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ये इश्क़❤ करना छोड दिया है यारो
😝💞😝
वरना हम तो आज भी,
😝💞😝
पलट के देख 👀ले तो
😝💞😝
लडकियाँ 👰 सोलह शुक्रवार
😝💞😝
के व्रत शुरू कर दे•••••••••••!!!!
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😇जब हमें इतना भरोसा है,
की 108 पर फोन करेंगे तो... 🚨एम्बुलेंस हमे लेने के लिए आएगी।
तो हमारे ऋषि मुनि इतने सालों
से बोलते आए हैं,
📿108 मनके की माला पर नाम जपोगे तो यमदूत नहीं स्वयं भगवान लेने को आएगे,तो हम विश्वास क्यू नहीं करते !!...

कभी कभी खुद से बात करो, कभी खुद से बोलो ।
अपनी नज़र में तुम क्या हो? ये मन की तराजू पर तोलो ।
कभी कभी खुद से बात करो ।
कभी कभी खुद से बोलो ।

हरदम तुम बैठे ना रहो - शौहरत की इमारत में ।
कभी कभी खुद को पेश करो आत्मा की अदालत में ।
केवल अपनी कीर्ति न देखो- कमियों को भी टटोलो ।
कभी कभी खुद से बात करो ।
कभी कभी खुद से बोलो ।

दुनिया कहती कीर्ति कमा के, तुम हो बड़े सुखी ।
मगर तुम्हारे आडम्बर से, हम हैं बड़े दु:खी ।
कभी तो अपने श्रव्य-भवन की बंद खिड़कियाँ खोलो ।
कभी कभी खुद से बात करो ।
कभी कभी खुद से बोलो ।

ओ नभ में उड़ने वालो, जरा धरती पर आओ ।
अपनी पुरानी सरल-सादगी फिर से अपनाओ ।
तुम संतो की तपोभूमि पर मत अभिमान में डालो ।
अपनी नजर में तुम क्या हो? ये मन की तराजू में तोलो ।
कभी कभी खुद से बात करो ।
कभी कभी खुद से बोलो ।

💚एक बेहतरीन सोच💚

हर एक की सुनो👂🏻
ओर हर एक से सीखो
क्योंकि हर कोई,
सब कुछ नही जानता
लेकिन हर एक
कुछ ना कुछ ज़रुर जानता हैं!

*स्वभाव रखना है तो उस 🔥दीपक की तरह रखिये, जो बादशाह के महल में भी उतनी ही रोशनी देता है, जितनी की किसी गरीब की झोपड़ी ⛺में

||ॐ||

वसन्त का अर्थ हुआ वासनाओं का अन्त, और पंचमी पञ्च-तत्त्वों से बनी काया को कहते है। इस प्रकार पञ्च-तत्त्वों से बनी काया से वासनाओं का मिट जाना ही वसन्त-पंचमी है।

वसन्त-पंचमी के दिन हम सरस्वती (स+रस+वती) की वंदना करते है। स मतलब वह परमात्मा, उस परमात्मा के रस में इन्द्रियाँ डूब जाये, रसवत हो जायँ तो हो गयी वन्दना।

इस प्रकार सरस्वती वन्दना का इतना ही मतलब है कि उस परमात्मा के भक्ति के रस से सरोबार हुआ जाय, नाकि किसी देवी (सरस्वती) की मूर्ति या तस्वीर खड़ी कर उसके पूजन-अर्चन में समय नष्ट किया जाय।

