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7/4/17
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एक जाति दूसरी जाति के लिए समस्या बनती जा रही है.
व्यक्तिवादी संगठन व स्वार्थी लोग ये जहर घोल रहे हैं.
सावधान.

प्राचीन यूनान का देवपरिवार बड़ा समृद्ध था। होमर के अनुसार यूनानी देव-परिवार का सर्वप्रथम देवता ओसीआनस था, जो नदियों का देवता कहा जाता था। इसकी सहचरी थीटिस थी, जिसकी मान्यता प्रमुख मातृदेवी के रूप में थी। ओसीआनास और थीटिस ही यूनानी देवपरिवार के आदि पिता और माता है। यूनान की प्रारंभिक देव कल्पना में निक्स, हिरण्यगर्भ (रजत अंड के रूप में) और इरोस (वायु) का भी महत्व है। इरोस की कल्पना भारतीय कामदेव से मिलती जुलती है। आकाशदेवता के रूप में क्रोनस्‌ तथा भू देवी के रूप में गाइया का भी विशेष मान था। ज्यूस, जो कालांतर में यूनानी देवमंडल का प्रधान बना, इन्हीं का पुत्र था। यूनानी देवमंडल में ज्यूस सहित 13 देवी देवता हैं, जो किसी न किसी रूप में ज्यूस से ही संबधित है।

क्रोनस्‌ अत्याचारी था, जिसे पछाड़कर ज्यूस ने अपने भाई बहनों की रक्षा की थी। इसे अपने पिता तथा उसके सहयोगी टाइटेनों (दैत्यों) के साथ दस वर्षो तक युद्ध करना पड़ा था। आरंभ में ज्यूस तथा उसके अन्य दो भाई पोसाइडान और हेडीज़ समानरूप से विश्व के अधिपति थे यद्यपि तीनों ने अपनी अधिकार सीमा विभाजित कर ली थी। इस प्रकार ज्यूस द्युलोक का, पोसाइडान समुद्र और हेडीज़ पाताल लोक का स्वामी बना। पृथ्वी पर सबका समान अधिकार माना गया। किंतु ज्यूस ने आपने कोशल और पराक्रम से पृथ्वी लोक पर विशेष अधिकार स्थापित कर लिया और देवमंडल का प्रधान बन बैठा।

ज्यूस की कल्पना भारतीय इंद्र से मिलती जुलती है। उसका भी आयुध वज्र तथा दंड था। यह वज्र दैत्यों से युद्ध करने के लिए इसे साइक्लोप्स नामक देवता से प्राप्त हुआ था। टाइटेनों (दैत्यों) से इसका निरंतर विरोध था, जिसके संबंध में यूनानी परंपराओं में अनेक कहानियाँ हैं। देवासुर संग्राम की भारतीय कथा ज्यूस और टाइटैनों के संघर्ष की कहानियों से काफी मिलती जुलती है। इंद्र की तरह ही यह परस्त्रीगामी तथा कामुक था। इसकी अनेक पत्नियाँ थीं, जिनमें हिरा, जो इसकी बहिन भी थी, प्रधान थी। इंद्राणी की ही तरह हिरा सापत्न्य भाव से पीड़ित रहती थी तथा ज्यूस से द्वेष करती थी। यूनानी समाज में हिरा की उपासना पुत्रदा के रूप में प्रचलित थी।

यूनानी कल्पना में ज्यूस की ओलंपियन देवसृष्टि और मनुज सृष्टि का आदि जनक है तथा इसी के अधीन विश्व का शासन चलता रहता है। भूलोक के सभी राजा इसी की व्यवस्था के अंतर्गत शासन संचालन करते रहते हैं। यही मानव मात्र का भाग्य विधाता, न्याय और दंड का व्यवस्थापक है। पाप पुण्य की विवेचना भी यही करता है। अपने वज्र से मेघों को नियंत्रित करके भूमंडल को जलसिंचित करता तथा मनुष्यों के अनियंत्रित और अव्यवस्थित जीवन से क्रुद्ध होकर पृथ्वी का विनाश करने के लिए अतिवृष्टि द्वारा महाप्लावन भी करता है, दे.'प्रलय' और 'ज्यूस'।

देवी अथीना, यूनानी देव परिवार में, ज्यूस की ही तरह महत्वशालिनी थी। यह नैतिकता, सामाजिकता और लोक कल्याण की भावना को प्रश्रय देती थी, तथा इन्हीं की स्थापना इसके पूजाविधान का महत्वपूर्ण अंग था। यह युद्ध की भी देवी थी किंतु यह केवल धर्मयुद्धों में ही भाग लेती थी। ज्यूस की भाँति इसका प्रधान आयुध वज्र था, यद्यपि इसके हाथों में मशाल भी सुशोभित होती थी। यह ज्यूस की ही तरह द्युलोक की स्वामिनी थी और कृषि, वाणिज्य, उद्योग, कला तथा रूप और यौवन की संरक्षिका मानी जाती थी।

एक यूनानी परंपरा के अनुसार यह पोसाइडान की पुत्री थी किंतु पोसाइडान से इसकी तनिक भी न पटती थी। इसे ज्यूस ने पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया था। इसके नाम के साथ 'पल्लस' जुड़ा रहता है। पल्लस के विषय में यूनान में अनेक परंपराएँ हैं, जो परस्पर विरोधी भी हैं। कुछ विद्वानों का मत है कि पल्लस अथीना की उपाधि मात्र है।

