कैसे करें त्वचा की देखभाल और पहचान |  get  solution for skin treatment
 
 
 
त्वचा की देखभाल :-
अनेक स्त्रियों को यह बात मालूम  नहीं होती है कि उनकी त्वचा कैसी है । श्रृंगार के नाम पर भी वह अपने चेहरे की केवल लीपा-पोती ही करती है । इसी कारण उनके चेहरे में तो वो बात दिखाई नहीं देती है जो दिखाई देनी चाहिये । यदि इस प्रकार की स्त्रियों को आकर्षक और सौन्दर्यमय बनाना है तो सबसे पहले उन्हें अपनी त्वचा की पहचान करनी होगी और उनको विषेष उपाय करते रहने पड़ेगा । प्राय: देखा गया है कि घर-गृहस्थी, चिंता, मानसिक तनाव और जलवायु के दुष्प्रभाव के कारण अधिकांश औरतें कम आयु में ही अधेड़ उम्र की लगने लगती है । युवा रहने के लिये वैसे तो अनेक उपाय हैं । लेकिन यदि त्वचा  की उचित देखभाल की जाए तो यौन अधिक समय तक रह सकती है ।
त्वचा के प्रकार (types of skin )  -- चेहरे की त्वचा प्राय: चार प्रकार की होती है । 1. साधारण त्वचा ( simple skin ) ,   
2. तैलीय त्वचा ( oily skin ) , 3. सूखी त्वचा ( dry skin ), 4. मिश्रित त्वचा (Combination Skin) ।

साधारण त्वचा ( simple skin ) - साधारण त्वचा कम स्त्रियों मे पाई जाती है । ऐसी त्वचा वाली स्त्री के चेहरे पर विशेष आकर्षण व ताजगी और ललिमा होती है । इस प्रकार की त्वचा न तो तैलीय होती है और न सूखी  इसका स्पर्श मुलायम और मखमली होता है । इसकी पारदर्शक सतह से रंग चमकता है जिससे यह सुन्दर दिखती है । इसलिये  इस त्वचा पर हल्का श्रृंगार करना चाहिये । और श्रृगार करने से पहले जल से त्वचा साफ करें । साधारण त्वचा का आकर्षण बनाये रखने के लिये जरूरी है कि रात को सोने से पहले क्लीजिंग क्रीम द्वारा चेहरे का मेकअप साफ किया जाए । सप्ताह में एक दिन श्रृंगार बिल्कुल न करें । ताकि त्वचा स्वस्थ्य रूप् से ष्वास ले सके ।
साधारण त्वचा वाले लोग अपनी त्वचा की देखभाल न करें तो उस पर झुर्रियों और बुढ़ापें के प्रभाव का असर शीघ्र प्रकट होने लगता है । ऐसी त्वचा वालो के लिये उसका पोषण जरूरी है ।
साधारण त्वचा को किस प्रकार चैक करें ( identification of simple skin ):-  सुबह उठकर त्वचा को धोने व साफ करने से पहले 'टीषू पेपर' को सारे चेहरे पर लगाये और यदि तेल के धब्बे बहतु कम नजर आये तो समझ लीजिये आपकी 'स्किन' त्वचा साधारण है ।
साधारण त्वचा की देखभाल ( maintenance of simple skin)  :- 1. साधारण त्वचा को हमेशा कोमल साबुन से ही धोना चाहिये । 2. चेहरे की धोते समय पानी का अधिक प्रयोग करें । 3. चेहरे की सफाई के लिये उसे लोषन या क्रीम लगाकर रूई से पोंछना चाहिये । 4. यदि आप किसी भी समय किसी भी प्रकार का मेकअप का प्रयोग करें तो रात को सोते समय मेकअप साफ करके सोए और क्रीम सा लोषन द्वारा मालिश करके सोए 5. सर्दियों में व गर्मियों में मोइश्चराइजर का प्रयोग करें । 6. खाने की तरफ भी पूरा ध्यान देना चाहिये ।
साधारण त्वचा के लिये उबटन ( ubatan for  simple skin)  - 1. सर्दियों की खुश्क हवाओं से त्वचा अकसर फट जाती है । इसके लिये मैदा में थोड़ा दूध मिलाकर पेस्ट बनाएं और चेहरे पर मलें ।मैल की बत्तियाँ उतर आएंगी और त्वचा मुलायम हो जायेगी । 2. तरबूज़, कद्दू, खीरा, ख़रबूज़ा इन चारों के बीज बराबर मात्रा में लेकर दूध में बारीक पीस लें और इसे मलाई के साथ फेस पर लगाएं और एक घंटे बाद धो दें । 3. शुद्ध सरसों को बारीक पीस कर दूध या पानी में लेई सी बना लें । इसके प्रतिदिन प्रयोग से रंगत निखर जाएगी । 4. स्नान करते समय पानी में एक चम्मच ज़ैतून का तेल मिला देने से शरीर की त्वचा का आकर्षण बढ़ने लगता है ।  यदि शरीर की त्वचा अधिक शुष्क है तो स्नान करने से लगभग 15 मिनट पहले हल्के गर्म ज़ैतून के तेल से सारे शरीर की मालिश करें ।
 


