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Who is mamta banerji ?


"Mamata Banerjee" is a disgrace to Bengal and the entire India. Nature has a strange habit of enforcing, what goes up, must come down. Bengal was once a land of great nationalist, spiritual leaders, writers, and scientists like Tagore, Vivekananda, Netaji and J. C. Bose. Whatever achievement it had due to their towering presence, are more than neutralised by corrupt, opportunist leaders like Jyoti Bose and Mamata Banerjee. On top it, she even looks worse than Jyoti Bose, due to her habit of getting maximum angry at slightest provocation and uttering words, which should have been avoided.

She is neither a Muslim nor a Hindu, she is one of the most prominent evidences of failure of India’s democracy. Once upon a time, we used to look at her as a great warrior, who is fighting left misrule in Bengal single-handedly. Now, we just pray to god that somebody saves Bengal from her misrule. The sooner it is done, the better for Bengal and the entire nation.
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यह तो कहिये सत्ता में भाजपा है, नहीं तो समाचार कुछ और ही होते,
👇👇

1~ बुलेट ट्रेन आने से पहले, बुलेट ट्रेन घोटाला आ जाता।

2~ बाबा राम रहीम बेल पर बाहर होते और उनके विरुद्ध केस करने वाली साध्वी गायब होती।

3~ जवानों के लिए बुलेट प्रूफ जैकेट के नाम पर पैसा आवंटित होता, पर कहाँ जाता यह किसी को नही पता।

4~ रोहिंग्या मुस्लिमों को देश मे रख लिया गया होता, उन्हें केंद्रीय योजनाओं में 2% आरक्षण भी दिया जा रहा होता।

5~ राम मंदिर का मुद्दा छुआ ही नही जाता।

6~ ट्रिपल तलाक़ पर कोई हस्तक्षेप नही होता।

7~ अभी भारत फीफा अंडर~17 वर्ल्डकप की मेजबानी कर रहा है, जिसका हाल शायद सीडब्ल्यूजी घोटाले के जैसा होता।

8~ कर्नल पुरोहित और साध्वी प्रज्ञा आज भी जेल में यातनाएं सह रहे होते।

8~ अलगाववादियों के चरण धोकर पीना आज भी चल रहा होता।

9~ ज़ाकिर नाइक "आतंकी बनो" का नारा आज भी दे रहा होता।

10~ पाकिस्तानी और बांग्लादेशी हिन्दू आज भी शरण के लिए तरस रहे होते।

11~ ड़ोकलाम पर चीन का कब्जा हो चुका होता।

12~ उत्तर प्रदेश में ISIS का खुरासन अपनी पकड़ मजबूत कर रहा होता।

13~ देश के बड़े शहरों में हर माह सीरियल ब्लास्ट हो रहे होते।

14~ कालाधन बनाने वाली कंपनियां अब भी धड़ल्ले से चल रही होती।

15~ किसान आत्महत्या कर रहे होते, मुआवजे के नाम पर उन्हें कुछ न मिलता।

16~ सरदार सरोवर डैम जैसे प्रोजेक्ट आज भी इंतज़ार में होते कि कब हमे जनता की सेवा करने का अवसर मिलेगा।

ऐसे एक नहीं, बहुत सारे बिन्दू हैं, जिनपर हम आसानी से अनुमान लगा सकते हैं कि यदि यूपीए के शासन होता तो आज हालात क्या होते !!?

