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यह कहानी है एक ऎसी महिला की, जिसे आदिवासी संथाल समाज ने देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की पत्नी तो घोषित किया, किन्तु साथ साथ समाज से बाहर शादी करने के आरोप में समाज से बहिष्कृत कर गाँव से बाहर भी कर दिया | गत वर्ष 'दैनिक भास्कर' के धनवाद झारखंड एडीशन में यह कहानी प्रकाशित भी हुई थी | 58 साल से जवाहर लाल नेहरू की पत्नी होने के आरोप में समाज के बहिष्कार और गांव निकाले की सजा भुगत रही इस 75 वर्षीय महिला का नाम है – बुधनी | http://www.krantidoot.in/2017/11/anonymous-tribal-santal-wife-of-jawahar-lal-nehru.html#more

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लेख का शीर्षक भले ही विजय माल्या और राफेल हो, वस्तुतः यह आलेख कांग्रेस के षडयंत्र महापुराण का एक छोटा सा अंश है | http://www.krantidoot.in/2018/11/Insight-story-of-Vijay-Mallya-and-Raphael-Deal-conspiracy-mahapuran-of-congress.html

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भारत देश के महान इतिहास में लाखों ऐसे वीर हुए हैं जिन्होंने देश,धर्म और जाति की सेवा में अपने प्राण न्योछावर कर दिए। खेद है कि स्वतंत्र भारत का इतिहास आज भी परतंत्र हैं कि उसमें गौरी और गजनी के आक्रमण के विषय में तो बताया जाता हैं मगर उसका प्रतिरोध करने वाले महान वीरों पर मौन धारण कर लिया जाता हैं। ऐसे ही महान वीरों में से हैं देश धर्म की रक्षार्थ बलिदान हुए वीर गोगा बापा एवं उनका परिवार। जिन्हें आज राजस्थान के गाँव गांव में हिन्दू गूगादेव के नाम से तो मुसलमान गूगा पीर के नाम से स्मरण करते हैं, पूजते हैं | http://www.krantidoot.in/2015/09/story-of-goga-dev.html

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कभी तो होगी रौशन मेरी भी ज़िन्दगी,
इंतेज़ार मुझे सुबह का नहीं, तेरी रहमत का हे..

⚘🙏🏻 जय श्री राम जय श्री राम
जय श्री राम जय जय हनुमान जय जय हनुमान 🙏🏻⚘
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श्री राम स्तुति

नमामि भक्त-वत्सलं, कृपालु-शील-कोमलम्।
भजामि ते पदाम्बुजं, अकामिनां स्व-धामदम्।।1।।
निकाम-श्याम-सुन्दरं, भवाम्बु-नाथ मन्दरम्।
प्रफुल्ल-कंज-लोचनं, मदादि-दोष-मोचनम्।।2।।
प्रलम्ब-बाहु-विक्रमं, प्रभो·प्रमेय-वैभवम्।
निषंग-चाप-सायकं, धरं त्रिलोक-नायकम्।।3।।
दिनेश-वंश-मण्डनम्, महेश-चाप-खण्डनम्।
मुनीन्द्र-सन्त-रंजनम्, सुरारि-वृन्द-भंजनम्।।4।।
मनोज-वैरि-वन्दितं, अजादि-देव-सेवितम्।
विशुद्ध-बोध-विग्रहं, समस्त-दूषणापहम्।।5।।
नमामि इन्दिरा-पतिं, सुखाकरं सतां गतिम्।
भजे स-शक्ति सानुजं, शची-पति-प्रियानुजम्।।6।।
त्वदंघ्रि-मूलं ये नरा:, भजन्ति हीन-मत्सरा:।
पतन्ति नो भवार्णवे, वितर्क-वीचि-संकुले।।7।।
विविक्त-वासिन: सदा, भजन्ति मुक्तये मुदा।
निरस्य इन्द्रियादिकं, प्रयान्ति ते गतिं स्वकम्।।8।।
तमेकमद्भुतं प्रभुं, निरीहमीश्वरं विभुम्।
जगद्-गुरूं च शाश्वतं, तुरीयमेव केवलम्।।9।।
भजामि भाव-वल्लभं, कु-योगिनां सु-दुलर्भम्।
स्वभक्त-कल्प-पादपं, समं सु-सेव्यमन्हवम्।।10।।
अनूप-रूप-भूपतिं, नतोऽहमुर्विजा-पतिम्।
प्रसीद मे नमामि ते, पदाब्ज-भक्तिं देहि मे।।11।।
पठन्ति से स्तवं इदं, नराऽऽदरेण ते पदम्।
व्रजन्ति नात्र संशयं, त्वदीय-भक्ति-संयुता:।।12।।
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वामपंथियों मानसिकता ने हमारे इतिहास में मुगल बादशाहों के अच्छे-अच्छे, नर्म-नर्म, मुलायम-मुलायम किस्से-कहानी ही भर रखे हैं, जिनके द्वारा उन्हें सतत महान, सदभावनापूर्ण और दयालु(?) बताया है, लेकिन इस प्रकार 63 पत्नियों की हत्या वाली बातें जानबूझकर छुपाकर रखी गई हैं। भारत के खूनी इतिहास से मुगलों द्वारा किये गये अत्याचारों को अगली पीढ़ी को उनके कारनामों के बारे में जानकारी होना चाहिए | ववर्ना “मैकाले-मार्क्स” के प्रभाव में वे तो यही सोचते रहेंगे कि अकबर एक दयालु बादशाह था (भले ही उसने सैकड़ों हिन्दुओं का कत्ल किया हो), शाहजहाँ अपनी बेगम से बहुत प्यार करता था (मुमताज़ ने 14 बच्चे पैदा किये और उसकी मौत भी एक डिलेवरी के दौरान ही हुई, ऐसा भयानक प्यार?) | तात्पर्य यह कि इस “दयालु मुगल शासक” वाले वामपंथी “मिथक” को तोड़ना बहुत ज़रूरी है। युवा पीढ़ी को उनके व्यक्तित्व के उचित विकास के लिये सही इतिहास बताना ही चाहिये,वरना उन्हें 63 पत्नियों के हत्यारे के बारे में कैसे पता चलेगा ? http://www.krantidoot.in/2018/11/History-of-Bijapur-Sath-kabra.html

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5 नवंबर को एक दिन की विशेष पूजा के लिए सबरीमाला मंदिर के द्वार कडे पहरे में खुले। न्यायालय के आदेश के बावजूद किसी महिला ने मंदिर में प्रवेश की कोशिश नहीं की, लेकिन कुछ बुद्धिजीवियों द्वारा सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश देने के न्यायालय के आदेश के विरोध को गलत ठहराया जा रहा है। इनका कहना है कि कुछ समय पहले जब ट्रिपल तलाक के खिलाफ न्यायायल का आदेश आया था तब उस सम्प्रदाय के लोग भी मजहबी परंपरा के नाम पर कोर्ट के इस फैसले का विरोध कर रहे थे। लेकिन उस समय जो लोग ट्रिपल तलाक को उस सम्प्रदाय की एक कुप्रथा कहकर न्यायालय के आदेश का समर्थन कर रहे थे, आज जब बात उनकी एक धार्मिक परंपरा को खत्म करने की आई, तो ये लोग अपनी धार्मिक आस्था की दुहाई दे रहे हैं। अपने इस आचरण से ये लोग अपने दोहरे चरित्र का प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे लोगों के लिए कुछ तथ्य। http://www.krantidoot.in/2018/11/Conspiracy-to-dismiss-Sanatan-tradition-as-Curiosity.html
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