मुल्क में इस वक्त सेकुलरिज्म नाम का तो जनाजा निकल चुका है जिस की मिसाल आप बिहार से ले सकते हैं और दूसरी तरफ मुसलमानो के सात जो सुलूक हो रहा है वह आईन के बिल्कुल खिलाफ है सरे आम मुसलमानो को हरासा किया जा रहा है हुकूमतें चुप चाप तमासा देखा करती है खुवाज़ा मुईनुद्दीन नाम का फौजी जिसने 12 साल मुल्क की हिफाजत करने में अपना खून पसीना बहाया हो उसको सिर्फ इस बिना पर नौकरी से बर्खास्त कर दिया कि उ सने दाढ़ी रखा ली आखिर मुसलमानो की दाढ़ी से जलन क्यों है और भी धर्म है पंजाबी है सिख है उनकी दाढ़ी से जलन क्यों नहीं वो तो भला हो मदनी साहब का जिन्हों ने देहली हाईकोर्ट से स्टे लेलिया वार्ना एक और मुसलमान को अपने धर्म की खातिर नौकरी गवानी पड़ती इन चन्द सालों में मुसलमानों पर कभी गाय के नामपर कभी बंदेमातरम कभी जैभारत कभी सूर्य नमस्कार कभी दाढ़ी के नाम पर मारा पीटा जाता है लेकिन फिरभी मुसलम न अपने धैर्य का परिचय देरहे हैं

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