इलैक्‍ट्रो होम्‍योपैथिक की मान्‍यता के रास्‍ते में रोडा
यह बहुत ही दु:ख का विषय है कि इलैक्‍ट्रोहोम्‍योपैथिक जैसी सरल एंव उपयोगी चिकित्‍सा पद्धति अपने अधिकारों को प्राप्‍त न कर सकी । इस चिकित्‍सा पत्द्धति के हजारों लाखों छात्रों एंव चिकित्‍सकों का भविष्‍य अंधकार में है । इस चिकित्‍सा पद्धति के शैक्षणिक संस्‍थाओं एंव चिकित्‍सा व्‍यवसाय हेतु पंजियन करने बाले संचालकों द्वारा अपने स्‍वार्थपूर्ति हेतु विभिन्‍न न्‍यायालयों की शरण लेकर सशर्त स्‍ट्रे तो कभी शैक्षणिक संस्‍थाओं पर आरोप प्रत्‍यारोप एंव यह कहना कि भारत में केवल हमारी ही संस्‍था को संचालन का आदेश न्‍यायालय ने दिया है अत: हमारी संस्‍था ही मान्‍यता प्राप्‍त है, अन्‍य संस्‍थाये नही । देश के विभिन्‍न न्‍यायलयों द्वारा दिये गये निर्णय हो, या आदेश, सभी अभी आधे अधूरे ही है, इसका कारण यह है कि किसी भी इलै0हो0 शैक्षणिक संस्‍था या बोर्ड आदि को किसी न किसी शर्त के तहत ही इस प्रकार के आदेश दिये गये है । जैसे डिग्री व डिप्‍लोमा आदि प्रदाय करने का अधिकार उन्‍हे नही होगा वे केवल सार्टिफिकेट कोर्स का संचालन कर सकते है । डिग्री ,डिप्‍लोमा देने का अधिकार यूनिवरसिट को है । इसी प्रकार से एक आदेश और प्रसारित हुआ है जिसमें इलैक्‍ट्रोहोम्‍योपै‍थिक चिकित्‍सको को डॉक्‍टर लिखने का अधिकार नही है । यदि इले0होम्‍यो0चिकित्‍सक अपने नाम के साथ डॉ0 शब्‍द का प्रयोग करता है या करते हुऐ पाये जाता है तो उसे चिकित्‍सा शिक्षा संस्‍था (नियंत्रण) अधिनियम 1973 की धारा-7 ग के अनुसार अभिधान डॉक्‍टर का उपयोग केवल उपरोक्‍त मान्‍य चिकित्‍सा पद्धतियों में रजिर्स्‍टड मेडिकल प्रेक्‍टीश्‍नर ही कर सकते है । अपात्र व्‍यक्ति द्वारा उक्‍त अभिधान का उपयोग चिकित्‍सा शिक्षा संस्‍था नियत्रण अधिनियम 1973 की धारा 8(2) के अर्न्‍तगत 3 वर्ष कारावास या रूपये 50000 जुर्माने या दोनो से दण्‍डनीय होगा ।
परन्‍तु इसके बाद भी इसकी कई शैक्षणिक संस्‍थाओं एंव रजिस्‍ट्रेशन बोर्ड आदि ने अपना कारोबार यथावत रख डिग्री डिप्‍लोमा आदि प्रदाय करते रहे । इसी प्रकार की कई भ्रमित करने वाली स्थितियों के बीच छात्र व चिकित्‍सक उलक्षते रहे । इलेक्‍ट्रो होम्‍योपै‍थिक की मान्‍यता का दम भरने बालों ने अपनी झोलियॉ भरने के नये नये तरीके इस प्रकार से निकाले कि उनकी पॉचों अंगुलियॉ धी में और मुंह कढाई में थी । परन्‍तु नुकसान केवल और केवल इस पैथी के छात्रों व चिकित्‍सकों को उठाना पड रहा है । यहॉ पर यह बात अपनी जगह पर सर्वविदित है कि कोई भी चिकित्‍सा पद्धति अपने उदभव से ही मान्‍यता लेकर पैदा नही होती , किसी भी चिकित्‍सा पद्धति को मान्‍यता हेतु अपनी उपयोगिता या वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर मान्‍यतायें मिलती रही है । तथाकथित आयुर्वेद ,एंव होम्‍योपै‍‍थिक चिकित्‍सा पद्धतियॉ प्रारम्‍भ से ही मान्‍यता प्राप्‍त चिकित्‍सा पद्धतिया नही थी । आयुर्वेद को सन 1970 तथा होम्‍योपै‍थिक को सन 1973 में शासकीय मान्‍यतायें प्राप्‍त हुई है A आयुर्वेदिक हो या होम्‍योपै‍थिक हो इन्‍हे अपनी उपयोगिता को सिद्ध करने के बाद ही समय समय पर इन्‍हे मान्‍यतायें मिली है । परन्‍तु इसे र्दुभाग्‍य ही कहना होगा , कि इतने लम्‍बे अर्स के बाद भी इलैक्‍ट्रो होम्‍योपैथिक चिकित्‍सा को मान्‍यता नही मिली लाखों चिकित्‍सकों एंव छात्रों का भविष्‍य अंधकार में है ,परन्‍तु इसके संचालनकर्ताओं द्वारा आधे अधुरे निर्णयों का सहारा लेकर आज भी छात्रों व चिकित्‍सकों के साथ खुले आम खिलवाड किया जा रहा है । शासन भी मौन तमाशा देख रही है ,कुछ राज्‍यों की राजनैतिक पार्टीयों ने अपनी रोटी भी सेंकी ,इनका खूब जम कर इस्‍तमाल भी किया गया , चूंकि वे जानते है कि ये अच्‍छा वोट बैंक है , उल्‍टे सीधे आदेशों को तोड मरोड कर ,पेश करने वालों की कतार में अब राजनैतिक पाटीयॉ भी , भीड एकत्र कर बहुमत बटोर , वोट खीच की राजनीति कर रही है ।] चिकित्‍सा व्‍यवसाय अधिनियम लागू हो जाने के बाद प्रत्‍येक चिकित्‍सकों को जिला स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारी के यहॉ अपने पंजियन तथा चिकित्‍सायल का पंजियन कराना अनुवार्य है , परन्‍तु इस अधिनियम के प्रावधानों के अर्न्‍तगत इलेक्‍ट्रो होम्‍योपै‍थिक मान्‍यता प्राप्‍त नही है फिर इनके चिकित्‍सालयों का पंजियन सी0 एम0 ओ0 के यहा नही हो सकता , अर्थात ये चिकित्‍सा व्‍यवसाय करने हेतु कानून अमान्‍य है । इलैक्‍ट्रो होम्‍योपै‍थिक का संरक्षण व मान्‍यता दिलाने का दम भरने वाली पार्टीयों ने कहॉ कि , हमने सी0 एम0 ओ0 के यहॉ पर एक अलग से इसके पंजियन का रजिस्‍ट्रर रखबा दिया है , इस प्रकार के भ्रमित करने वाले अश्‍वासनों से भ्रमित छात्र व चिकित्‍सक अपने आप को अकेला मुसीबतों से धिरा पाता है । ,तथाकथित कुछ संस्‍थाओं का यह दावा है कि उन्‍होने विश्‍वविद्यलयों से सम्‍बृद्धता ले रखी है , कुछ प्राईवेट विश्‍वविद्यलयों द्वारा जो सम्‍बृत्द्धता दी गयी है उसमें उन्‍होने स्‍पष्‍ट कर रखा है कि उक्‍त कोर्स चिकित्‍सा व्‍यवसाय हेतु मान्‍य न हो कर केवल ज्ञानवर्धन हेतु संचालित है , इस प्रकार के भ्रमित कारोबार से जुडे लोगों के बहकावे में न आकर इसके छात्रों एंव चिकित्‍सकों को चाहिये कि वे आपस में सोसल मीडिया या अन्‍य साधनों के माध्‍यम से एक दूसरे से जुडें एंव इसकी सच्‍चाई को अपने साथीयों के बीच शेयर करे तभी इस पैथी का उद्धार संभव है । आप सभी