Bhut hi pyara msg👌👌👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻
💮💮💮💮
काबू में रखें - प्रार्थना के वक़्त अपने दिल को,
काबू में रखें - खाना खाते समय पेट को,
काबू में रखें - किसी के घर जाएं तो आँखों को,
काबू में रखें - महफ़िल मे जाएं तो ज़बान को,
काबू में रखें - पराया धन देखें तो लालच को,
💮💮💮
भूल जाएं - अपनी नेकियों को,
भूल जाएं - दूसरों की गलतियों को,
भूल जाएं - अतीत के कड़वे संस्मरणों को,
💮💮💮
छोड दें - दूसरों को नीचा दिखाना,
छोड दें - दूसरों की सफलता से जलना,
छोड दें - दूसरों के धन की चाह रखना,
छोड दें - दूसरों की चुगली करना,
छोड दें - दूसरों की सफलता पर दुखी होना,
💮💮💮💮
यदि आपके फ्रिज में खाना है, बदन पर कपड़े हैं, घर के ऊपर छत है और सोने के लिये जगह है,
तो दुनिया के 75% लोगों से ज्यादा धनी हैं

यदि आपके पर्स में पैसे हैं और आप कुछ बदलाव के लिये कही भी जा सकते हैं जहाँ आप जाना चाहते हैं
तो आप दुनिया के 18% धनी लोगों में शामिल हैं

यदि आप आज पूर्णतः स्वस्थ होकर जीवित हैं
तो आप उन लाखों लोगों की तुलना में खुशनसीब हैं जो इस हफ्ते जी भी न पायें

जीवन के मायने दुःखों की शिकायत करने में नहीं हैं
बल्कि हमारे निर्माता को धन्यवाद करने के अन्य हजारों कारणों में है!!!

यदि आप मैसेज को वाकइ पढ़ सकते हैं और समझ सकते हैं
तो आप उन करोड़ों लोगों में खुशनसीब हैं जो देख नहीं सकते और पढ़ नहीं सकते

अगर आपको यह सन्देश बार बार मिले तो परेशान होनेकी
बजाय आपको खुश होना चाहिए !

धन्यवाद...

मैंने भेज दिया
अब आपकी बाऱी है ।
👌:: एक खूबसूरत सोच ::👌:

अगर कोई पूछे कि जिंदगी में क्या खोया और क्या पाया ? .... .... तो बेशक कहना, जो कुछ खोया वो मेरी नादानी थी और जो भी पाया वो प्रभू की मेहेरबानी थी। क्या खुबसूरत रिश्ता है मेरे और मेरे भगवान के बीच में, ज्यादा मैं मांगता नहीं और कम वो देता नहीं...✍”॥


▁▂▄▅▆▇██▇▆▅▄▂▁

☄जीवन के तीन मंत्र☄

आनंद में - वचन मत दीजिये

क्रोध में - उत्तर मत दीजिये

दुःख में - निर्णय मत लीजिये

💐💎 जीवन मंत्र 💎💐

१) धीरे बोलिये 👉 शांति मिलेगी
२) अहम छोड़िये 👉 बड़े बनेंगे
३) भक्ति कीजिए 👉 मुक्ति मिलेगी
४) विचार कीजिए 👉 ज्ञान मिलेगा
५) सेवा कीजिए 👉 शक्ति मिलेगी
६) सहन कीजिए 👉 देवत्व मिलेगा
७) संतोषी बनिए 👉 सुख मिलेगा

"इतना छोटा कद रखिए कि सभी आपके साथ बैठ सकें। और इतना बड़ा मन रखिए कि जब आप खड़े हो जाऐं, तो कोई बैठा न रह सके।"

👌 शानदार बात👌

झाड़ू जब तक एक सूत्र में बँधी होती है, तब तक वह "कचरा" साफ करती है।

लेकिन वही झाड़ू जब बिखर जाती है, तो खुद कचरा हो जाती है।

इस लिये, हमेशा संगठन से बंधे रहें , बिखर कर कचरा न बनें।

acha lage to share jarur kare

🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉.......
धन और धर्म में कौन महान है ?

