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🙏 कड़वी बात 🙏
यदि आप "शराब" पीकर मंदिर, मस्जिद, गुरूद्वारा या चर्च नहीं जाते ,,, फिर घर कैसे जाते हो!!!
जहाँ आपको जन्म देने वाली "माँ",,
प्यार करने वाली " बहन",,
सम्मान देने वाली "पत्नी",,
साथ निभाने वाला " भाई",,
और सहारा देने वाला "पिता" रहता हैं::::
घर भी तो एक "मन्दिर" हैं!!!

🌸🙏🏼🌸

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शुभ प्रभात
होलीका के पावन दीन पर होलीकादहन के समय त्रीषुल के पावन दर्शन । 👇👌👌🙏
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ब्राह्मण का आना और बसंत का आना
एक सा होता है ! ....क्योंकि....
जब बसंत आता है तो प्रकृति सुधर जाती है
और
जब ब्राह्मण आता है तो संस्कृति सुधर जाती है !

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जय माताजी
।नवचंडी यज्ञ ।
महाकाली , महालक्ष्मी , महासरस्वती , माँ को प्रसन्न करने का श्रेष्ठ प्रयोग ।
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3/11/16
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एक महान आदमी जब कोई गलत काम करता है तो उसे कोई कुछ नहीं कहता. एक नीच आदमी जब कोई अच्छा काम भी करता है तो उसका धिक्कार होता है. देखिये अमृत पीना तो अच्छा है लेकिन राहू की मौत अमृत पिने से ही हुई. विष पीना नुकसानदायी है लेकिन भगवान् शंकर ने जब विष प्राशन किया तो विष उनके गले का अलंकार हो गया.
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भग्वद चर्चा की और___
--शुभ सवार_आपका दिन शुभ रहे ।
पुराणो की चर्चा की और ___
📍हमारे घर्म की और बस दो कदम 📍
👇 हमारे घर्मनुसार १८ पुराण हैै 👇
मद्वयं - १> मत्स्य पुराण । २>मार्कन्ड पुराण
भद्वयं-१>भागवत पुराण २>भविष्य पुराण ।
बत्रयं - १> ब्रम्ह पुरान । २> ब्रम्हान्ड पुराण ३> ब्रम्हवैवरतकम्
वचतुष्टकम् १> विष्णु पुराण २>वराह पुराण ३>वायु पुराण ४>वामन पुराण ।
अ - १> अग्नि पुराण ।
न - १> नारद पुराण ।
प- १> पद्म पुराण ।
ल - १> लिंग पुराण ।
ग- १> गरूड पुराण ।
क - १> कुर्म पुराण ।
+Harshad maharaj

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जय श्री कृष्ण ।
कुछ सामान्य ज्ञान होना जरूरी है । हिन्दु घर्म के अनुसार १८ पुरान है । यह श्लोक मैै १८ पुरान के पेहले अक्षर है । -( म द्वयं भ द्वयं चैव ब त्रयं व चतुष्टकम् अनापलिंग कुष्कानि पुराणानि प्रचज्क्षते ।)
जीनको पता है वह Commnets करे । नही पता वह इन्तजार करे । कल हम विशेष चर्चा करेंगे ।
जरूरी नही की १८ के १८ पुरान के नाम आते वही बता सके । आपको जीतने नाम पता है उतना बताईये ।

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हम चिल्लाते क्यों है गुस्से मे ?

एक बार एक संत अपने शिष्यों के साथ बैठे थे। अचानक उन्होंने सभी शिष्यों से एक सवाल पूछा। बताओ जब दो लोग एक दूसरे पर गुस्सा करते हैं तो जोर-जोर से चिल्लाते क्यों हैं?

शिष्यों ने कुछ देर सोचा और एक ने उत्तर दिया : हम अपनी शांति खो चुके होते हैं इसलिए चिल्लाने लगते हैं।

संत ने मुस्कुराते हुए कहा : दोनों लोग एक दूसरे के काफी करीब होते हैं तो फिर धीरे-धीरे भी तो बात कर सकते हैं। आखिर वह चिल्लाते क्यों हैं?
कुछ और शिष्यों ने भी जवाब दिया लेकिन संत संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने खुद उत्तर देना शुरू किया। वह बोले : जब दो लोग एक दूसरे से नाराज होते हैं तो उनके दिलों में दूरियां बहुत बढ़ जाती हैं। जब दूरियां बढ़ जाएं तो आवाज को पहुंचाने के लिए उसका तेज होना जरूरी है। दूरियां जितनी ज्यादा होंगी उतनी तेज चिल्लाना पड़ेगा। दिलों की यह दूरियां ही दो गुस्साए लोगों को चिल्लाने पर मजबूर कर देती हैं। वह आगे बोले, जब दो लोगों में प्रेम होता है तो वह एक दूसरे से बड़े आराम से और धीरे-धीरे बात करते हैं। प्रेम दिलों को करीब लाता है और करीब तक आवाज पहुंचाने के लिए चिल्लाने की जरूरत नहीं। जब दो लोगों में प्रेम और भी प्रगाढ़ हो जाता है तो वह खुसफुसा कर भी एक दूसरे तक अपनी बात पहुंचा लेते हैं। इसके बाद प्रेम की एक अवस्था यह भी आती है कि खुसफुसाने की जरूरत भी नहीं पड़ती। एक दूसरे की आंख में देख कर ही समझ आ जाता है कि क्या कहा जा रहा है।

शिष्यों की तरफ देखते हुए संत बोले : अब जब भी कभी बहस करें तो दिलों की दूरियों को न बढ़ने दें। शांत चित्त और धीमी आवाज में बात करें। ध्यान रखें कि कहीं दूरियां इतनी न बढ़े जाएं कि वापस आना ही मुमकिन न हो।
-Harshad Maharaj

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क्या आप भगवान जी की पूजा एवं ज्योतिष पर विश्वास करते है । ?
करते हे और कुछ भी प्रश्न है तो इस पे पुछ सकते है ।
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