😰😱 💫
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22/09/2017
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यह लेख खास कर उनके लिए है जो खुद को राजनीति से अलग बताकर मोदी को टारगेट करते हैं
-- सैनिक शहीद हो जाये तो मोदी कायर है, 56 इंच का सीना कहाँ गया?
और सर्जिकल स्ट्राइक कर दो तो वो तो सेना ने किया है मोदी थोड़ी ना जा के लड़े थे? तेजबहादुर पतली दाल का वीडियो पोस्ट करदे तो मोदीराज मे सैनिकों को ढंग का खाना तक नही मिल रहा है,
कर्नल पुरोहित सेना के तो है नही वो तो अलकायदा से सम्बन्ध रखते हैं?
गौरी लंकेश की हत्या के कुछ ही मिनट बाद बैनर छप जाते हैं, प्रदर्शन होता है, हत्यारे का पता लगा लिया जाता है, राजकीय सम्मान दिया जाता है, डीपी बदल लिया जाता है, प्रेस क्लब के श्रद्धांजलि समारोह मे वरिष्ठ पत्रकार कन्हैया कुमार को बुला कर मोदी को गालियां दी जाती हैं,
बिहार मे गला काट कर मार दिये जाने वाले पत्रकारों का नाम तक नही पता?
बीजेपी शासित प्रदेशों में किसी की हत्या हो जाय तो राज्य सरकार दोषी, कानून व्यवस्था ध्वस्त है बंगाल, केरल, और कर्नाटक में हो जाये तो केंन्द्र सरकार, आरएसएस, राष्ट्रवादी संगठन जिम्मेदार ?
मोदी किसी प्रोजेक्ट का उद्घाटन कर दें तो ये तो खांग्रेस ने बनाया था साहब फीता काटने पहुँच जाते हैं, लेकिन कालाधन, आतंकवाद, गरीबी, बेरोजगारी सब 2014 में मोदी के आने के अगले दिन से शुरू हुआ है?
गुजरात सांसदो का वोट चुनाव आयोग रद्द कर दें, बवाना मे आम आदमी पार्टी जीत जाय तो चुनाव आयोग, इवीएम सही है, उत्तर प्रदेश में बीजेपी जीत जाय तो इवीएम हैक कर लिया गया, चुनाव आयोग सरकार के दबाव में काम कर रही है!
कोई मुसलमान न्यायालय से बरी हो जाय तो बेगुनाह को फँसा दिया गया, उसकी जिंदगी के बीते समय कौन वापस करेगा?
लेकिन अमित शाह, नरेन्द्र मोदी को न्यायालय चाहे जितनी बार बाइज्जत बरी करे लेकिन वो 2002, और शहीद इशरत जहाँ के हत्यारे है वो बरी हो ही नही सकते?
योगी यह कह दे कि अगर हम सड़क पर नमाज पढ़ने से नही रोक सकते, मस्जिदों से लाउडस्पीकर नही उतरवा सकते तो हम कावंड़ यात्रा और डीजे भी नहीं रोक सकते यह भड़काउ बयान और अल्पसंख्यकों को निशाना हो जाता है , लेकिन ममता बनर्जी दुर्गा पूजा को रोक दें, मूर्ति विसर्जन को स्थगित कर दे तो वह साधारण प्रकिया होती है?

कोई समुदाय विशेष की बात करे तो वह सेक्यूलरिज्म होता है
और अगर हिन्दू की बात कर दें तो वह साम्प्रदायिक हो जाता है ?
सीबीआई राम रहीम को पकड़
कर जेल मे डाल दे तो बीजेपी तो बचाना चाहती थी लेकिन सीबीआई ने अच्छा काम किया, वही सीबीआई लालू के घर छापा मार दे तो सीबीआई तो मोदी का मोहरा हैं ?
-- दिग्विजय सिंह जाकिर नाइक को गले लगायें तो स्वच्छ,
-- मोदी आसाराम के सतसंग मे चले जाये तो दोषी?
इन दोहरी मानसिकता वालों की इज्जत वैसे ही दो कौड़ी की हो गई है, पता नही और कितना गिरेंगे!
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इन भस्मासुर कौम रोहिंग्या मुसलमानों की हर अवैध गतिविधि को म्यांमार और बांग्लादेश बखूबी जानता है । ये हर उस गतिविधि में लिप्त है जो समाज और राष्ट के लिए खतरा है। म्यांमार और बांग्लादेश ने जब इन रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर अभियान चलाया हुआ है ऐसे में भारत के मुसलमान नेता इन सबको भारत में पनाह देने के लिए आंदोलन कर रहे हैं। कितनी बड़ी विसंगति है कि जिन देशों के ये नागरिक हैं वे तो इन्हें रखना नहीं चाहते, लेकिन भारत के मुसलमान नेताओं को इन अवैध कारोबारियों, नशा और अपराध के सौदागरों से बहुत हमदर्दी है।जिस तरह ईसाई, यहूदी और बौध भारत में भारतीय बनकर रहते हैं, मुसलमानों को भी उसी तरह भारतीय बनकर रहना चाहिए। भारत की सर जमीं से देश विरोधी किसी भी प्रकार की गतिविधियां चलाने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। http://www.krantidoot.in/2017/09/Gold-birds-India-let-India-stay-do-not-make-Taliban.html

