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मोहब्बत वोह चीज़ है दोस्तों,
जो हो गई सो हो गई,फिर ना उसपे यार बदला जाये ।या मरहम बदला जाये।
अक़्स यार का फिर न कभी बदला जाता है,और मरहम न कोई बी फिर काम आता है।
उसे कह दो के आ जाये हमे तस्सवुर दिलानेको,
हुस्न-ए-तक्कवुर में यार को भुलाया न जाता है।
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