतुष्ट कर सकते हैं कि हमारा इतिहास भी इस बात का गवाह है कि प्राचीन काल से आज तक कभी किसी भी हिन्दू राजा ने गैर हिन्दुओं पर अत्याचार नहीं किये, वरना यहाँ कभी कोई दूसरा धर्म पनप ही नहीं पाता, जबकि बाबर, महमूद गजनवी, चंगेज़ खान, तैमूरलंग, मुहम्मद गौरी और औरंगज़ेब समेत न जाने कितने ही मुस्लिम बादशाहों के द्वारा हिन्दू मंदिरों को तोड़ने, उन्हें लूटने और यहाँ की हिन्दू प्रजा पर जुल्मो-सितम के किस्से तो इतिहास में भरे पड़े हैं। 
                उन्हें इस बात का भरोसा दिलाइये कि हिन्दू राष्ट्र बनने के बाद भी उनके साथ किसी किस्म का कोई भेदभाव नहीं किया जायेगा। अगर मेरी बात आपको ठीक से समझ में आ पायी हो, तो आप इसे आगे भी शेयर कर सकते हैं। आप मेरी किसी भी पोस्ट के व्यूज को देखकर सुनिश्चित कर सकते हैं, कि मेरी हर पोस्ट को हज़ारों लोग अवश्य देखते हैं। इसलिए अपने इस मैसेज को इस पोस्ट के ज़रिये हज़ारों लोगों को भेज कर अपने हिस्से का अपना काम मैं तो कर चुका हूँ। 
                आगे का काम आपका है कि यह मैसेज आप अपने आगे के हज़ारों लोगों को कैसे भेज पाते हैं अथवा उन्हें भी यह हकीकत कैसे समझा पाते हैं? चाहें तो इसके लिए आप इस मैसेज के हज़ारों प्रिंट छपवा कर भी यह काम आसानी से कर सकते हैं। लेकिन सावधान ! कांग्रेस व् अन्य राजनीतिक पार्टियों से जुड़े हुए लोगों और कट्टर मुसलमानों से बचकर, क्यूँकि इससे उनकी इस देश को मुस्लिम देश बनाने की साज़िश नाकाम जो हो सकती है, तो ज़ाहिर है कि मेरी तरह आप भी उनकी नज़रों में खटक सकते हैं। 
                क्या आप नहीं जानते कि भारत में भाजपा व् अन्य हिन्दू संगठनो के नेताओं को छोड़कर अन्य सभी नेता, मीडिया, अन्य वर्गों/धर्मों के लोग व् मुस्लिम समुदाय सहित समाज के सभी ताकतवर तबके न केवल कदम कदम पर हिन्दू धर्म के बारे में तरह तरह की उल-जुलूल बातें फैलाने की भरसक कोशिश ही करते हैं, बल्कि अक्सर यह भी देखने में आता है कि ये सभी लोग व् नेता जब कभी उन्हें हिन्दुओं को किसी भी बात पर नीचा दिखाने और अपमान करने का मौका मिलता है, तो उसमें अपनी तरफ से कोई कसर भी बाकी नहीं छोड़ते? इसका भी एक कारण है कि इनमें से अधिकाँश नेता व् मीडिया कर्मी या तो मुसलमान बन ही चुके हैं या बनने को तैयार बैठे हैं, जिसका खुलासा हम पहले की कई पोस्ट्स में भी कर चुके हैं। लेकिन फैसला तुरंत अवश्य करें, वरना देर होने पर तो पछताने का भी कोई फायदा नहीं होगा। 
                                                          - उमा शंकर पराशर 
Note : If you agree with our views, then don't just like/share this post but also join us at google+ in 'Sarfrosh Deshbhakt' community : ( https://plus.google.com/u/0/communities/117687291425332274527 ) at the earliest.  मित्रों व् बच्चों ! क्या आप हमारे इन विचारों से सहमत हैं? क्या आप अपने क्षेत्र के असामाजिक तत्वों से परेशान हैं और ऐसे लोगोँ से अपने इलाके को सुरक्षित करना चाहते हैं? क्या आप के अंदर देश व् समाज के लिए कुछ अपनी तरफ से कुछ करने की भी आग भरी है? यदि आपका जवाब 'हाँ' में हैं, तो अतिशीघ्र हमसे जुड़ें ! 
मित्रों ! बीच में मुझे एक बार यह शिकायत भी सुनने को मिली थी कि मेरे मैसेज में दिए गए सरफ़रोश देशभक्त के वेब एड्रेस पर क्लिक करने से कभी कभी 404 error भी शो कर देता है, उस अवस्था में आप मेरी प्रोफाइल को ओपन करके उसके अबाउट में लिंक में सरफ़रोश देशभक्त लिखे हुए पर क्लिक कर दें। जिससे वो कम्युनिटी अपने आप ओपन हो जाएगी।  
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     सत्यम शिवम् सुन्दरम !  
      जय हिन्द, जय भारत !   
               वंदे मातरम !

प्रिय मित्रों एवं बच्चों !
               ॐ नमः शिवाय ! हर हर महादेव ! भगवान शिव आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करें ! और
     ईश्वर आपको सदा सही राह पर चलायें,
   जिससे आपका प्रत्येक दिन मंगलमय हो !

    विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, 
         झंडा ऊंचा रहे हमारा !

मित्रों !
                   कहा जाता है कि जब कोई बात पढ़कर अथवा बोलकर बार-बार दोहराई जाती है, तब वो बात हमारे अवचेतन मन में गहरे तक बैठ जाती है। तब क्यों न हम अपनी भारतीय संस्कृति की नीचे लिखी हुई कुछ अच्छी बातों को दोहराएं, जिससे हमारे व्यक्तित्व का उचित विकास हो और हम अपने राष्ट्र के सर्वांगीण विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकें?
                   श्रीमद भगवद्गीता में भगवान श्री कृष्ण ने स्पष्ट कहा है कि न्याय-अन्याय अथवा धर्म-अधर्म की लड़ाई में बीच का कोई मार्ग ही नहीं होता अर्थात कोई भी पक्ष जो न्याय का समर्थक है, तो उसे अन्याय के प्रतिकारस्वरूप पूरी तरह से न्याय के साथ खड़े होना चाहिए। इसी प्रकार जो कोई भी पक्ष धर्म या न्याय के पक्ष में नहीं है, तो उसे परोक्ष-अपरोक्ष रूप से अन्याय का समर्थन करने वाला ही मानना चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण ने आगे इस बात को भी स्पष्ट किया है कि अधर्मियों  से समाज एवं धर्म की रक्षा के लिए अधर्मियों के खिलाफ किये गए किसी भी प्रकार के छल-बल एवं हिंसा के प्रयोग को पाप की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। लेकिन उसका उद्देश्य केवल और केवल धर्म की स्थापना ही होना चाहिए।
                   "कोई भी धर्म राष्ट्र-धर्म अथवा देशभक्ति से बड़ा नहीं होता। किसी भी प्रकार के देशद्रोह की केवल एक ही सजा मृत्यु-दंड होनी चाहिए। जिस देश अथवा राज्य की अधिकांश जनता कायर हो, वहां विदेशी शक्तियों अपना आधिपत्य अधिक आसानी से जमा पाती  हैं। अन्याय करने वाले से उस अन्याय को चुपचाप सहने वाला अधिक दोषी होता है, जिसके कारण समाज में कायरता बढ़ती है और अन्यायी को बल मिलता है। अतः अन्याय का प्रतिकार अवश्य करें व् अपने बच्चों एवं छोटे भाई-बहनों को भी अन्याय का प्रतिकार करने की ही शिक्षा दें।" 
                   "जैसे काली से काली घटाएँ भी सूर्य के प्रकाश को बिखरने से अधिक समय तक रोक नहीं सकती, उसी प्रकार झूठ को कैसी भी चाशनी में लपेट कर परोसने या सत्य को सात तालों के भीतर कैद करने पर भी सत्य को छिपाया अथवा दबाया नहीं जा सकता। और झूठ के सारे अंधकार को चीर कर एक न एक दिन सच का सूरज निकलता जरूर है। सत्य एवं अहिंसा के पथ पर चलना कुछ कठिन भले ही हो, लेकिन केवल सत्य और अहिंसा का मार्ग ही सर्वश्रेष्ठ होता है, इसलिए सदा सत्य बोलने की कोशिश करें। सत्य को बोलने का सबसे बड़ा फायदा ये है कि आपको कोई भी बात याद नहीं रखनी पड़ती, जबकि एक झूठी बात को छिपाने के लिए कभी-कभी सैंकड़ों झूठ बोलने पड़ते हैं। लेकिन एक बात अवश्य याद रखें कि सत्य और अहिंसा कायरों के हथियार नहीं, अतः अपनी कायरता को छिपाने के लिए इनका सहारा लेकर अपने बच्चों एवं समाज को मूर्ख बनाना अपने आपको धोखा देने जैसा ही है।"
                    " साफ़ दिल, नेक नियत और सही इरादे से किये जाने वाले हर काम में परमात्मा स्वयँ आपके साथ रहते हैं !" 