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No caste base Reservation :

Science - technology jaise vishayo me jaatigat aadhar par reservation dekar aage badane se kisi desh ka bhala nahi ho sakta.
No caste base Reservation :

Science - technology jaise vishayo me jaatigat aadhar par reservation dekar aage badane se kisi desh ka bhala nahi ho sakta.

ये सब देख कर एक बात दिमाग़ मे आई है…
क्यू ना सड़क पर यातायात के नियम भी रिज़र्वेशन के हिसाब से बना दिए जाए… तो कुछ ऐसी स्थिति होगी
1. एस सी/एस टी/ओ बी सी के लिए अलग लेन होगी उस लेन पर अगर समान्य वाले चलेंगे तो उसी समय 500/- रुपये का अर्थ दंड लगेगा जो सीधा दलितों के पास जाएगा
2. अगर सामान्य वर्ग की लेन मे आरक्षित श्रेणी वाला चलेगा तो उसको प्राथमिकता दी जाएगी सामान्य वर्ग के लोगो को उसको रास्ता देना पड़ेगा !
3. दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के लिए कोई यातायात के नियम नही होंगे ! सेपरेट हिंदू ट्रॅफिक रूल्स एक्ट, मुस्लिम ट्रॅफिक रूल्स एक्ट और माइनोरिटी ट्रैफिक रूल्स एक्ट होंगे !
4. सामान्य वर्ग हफ्ते मे सिर्फ़ 3 दिन ही सड़क प्रयोग कर पाएँगे और बाकी दिन सामान्य वर्ग की सड़कें दलित और पिछड़ी जाति के लोग करेंगे !
5. दलितों और पिछड़ी जातियों कि सड़कों का सारा खर्च सामान्य वर्ग को ही उठाना पड़ेगा !
6. दलित और पिछड़े जब भी चाहे सामन्य वर्ग की गाड़ी हाथ दिखाकर रोक सकते हैं !
7. दलितों और पिछड़ों को पेट्रोल फ्री दिया जायेगा !
8. दलितों को अंधा होने पर भी ड्राइविंग लाइसेंस दे दिया जायेगा !
9. दलित की गाड़ी खराब हो जाए तो सामान्य वर्ग वाले ही उसे धक्का लगायेंगे !
10. सामन्य वर्ग दलितों की सड़क खाली होने पर भी जाम कि स्थिति में उस तरफ़ नही देखेगा !
अब तो आरक्षण भोगी खुश हो गए होंगे ??
1857 से 1947 तक विदेशी शासको के विरुद्ध संघर्ष , लाखो देश भक्तो ने आत्म बलिदान दिया ! लाखो लोग अंग्रेजी सत्ता के जुल्मो से तबाह हुए ! कौन थे वो लोग ? किस जाति के थे ? आज़ादी के लिए लड़ने वालो में दलित जाति के कितने लोगो ने आत्म बलिदान दिया ? कितने दलित जेलों में गये ? आज दलित इस देश पर राज करना चाहता है ! इन्हें राज का इतना ही शौक है तो लड़ते विदेशीयों से किसने रोका था ? आज़ादी के संघर्ष में बलिदान देते ,आज़ादी के लिए जेलों में जाते ! क्यों नही इन् दलितो ने चन्द्र शेखर आजाद और भगत सिंह प.राम प्रसाद बिसमिल अशफाकउल्ला, ठाकुर रोशन सिंह, चापेकर बंधुओं [जो की तीन सगे भाई थे एक एक परिवार से दो दो तीन तीन किशोरों ने बलिदान दिया] के साथ कंधे से कंधा मिलाके संघर्ष किया ? किसने रोका था इन्हें? 1947 1949 केवल 16 माह ही देश के लोग आजाद रहे ! 26 जनवरी 1950 संविधान में आरक्षण के नाम पर 25% सवर्णों को गुलामी की जंजीरे पहना दी ! देश के लोगो ने 10 साल के लिए आरक्षण दिया जिसे आज आरक्षण भोगी अपना अधिकार समझने लगे है !
1962 में चीन ने हमला किया तब इन दलितो क्या योगदान था ?
1965 और 1971 के पाकिस्तान के विरुद्ध क्यों नही लड़े ये आरक्षण भोगी ?
देश की रक्षा में प्राणों की आहुति तो दे कोई और तथा आरक्षण के नाम पर राज करने का अधिकार इन्हें चाहिए?
यदि सामान्य वर्ग अपने अधिकारों के लिए सुप्रीमकोर्ट में केस जीत जाते है तो काँग्रेस और भा.ज.पा मिलकर दलित तुष्टीकरण के लिए 81 वा , 82 वा और 85 वा संविधान संशोधन करते है | मायावती देश के लोगो के पैसे से अपनी मूर्तियां बनवाती हैं ! राज्नीतिग्य अपनी रोटियाँ सेक्ने के लिए योग्यता का उपहास करते हैं !