तैलीय त्वचा ( oily skin ) - तैलीय त्वचा देखने में ऐसी लगती है जैसे चेहरे पर तेल लगाया हुआ हो । ऐसे त्वचा को धोने के थोड़ी देर बाद तेल निकल आता है । इस प्रकार की त्वचा पर किया गया मेकअप जल्दी ही खराब हो जाता है । ऐसी त्वचा वाले लोगों के शरीर की तेल ग्रंथियां अधिक क्रियाशील रहती है और जरूरत से अधिक चिकनाई निकालती हैं जो चेहरे पर एकत्रित होकर उसे एक चमक प्रदान करती है ।ऐसी त्वचा पर तिल, मुहांसे और फुसियां निकलने की संभावना अधिक रहती है । चिकनी त्वचा को विशेष रूप से साफ रखने की आवश्यकता होती है । जिससे कि रोमकूप खुले रहें । किशोरावस्था में चिकनाहट अधिक निकलती है । जो उम्र बढ़ने के साथ-साथ कम हो जाती है । माहवारी के समय और हार्मोन्स की गड़बड़ी के कारण भी संतुलन बिगड़ जाता है और तैलीय ग्रंथियां अधिक सक्रिय हो जाती है  ।
तैलीय त्वचा की पहचान ( identification of oily skin ):-त्वचा पर सुबह या शाम को चेहरा धोने से पहले पूरी त्वचा पर तेल आ जाता है तो समझे कि आपकी त्वचा तैलीय है ।
तैलीय त्वचा की सावधानियां ( precaution for oily skin )  - 1. त्वचा को कम से कम दिन में चार-पॉच बाद धोऐ । 2. उसी मेकअप का प्रयोग करें जो विशेष रूप से तैलीय त्वचा के लिये बनाया गया है ।3. ऐसी त्वचा के लिये (Medicated Soap) या लोषन लाभकारी होते हैं । 4. ऐसी त्वचा पर फेस-मास्क और पैक वही लगाएं जो तैलीय त्वचा के लिये ही बने है  5. तैलीय त्वचा वाले लोगों को खाने की तरफ भी पूरा ध्यान देना चाहिये । असंतुलित भोजन नहीं करना चाहिये और चिकनाई युक्त भोजन तो बिल्कुल नहीं करना चाहिये । 6. अधिक मात्रा में चीनी का प्रयोग नहीं करना चाहिये । 7. अधिक मसालेदार व चटपटी चीजे नहीं खानी चाहिये । 8. मेकअप से पहले चेहरे पर  एस्ट्रिनजेंट' लगाना चाहिये ।
विधि - 1. एक चम्मच शहद में अंडे की सफेदी मिलाकर अपने चेहरे और गर्दन पर मलें । 10.15 मिनट बाद धो ले । 2. एक चम्मच ख़मीर, एक चम्मच चीनी, आधा कप दूध, इस मिश्रण को ढककर रख दें । जब इसमें ख़मीर उठ जाए तो इस लेप को चेहरे पर लगाएं । 3. दो चम्मच पपीते का गूदा, 10 बूंद नींबू के रस को डालकर अच्छी तरह मसलें । इसे चेहरे पर लगायें । सूखने के बाद चेहरा ठण्डे पानी से धो लें । 4. मटर के दानों को छाया में सुखा कर उनका चूर्ण बनाए और शीशी में भरकर रखें इसमें दो चम्मच गुलाब जल, एक चम्मच मटर पाउडर मिलाकर पेस्ट बनाऐ और चेहरे पर लगाएं जब यह सूख जाए तो ठंडे पानी से धो लें । यह हफते में दो बार करें । 5. संतरे, माल्टा तरबूज़, पपीता इन सबका रस चेहरे पर लगाएं 10-15 मिनट बाद चेहरा धो लें । इससे रोमछिद्र खुल जाते है ।  और रक्त संचार भी बढ़ता है ।
सूखी त्वचा ( dry skin ):- सूखी त्वचा की बनावट देखने में ठीक तो लगती है पर ऐसी त्वचा को देखभाल करने में कई कठिनाईयां आती है । और यह सर्दियों में सूखी-सूखी रहती है तथा त्वचा पर सफेद-सफेद दाग निकलने लगते है ऐसी त्वचा की ठीक से देखभाल न की जाए तो यह समय से पहले बूढ़ी लगने लगती है । और त्वचा पर झुर्रियां आ जाती है । सूखी त्वचा पर मौसम का प्रभाव तुरंत होता है  । ऐसी त्वचा का तेज हवा, धूप, और जल से बचाना चाहिये । शुष्क त्वचा को ठंडे पानी से कम धोना चाहिये और साबुन का प्रयोग कम करना चाहिये  शुष्क त्वचा पर 'एस्ट्रिनजेंट' लोशन बिल्कुल नहीं लगाना चाहिये । रात को ताजगी प्रदान करने वाली  क्रीम का इस्तेमाल करें ।   शुष्क त्वचा पर मोइश्चराइजिंग क्रीम गर्दन तथा शरीर के उन भागों पर भी लगाएं जो दिनभर खुले रहते हैं । ऐसी महिलाओं को विटामिन (A, B, C, D) से भरपूर आहार अधिक मात्रा में लेना चाहिये ।
सूखी त्वचा की पहचान - त्वचा की पहचान करने के लिये पूरे चेहरे पर 'टिशू पेपर' रखें अगर उस पर तेल के दाग व धब्बे नहीं आऐं तो समझ जायें की त्वचा शुष्क है ।
शुष्क त्वचा के लिये सावधानियां - 1. साबुन का प्रयोग नहीं करना चाहिये । इससे त्वचा और सूखी हो जाती है । 2. बहुत देर एयर कंडीशनर और रूम हीटर का प्रयोग न करें । 3. अधिक देर तक सूर्य की किरणों में बैठना यह भी त्वचा को सूखा बेजान बनाता है । 4. कभी भी उन लोषन का प्रयोग न करें जिसमें अलकोहल की अधिक मात्रा हो । 5. गलत तरीके से मेकअप का प्रयोग न करें ।