                    "दूसरों के साथ वो व्यव्हार कभी न करें, जो आप स्वयं अपने लिए नहीं चाहते !"             
                    "याद रखें कि हमारा चरित्र उस भव्य इमारत की भांति होता है, जिसे बनाने में तो कभी-कभी बरसों लग जाते हैं, लेकिन गिराने में केवल कुछ पल की ही देरी लगती है। ठीक उसी प्रकार चरित्र निर्माण हिमालय पर चढ़ने के समान दुर्गम है, परंतु गिरने के लिए केवल हमारा एक गलत कदम ही पर्याप्त है !"
                    "प्रकृति का यह नियम है कि संसार में जो कुछ भी हल्का है, वही ऊपर उठता है। इसलिए अपने उत्थान के लिए अपने अंदर के अहंकार को निकाल कर अपने आपको हल्का करें !" 
                     "वैसे तो कुछ भी बोलकर अपने शब्द वापस लेना दोगले नेताओं का ही चलन है, फिर भी आप अपने लफ़्ज़ों को तोलकर बोलिए ! ताकि कभी वापस भी लेने पढ़ें तो वजन न लगे !"
                     "इस देश में पैदा होने, यहाँ की आबो-हवा में खेल-कूद कर पले बढे होने के कारण इस देश के प्रति हमारे कुछ फ़र्ज़ व् क़र्ज़ होते हैं। यदि आप के मन में अपने इस देश के प्रति प्रेम और आदर की भावना न हो, यदि यहाँ का नागरिक होने के बावजूद आप अपने उन कर्तव्यों का पालन ठीक से नहीं करते, अपने माता-पिता, बुजुर्गों एवं गुरुजनों को यथोचित सम्मान नहीं देते व् केवल दूसरों में मीन-मेख निकालकर ही आप अपना जीवन व्यतीत करते हैं, तो निश्चय ही आप इस देश की धरती पर बोझ और इंसानियत के नाम पर कलंक हैं !"
                     "Inactivity and idleness is the sign of a dead body ! if you have got any free time, don't waste it. You can utilize the same for the sake of the betterment of society, mankind and work for the national interests."  
                     "निष्क्रियता और आलस्य एक मृत शरीर की पहचान है ! यदि आप के पास खाली समय है, तो इसे व्यर्थ बर्बाद मत करो। आप अपने खाली समय का सदुपयोग समाज, मानवता की बेहतरी और राष्ट्रीय हितों के लिए काम करके भी कर सकते हैं ! " 
 मित्रों एवं बच्चों ! आज इस नव वर्ष पर आप मेरी कोई भी पोस्ट न पाकर आपको थोड़ी हैरानी अवश्य हुई होगी। इसलिए सोचा कि ऊपरी मन से ऐसा करने की बजाए अपने कुछ विचार आपके सामने रखूँ। मित्रों ! जब से मैंने होश संभाला है, तभी से इन अल्पसंख्यक कहे जाने वाले मुस्लिम और क्रिश्चियनिटी के अधिकांश लोगों को इस हिन्दू बहुल देश और यहाँ के मूल निवासी हिन्दुओं के हितों के खिलाफ ज़हर उगलते और हिन्दू धर्म की जड़ें काटते हुए ही पाया है। इसके बावजूद हमने सदा इनके त्यौहारों पर इन लोगों को अपनी शुभकामनायें देना और इनके सुख दुःख में शरीक होना अपना फ़र्ज़ समझा। लेकिन फिर भी इनकी आदतें नहीं बदली। जिसका सबूत है इस देश की संसद में इनके प्रतिनिधियों के दिनोंदिन बढ़ते जा रहे हौसले और हिन्दू विरोधी बयान। अब ये दोनों ही समुदाय इस देश पर आधिपत्य ज़माने के लिए इस देश के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को ख़त्म करके इस देश को इस्लामिक या क्रिश्चियन देश बनाने की साज़िशों में लगे हुए हैं। इसलिए हमने यह निश्चय किया है कि अब हम इनके किसी सुख-दुःख में कम से कम तब तक तो शामिल नहीं होंगे, जब तक कि प्रत्येक आगामी प्रादेशिक चुनाव में भाजपा और अन्य हिन्दू संघठनों को विजयी बनाकर हम स्वयं इस देश को ही हिन्दू राष्ट्र घोषित नहीं करवा देते। अब इस बात का फैसला तो खुद आपको भी करना है कि आप को स्वयं अपने देश को एक हिन्दू राष्ट्र देखना अधिक प्रिय है या थोथी धर्मनिरपेक्षता के नाम पर चलकर भविष्य में इस हिन्दू बहुल देश को एक इस्लामिक या क्रिश्चियन देश में परवर्तित होते देखना? अच्छी तरह से सोच-समझकर और पाकिस्तान व् बांग्लादेश सहित सभी इस्लामिक देशों के माहौल और उनमें हिन्दुओं की मौजूदा परिस्थितियों का आंकलन करने के पश्चात ही कोई निर्णय लें। निश्चय ही ये फैसला आपका होगा, क्यूँकि न केवल वोट ही आपका है, बल्कि आपके इस फैसले से ही जुड़ा हुआ है आपकी आने वाली सभी पीढ़ियों का भविष्य ! और ये तो केवल हमारे हिन्दू धर्म में ही सिखाया जाता है कि उस काम को कभी नहीं करना चाहिए, जिसके लिए आपकी अपनी आत्मा ही साथ न दे ! 
               कितने दिन आँखें तरसेंगी,
               कितने दिन यूँ दिल तरसेंगे, 
               इक दिन तो बादल बरसेंगे,
                         ऐ मेरे प्यासे दिल ! 
                आज नहीं तो कल महकेंगी, 
                ख्वाबों की महफ़िल !
                नया ज़माना आएगा...... 
                नया ज़माना आएगा......