इलैक्‍ट्रो होम्‍योपै‍थिक चिकित्‍सको से निवेदन है कि हमारी बात जहॉ तक पहूंचे आप सभी इसे उन तक पहुचाने में इसे शेयर करे ,एंव शासन ,तथा विभिन्‍न न्‍यायालयों के आदेशों को स्‍केन कर सोसल मीडिया पर डालते रहे ताकि इस प्रकार की जानकारीयॉ सभी चिकित्‍सको तक समय समय पर पहूंचती रहे । चिकित्‍सा व्‍यवसाय अधिनियम की जानकारीयॉ हमने अपनी साईड पर दे रखी है चिकित्‍सक व छात्र हमारी साईड से इसे प्राप्‍त कर सकते है ।
आप हमे कमेन्‍ट करे इस पैथी से सम्‍बन्धित न्‍यायलयों व शासन आदि के आदेश हम आप को आपके कमेन्‍ट पश्‍चात भेजने का हर संभव प्रयास करेगे ।

संचालनालय स्‍वास्‍थ्‍य सेवाये
मध्‍य प्रदेश
क्रमाक/ अ प्र शा /सेल-6 /एफ-292/ 2011/1084 भोपाल दिनांक 26-8-2011
प्रति, 1- समस्‍त कलेक्‍टर
मध्‍यप्रदेश
2- समस्‍त जिला पुलिस अधिक्षक
मध्‍यप्रदेश
विषय:- फर्जी चिकित्‍सकों /झोला छाप डॉक्‍टरों /मध्‍यप्रदेश में चिकित्‍सा व्‍यवसाय कर रहे अन्‍य राज्‍य में पंजीकृत फजी चिकित्‍सकों के विरूद्ध कार्यवाही ।
सर्न्‍दभ :- संचालनालय का पत्र क्रमाक /अप्रशा/सेल-4/ 08/एफ-292/1044/दिनाक 25-02-2008
प्रदेश में अपात्र फर्जी चिकित्‍सकों,अन्‍य प्रदेशों में पंजीकृत किन्‍तु मध्‍यप्रदेश में अमान्‍य चिकित्‍सा पद्धतियों झोला छाप चिकित्‍सकों द्वारा रोगियों का उपचार किया जा रहा है अधिकाश ऐसे चिकित्‍सक एलोपैथी पद्धति की औषधिया रोगियों को दे रहे है । बिना उपयुक्‍त ज्ञान के इस प्रकार का उपचार घातक होता है । एसे कई प्रकारण सामने आये है जहां अपात्र फजी चिकित्‍सको द्वारा गलत इंजेक्‍शन देने से रोगियों को एब्‍सेस गैगरीन आदि हो गया है । जिससे
तथा गलत इंजेक्‍शन के रियेक्‍शन से रोगियों की मृत्‍यु भी हो गई है । उपरोक्‍त तथ्‍यों एंव समय समय पर माननीय उच्‍च्‍ा न्‍यायालय के आदेशो के पालनमें संदर्भित पत्र क्रमाक 1044 दिनांक 20;02;2008 द्वारा विभिन्‍न मान्‍य चिकित्‍सा पद्धतियों पर चर्चा करते हुऐ फजी चिकित्‍सकों /झोला छाप डॉक्‍टरों आदि पर विभिन्‍न चिकित्‍सा रेग्‍यूलेट्री प्रावधनो के अन्‍तर्गत कार्यवाही हेतु दिशा निर्देश जारी किये गये थे किन्‍तु प्रदेश में अवैध चिकित्‍सा व्‍यवसाय पर कोई ठोस कार्यवाही नही की गई है । माननीय मध्‍यप्रदेश मानव अधिकार आयोग द्वारा भी अवैध चिकित्‍सा व्‍यवसाय पर चिन्‍ता व्‍यक्‍त करते हुऐ प्रकरण क्रमाका486/छिदवाडा/10 में निम्‍न अहनुशसा की गयी है । जितने भी तथाकथित डॉक्‍टर पाये जावे,जिनके पास कोई डिग्री नही है उनके विरूद्ध कठोरता पूर्वक एंव गंभीरता पूर्वक कार्यवाही की जावे, ताकि व्‍यक्यिों को उनके द्वारा किये जाने वाले इलाज से कोई क्षति न हो