सूखी त्वचा के लिये नियम व उपाय :- सप्ताह में एक बार चेहरे की मालिश अवश्य करवायें । 2. धूप की सीधी चमक ऐसी त्वचा को और अधिक शुष्क बनाती है तथा त्वचा को कड़ा भी कर देती है । इसलिये धूप से बचकर रहना चाहिये । 3. सप्ताह में एक बार ख़रबूज़े के रस से चेहरे को धोऐ । 4. अच्छी और बढ़िया किस्म की क्रीम से दिन में कम से कम तीन बार चेहरा धोकर लगाएं । 5. त्वचा साफ करने के बाद और अगर मेकअप साफ किया है तो भी स्किन टॉनिक जरूर लगाएं । 6. मेकअप से पहले मोश्चराइजर का प्रयोग करें । 7. चेहरे को क्लीजिंग मिल्क से साफ करें और एस्ट्रिनजेंट लोशन का प्रयोग न करें । 8. सूखी त्वचा के लिये मिल्क सोप का प्रयोग करें ।और कोल्ड क्रीम जरूर लगाएं ।
शुष्क त्वचा के लिये उबटन ( ubtan for  dry skin) :- 1. एक चम्मच बादाम रोगन में 10 चम्मच ठंडा कच्चा दूध और एक चम्मच चीनी मिलाकर रूई के फोहे से पूरे चेहरे व गर्दन पर लगाएं 15 मिनट के बाद चेहरा पानी से धो लें । 2. एक अंडे की ज़र्दी में 2 चम्मच संतरे को रस आधा चम्मच पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाएं । 30-35 मिनट बाद चेहरा धो दें । 3. 50 ग्राम सोयाबीन या मसूर की दाल को रात में भिगोकर रखें । सुबह छिलका उतार कर बारीक पीसिए उसमें थोड़ा सा कच्चा दूध और 4-5 बूँदें बादाम रोगन की डाले । पेस्ट बनाकर फेस पर लगाएं । सूखने के बाद ताजे पानी से धो लें । यह पेस्ट फ्रीज में रख सकते है, अगली बार इस्तेमाल करने के लिये । 4. एक चम्मच बेसन, 1 चुटकी हल्दी, आधा चम्मच शहद और आधा ज़ैतून का तेल मिलाकर चेहरे पर लगाने से सुखी त्वचा में चमक आने आने लगती है । 5. एक छोटा चम्मच बारीक पिसी हुई मुल्तानी मिट्टी में एक छोटा चम्मच गुलाबजल अथवा क्लीजिंग मिल्क मिलाकर पेस्ट तैयार करके चेहरे पा लगाएं । 15-20 मिनट बाद चेहरा गुनगुने पानी से धो लें । 6. चेहरे की त्वचा यदि लू लगने से खुश्क हो गई है तो पानी एक कप व मक्खन एक चम्मच डालकर गरम करें । और चेहरे पर रूई के फोहे से लगाएं । ऐसा 10-15 मिनट करें । फिर चेहरा सूखी रूई के फोहे से पोंछ लें ।
मिली जुली त्वचा (Combination Skin)  :- इस प्रकार त्वचा दो तरह की त्वचा से मिश्रित होती है । इसमें कुछ भाग सूखा (DRY) तो कुछ भाग तैलीय (Oily) होता है। जैसे - माथा, नाक और ठोड़ी यह हिस्सा चिकना पाया जाता है । और बाकी हिस्सा सूखा होता है । इसका मुख्य कारण त्वचा की बहुत समय से देखभाल न करना है । और यह अवस्था मुख्यत: युवावस्था में होती है । क्योंकि कभी-कभी कुछ स्त्रियाँ सौन्दर्य प्रसाधनों में ध्यान नहीं देती और अज्ञानता से किए गए प्रयोग से त्वचा पर बुरा प्रभाव पड़ता है ।
मिली-जुली त्वचा की पहचान :- चेहरे पर टिशू पेपर रखकर उंगलियों से दबाएं फिर टिशू पेपर हटाकर देखें कि उस पर कहीं तेल के धब्बे नजर आऐंगे और कहीं पर नहीं तो समझ लीजिए कि आपकी त्वचा मिली-जुली त्वचा (Combination Skin) है ।
मिली-जुली त्वचा की देखभाल :- 1. इस प्रकार की त्वचा के हर भाग का अलग-अलग उपचार करना चाहिये । 2. इस त्वचा के दोनों भागों, ''सूखे व चिकने'' को नमी प्रदान करने वाले लोशन का इस्तेमाल करना चाहिये । 3. त्वचा की सफाई पर विशेष देना चाहिये आर त्वचा को चिकने और पुष्ट करने वाले ''टॉनिक'' का उपयोग करना चाहिये । 4. रात को सोने से पहले ''नोरिषिंग'' क्रीम से मालिश करनी चाहिये  । 5. इस पर रोज टॉनिक या रोज क्रीम लगानी चाहिये।
मिली-जुली त्वचा के लिये उपाय :- 1. सूखी उड़द की दाल का पाउडर बना कर उसमें एक चम्मच गुलाब जल, 1 चम्मच ग्लिसरीन, 2 बूँद बादाम रोगन को मिलाकर पेस्ट बनाएं, इसे चेहरे पर रोज लगाएं और सूखने पर ताजे पानी से चेहरा धो दें । 2. चंदन पाउडर 1 चम्मच , 2 चम्मच गुलाब जल मिलाकर लेप बनाएं । इसे चेहरे पर लगाएं और 20-25 मिनट बाद चेहरा ठंडे पानी से धो लें । 3. छाछ में जौ या शहद या खीरे का रस मिलाकर लगाने से चेहरे की नमी निकलती है । 4. गेहूँ का आटा 1 चम्मच, 1 चुटकी हल्दी, 1 चम्मच सरसों का तेल मिलाकर पैक करें और चेहरे पर लगाएं 20 मिनट बाद चेहरा गर्म पानी से धो दें ।