                आएगा इक दिन ऐसा भी, 
                जब इंडिया भारत कहलायेगा !  
       सत्यम शिवम सुंदरम !  जय हिन्द जय भारत वन्दे मातरम ! 
                                                      भारत माता की जय !  

            प्रिय मित्रों एवं बच्चों ! आप सभी इस बात से भली भांति परिचित हैं कि कांग्रेस और उसके सहयोगियों की कुनीतियों, मुस्लिम चाटुकारिता और दुर्व्यवस्था के कारण न सिर्फ मुस्लिम समाज के अपराधी प्रवृति के लोगों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं, जिसका सीधा असर हमारे हिन्दू समाज और उस की बहु-बेटियों की सामाजिक सुरक्षा पर पड़ रहा है। आये दिन देश में बढ़ते जा रहे सामूहिक बलात्कार के किस्से और थोड़े थोड़े अंतराल पर देश के विभिन्न भागों में होते दंगे इसके ज्वलंत उद्दाहरण हैं।
            हमारे हिन्दू धर्म को हिन्दू बहुल भारत होते हुए भी कदम कदम अपमानित होना पड़ता है, साथ ही ये देश भी कुव्यवस्था के कारण एक बार फिर से विनाश और विभाजन की ओर अग्रसर होता प्रतीत हो रहा है। इन सब बातों के अलावा पिछले कुछ समय से कुछ मुस्लिम देशों में गैर-मुस्लिम लोगों के साथ दुर्व्यवहार, सामूहिक जन-सँहार और जबरन धर्मान्तरण की अनगिनत घटनाओं के बाद इस देश को भी एक मुस्लिम देश बनाने की उठती मांग ने हमें सकते में डाल दिया है और सोचने पर मज़बूर कर दिया है कि नेहरू और गांधी की बेवकूफी और साज़िश के कारण क्या भारत और हिंदुत्व का अस्तित्व इस दुनिया से ही खत्म होने जा रहा है?
            यह बात मात्र कपोल-कल्पना समझ कर सिर्फ लापरवाही में हंसी में ही उड़ा देने की नहीं है, अपितु इस पर ठन्डे दिमाग से बैठ कर मंथन करने की आवश्यकता है। क्यूँकि दुनिया का इतिहास इस बात का गवाह है कि दुनिया के नक़्शे में पहले जितने भी हिन्दू धर्म पर चलने वाले देश थे, भारत और नेपाल जैसे इक्का दुक्का देश के अलावा उन सभी का अस्तित्व आज खतम हो चूका है और वो सभी न सिर्फ आज कट्टर इस्लामिक में गिने जाते हैं, बल्कि जो देश हिन्दू जनसख्या की बहुलता से हिन्दू देशो की श्रेणी में गिने जाते थे, आज वहाँ हिन्दू ढूंढने से भी नहीं मिलते, क्यूँकि वहां न सिर्फ हिन्दू सभ्यता और संस्कृति के प्रतीकों ही नष्ट किया गया, बल्कि वहाँ के मूल निवासी हिन्दुओं का अस्तित्व भी समाप्त कर दिया गया है। जो कुछ थोड़े बहुत अपनी जान बचाने में कामयाब भी हुए, उन्हें अपने अस्तित्व को बचाने के लिए अपने ही देश से अपनी समस्त चल-अचल संपत्ति को त्याग कर पलायन करना और संसार के विभिन्न हिस्सों में जा कर बसना पड़ा है।
           नेताओं की बातों पर आँख मूँद कर विश्वास करने वालों का सदा यही हश्र होता है। सोचो कि भगवान ने हम सभी को बुद्धि और दिमाग किसलिए दिए हैं, यदि हम उनका इस्तेमाल ही न करें? और आप सब भी तो इस बात से सहमत हैं कि विश्व के समस्त नेताओं की प्रवृति तो गिरगिट जैसी होती है, पल-पल में ही बदल जाती है। इससे ज्यादा दुखद और क्या होगा कि भारतीय नेताओं के कारण तो बेचारे गिरगिटों को भी बहुत बड़ी मात्रा में आत्महत्या करनी पड़ रही है क्यूँकि उनका कहना है कि जितनी देर उन्हें ये सोचने में लगती है कि अपना अगला रंग क्या बदलूँ, उतनी देर में तो कुछ भारतीय नेता अपना बयान तीन बार बदल लेते हैं।

महत्वपूर्ण सन्देश
भारत का एक जल्द से जल्द एक हिन्दू राष्ट्र बनना जरुरी क्यों?
क्या आप नहीं जानते कि आज़ादी के बाद से आज तक भारत के छह करोड़ से भी अधिक हिन्दुओं को जोर-जबरदस्ती से या लालच देकर मुस्लिम अथवा क्रिश्चियन बनाया जा चूका है?
क्या कीजियेगा, आज से 20-30 साल बाद जब भारत भी एक इस्लामिक देश बन जायेगा? आप अपनी जान देंगे, विदेश चले जायेंगे या कि अपने बच्चों सहित मुस्लिम बन जायेंगे? लेकिन तब भी सुरक्षा की क्या गारंटी है, क्यूँकि जो सुन्नी मुस्लिम लोग आज अपने ही उस शिया समुदाय को भी ठिकाने लगाने पर तुले हुए हैं, जो उन्हीं के इस्लाम का सदियों पुराना हिस्सा है, फिर क्या भरोसा कि कल को वो धर्म परिवर्तन से अपनी जान बचाने वालों को भी जिन्दा छोड़ेंगे या नहीं?
क्या आप नहीं जानते कि हिन्दू बहुल भारत होते हुए भी झारखण्ड के पहले से नक्सली पीड़ित रहे ख़ास भाग में आतंकवादियों द्वारा वहाँ रहने वाले हिन्दुओं को इलाका खाली करने या जान माल से हाथ धोने की धमकी भरे सन्देश भेजे जा चुके हैं, जिसकी चर्चा न्यूज़ चैनल की भी सुर्खियां बनी?
क्या कश्मीर को २५ साल पहले ही हिन्दुओं से खाली नहीं कराया जा चूका है? क्या आप नहीं जानते कि आज अरुणाचल और आसाम आदि राज्यों के कुछ मुस्लिम बहुल खास इलाकों में से भी लाखों की संख्या में हिन्दुओं का पलायन जारी है?
क्या आप पश्चिम बंगाल, केरल, अरुणाचल और आसाम के कुछ मुस्लिम बहुल खास इलाकों में रहने वाले हिन्दुओं की सैंकड़ों-हज़ारों की संख्या में आगजनी आदि से हुई जान माल की क्षति की अनगिनत बार की घटनाओं से वाकिफ नहीं, जिसके कारण आज केरल में हिन्दू नाममात्र ही बचे हैं?