क्या सामान्य वर्ग ने जातीय आधार पर आज़ादी की लड़ाई लड़ी थी ? आज़ादी की लड़ाई जो सामान्य वर्ग के लोग लड़े और जिनके परिवार बर्बाद हुए क्या वो गरीबी की मार नही झेल रहे ? उनका शोषण नही हुआ ? क्या मिला समन्य वर्ग को अंग्रेजो से लड़ने में ? बताओ आरक्षण भोगियो 1962 , 1965 , 1971 और कारगिल युद्ध कितने दलित युद्ध में लड़े कितने शहीद हुए ? क्या जवाब है तुम्हारा ? क्या आज तक देश के लिये किसी दलित ने किसी भी तरह की कोई कुर्बानी दी है ? अपनी जाति से बाहर कि सोच ही नही रख पाये आज तक ! देश के लिये कुर्बानिया और त्याग करे कोई और तथा आरक्षण के नाम पर विशेषाधिकार चाहिए इन दलितो को ! क्यों? क्यों आखिर क्यों चाहिए इन्हें विशेषाधिकार ? क्या योग्यता है इनकी सिर्फ़ जाति के अलावा जिसके आधार पर ये लोग विशेषाधिकार चाहते है ? आज पढ़ें लिखे मेहनत करने वाले योग्य लोग बेरोजगार फिरते रहे पर दलितो को आरक्षण के नाम पर सारी सहुलियते चाहिए |जागो भारतीय नवयुवको जागो क्यों अपनी आनेवाली पीढियों का भविष्य अंधकारमय करते हो ? आरक्षण संविधान में दिए गए समानता के मौलिक अधिकार का उलंघ्घन करता है !
जब संविधान में आरक्षण देने का निर्णय लिया गया था तब इसका आधार जातिय रखा गया और कुछ को अनुसूचितजाति [SC ]और कुछ को अनुसूचित जनजाति [ST ] माना गया !
प्रश्न 1 . ———— इस बात का क्या आधार ( Criteria ) निर्धारित किया की ये ये जातिया अनुसूचित जातिया ( SC ) होगी और ये ये जातिया अनुसूचित जनजातीय ( ST ) होगी ? ( इसी तरह एक और प्रश्न है की 1950 जब से संविधान लागु हुआ उससे पहिले तक भारत में चमड़े का जितना भी व्यापर होता था उस पर चर्मकार जाति का एकाधिकार था अर्थात चर्मकार जाति एक व्यापारी जाति थी और आज भी बहुत से क्षेत्रों में चमड़े का बड़ा व्यापार करते हैं ! फिर चर्मकार जाति को किस आधार पर आरक्षण दिया गया ? इसी तरह राजस्थान मीणा जाति के पास 1950 से पहिले ही कृषि भूमि थी ! उन्हें किस आधार पर अनुसूचित जन जाति माना गया ? ( मीणा जाति कृषक जाति थी )
प्रश्न 2 . ———- —- क्या कोई बन्धु आरक्षण में जाति का क्या CRITERIA था की जानकारी देगे ?
प्रश्न 3 .————————-पिछले 63 वर्षों में किस आरक्षित जाति ने कितनी तरक्की की ?
प्रश्न 4 ——————— कितनी जातिया आरक्षण के सहारे अगड़ी जातियों के बराबर आगयी ?
प्रश्न 5 ———————–वो कौनसी सीमा रेखा थी जिसको पार करने पर दलित दलित नही होगा ?
प्रश्न 6 ————————आरक्षण के सहारे सभी दलित कब तक अगडे हो जायेगे ?
प्रश्न 7 ———————- क्या दलितो में जातिया नही होती ? ( There are more Than 700 caste included in SC & More than 400 caste in ST )
प्रश्न 8 ————– दलित जातियों में यानि SC& ST जातियों में आपसी विवाह को प्रोत्साहन क्यों नही दिया जाता ? दलितों में 700 से ज्यादा जातिया हैं तो वो अपनी ही जाति में आपसी विवाह को प्रोत्साहन दे के जातीयता को समाप्त क्यों नही करते ? SC& ST जातियों में आपसी विवाह तो दूर कि बात इनके बीच कि जातियों में आपसी विवाह नही होते !ये लोग दलित और गैर दलित में ही विवाह को प्रोत्साहन के लिए इतने आतुर क्यो रहते है ?
है किसी के पास इस जिज्ञासा का जवाब ?
मेरे मित्रों इन राजनेतिक षड्यंत्रो को पहचानो और आरक्षण के विरोध में देश की जातिगत एकता के प्रयास करों |

