हमारे मध्यप्रदेशके मुख्यमंत्री महोदय जी-के नाम एक मार्मिकआवेदन पत्र- मध्यप्रदेश में रास्ट्रीय ग्रामीणआजीविका मिशन के कर्मचारियों का
1- वेतन से मानदेय कर दिया गया।
2-संविदा हैं पर संविदा कर्मचारियों जैसा लाभ नहीं
3- सभी कर्मचारियों को अनुबंधित किया हुआ है क्यों
4-आज तक एच आर पालिसी लागू नहीं की गई क्यों
5-कर्मचारियों को फील्ड विजिट यहाँ तक कि रात्रि विश्राम ज़रूरी है किन्तु आज तक 2012 से एक रुपये भी फील्ड विजिट भत्ता नहीं दिया गया और न ही दिया जा रहा क्यों
6-जब हमारा काम सरकारी मोहकमे जैसा है। पूरे नियम और क़ायदे, कानून सरकारी कर्मचारियों जैसे हैं-- न कोई व्यापार, और न ही व्यवसाय कर सकते-- तो हमें सरकारी कर्मचारियों जैसे सुविधाऐं क्यों नहीं।
7- हम लोग पूरे प्रदेश के स्व सहायता समूह की महिलाओं को बैंक से सीसीएल बनवाने का काम करते हैं, किन्तु हणँम खुद बैंक से अतिआवश्यक काम पर भी बैंक का दरवाजा नहीं खटखटा सकते क्यों।
8-लोकसभा/विधानसभा, का चुनाव हो या ग्रामसभा की बैठक या समूह या ग्राम संगठनों की बैठक, रोजगार मेला हो या बेरोजगारों का प्लेसमेंट हम हर जगह तत्पर रहते हैं। यहाँ तक कि राजनेताओं, अधिकारियों के दौरों में जन मानस को इकट्ठा करने से लेकर उन्हें उनके घर तक पहुँचाने की जवाबदेही तय करते हैं किन्तु हमारे विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ भेदभाव क्यों मान्यवर आख़िर क्यों- - - ?

हमारे प्रदेश के मुखिया जी-के नाम एक पत्र- मध्यप्रदेश में रास्ट्रीय ग्रामीणआजीविका मिशन के कर्मचारियों का
1- वेतन से मानदेय कर दिया गया।
2-संविदा हैं पर संविदा कर्मचारियों जैसा लाभ नहीं
3- सभी कर्मचारियों को अनुबंधित किया हुआ है क्यों
4-आज तक एच आर पालिसी लागू नहीं की गई क्यों
5-कर्मचारियों को फील्ड विजिट यहाँ तक कि रात्रि विश्राम ज़रूरी है किन्तु आज तक 2012 से एक रुपये भी फील्ड विजिट भत्ता नहीं दिया गया और न ही दिया जा रहा क्यों
6-जब हमारा काम सरकारी मोहकमे जैसा है। पूरे नियम और क़ायदे, कानून सरकारी कर्मचारियों जैसे हैं-- न कोई व्यापार, और न ही व्यवसाय कर सकते-- तो हमें सरकारी कर्मचारियों जैसे सुविधाऐं क्यों नहीं।
7- हम लोग पूरे प्रदेश के स्व सहायता समूह की महिलाओं को बैंक से सीसीएल बनवाने का काम करते हैं, किन्तु हम खुद बैंक से अतिआवश्यक काम पर भी बैंक का दरवाजा नहीं खटखटा सकते क्यों।
8-लोकसभा/विधानसभा, का चुनाव हो या ग्रामसभा की बैठक या समूह या ग्राम संगठनों की बैठक, रोजगार मेला हो या बेरोजगारों का प्लेसमेंट हम हर जगह तत्पर रहते हैं। यहाँ तक कि राजनेताओं, अधिकारियों के दौरों में जन मानस को इकट्ठा करने से लेकर उन्हें उनके घर तक पहुँचाने की जवाबदेही तय करते हैं किन्तु हमारे विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ भेदभाव क्यों मान्यवर आख़िर क्यों- - - ?
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