क्या आप नहीं जानते कि बांग्लादेश बनने अर्थात 1971 से भारत के बहुसंख्यक हिन्दू समुदाय को अल्प संख्या में लाने और बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठियों द्वारा यहाँ भारत में मुस्लिम जनसँख्या को बढ़ाने की एक सोची समझी साज़िश चल रही है, जिसके तहत बांग्लादेश बनने अर्थात 1971 से अब तक इसी साज़िश को अंजाम देने के लिए बांग्लादेश से सात करोड़ से भी अधिक मुसलमानों को अनाधिकृत रूप से भारत में प्रवेश कराया जा चूका है, जिसका साथ लालू,मुलायम और मायावती और ममता बैनर्जी के अलावा सम्पूर्ण कांग्रेस के नेता भी बखूबी दे रहें हैं। इसीलिए ये सभी अक्सर ही उन बांग्लादेशी घुसपैठियों को वापस बांग्लादेश भेजने के प्रश्न पर भड़क जाते हैं, क्यूँकि उनमें से अधिकांश को तो अपना वोट बैंक बढ़ाने की खातिर ये लोग पहले ही भारत की नागरिकता दे भी चुके हैं। यदि बांग्लादेशी घुसपैठियों की वापसी पर सख्ती से अमल होता है, तो इन सबकी ये साज़िश भी सामने आ जाएगी।
क्या आप नहीं जानते कि बांग्लादेश में वहाँ रहने वाले बंगाली हिन्दुओं पर कैसे कैसे कहर ढाये जा रहे हैं, जिसके कारण वो लोग भी वहाँ से पलायन करने पर मज़बूर हैं?
क्या आप नहीं जानते कि पाकिस्तान में अपनी चल-अचल धन-संपत्ति छोड़कर अपनी जान बचाने की खातिर वहाँ के हिन्दुओं को लाखों की संख्या में भारत के राजस्थान आदि में शरण लेनी पड़ी है, जो किसी भी कीमत पर वापस पाकिस्तान जाने को तैयार नहीं? उन लाखों हिन्दुओं को तो यहाँ के मूल निवासी होने पर भी आज तक भारत की नागरिकता नहीं दी गई है, जबकि इन लालू, मुलायम मायावती और ममता बैनर्जी आदि के शासनकाल में और कांग्रेस शासित प्रदेशों में कांग्रेस के इशारे पर करोड़ों की संख्या में बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठियों को यहाँ की नागरिकता दे दी गई है, आखिर क्यों?
आप चाहे लड़कें हों या लड़की हों, आदमी हों या औरत हों, जवान हों या बूढ़े हों, अमीर हों या गरीब हों, नेता हों या अभिनेता हों, कर्मचारी हों या व्यापारी हों, जज हों या वकील हों, भले ही हम लोग कितने भी पढ़े लिखे हों या बिलकुल अनपढ़ हों लेकिन यदि हम हिन्दू हैं तो क्या यह हमारा फ़र्ज़ नहीं बनता कि हम अपने अपने लेवल पर हम में से हर एक का यह कर्तव्य बनता है कि अपने से मिलने जुलने वाले हर एक व्यक्ति से संसार के सभी 56 हिन्दू देशों के इस्लामिक देश बनने और वहां के मुस्लिम्स के द्वारा वहां उन देशों में रहने वाले हिन्दुओं के ऊपर किये जा रहे जुल्मों-सितम व् अत्याचारों के बारे में बातचीत अवश्य करें, क्यूँकि यह न केवल आपके और आपकी ही बल्कि उन सभी की आने वाली पीढ़ियों की भी जिंदगी का प्रश्न है, जिनसे आप इस बारे में बातचीत करेंगे।
कभी यहाँ की भोली भाली जवान व् खूबसूरत लड़कियों की मासूमियत और नासमझी/अनभिज्ञता का लाभ उठाकर उन्हें लव-जेहाद जैसे हथकंडों में फंसाया जाता है, जिसमें कभी कभी तो अपने आपको जरुरत से ज्यादा मॉडर्न व् समझदार समझने वाली पढ़ी-लिखी मगर हकीकत में निहायत ही बेवकूफ किस्म की लड़कियां भी फंस जाती हैं, जिनका परिणाम अक्सर ही समाचार-पत्रों में चर्चा का विषय बन जाया करता है तो कभी कभी उनकी यह आधुनिकता भरी समझ उन्हें आत्महत्या की कगार तक भी पहुँचा देती है।
कभी इन लोगों के द्वारा कभी यहाँ हिन्दुओं के गरीब व् अनपढ़ तबके खासकर पिछड़ी जाति के लोगों को ऊँची जाति के लोगों के खिलाफ भड़काया जाता है। मुसीबत तो यह है कि इन तथाकथित पिछड़ी जातियों के पढ़े-लिखे लोग भी बिना कुछ सोचे समझे ही इन लोगो की हाँ में हाँ मिला देते हैं, जिसका परिणाम यह होता है कि उस समय वहाँ मौजूद अन्य गरीब व् अनपढ़ लोग उनकी बात को सही समझकर खुद अपने ही हिन्दू धर्म की जड़ें खोदने का काम शुरू कर देते हैं।
कभी सोचा है कि ऐसा सिर्फ हिन्दू धर्म के लोगों के साथ ही क्यों किया जाता है? क्या आपको पता है कि समस्त संसार के अधिकांश देश या तो क्रिश्चियन हैं या इस्लामिक अथवा मुस्लिम देश। जबकि हमारा सनातन हिन्दू धर्म संसार में तीसरा सबसे अधिक माना जाने वाला धर्म होते हुए भी बहुसंख्यक हिन्दुओं का इकलौता देश यह भारत ही है या नाममात्र का छोटा सा गरीब देश नेपाल। इस्लाम व् क्रिश्चयन दोनों ही धर्म किसी भी प्रकार से समस्त संसार के ताकतवर देशो पर अपनी हुकूमत चाहते हैं, ताकि संसार के बाकी कमज़ोर देशों को अपनी आधीन कर सकें या इच्छानुसार चला सकें। और यही इच्छा इन दोनों धर्मों की भारत के बारे में भी है।
इसलिए अभी से सोच लीजिये कि आपको भविष्य में हिन्दू बनना है या क्रिश्चियन। मुसलमान आपको मार-मार कर मुस्लिम बनाएंगे और क्रिश्चियन लालच देकर। लेकिन फायदा क्रिश्चियन बनने में है, क्यूँकि क्रिश्चियन देश लूटते भले ही हों, लेकिन वो किसी को जान से नहीं मारते। वो बात अलग है कि वो आपको लालच देकर क्रिश्चियन बनाने की कोशिश करेंगे। बन गए तो ठीक वर्ना मुसलमान आपको मुसलमान बना देंगे या मार देंगे। लेकिन भारत में रह कर हिन्दू आप किसी भी हालत में नहीं रहेंगे, क्यूंकि तब तक तो यह एक इस्लामिक देश बन चुका होगा। जिसका सबसे बड़ा सबूत संसार के सभी हिन्दू 56 देशों का पहले ही इस्लामिक देशों में तब्दील होना है और पिछले साल 15 अगस्त को भारत को एक इस्लामिक देश बनाने की मांग केरल में उठ भी चुकी है, जिसके फोटोज आप मेरी पुरानी पोस्ट्स में भी देख सकते हैं।
इनका केवल एक ही मकसद है कि किसी भी प्रकार से यहाँ के बहुसंख्यक हिन्दू आपस में लड़ें, कमज़ोर हों और उनका हिन्दू धर्म से मोह भंग हो सके और वो यहाँ के बहुसंख्यक हिन्दुओं को अल्प संख्यक बना सकें, ताकि अपनी सुविधानुसार जब जी चाहे इसे एक क्रिश्चियन या इस्लामिक देश में परिवर्तित किया जा सके। जबकि अमीर गरीब या ऊँच-नीच की ये जातिगत विसंगतियाँ किस धर्म में नहीं हैं? क्या क्रिश्चियन व् इस्लाम में नहीं हैं? क्या क्रिश्चियन धर्म में रोमन कैथोलिक व् प्रूटेस्टेंट नहीं होते? क्या उनमें आपस में शादियाँ आसानी से हो जाती हैं, फिर यह तोहमत केवल हिन्दू धर्म पर ही क्यों लगायी जाती है? क्या इस्लाम में शिया-सुन्नी नहीं होते, जिनमें संसार के सभी कोनों में अक्सर ही मुठभेड़ भी होती रहती हैं?