ज्यूस का भाई, पोसाइडान, समुद्र और नौपरिवहन का संरक्षक था। भारतीय देवता वरुण से इसकी समता की जा सकती है। यूनानी धारणा के अनुसार यह सागर में रहता था और विशेष अवसरों पर ही पृथ्वी पर आता था। समुद्र में यह निरंतर मत्स्यकन्याओं के साथ जलविहार और आखेट करता था। यह अश्वों का भी स्वामी माना जाता था। अथीना की इससे विशेष प्रतिद्वंद्विता थी, अतएव यह कभी रोष में आकर जलप्लावन द्वारा पृथ्वी के स्थल भाग का अपहरण भी किया करता था। इसका आयुध त्रिशूल है, तथा इसके हाथ में मत्स्य भी रहता है।

जललोक के स्वामी पोसाइडान की तरह हेडीज भी ज्यूस का भाई था। यूनानी परंपरा के अनुसार यह अदृश्य देवता है और सदैव पाताल लोक ही में रहता है। ज्यूस की पुत्री पर्सेफोन का इसने अपहरण कर लिया था। पर्सेफोन इसे चाहती न थी और कभी कभी ही पत्नी भाव से हेडीज के पास जाती थी। धरती पर इस देवता का मान कम था।

हेस्तिया शांति और सौख्य भावना की देवी थी। युद्ध और विवाद इसे प्रिय न था। इसके सौंदर्य पर अनुरक्त होकर अपोलो और पोसाइडान इसे चाहने लगे। अपोलो और पोसाइडान में बड़ी शत्रुता बढ़ गई और युद्ध की नौबत आने को हुई, जिसे दूर करने के लिए इसने आजीवन कौमार्य ्व्रात धारण कर लिया। यह गृहाग्नि और थलाग्नि की संरक्षिका थी अतएव अग्निदेवी के रूप में यूनानी समाज में घर घर आदर पाती रही।

हंसवाहिनी ऐफ्रोडाइटि प्रेम और सौंदर्य की देवी थी। जीव और वनस्पति जगत्‌ में जनन-उत्पादन-क्षमता की यह संरक्षिका थी। गर्भ की रक्षा तथा प्रजनन का नियंत्रण यह अपने वाहन हेबी देवी के साथ करती थी। हेबी वसंत की स्वामिनी थी। ऐफ्रोडाइटि का विवाह ज्यूस ने हेफेस्टस से कर दिया था किंतु ये उससे अनुरक्त न थीं और युद्ध देवता एरीज़ से प्रेम करती थी। इसीसे इन्हें दो पुत्र फोवस (भय) और डेमोस (आतंक) उत्पन्न हुए थे। पोसाइडान भी इनका प्रेमी था। इस देवी को गुलाब विशेष प्रिय था।

ज्यूस से उत्पन्न आर्तेमिस्‌ और अपोलो जुड़वाँ बहनभाई थे और दोनों ही आयुध के रूप में चाँदी का धनुष बाण धारण करते थे। दे. 'आर्तेमिस्‌'। अपोलो संगीत, कविता, नृत्य आदि कलाओं के साथ ही साथ विज्ञान और दर्शन का भी संरक्षक, ऋतुओं का अधिष्ठाता तथा सूर्य का प्रतिरूप भी माना जाता था। यह हाथों में वीणा और धनुष धारण करता था। दे. 'अपोलो'।

हर्मीज़ की ख्याति देवदूत के रूप में विशेष रूप से थी। यह भी पशुधन, वाणिज्य, कला और विज्ञान का संरक्षक था। संतान की कामनावालों का यह विशेष आराध्य था। यूनानी कल्पना के अनुसार यह पंख-युक्त जूते धारण करता है तथा इसका मुख सुंदर और स्मश्रु युक्त है। भारतीय देवता स्कंद की तरह यह चोरों का देवता भी माना जाता है।

एरीज़ को युद्ध और विभीषिका ही प्रिय थी। जीवन और जगत्‌ की कुंठाओं और वीभत्सों का संरक्षक होने के नाते यूनानी समाज इससे डरता जरूर था किंतु इसका आदर न करता था। इसे कुत्तों की बलि दी जाती थी। यह हाथ में मशाल धारण करता था। माला इसे विशेष प्रिय थी।

हेफेस्टस्‌ यूनानी देवताओं का विश्वकर्मा था। यह उद्योग का संरक्षक माना जाता था और आयुध बनाने में विशेष पटु था।

इन देवताओं के अतिरिक्त, यूनानी समाज में अन्य देवी-देवता भी पूजित थे। इनमें हिराक्लीज़ डाइओनाइसस्‌ और डिमीटर का विशेष मान था। हिराक्लीज के द्वादश पराक्रम यूनानी आख्यानों में विशेष लोकप्रिय हैं। यह पराक्रम और पौरुष का प्रतीक समझा जाता था। डिमीटर देवी मानवोचित सद्गुणों की सरंक्षिका के रूप में समादर पाती थी। डाइओनाइसस्‌, यूनानी सभ्यता का प्रचारक था और शराब का आविष्कारक समझा जाता था।

SC/ST/OBC में आजकल सुधार हो रहा है .

पहले जीवन स्तर जानवर से भी बदतर था.

आजकल जानवर के स्तर पर पहुंच चुके हैं.

पहले कोई मारता पीटता था तो बदले में हाथ जोड़कर अपनी ही गलती मान लेते थे.

पर आजकल उसका जवाब तो दे रहे हैं.

भविष्य में ये लोग लोकतांत्रिक रूप से संगठित हों ताकि वर्तमान जानवर के स्तर से ऊपर उठकर सही मायने में मानव बन सकें.

सामूहिक लोकतांत्रिक नेतृत्व वास्तविक प्रगति का परिचायक है.

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