उपरोक्‍त के संदर्भ में अपात्र व्‍यक्तियों द्वारा किये जा रहें चिकित्‍सा व्‍यवसाय पर अंकुश लगाने के लिये विधि अनुसार निम्‍न प्रावधान उपलब्‍ध है ।
1-मध्‍यप्रदेश उपचार्यागृह तथा रूजोपचार संब‍धी स्‍थापनाए(रजिस्‍ट्रीकरण तथा अनुज्ञापन)
अधिनियम 1973 की धारा-3 कें प्रावधान अनुसार निजी क्षेत्र के समस्‍त उपचार्यागृह या रूजोपाचार संबधी स्‍थापना (नर्सिग होम/ निजी चिकित्‍साल/परामर्श केन्‍द्र ,औषधालय,प्रयोगशाला,एक्‍सरे,डेन्‍टल क्‍लीनिक सहित सभी क्‍लीनिक इस्‍टेब्लेश्‍मेन्‍ट उक्‍त एक्‍ट के अर्न्‍तगत रजिस्‍ट्रीकरण तथा अनुज्ञप्ति के बिना खोले जा सकते है न रखे जा सकते है और न चलाये जा सकते है । उक्‍त धारा-3 के उल्‍लधन करने पर अधिनियम 1973 की धारा -8(क)(एक)तथा (दो)के अर्न्‍तगत जुर्माने तथा 3 माहतक के कठोर कारावास का प्रावधान है ।

मध्‍यप्रदेश उपचार्यागृह तथा रूजोपचार संब‍धी स्‍थापनाए (रजिस्‍ट्रीकरण तथा अनुज्ञापन)
अधिनियम 1973 के अर्न्‍तगत विधि अनुसार केवल निम्‍न मान्‍य चिकित्‍सा पद्धतियों के अर्न्‍तगत कार्यरत क्‍लीनिक इस्‍टेब्लेश्‍मेन्‍ट / नर्सिग होम आदि के पंजीयन का प्रावधान है :-
अ- आधुनिक चिकित्‍सा पद्धति एलोपैथी :- इसके अर्न्‍तगत चिकित्‍सा व्‍वसाय हेतु मेडिकल काडन्सिल ऑफ इंडिया एक्‍ट 1956 की धारा 15(1)के अर्न्‍तगत मान्‍य अर्हताधारी का मध्‍यप्रदेश मेडिकल काउसिन्‍सल अधिनियम 1987 के अर्न्‍तगत पंजीयन अनुवार्य है ।
ब- भारतीय चिकित्‍सा पद्धति :-इसके अर्न्‍तगत चिकित्‍सा व्‍यवसाय हेतु मध्‍यप्रदेश आयुर्वेद यूनानी तथा प्राकृतिक चिकित्‍सा व्‍यवसायी अधिनियम 1970 के अर्न्‍तगत शेडयूल में उल्‍लेखित मान्‍य अर्हताधारी का बोर्ड ऑफ आयुर्वेदिक एण्‍ड यूनानी सिस्‍टम ऑफ मेडिसिन एण्‍ड नेचुरोपैथी मध्‍यप्रदेश के अर्न्‍तगत पंजीयन अनिवार्य है ।
स- होम्‍योपैथी एण्‍ड बायोकेमिक सिस्‍टम ऑफ मेडिसन :- इसके अर्न्‍तगत चिकित्‍सा व्‍यवसाय हेतु होम्‍योपैथी सेन्‍ट्रल काउसिन्‍ल एक्‍ट 1973 की दूसरी/ तीसरी अनुसूची में मान्‍य अर्हताधारी का स्‍टेट काउन्सिल ऑफ होम्‍योपैथी मध्‍यप्रदेश के अर्न्‍तगत पंजीयन अनिवार्य है ।
2- चिकित्‍सा शिक्षा संस्‍था (नियंत्रण) अधिनियम 1973 की धारा-7 ग के अनुसार अभिधान डॉक्‍टर का उपयोग केवल उपरोक्‍त मान्‍य चिकित्‍सा पद्धतियों में रजिर्स्‍टड मेडिकल प्रेक्‍टीश्‍नर ही कर सकते है । अपात्र व्‍यक्ति द्वारा उक्‍त अभिधान का उपयोग चिकित्‍सा शिक्षा संस्‍था नियत्रण अधिनियम 1973 की धारा 8(2) के अर्न्‍तगत 3 वर्ष कारावास या रूपये 50000 जुर्माने या दोनो से दण्‍डनीय होगा ।