क्या उनमें विभिन्न जातियां नहीं होती? और तो और जो लोग धर्म परिवर्तन करके मुसलमान बन भी जाते हैं, उन्हें भी इस्लाम को शुरू में ही अपनाने वाले लोग भी दोयम दर्जे का मुसलमान यांनी मुहाजिर कहते हैं। मुस्लिम वर्ग के लोग दिल्ली तो इन मुठभेड़ों का खास गवाह रहा है, जब कुछ साल पहले तक भी मुहर्रम के अवसर पर इस्लाम के इन दोनों वर्गों के लोग ताजिये निकलते वक्त अक्सर ही भिड़ जाया करते थे।
क्रिश्चियन देशों में और मुस्लिम देशों में सबसे बड़ा अंतर यही है कि क्रिश्चियन धर्म वाले देश अन्य गरीब देशों के लोगों को अपरोक्ष रूप से लूट-लूट कर अमीर बनना चाहते हैं, तो मुस्लिम धर्मानुयायी अपराध के रस्ते दूसरे धर्मानुयायियों की धन-संपत्ति आदि को हड़प कर के अमीर बनना चाहते हैं, जिसका सबसे बड़ा उद्दाहरण कश्मीर, बांग्लादेश और पाकिस्तान सहित सभी मुस्लिम देशों में गैर-मुस्लिम लोगों खासकर हिन्दुओं को मार-पीट कर, उन्हें मारकर अथवा वहां से खदेड़ कर उनकी संपत्ति पर कब्ज़ा किया जाना है।
भारत के कश्मीर से हिन्दू 25 साल पहले ही भगा दिए गए, जो आज तक देश के विभिन्न भागों में खानाबदोशों की जिंदगी बसर कर रहे हैं। केरल, आंध्र आदि में ओवैसी भाइयों की दादागिरी तो जगजाहिर है ही, इसके अलावा पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश व् महाराष्ट्र आदि राज्यों के बहुत बड़े भागों को आजकल वहाँ रहने वाले हिन्दुओं ने ही मिनी पाकिस्तान का नाम भी दे दिया है, क्यूँकि वहां केवल मुस्लिम्स की ही हुकूमत चलती है।
कश्मीर पहले ही खाली करवा चुके हैं, झारखण्ड के बहुत बड़े भाग में तो ISIS के आतंकवादियों द्वारा हिन्दुओं को घर छोड़कर चले जाने की धमकी के पर्चे भी समाचारों में आ ही चुके हैं और अरुणाचल एवं आसाम आदि में से भी कश्मीर की तर्ज पर हिन्दुओं का पलायन लगातार जारी है।
अब यह फैसला आपको करना है कि आप मुसलमान बनना चाहते हैं या क्रिश्चियन, क्यूँकि आपको जिन्दा रहने के लिए या तो आपको किसी क्रिश्चियन देश में जा कर बसना होगा या आपको इन दोनों में से एक को तो अवश्य ही चुनना होगा। वर्ना आने वाले 30 साल के बाद तो आपकी भावी पीढ़ी का अंत तय है।
इस सबसे बचने का केवल एक ही मार्ग है कि न सिर्फ इस समस्या के बारे में अपने सभी जानकारों, मित्रों व् रिश्तेदारों आदि से अक्सर चर्चा ही करेंगे, बल्कि हम सभी आज से ही ये प्रण करें कि ये हालात काबू में आने और इस देश को हिन्दू राष्ट्र घोषित होने तक आज के बाद भारत के किसी भी हिस्से में होने वाले सभी प्रकार के स्थानीय निकायों, वहाँ की विधान सभाओं और केंद्र सरकार के लिए लोकसभा के सभी चुनावों में केवल अपने देशभक्त हिन्दू नेताओं और अपने हिन्दू संगठनों जैसे - भाजपा, शिव-सेना, विश्व हिन्दू परिषद, आरएसएस, बजरंगदल आदि के नेताओं को ही अपना वोट देकर चुनेंगे। ताकि हमारे इन हिन्दू संगठनो के हाथ मज़बूत हों और इनके ज़रिये हम इस देश को वो विषम एवं दुखदायी परिस्थितियां आने से पहले ही जल्दी से जल्दी भारत को एक हिन्दू राष्ट्र घोषित करवा सकें।
इससे पहले कि मुस्लिम मैजोरिटी में आकर यहाँ उत्पात मचाएं और इस देश को एक इस्लामिक देश बना पाएं, उससे पहले ही हम सबकी यह कोशिश होनी चाहिए कि अपने सभी जानकारों को यह मैसेज और सन्देश देकर समस्त भारत में भाजपा की सरकार बनाकर इस देश को भाजपा के ज़रिये एक हिन्दू राष्ट्र में ही बदल दिया जाएँ, क्यूँकि इस बात को तो सभी जानते हैं कि भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने का सपना केवल भाजपा, आरएसएस और अन्य हिन्दू संगठन ही देखते हैं।
आप यह भी सोच सकते हैं कि कहीं मैं कोई भाजपा समर्थक तो नहीं? हकीकत तो यही है कि मैं कोई भाजपा समर्थक नहीं हूँ, लेकिन अगर होता भी उससे क्या फर्क पड़ जाता? अगर मैं मुस्लिम संगठनो को भी समर्थन करूँ, तो उससे भविष्य में हिन्दुओं और हिंदुस्तान पर आने वाला यह संकट क्या टल जायेगा?
हम आपको कोई आतंकवादी बनने के लिए तो नहीं कह रहे न? बल्कि हम तो आपको केवल इस बात का एहसास कराना चाहते हैं कि इस तथाकथित थोथी धर्मनिरपेक्षता की नीति में क्या रखा है? जबकि प्रथम तो धर्मनिरपेक्षता का अर्थ ही सभी धर्मों को एक समान अधिकार एवं एक समान न्याय देना ही होता है, लेकिन क्या भारत में कभी वास्तव में ऐसा होता भी है?
नहीं होता, उसके दो ही कारण हैँ - पहला कारण कि मुस्लिम खुद ही इसे कभी नहीं मानते और दूसरा कारण यह कि अपने आपको धर्मनिरपेक्ष कहने वाले कांग्रेस और उसके सभी सहयोगी दलों के मुस्लिमपरस्त नेताओं ने इस धर्मनिरपेक्षता की नीति को केवल मुस्लिम तुष्टिकरण और हिन्दुओं के अपमान का ही जरिया बनाकर छोड़ दिया है।
फिर क्या दिया है हमें इस धर्मनिरपेक्षता की नीति ने? केवल हम हिन्दुओं को अपने हिन्दू भाइयों से उन थोथे सिद्धांतों के लिए लड़कर अपने ही हिन्दू धर्म और अपने ही देश की जड़ें खोदना ही सिखाया है, वरना न तो यह देश कभी किसी का ग़ुलाम बनता और न ही ये विषम परिस्थितियां कभी हमारे व् हमारे बच्चों के सामने आती?