धन की रक्षा करनी पड़ती है ।
धर्म हमारी रक्षा करता है ।

धन दुर्गति में ले जाता है ।
धर्म सद्गति में ले जाता है ।

धन के लिए पाप करना पड़ता है ।
धर्म में पाप का त्याग होता है ।

धन से धर्म नहीं होता ।
धर्म आत्मा से होता है ।

धन मित्रों को भी दुश्मन बना देता है ।
धर्म दुश्मन को भी मित्र बना देता है ।

धन भय को उत्त्पन्न करता है ।
धर्म भय को समाप्त करता है ।

धन रहते हुए भी व्यक्ति दुःखी है ।
धर्म से व्यक्ति दुःख में भी सुखी है ।

धन से संकीर्णता आती है ।
धर्म से विशालता आती है ।

धन इच्छा को बढ़ाता है ।
धर्म इच्छाओं को घटाता है ।

धन में लाभ-हानी चलती रहती है ।
धर्म से हर समय फायदा ही फायदा है ।

धन से कषाय बढ़ती है ।
धर्म से कषाय शांत होती है ।

धन चार गति में भटकाता है ।
धर्म चार गति को पार कराता है ।

धन से रोग बढ़ता है ।
धर्म से जीवन स्वस्थ बनता है ।

धन अशाश्वत है ।
धर्म शाश्वत है ।

धन का साथ इसी भव तक है ।
धर्म परभव में भी साथ रहता है .......🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉

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✳️ओशो का सालों पहले बोला यह प्रवचन आज के देश के माहौल पर बिल्कुल सटीक बैठता है ✳️

बुद्ध एक बार एक जंगल में बैठे हुए थे और एकदम जंगल में जैसे एक भूकंप आ गया हो। सारे जानवर बुद्ध के सामने से भागते हुए निकले। थोड़ी देर तो वे बैठे देखते रहे कि मामला क्या है? लेकिन जब उन्होंने देखा कि पूरे जंगल के पशु-पक्षी सभी भागे जा रहे हैं एक दिशा में, तो उन्हें भी थोड़ी हैरानी हुई। उन्होंने एक हिरण को पकड़ कर पूछा कि बात क्या है, कहां भागे जाते हो? उसने कहा कि छोड़िए, इधर रुकने की फुर्सत नहीं है। आपको पता नहीं, आखिरी दिन आ गया है दुनिया का, सृष्टि नष्ट होने के करीब है! महाप्रलय आ रहा है!

लेकिन बुद्ध ने पूछा कि तुझे कहा किसने? उसने कहा कि वे जो लोग आगे जा रहे हैं। आगे वालों के पीछे बुद्ध भाग कर पहुंचे, उन्हें रोका, पकड़ा, पूछा कि जा कहां रहे हो? शेर भी भागे जा रहे हैं, हाथी भी भागे जा रहे हैं। जाते कहां मित्र? उन्होंने कहा कि आपको पता नहीं, महाप्रलय आ रहा है? लेकिन बताया किसने? तो उन्होंने कहा वे लोग जो आगे जा रहे हैं। बुद्ध भागते-भागते बड़े परेशान हो गए, क्योंकि जो भी मिला उसने कहा, जो लोग आगे जा रहे हैं।

आखिर में, सबसे आखिर में खरगोशों की एक भीड़ मिली। उनसे बुद्ध ने पूछा कि दोस्तो! कहां भागे चले जा रहे हो? उनकी तो हालत समझ सकते हैं। जब शेर और हाथी भाग रहे हों तो बेचारे खरगोश! उन खरगोशों ने तो रुकने की भी हिम्मत नहीं की। भागते ही भागते चिल्लाया कि वह जो आगे-आगे एक खरगोश था उनका नेता। उन्होंने बुद्ध ने बामुश्किल उसको पकड़ा और पूछा कि दोस्त! कहां भाग रहे हो? क्योंकि उसके आगे अब कोई भी नहीं था। उसने कहा : कहां भाग रहा हूं? महाप्रलय होने वाली है। किसने तुझे कहा? उसने कहा : किसी ने कहा नहीं, ऐसा मुझे अनुभव हुआ है। अनुभव तुझे कैसा हुआ?