3-ऐलोपैथी चिकित्‍सा पत्द्धति में केवल वे ही चिकित्‍सा व्‍यवसाय हेतु पात्र है जो मेडिकल काउन्सिल आफ इंडिया एक्‍ट 1956 की धारा 15(1) में उल्‍लेखित अर्हता धारी होकर मध्‍य प्रदेश मेडिकल काउन्सिल एक्‍ट 1987 के अन्‍तर्गत पंजीकृत हो । अपाऋ एंव अपजीकृत व्‍यक्तियों द्वारा ऐलोपैथिक चिकित्‍सा पत्द्धति में चिकित्‍सा व्‍यवसाय करने पर मध्‍यप्रदेश मेडिकल काउन्सिल एक्‍ट 1987 की धरा 24 के अर्न्‍तगत 3 वर्ष तक के कठोर कारावास तथा 50000 रू तक जुर्माने का प्रावधान है ।
4-इलेक्‍ट्रो होम्‍योपैथिक /आल्‍टर्नेटिव मेडिसिन देश के विधान अनुसार स्‍थापित चिकित्‍सा पद्धति नही है इन पद्धतियों के व्‍यवसाईयों हेतु माननीय उच्‍च न्‍यायालय पश्चिम बंगाल,मध्‍यप्रदेश तथा दिल्‍ली द्वारा इनके विरूद्ध कोई कार्यवाही न किये जाने संबधी निर्देश है ।किन्‍तु इन पद्धतियों के चिकित्‍सा व्‍यवसायी केवल अपनी पद्धति में ही चिकित्‍सा व्‍यवसाय कर सकते है । याचिका क्रमाक 502 /99 (डॉ0मुकेश श्रीवास्‍तव विरूद्ध मध्‍यप्रदेश शासन ) 2957/94 (काउन्सिल आफ आल्‍टरनेटिव सिस्‍टम विरूद्ध मध्‍यप्रदेश शासन )2018/92(नेशनल उब्‍हलप्‍मेन्‍ट सोसायटी आफ इलेक्‍ट्रोहोम्‍योपै‍थी विरूद्ध मध्‍यप्रदेश शासन ) एंव अन्‍य याचिकाओं में पारित आदेश दिनांक 19-03-1999 के पैरा 10 में माननीय उच्‍च न्‍यायालय जबलपुर द्वारा इलेक्‍ट्रोहोम्‍योपैथी / आल्‍टर्नेटिव मेडिसन अर्हता धारीयों के लिये निम्‍न व्‍यवस्‍था जारी की गई है । क्‍योकि इलेक्‍ट्रोहोम्‍योपैथी / आल्‍टर्नेटिव मेडिसिन अर्हताधारी मान्‍य पद्धतियो के अर्न्‍तगत अर्हताधारी नही है माननीय उच्‍च न्‍यायालय के उपरोक्‍त आदेशानुसार इनको यद्यपि इनकी विधा में चिकित्‍सा व्‍यवसाय की पात्रता है :-
(1) इनका पंजीयन मध्‍यप्रदेश उपचर्यागृह तथा रूजोपचार संबधी स्‍थापनाए (रजिस्‍ट्रीकरण तथा अनुज्ञापन ) अधिनियम 1973 के अर्न्‍तगत नही किया जाना है किन्‍तु उक्‍त अधिनियम की धारा 8 के अर्न्‍तगत इन पर कोई कार्यवाही भी नही की जायेगी ।
(2)इलेक्‍ट्रोहोम्‍योपैथी / आल्‍टनेटिव मेडिसिन अर्हताधारी अभिधान डॉक्‍टर का उपयोग करने हेतु पात्र नही है यदि यह अर्हताधारी अभिधान डॉक्‍टर का उपयोग करते है तो उपरोक्‍त पैरा-2 में प्रावधानानुसार इनके विरूद्ध दण्‍डात्‍मक कार्यवाही की जाए (याचिका क्रमाक 7352/07 में माननीय उच्‍च न्‍यायालय जबलपुर का आदेश दिनांक 22-07-2010 कृपया आपके नेतृत्‍व में जिले में डिप्‍टी कलेक्‍टर उप पुलिस अधीक्षक तथा मुख्‍य चिकित्‍सा एंव स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारी पर आधारित एक दल का गठन कर अभियान चलाकर फर्जी चिकित्‍सकों /झोला छाप डॉक्‍टरों की पहचान कर उपरोक्‍त प्रावधान अनुसार प्रभावी कार्यावाही कर इन अपात्र व्‍यक्तियों द्वारा किये जा रहे चिकित्‍सा व्‍यवसाय पर अंकुश लगाने की कार्यावाही करे । कृपया प्रकरण में आवश्‍यक कार्यवाही कर 30 दिवस की अवधि में पालन प्रतिवेदन भेजना सुनिश्चित करे ।