हम आपसे कोई यह तो कह नहीं रहे कि आइये ! हम और आप सभी हिन्दू एकजुट होकर मुसलमानों का कत्लेआम करेंगे? हमारे हिन्दू धर्म और हमारे घर-परिवारों में यह नीचता या बर्बरता तो कभी भी सिखाई नहीं जाती। लेकिन कम से कम मौजूदा हालात में हम सभी एकजुट होकर ऊपर बताये हुए इस उपाय पर अमल करके इसके ज़रिये अपने देश में आने वाले संकट से तो निपट सकते हैं ना?
और हाँ एक बात यह भी याद रखियेगा कि अकेले मोदी जी भी इस विषय में कुछ खास नहीं कर पाएंगे, जब तक कि आप उन जैसे ही कुछ कट्टर देशभक्त और कट्टर हिन्दू नेताओं को उनका इस मुहीम में साथ देने के लिए नहीं चुनते। क्यूँकि हो सकता है कि भारत को एक हिन्दू देश बनाने की घोषणा होते ही मुसलमान सारे भारत में एक बार जोर-शोर से दंगा फैलाने की कोशिश करें? जिसको काबू करने के लिए सारे भारत में सशक्त भाजपा और कट्टर पंथी हिन्दू नेताओं के हाथ में वहां की सत्ता अवश्य होनी चाहिए, खासकर उन प्रदेशों में, जिनमें वहाँ के लोग बड़े भाग को मिनी पाकिस्तान का नाम पहले ही दे चुके हैं, ताकि किसी भी समुदाय के जान-माल की ज्यादा हानि न हो सके।
अपने मुस्लिम मित्रों को भी आप यह कहकर भारत को एक हिन्दू राष्ट्र बनाने की इस मुहीम में भाजपा का साथ देने के लिए संतुष्ट कर सकते हैं कि हमारा इतिहास भी इस बात का गवाह है कि प्राचीन काल से आज तक कभी किसी भी हिन्दू राजा ने गैर हिन्दुओं पर अत्याचार नहीं किये, वरना यहाँ कभी कोई दूसरा धर्म पनप ही नहीं पाता, जबकि बाबर, महमूद गजनवी, चंगेज़ खान, तैमूरलंग, मुहम्मद गौरी और औरंगज़ेब समेत न जाने कितने ही मुस्लिम बादशाहों के द्वारा हिन्दू मंदिरों को तोड़ने, उन्हें लूटने और यहाँ की हिन्दू प्रजा पर जुल्मो-सितम के किस्से तो इतिहास में भरे पड़े हैं।
उन्हें इस बात का भरोसा दिलाइये कि हिन्दू राष्ट्र बनने के बाद भी उनके साथ किसी किस्म का कोई भेदभाव नहीं किया जायेगा। अगर मेरी बात आपको ठीक से समझ में आ पायी हो, तो आप इसे आगे भी शेयर कर सकते हैं। आप मेरी किसी भी पोस्ट के व्यूज को देखकर सुनिश्चित कर सकते हैं, कि मेरी हर पोस्ट को हज़ारों लोग अवश्य देखते हैं। इसलिए अपने इस मैसेज को इस पोस्ट के ज़रिये हज़ारों लोगों को भेज कर अपने हिस्से का अपना काम मैं तो कर चुका हूँ।
आगे का काम आपका है कि यह मैसेज आप अपने आगे के हज़ारों लोगों को कैसे भेज पाते हैं अथवा उन्हें भी यह हकीकत कैसे समझा पाते हैं? चाहें तो इसके लिए आप इस मैसेज के हज़ारों प्रिंट छपवा कर भी यह काम आसानी से कर सकते हैं। लेकिन सावधान ! कांग्रेस व् अन्य राजनीतिक पार्टियों से जुड़े हुए लोगों और कट्टर मुसलमानों से बचकर, क्यूँकि इससे उनकी इस देश को मुस्लिम देश बनाने की साज़िश नाकाम जो हो सकती है, तो ज़ाहिर है कि मेरी तरह आप भी उनकी नज़रों में खटक सकते हैं।
क्या आप नहीं जानते कि भारत में भाजपा व् अन्य हिन्दू संगठनो के नेताओं को छोड़कर अन्य सभी नेता, मीडिया, अन्य वर्गों/धर्मों के लोग व् मुस्लिम समुदाय सहित समाज के सभी ताकतवर तबके न केवल कदम कदम पर हिन्दू धर्म के बारे में तरह तरह की उल-जुलूल बातें फैलाने की भरसक कोशिश ही करते हैं, बल्कि अक्सर यह भी देखने में आता है कि ये सभी लोग व् नेता जब कभी उन्हें हिन्दुओं को किसी भी बात पर नीचा दिखाने और अपमान करने का मौका मिलता है, तो उसमें अपनी तरफ से कोई कसर भी बाकी नहीं छोड़ते? इसका भी एक कारण है कि इनमें से अधिकाँश नेता व् मीडिया कर्मी या तो मुसलमान बन ही चुके हैं या बनने को तैयार बैठे हैं, जिसका खुलासा हम पहले की कई पोस्ट्स में भी कर चुके हैं। लेकिन फैसला तुरंत अवश्य करें, वरना देर होने पर तो पछताने का भी कोई फायदा नहीं होगा।
- उमा शंकर पराशर

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                                  - Uma Shankar Parashar.
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Dear brothers and sisters ! 
                              Namaskar. 
                                   II ॐ नमः शिवाये II
                                                         मेरी और मेरे परिवार की ओर से आप सभी भाई-बहनों और आप के परिवार के सभी सदस्यों को दीवाली, गोवेर्धन पूजा, भैया दूज सहित त्यौहारों भरे इस सीजन और नव वर्ष की ढेरों बधाई एवं हार्दिक शुभकामनायें ! मेरी कामना है कि नए वर्ष में भोले बाबा भगवान शिव आपकी सभी उचित मनोकामनाओं को पूर्ण करें। मेरी यही कामना है कि भोले बाबा का शुभाशीष हर पल सदैव आप के साथ रहे, उनकी कृपा प्राप्त करके आप हर प्रकार के दुःख-दर्द से दूर रह कर संसार के समस्त सुखों का जीवन भर आनंद उठा सकें। भोले बाबा मेरे सभी नेट भाइयों को दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की दें और उनके घर में सभी प्रकार के सुख-शांति एवं सम्पन्नता की बरसात करते रहें तथा उनकी सभी उचित मनोकामनाओं को जल्दी से जल्दी पूरा करें, ताकि मुझे भी सारा साल आप लोगों से एक के बाद एक खुशखबरियाँ मिलती रहें। भोले बाबा से मेरी यही प्रार्थना है कि वो आप सभी के जीवन को हर तरह की खुशियों के रंगों से सदा ही सराबोर रखें I 
                                                                 - Poonam Sharma.