मस्से :- यह त्वचा पर छोटी-छोटी उभरी हुई काली-काली फुंसिया होती है इनकी सतह खुरदरी होती है। यह शरीर के किसी भी भाग में हो सकती है । परंतु हाथों और चेहरे पर हो जाएं तो भद्दी लगती है।  विशेष रूप से यह त्वचा में विषैले कीटाणु घुसने से पैदा होती है। और त्वचा पर बुरा प्रभाव डालती है। कई बार एक ही जगह पर बहुत से मस्से निकल आते है । जिन्हें देखने में घृणा आती है ।  इसके कई इलाज है परंतु यह नहीं कहा जा सकता कि इससे ये फिर से पैदा नहीं होंगे । इन्हें हाथ से खींच कर नहीं निकालना चाहिये । सौन्दर्य-विशेषज्ञ से इनके संबंध में परामर्श करें तो ठीक रहेगा ।
इन मस्सों को रोकने के लिये जिस वस्तु का प्रयोग किया जाता है। उससे इन तक रक्त संचार होना बंद हो जाता है । इन मस्सों पर एक बारीक मजबूत धागा बांधा जाता है । जिससे यह सूख जाते है । और अंत में इन्हें किसी छोटी आरी या ब्लेड से काट दिया जाता है । फिर अच्छी मेडीकेटेड क्रीम या एन्टी सैप्टिक क्रीम लगाने की सलाह दी जाती है ।