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9/20/17
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Accha hai log...ab sach janne ke ichhuk hai....
💙 "राहुल गाँधी" के विषय में "अनूप कुमार" का एक तथ्यपरक एवम खोजपूर्ण लेख ।
🐵🐒🐒🐵🐵

बात सन 1989 की है।
XIIth में मात्र 65% marks होने के बावजूद राहुल गाँधी को दिल्ली के St. Stephens College ने BA (History Hons) में दाखिला दे दिया था। इस बात को लेकर मीडिया में काफी बवाल हुआ। जब दूसरे छात्रों के लिए cut off मार्क 90% के लगभग था तो राहुल को किस आधार पर 65% पे ही दाखिला दे दिया गया? मीडिया में प्रश्न उठा कि क्या राहुल गाँधी को ईसाई होने की वजह से कम अंक होने के बावजूद दाखिला दिया गया है? ⁉️

अब, 'गाँधी परिवार' सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार करना नहीं चाहता था कि राहुल गाँधी कैथोलिक क्रिस्चियन हैं। इसलिए St. Stephen's प्रशासन से यह कहलवाया गया कि राहुल गाँधी को sports quota में एडमिशन मिला है। 💢‼️

लोगों का माथा ठनका। ‼️
sports quota? कौन सा स्पोर्ट्स भईया? राहुल गाँधी, किसी खेल में प्रवीण थे, ऐसा तो कभी किसी ने न सुना न देखा। तो St. Stephen's ने कहा कि राहुल को shooting में पारंगत होने की वजह से उन्हें स्पोर्ट्स कोटा के लिए consider किया गया है।