N.B : I strictly believe in and follow my Indian culture only and hence I am not at all interested in making the boys my friends. As such all of my posts are addressed to my brothers and sisters on net only. In case you too consider yourself one among them, then only you are supposed to write some comment on my posts, otherwise you not only need to keep away from my posts but also to remove my name from your circle at once. मैं केवल अपनी भारतीय सभ्यता को ही मानती और उसी पर चलती हूँ तथा वेस्टर्न कल्चर पर चलने वाली लड़कियों की तरह लड़कों से दोस्ती करने का भी मैं कोई शौक नहीं रखती। इसीलिए मेरी सभी पोस्ट्स केवल मेरे भाई-बहनों के नाम ही होती हैं। यदि आप खुद को भी मेरे उन्हीं भाई-बहनों में से ही एक समझते हों, तभी मेरी पोस्ट्स में कमेंट करें, वरना ना सिर्फ मेरी सभी पोस्ट्स से दूर ही रहें, बल्कि मेरा नाम भी अपने सर्किल से तुरंत रिमूव कर दें।

प्रिय भाइयों और बहनों ! क्या आप जानते हैं कि आप में से अधिकतर लोगों की प्रोफाइल में किसी भी पोस्ट में हमारी तरह से ज्यादा लोगों के कमेंट्स, लाइक्स और शेयर ना होने का असली कारण क्या है? इसका सब से बड़ा एक ही कारण यह है कि एक तो आपको बहुत कम लोगों ने अपने सर्किल में add किया हुआ है, और ऊपर से आप सभी अपनी पोस्ट्स को प्राइवेटली शेयर करके खुद ही दूसरे लोगों को अपने साथ जुड़ने का रास्ता बंद कर देते हो, जिससे वो लोग, जो आपके सर्किल में नहीं हैं, वो आपकी पोस्ट्स को देख ही नहीं पाते। जबकि आपको शायद इस बात का मलाल भी होता होगा कि हमारी पोस्ट्स में भी ज्यादा लोग लाइक और शेयर क्यूँ नहीं करते, होता है ना? एक बात याद रखिये कि छिपाता वही है, जो कुछ गलत करता है। जब आप कुछ अच्छा करते हैं, तो उसे छिपाने की बजाए सभी को जानने दीजिये, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग आपके अच्छे विचारों को जानें और आप के साथ जुड़ें। इसलिए आगे से आप अपनी सभी पोस्ट्स को प्राइवेटली की बजाए पब्लिकली शेयर किया कीजिये अर्थात अपनी पोस्ट किसी के साथ शेयर करते वक्त नाम लिखने वाली लाइन में सबसे पहले पब्लिक पर क्लिक करें और उसके बाद उन सबके नाम add करते जाएँ, जिन्हें आप अपनी वो पोस्ट भेजना चाहते हों। I hope you can understand my suggestion well and would follow the same in future.
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For Motivation of younger generation : 
     सत्यम शिवम् सुन्दरम !  
      जय हिन्द, जय भारत !   
               वंदे मातरम !

प्रिय मित्रों एवं बच्चों !
               ॐ नमः शिवाय ! हर हर महादेव ! भगवान शिव आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करें ! और
     ईश्वर आपको सदा सही राह पर चलायें,
   जिससे आपका प्रत्येक दिन मंगलमय हो !

    विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, 
         झंडा ऊंचा रहे हमारा !

मित्रों व् बच्चों ! 
                   आप सभी भाई-बहनों, मित्रों एवं बच्चों को परिवार सहित दीपावली के पावन पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं ! लक्ष्मी माता, गणपति बाबा, भगवान शिव और माता रानी आप सभी को सपरिवार यथायोग्य संयम, साहस, संस्कार, सफलता, बल-बुद्धि, ऋद्धि-सिद्धि, धन-संपत्ति के साथ साथ सभी प्रकार का मानसिक, शारीरिक व् पारिवारिक सुख-शांति प्रदान करें और आप सभी के सपनो को साकार करें।  

मित्रों !
                   कहा जाता है कि जब कोई बात पढ़कर अथवा बोलकर बार-बार दोहराई जाती है, तब वो बात हमारे अवचेतन मन में गहरे तक बैठ जाती है। तब क्यों न हम अपनी भारतीय संस्कृति की नीचे लिखी हुई कुछ अच्छी बातों को दोहराएं, जिससे हमारे व्यक्तित्व का उचित विकास हो और हम अपने राष्ट्र के सर्वांगीण विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकें?
                   श्रीमद भगवद्गीता में भगवान श्री कृष्ण ने स्पष्ट कहा है कि न्याय-अन्याय अथवा धर्म-अधर्म की लड़ाई में बीच का कोई मार्ग ही नहीं होता अर्थात कोई भी पक्ष जो न्याय का समर्थक है, तो उसे अन्याय के प्रतिकारस्वरूप पूरी तरह से न्याय के साथ खड़े होना चाहिए। इसी प्रकार जो कोई भी पक्ष धर्म या न्याय के पक्ष में नहीं है, तो उसे परोक्ष-अपरोक्ष रूप से अन्याय का समर्थन करने वाला ही मानना चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण ने आगे इस बात को भी स्पष्ट किया है कि अधर्मियों  से समाज एवं धर्म की रक्षा के लिए अधर्मियों के खिलाफ किये गए किसी भी प्रकार के छल-बल एवं हिंसा के प्रयोग को पाप की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। लेकिन उसका उद्देश्य केवल और केवल धर्म की स्थापना ही होना चाहिए।
                   "कोई भी धर्म राष्ट्र-धर्म अथवा देशभक्ति से बड़ा नहीं होता। किसी भी प्रकार के देशद्रोह की केवल एक ही सजा मृत्यु-दंड होनी चाहिए। जिस देश अथवा राज्य की अधिकांश जनता कायर हो, वहां विदेशी शक्तियों अपना आधिपत्य अधिक आसानी से जमा पाती  हैं। अन्याय करने वाले से उस अन्याय को चुपचाप सहने वाला अधिक दोषी होता है, जिसके कारण समाज में कायरता बढ़ती है और अन्यायी को बल मिलता है। अतः अन्याय का प्रतिकार अवश्य करें व् अपने बच्चों एवं छोटे भाई-बहनों को भी अन्याय का प्रतिकार करने की ही शिक्षा दें।" 
                   "जैसे काली से काली घटाएँ भी सूर्य के प्रकाश को बिखरने से अधिक समय तक रोक नहीं सकती, उसी प्रकार झूठ को कैसी भी चाशनी में लपेट कर परोसने या सत्य को सात तालों के भीतर कैद करने पर भी सत्य को छिपाया अथवा दबाया नहीं जा सकता। और झूठ के सारे अंधकार को चीर कर एक न एक दिन सच का सूरज निकलता जरूर है। सत्य एवं अहिंसा के पथ पर चलना कुछ कठिन भले ही हो, लेकिन केवल सत्य और अहिंसा का मार्ग ही सर्वश्रेष्ठ होता है, इसलिए सदा सत्य बोलने की कोशिश करें। सत्य को बोलने का सबसे बड़ा फायदा ये है कि आपको कोई भी बात याद नहीं रखनी पड़ती, जबकि एक झूठी बात को छिपाने के लिए कभी-कभी सैंकड़ों झूठ बोलने पड़ते हैं। लेकिन एक बात अवश्य याद रखें कि सत्य और अहिंसा कायरों के हथियार नहीं, अतः अपनी कायरता को छिपाने के लिए इनका सहारा लेकर अपने बच्चों एवं समाज को मूर्ख बनाना अपने आपको धोखा देने जैसा ही है।"
                    " साफ़ दिल, नेक नियत और सही इरादे से किये जाने वाले हर काम में परमात्मा स्वयँ आपके साथ रहते हैं !" 
                    "दूसरों के साथ वो व्यव्हार कभी न करें, जो आप स्वयं अपने लिए नहीं चाहते !"             
                    "याद रखें कि हमारा चरित्र उस भव्य इमारत की भांति होता है, जिसे बनाने में तो कभी-कभी बरसों लग जाते हैं, लेकिन गिराने में केवल कुछ पल की ही देरी लगती है। ठीक उसी प्रकार चरित्र निर्माण हिमालय पर चढ़ने के समान दुर्गम है, परंतु गिरने के लिए केवल हमारा एक गलत कदम ही पर्याप्त है !"
