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मैं तो ये भी नहीं जानता कि वो सच भी थी या सिर्फ एक छलावा थी, पर मैं उसके मायाजाल में इस हद तक फसता जा रहा था की मनो मुझे मेरी ज़िन्दगी से ज़्यादा उसकी एक झलक से मोहब्बत हो गई थी। उसे देखने के लिए मैं किसी भी हद को पार कर सकता था... पर कम से कम मुझे ये तो…

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   Chapter- 1 हकिकत और भ्रम में बहुत ही मामूली सा फर्क होता है, इसलिए अक्सर इनमें तालमेल बिठाना काफी मुश्किल हो जाता है। हकीकत वो जो सच है जिसे आप छू सकते हो और भ्रम जो सिर्फ हकीकत जैसा दिखता है, इसे आप देख सकते हो और कुछ हद तक महसूस भी कर सकते … Continue…
वो कौन थी ?
वो कौन थी ?
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