लो जी, ये अच्छा खेल बताया। क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी या टेनिस कहते तो झट् से कोई पूछ बैठता कि कौन सी प्रतियोगिता खेली है इन्होंने?
पर "शूटिंग" कौन फॉलो करता था उस वक़्त? फिर भी कुछ लोग पूछ ही बैठे कि भाई, सिर्फ किसी खेल में पारंगत होने की वजह से स्पोर्ट्स कोटा में एडमिशन नहीं मिलता, उसका एक मानक होता है कि अगर आपने राज्य स्तर पर वह खेल खेला है तभी आपको स्पोर्ट्स कोटा के लिए consider किया जाएगा। 👈💢

खैर, बात आई गई हो गई। प्रधानमंत्री का बेटा जो ठहरा। किसकी हिम्मत बात को आगे बढ़ाए?

अब चूंकि मैंने भी 1989 में ही JNU में BA (French Hons) में दाखिला लिया था; तो उड़ती-उड़ती कुछ खबरें Stephen's के मित्रों से राहुल गाँधी के बारे में मिलने लगीं। बताया गया कि कक्षा के अन्य छात्रों का "बौद्धिक स्तर" राहुल गाँधी के स्तर से कहीं ऊपर था। राहुल गाँधी के बेवक़ूफ़ी भरे सवालों पर वो हँस देते। 🤐💢
राहुल, कक्षा में अलग-थलग पड़ गये और धीरे-धीरे कुंठा का शिकार होने लगे। मात्र एक साल के अंदर उन्होंने St Stephen's छोड़ दिया।

बताया गया कि राहुल गाँधी, Harvard जा रहे हैं। 😳‼️⁉️

अब मुझे लगने लगा कि राहुल गाँधी के बारे में जो कहानियाँ हमें स्टीफेंस वालों ने सुनाई थीं वो झूठी थीं। यूँ ही किसी को "हार्वर्ड" में दाखिला तो नहीं मिल जाता न ! कुछ तो बात होगी बंदे में!

पर ये क्या! एक वर्ष बाद खबर आई कि राहुल गाँधी, ने अब हार्वर्ड भी छोड़ दिया। ⁉️💢

अब मुझे स्टीफेन्स वाले मित्रों की बातें सच लगने लगीं। 👈😄

अगर कोई NIT Kurukshetra में एडमिशन लेने के एक साल बाद यदि इसलिए उसे छोड़ देता है कि उसे IIT Delhi में एडमिशन मिल गया है तो बात समझ में आती है। परन्तु, यदि वो फिर एक साल में IIT भी छोड़ दे तो आप क्या कहेंगे? यही न कि ये लड़का भोंदू है, ये सब जगह फेल हो रहा है। 💢🤐

पर इस बार राहुल गाँधी कहाँ गए, किसी को पता नहीं चला। यह बात गुप्त रखी गई। इस दौरान उनके पिता की हत्या भी हो गई, तो हमें लगा कि शायद सुरक्षा कारणो से उनका लोकेशन public नहीं किया गया है।

खैर, राजीव की मृत्यु के बाद राजनीति ने काफ़ी करवटें बदलीं। देश का प्रधानमंत्री बनने के बाद "नरसिंह राव" कांग्रेस पार्टी के भी सर्वशक्तिमान नेता बन गए। गाँधी परिवार, की एक नहीं चलने देते थे।
पर 1996 में वो चुनाव हार गये और फिर यूनाइटेड फ्रंट की अल्पकालिक सरकार बनी। उसके बाद हुए चुनावों में "अटल बिहारी वाजपेयी" विजयी हुए।
इस बीच, सोनिया गाँधी ने कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष सीताराम केसरी को धक्के मार कर कांग्रेस कार्यालय से बाहर फिंकवा दिया और खुद कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज हो गईं।
☹️😰👆