                    "प्रकृति का यह नियम है कि संसार में जो कुछ भी हल्का है, वही ऊपर उठता है। इसलिए अपने उत्थान के लिए अपने अंदर के अहंकार को निकाल कर अपने आपको हल्का करें !" 
                     "वैसे तो कुछ भी बोलकर अपने शब्द वापस लेना दोगले नेताओं का ही चलन है, फिर भी आप अपने लफ़्ज़ों को तोलकर बोलिए ! ताकि कभी वापस भी लेने पढ़ें तो वजन न लगे !"
                     "इस देश में पैदा होने, यहाँ की आबो-हवा में खेल-कूद कर पले बढे होने के कारण इस देश के प्रति हमारे कुछ फ़र्ज़ व् क़र्ज़ होते हैं। यदि आप के मन में अपने इस देश के प्रति प्रेम और आदर की भावना न हो, यदि यहाँ का नागरिक होने के बावजूद आप अपने उन कर्तव्यों का पालन ठीक से नहीं करते, अपने माता-पिता, बुजुर्गों एवं गुरुजनों को यथोचित सम्मान नहीं देते व् केवल दूसरों में मीन-मेख निकालकर ही आप अपना जीवन व्यतीत करते हैं, तो निश्चय ही आप इस देश की धरती पर बोझ और इंसानियत के नाम पर कलंक हैं !"
                     "Inactivity and idleness is the sign of a dead body ! if you have got any free time, don't waste it. You can utilize the same for the sake of the betterment of society, mankind and work for the national interests."  
                     "निष्क्रियता और आलस्य एक मृत शरीर की पहचान है ! यदि आप के पास खाली समय है, तो इसे व्यर्थ बर्बाद मत करो। आप अपने खाली समय का सदुपयोग समाज, मानवता की बेहतरी और राष्ट्रीय हितों के लिए काम करके भी कर सकते हैं ! "   
            प्रिय मित्रों एवं बच्चों ! आप सभी इस बात से भली भांति परिचित हैं कि कांग्रेस और उसके सहयोगियों की कुनीतियों, मुस्लिम चाटुकारिता और दुर्व्यवस्था के कारण न सिर्फ मुस्लिम समाज के अपराधी प्रवृति के लोगों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं, जिसका सीधा असर हमारे हिन्दू समाज और उस की बहु-बेटियों की सामाजिक सुरक्षा पर पड़ रहा है। आये दिन देश में बढ़ते जा रहे सामूहिक बलात्कार के किस्से और थोड़े थोड़े अंतराल पर देश के विभिन्न भागों में होते दंगे इसके ज्वलंत उद्दाहरण हैं।
            हमारे हिन्दू धर्म को हिन्दू बहुल भारत होते हुए भी कदम कदम अपमानित होना पड़ता है, साथ ही ये देश भी कुव्यवस्था के कारण एक बार फिर से विनाश और विभाजन की ओर अग्रसर होता प्रतीत हो रहा है। इन सब बातों के अलावा पिछले कुछ समय से कुछ मुस्लिम देशों में गैर-मुस्लिम लोगों के साथ दुर्व्यवहार, सामूहिक जन-सँहार और जबरन धर्मान्तरण की अनगिनत घटनाओं के बाद इस देश को भी एक मुस्लिम देश बनाने की उठती मांग ने हमें सकते में डाल दिया है और सोचने पर मज़बूर कर दिया है कि नेहरू और गांधी की बेवकूफी और साज़िश के कारण क्या भारत और हिंदुत्व का अस्तित्व इस दुनिया से ही खत्म होने जा रहा है?
            यह बात मात्र कपोल-कल्पना समझ कर सिर्फ लापरवाही में हंसी में ही उड़ा देने की नहीं है, अपितु इस पर ठन्डे दिमाग से बैठ कर मंथन करने की आवश्यकता है। क्यूँकि दुनिया का इतिहास इस बात का गवाह है कि दुनिया के नक़्शे में पहले जितने भी हिन्दू धर्म पर चलने वाले देश थे, भारत और नेपाल जैसे इक्का दुक्का देश के अलावा उन सभी का अस्तित्व आज खतम हो चूका है और वो सभी न सिर्फ आज कट्टर इस्लामिक में गिने जाते हैं, बल्कि जो देश हिन्दू जनसख्या की बहुलता से हिन्दू देशो की श्रेणी में गिने जाते थे, आज वहाँ हिन्दू ढूंढने से भी नहीं मिलते, क्यूँकि वहां न सिर्फ हिन्दू सभ्यता और संस्कृति के प्रतीकों ही नष्ट किया गया, बल्कि वहाँ के मूल निवासी हिन्दुओं का अस्तित्व भी समाप्त कर दिया गया है। जो कुछ थोड़े बहुत अपनी जान बचाने में कामयाब भी हुए, उन्हें अपने अस्तित्व को बचाने के लिए अपने ही देश से अपनी समस्त चल-अचल संपत्ति को त्याग कर पलायन करना और संसार के विभिन्न हिस्सों में जा कर बसना पड़ा है।
           नेताओं की बातों पर आँख मूँद कर विश्वास करने वालों का सदा यही हश्र होता है। सोचो कि भगवान ने हम सभी को बुद्धि और दिमाग किसलिए दिए हैं, यदि हम उनका इस्तेमाल ही न करें? और आप सब भी तो इस बात से सहमत हैं कि विश्व के समस्त नेताओं की प्रवृति तो गिरगिट जैसी होती है, पल-पल में ही बदल जाती है। इससे ज्यादा दुखद और क्या होगा कि भारतीय नेताओं के कारण तो बेचारे गिरगिटों को भी बहुत बड़ी मात्रा में आत्महत्या करनी पड़ रही है क्यूँकि उनका कहना है कि जितनी देर उन्हें ये सोचने में लगती है कि अपना अगला रंग क्या बदलूँ, उतनी देर में तो कुछ भारतीय नेता अपना बयान तीन बार बदल लेते हैं।
           हमारी कम्युनिटी 'सरफ़रोश देशभक्त' और 'अखिल भारतीय गौ-रक्षा समिति' का गठन केवल सोशल साइट पर अपने आसपास के उन सभी लोगों को एकजुट करने के लिए ही किया गया है, जिनके दिल के अंदर इस देश और हिन्दू धर्म के लिए कुछ भी कर गुजरने की आग भरी है। जैसे ही हमारी सदस्य संख्या निश्चित स्तर को पार करेगी, उसके पश्चात आगे के कार्यक्रम की रूपरेखा और उन पर कार्यवाही करने की प्रणाली पर विचार-विमर्श किया जायेगा। तब तक के लिए आप सभी ज्यादा से ज्यादा ऐसे लोगों को यहाँ लाने का प्रयास करते रहें, जिनमें इस देश और हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए आप जैसा ही जज्बा और आग भरे हों। इसके अलावा आप सभी सदस्यों से अनुरोध है कि इस कम्युनिटी में ऐसी कोई पोस्ट शेयर न करें, जो आने वाले किसी भी अन्य सदस्य की नज़र में हमें विषय की गंभीरता के प्रति लापरवाह, गैर-जिम्मेदार या छिछोरी प्रवृति का दर्शाये। अतः यहाँ केवल वही पोस्ट शेयर करें, जिसमें देशभक्ति की भावना कूट कूट कर भरी हो या हिन्दू धर्म के प्रति आस्था का समावेश हो।

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                                  - Uma Shankar Parashar.
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