उदर की पीड़ा की आयुर्वेदिक चिकित्सा

उदर की पीड़ा के अनेक प्रकार होते हैं, जैसे कि गैस की समस्या, जलन का एहसास, लंबे समय से चल रही उदर की पीड़ा इत्यादि । कई बार उदर की पीड़ा दूषित खाना खाने से और दूषित पानी पीने से होती है। इसके अलावा उदर की पीड़ा, तपेदिक, पथरी, अंतड़ियों में गतिरोध, संक्रमण, कैंसर और अन्य रोगों के कारण भी होती है। देखा जाये तो उदर की मांसपेशियों में पीड़ा होती है, लेकिन समझा यह जाता है की पीड़ा उदर में है।

उदर में अल्सर या छाले

अगर उदर की पीड़ा उदर में हुए अल्सर या छालों की वजह से है तो निम्नलिखित उपचार पीड़ा को कम करने में सहायक सिद्ध होते हैं:

मोती पिस्ती, अयुसिड, अविपत्रिकर चूर्ण, ऐसीं जड़ी बूटियाँ होती हैं जो उदर के अस्तर की मरम्मत करने में मदद करती हैं। यह उदर की मांसपेशियों की पीड़ा कम करने में मदद करती हैं और रोगी को अपने शारीरिक बल को वापस पाने में भी मदद करती हैं।


उदर की पीड़ा के संकेत और लक्षण

उदर की पीड़ा के आम लक्षण हैं: पेचिश, रक्त के साथ पेचिश, अनियमित दिनचर्या, कब्ज़ियत, अपचन, गैस, भूख न लगना, पेट में तकलीफ और जलन का एहसास, उल्टियाँ, पेशाब और सीने में जलन, एसिडिटी, पीलिया और अनियमित मासिक धर्म।