और फिर जो होना था वो हुआ। वंशवाद की बेल, फिर से प्रस्फुटित होने लगी। 2004 के लोक सभा चुनावों के ठीक पूर्व "राहुल गाँधी", सात समंदर पार से अचानक भारत आ धमके और अमेठी से लोक सभा का पर्चा दाखिल कर दिया। उन्हें अपने पिता की विरासत जो संभालनी थी। ‼️⁉️

2004 के चुनावों में वाजपेयी जी की "अप्रत्याशित हार हुई" और राहुल गाँधी की अम्मा ने गुलाम वंश की स्थापना की। भारत के साथ-साथ इटली की नागरिक होने की वजह से वो खुद तो प्रधानमंत्री बन नहीं सकती थीं और न ही तभी-तभी राजनीति में कूदे "राहुल गांधी" को बना सकती थीं। तो मैडम जी ने मनमोहन सिंह नामक एक कठपुतली को प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बिठा दिया और पुत्र के साथ मिल कर पीछे से उसकी डोर खींचने लगीं।

खैर, मूल मुद्दे पर वापस आते हैं। 👇

तो साहब, जब राहुल गाँधी 2004 में अपने लंबे विदेश प्रवास के बाद भारत वापस लौटे, तो प्रश्न लाजमी था कि "उन्होंने इतने सालों तक विदेश में किया क्या?*

पार्टी के नेता tv channels पर घूम-घूम कर कहने लगे कि राहुल ने पढ़ाई पूरी करने के बाद, एक मल्टीनेशनल कंपनी जॉइन की। पर देश सेवा की इच्छा पैदा हुई तो वो अपनी लाखों की नौकरी छोड़ कर भारत चले आये। 😵💫

अब यह प्रश्न उठना स्वाभाविक था कि "राहुल बाबा, कौन सी मल्टीनेशनल कंपनी में काम करते थे?"
पर न उन्होंने कभी यह बात किसी इंटरव्यू में लोगों को बताई न ही उनकी पार्टी ने। आप अपने career के बारे में कोई बात तभी छुपाते हैं। जब आपको उसे बताने में शर्मिंदगी का अहसास हो। जाहिर है राहुल को भी अपने किये पर शर्मिंदगी का अहसास होगा तभी वह अपनी नौकरी के बारे में देश से छुपाते फिरते हैं। न ही सिर्फ नौकरी, बल्कि अपनी शिक्षा के बारे में जानकारी भी वह छुपा गये।

जब राहुल 2004 में वापस आये तो "कांग्रेसी" उनकी शिक्षा के बारे में अलग-अलग बातें कहते थे। किसी ने कहा कि राहुल ने MBA किया है तो किसी ने M.Tech., तो किसी ने M.Phil. बताया। बहरहाल, राहुल चुनाव जीत गये।
💫‼️
लोगों की curiosity भले ही खत्म हो गई थी पर राहुल की शिक्षा के बारे में मेरे मन में उत्सुकता बनी हुई थी कि *इस आदमी ने जब भारत छोड़ा तो यह गया कहाँ था!?
👇
एक तरीका था। पार्लियामेंट की साइट पर सभी "सांसदों" के विवरण दिए होते हैं। ये विवरण सांसद स्वयं ही लोकसभा सचिवालय को देते हैं जो उसे वेबसाइट पर डाल देते हैं।

तो मैं वहाँ पहुँचा।
वहाँ महाशय ने अपनी educational qualification में क्या डाला हुआ था – M.Phil आगे लिखा हुआ था Educated at Trinity College, Cambridge University, UK.