आयुक्‍त स्‍वास्‍थ्‍य
मध्‍यप्रदेश


पृ0क्रमाक/ अ प्र शा /सेल-6 /एफ-292/ 2011/1084 भोपाल/ दिनांक 26-8-2011
प्रतिलिपि-
1- अपर मुख्‍य सचिव गृह विभाग मध्‍यप्रदेश शासन मंत्रालय बल्‍लभ भवन की ओर भेजकर निवेदन है कि कृपया गृह विभाग से भी आवश्‍यक दिशा निर्देश जारी करना चाहेगे ।
2- प्रमुख सचिव मध्‍यप्रदेश मानव अधिकार आयोग पर्यावास भवन खण्‍ड 1भोपाल की ओर उनके क्रमाक 821/माअआ/अनु/ 446/छिदवाडा/ 2011दिनांक18-04-2011 के सर्न्‍दभ में सूचनार्थ ।
3- प्रमुख सचिव मध्‍यप्रदेश शासन लोक स्‍वास्‍थ एंव परिवार कल्‍याण विभाग की ओर क्रमाक 842/ 672/2011/मेडी-2/1-दिनांक 05-07-2011 के सर्न्‍दभ में सूचनार्थ ।
4- पुलिस महानिर्देशक पुलिस मुख्‍यालय जहांगीराबाद भोपाल की ओर सूचनार्थ एंव आवश्‍यक कार्यवाही हेतु ।
5- अपर संचालक (प्रशासन)स्‍थानीय कार्याल की ओर क्रमाक 4/शिका/स्‍पेसल/2011/1571दिनांक 21-07-2011 के सर्न्‍दभ्‍ा में सूचनार्थ ।
6- संभागीय संयुक्‍त संचालक स्‍वास्‍थ्‍य सेवायें भोपाल ,इन्‍दौर ,उज्‍जैन,ग्‍वालियर,जबलपुर,सागर तथा रीवा की ओर सूचनाथ एंव आवश्‍यक कार्यवाही हेतु
7- समस्‍त मुख्‍य चिकित्‍सा एंव स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारी मध्‍यप्रदेश की ओर भेजकर निर्देश दिये जाते है कि जिला कलेक्‍टर एंव पुलिस अधिक्षक से सम्‍पर्क कर फर्जी चिकित्‍सकों द्वारा चलाये जा रहे चिकित्‍सा व्‍यवसाय पर अंकुश लगाने हेतु उपरोक्‍तानुसार कार्यवाही एक मिशन के रूप में करे ।
8- श्री थामस,कम्‍प्‍यूटर कक्ष ,स्‍थानीय कार्यालय की ओर भेजकर इसको विभागीय वेब साइट पर प्रर्दर्शित करे ।
9- आदेश फाईल ।


आयुक्‍त स्‍वास्‍थ्‍य
मध्‍यप्रदेश

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इलैक्‍ट्रो होम्‍योपैथिक की मान्‍यता के रास्‍ते में रोडा
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          फर्जी चिकित्‍सकों /झोला छाप डॉक्‍टरों के खिलाप संचालनालय  स्‍वास्‍थ्‍य सेवाये मध्‍यप्रदेश का आदेश             संचालनालय स्‍वास्‍थ्‍य सेवाये                   मध्‍य
प्रदेश क्रमाक/ अ प्र शा /सेल-6 /एफ-292/ 2011/1084 भोपाल दिनांक
26-8-2011  प्रति,   ...

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           फर्जी चिकित्‍कों /झोला छाप डॉक्‍टरों के खिलाप कार्यवाही मध्‍यप्रदेश स्‍वास्‍थ्‍य सेवाये का आदेश                 संचालनालय स्‍वास्‍थ्‍य सेवाये                        मध्‍य
प्रदेश क्रमाक/ अ प्र शा /सेल-6 /एफ-292/ 2011/1084 भोपाल दिनांक
26-8-2011  प...

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