उदर की पीड़ा के अन्य उपचार

रोगी को बिना किसी बाधा के मलत्याग होना चाहिए। 24 घंटों में कम से कम एक बार मल का त्याग ज़रूरी है। लेकिन अगर मलत्याग में पेशानी होती है और कब्ज़ियत की शिकायत रहती है तो एक कप गुनगुने दूध में २ चम्मच अरंडी का तेल मिलाकर,रात को सोने से पहले पीने से काफी लाभ मिलता है।
अगर पीड़ा का कारण गैस या एसिडिटी हैं, तो मट्ठा या छाँछ पीने से तुरंत राहत मिलती है।
50 मिलीलीटर गुनगुने पानी में दो चम्मच नींबू का रस और 1 ग्राम सेंधा नमक मिलाकर पीने से भी काफी आराम मिलता है।
गुनगुने पानी के साथ अजवाइन लेने से भी उदर की पीड़ा से काफी आराम मिलता है। इसमें अगर बराबर मात्रा में सेंधा या सादा नमक मिलाया जाये तो यह ज़्यादा असरदार होता है।
एक चम्मच अदरक के रस के साथ एक चम्मच अरंडी का तेल गुनगुने पानी में मिलाकर पीने से भी उदर की पीड़ा कम होती है। इसे दिन में दो बार लिया जा सकता है।
एक चुटकी हिंग पाउडर को पानी में मिलाकर उसका लेप बना लें और अपनी नाभि पर मल कर 25 या 30 मिनट के लिये लेट जाएँ। इससे आपके उदर में बनी गैस के निष्काशन में सहायता मिलेगी और आपको काफी राहत भी महसूस होगी।
एक चम्मच पुदीने का रस एक कप पानी में मिलाकर पीयें। इससे भी आपको उदर की पीड़ा में काफी राहत मिलेगी। हालांकि इस मिश्रण का स्वाद जायकेदार नहीं होता, लेकिन इसके सेवन से तुरंत आराम मिलता है।



आहार और खान पान

उदर की पीड़ा के दिनों में ऐसे खान पान का सेवन करना चाहिए जो आसानी से पचाया जा सके। चावल, दही या छाँछ (मट्ठा) , खिचड़ी, वगैरह का सेवन बहुत लाभकारी होता है। सब्ज़ियों के सूप, और फलों के रस और अंगूर, पपीता , संतरे जैसे फलों के सेवन से भी उदर की पीड़ा कम हो जाती है।

तले हुए और मसालेदार खान पान का सेवन बिलकुल भी नहीं करना चाहिए। खाना खाने के बाद रोगी को किसी भी प्रकार की गतविधि में शामिल नहीं होना चाहिए। रोगी को चिंता, तनाव, क्रोध को त्याग देना चाहिए और तनावमुक्त होकर रहना चाहिए।

निम्बू पानी का सेवन ज्यादा से ज्यादा करें। शराब का सेवन कम से कम करें या बिल्कुल न करें। जब तक पेट दर्द पूरी तरह से ठीक न हो जाये तब तक शराब का सेवन एकदम से बंद कर दें।

Marma Therapy
This is an ancient form of Ayurvedic Massage initially developed and used by martial arts practitioners to treat paralysis to Marmas.

There are 107 reflex points around the body where flesh, veins, arteries, tendons, bones and joints meet up. Each of these points have their own intelligence and consciousness, which co-ordinate with the mind and body.

The therapy involves stimulation using the fingers of these Marma (trigger) points, which promotes physical and mental rehabilitation. The Marma massage therapist isolates points and cleans them out by increasing blood flow to the affected part of the neuro-muscular junction. Stretching of muscles and tendons is also used to improve tone, and gentle manipulation of the spine.

Special types of oils rich in B group vitamins, which are good for muscles and nerves, are used to massage the joints and their surrounding areas. Often the oils are warmed to increase absorption by the body. These oils remove swelling and pain providing welcome relief.

Marma massage has wide applications. Particularly for stroke victims as the massage clears away obstructions which delay information being communicated between the muscles, nerves and brain. This helps to re-educate the brain in control and co-ordination of muscles and nerves after illness or injury.

The following symptoms can also be alleviated through the massage:

Nervousness
Anxiety
Light headedness
Numbness or metallic taste in the mouth
Tingling in fingers or toes
Stress at work or home
Lack of energy
General weakness
muscular aches and pains
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