मैं एक वृक्ष के नीचे सो रहा था, दोपहर थी, ठंडी हवाएं चल रही थीं और एक छाया में सोया हुआ था, वह खरगोश कहने लगा, फिर एकदम से कोई जोर की आवाज हुई और मेरी मां ने मुझसे बचपन में कहा था कि जब ऐसी आवाज होती है तो महाप्रलय आ जाता है। बुद्ध ने उस खरगोश से कहा पागल! किस वृक्ष के नीचे बैठा था? वह कहने लगा आमों का वृक्ष था। बुद्ध ने कहा कोई आम तो नहीं गिरा था? उसने कहा यह भी हो सकता है। बेचारा खरगोश! आम भी काफी है गिर जाए तो। बुद्ध उसे लेकर उस वृक्ष के पास लौटे। वहां तो काफी आम गिरे थे। वह खरगोश कहने लगा, जरूर मैं इस जगह सोया हुआ था। ये आम ही गिरे होंगे। लेकिन मेरी मां ने मुझे कहा था कि जब महाप्रलय होती है तो बड़े जोर की आवाज होती है। आवाज बड़े जोर की थी। और सारा जंगल भाग रहा था एक खरगोश के कहने पर!

सारी दुनिया भाग रही है करीब-करीब ऐसे ही। हम भी अगर इस भांति भागते हैं जीवन में......एक आदमी खबर कर देता है, हिंदू-मुस्लिम दंगा हो गया, फिर कोई भी नहीं पूछता कि किस खरगोश ने यह हरकत शुरू की है। फिर गांव का मौलवी, पंडित, संन्यासी, धार्मिक, पूजा-पुजारी, माला फेरने वाला, जनेऊ वाला, तिलक-छापे वाले सब भागने लगते हैं। हिंदू-मुसलमान दंगा हो गया है!

यह सारी मनुष्य-जाति अत्यंत एब्‍सर्डिटी, मूढ़ता से भरी हुई है और इस मूढ़ता की बुनियाद में एक बात है, वह यह कि हम दिए हुए ज्ञान को पकड़ कर तृप्त हो जाते हैं। उसे स्वीकार कर लेते हैं। जो आदमी बाहर से आए हुए ज्ञान से चुपचाप राजी हो जाता है उस आदमी के भीतर वह घटना पैदा नहीं होती कि उसका अपना ज्ञान पैदा हो सके। अपना ज्ञान पैदा होता है उस वैक्यूम में, उस शून्य में जब आप बाहर के ज्ञान को इनकार कर देते हैं। कह देते हैं कि नहीं, हमारे द्वार पर नहीं है प्रवेश इस ज्ञान का जो दूसरे का है। जो दूसरे का है वह हमारे लिए अज्ञान के ही बराबर है, अज्ञान से भी ज्यादा खतरनाक है। अज्ञान कम से कम अपना तो है। और यह ज्ञान है दूसरे का। जो आदमी दूसरे के ज्ञान को कह देता है कि नहीं, अज्ञान है मेरा और मेरे ज्ञान से ही टूट सकता है। इस गणित को बहुत गहराई में समझ लेना जरूरी है।

अज्ञान है मेरा तो मेरे ज्ञान से ही टूट सकता है, अज्ञान अगर दूसरे का होता तो दूसरे के ज्ञान से भी टूट सकता था। लेकिन अज्ञान है मेरा और ज्ञान है महावीर का, ज्ञान है बुद्ध का, ज्ञान है कृष्ण का। नहीं, किसी दूसरे के ज्ञान से आपका अज्ञान नहीं टूट सकता है-यह असंभव है। यह असंभव है। यह कभी भी संभव नहीं था और कभी संभव नहीं होगा। यह जीवन के शाश्वत नियमों में एक नियम है कि मेरा अज्ञान मेरे ज्ञान से टूटेगा किसी दूसरे के ज्ञान से नहीं। इसलिए दूसरे के ज्ञान के प्रति उपेक्षा चाहिए, इनडिफरेंस चाहिए
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