मतलब सिर्फ highest qualification. M.Phil. के पहले क्या किया? M.A. किया या M.Com. किया? और किया तो कहाँ से किया? उसके पहले B.A. भी तो किया होगा। वो कहाँ से किया और किस विषय में किया, इसके बारे में कोई जानकारी नहीं दी।
😄😄
मुझे लगा कि शायद "कांग्रेसियों" में ये रिवाज़ हो कि सिर्फ अपनी highest qualification बताते हों। तो यह चेक करने के लिए मैंने राहुल के मित्र और सहयोगी सचिन पायलट, ज्योतिरादित्य सिंधिया और कपिल सिबल की biography खंगाल डाली। पर वहाँ तो कुछ और ही नज़ारा था। सबने B.A.upwards अपनी डिग्री के बारे में बताया हुआ था। ज्योतिरादित्य, ने तो अपने स्कूल का भी ज़िक्र किया हुआ था क्योंकि वह दून स्कूल से पढ़े हैं।
🐒
अब आते हैं उनके shooting में पारंगत होने के ऊपर। मैंने सोचा कि यदि राहुल गाँधी shooting में पारंगत हैं तो "पार्लियामेंट साइट" पर उनकी बायोग्राफी में, *"Sports and Clubs' column में shooting ज़रूर लिखा होगा*।
पर ये क्या! उस कॉलम में shooting का कोई ज़िक्र तक नहीं। वहाँ जिन चार खेलों का नाम लिखा हुआ है वो हैं; Swimming, Cycling, Running and Aikido. 😰💢‼️

मतलब, झूठ बोलने की भी हद्द है।
St. Stephen's में एडमिशन के वक़्त असली कारण ( कैथोलिक क्रिस्चियन होना) न बता कर, स्पोर्ट्स कोटा का झूठ गढ़ना, यह इस व्यक्ति की अनैतिकता की तरफ इशारा करता है।

राहुल गाँधी, जो कि प्रधानमंत्री बनने के सपने देखता है। अपनी शिक्षा और नौकरी के बारे में जानकारी देशवासियों से छुपाता है।
हमें पता तक नहीं कि 2004 में भारत वापस आने के पहले यह आदमी, किस कंपनी में किस पद पर क्या काम करता था? जितने साल इसने नौकरी की, उसके दौरान इसका career graph कैसा था? क्या इसे promotion मिले थे? और अगर मिले थे तो वो क्या औसत गति से मिले थे या तेज़ गति से? या फिर कोई प्रोमोशन ही नहीं मिला था भाई को!
क्या वह इतना निकम्मा था?

और आज वही निकम्मा, 👆 😠 जिसे कहीं कोई जॉब नहीं मिली, या मिली भी तो ऐसी नहीं मिली, जिसके बारे में वो गर्व से दुनिया को बता पाये, कह रहा है कि "Core constituency of right wing leaders are those who cannot get a job." 👆 😠😰💫🙏

राहुल गाँधी एक दो कौड़ी का नेता है जिसे राजनीति के बाहर कोई चपरासी की नौकरी न दे।

‼️⁉️💢☹️😠
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Kya aap log apni aadhi salary....rohingyas ko.doge....

Kuch log dilwane main.lage hai.....aaj.dharna de rahe hain kal danda denge......halaq main.hath.dalkar haq magengey....????
Bhaiyo....kya bharat main hi sab ke liye...jagah.hai....aur desh kya haz par gaye hain....bhai baat saaf hai...main nahi chahta ..ki rohingya bharat main rahe....

Sidhi baat...main kuch ukhaad to nahi sakta par main aapna tax inke palan poshan main nahi dunga....inko congress italy kyon nahi le jaati....main mar jaonga par ye manzoor nahi hai....hamare kashmiri bhai log aaj tak apne hi desh main refugee hain..saale bangladeshi bengol main gushke....haq maang rahe hai...kya hoga bhagwan....desh ka....vinash kale vipreet buddhi....unki jo support karte hain in sab ko....
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हरियाणा में ऑपरेशन राम रहीम की कुछ अनकही सच्चाई

रामरहीम को डेरे से बाहर निकालना था चैलेंज ?

हरियाणा के होम सेक्रेटरी रामनिवास ने भी माना कि सरकार के लिए सबसे बड़ा चैलेंज रामरहीम को उसके सिरसा स्थित 700 एकड़ में फैले में डेरे से बाहर निकालना था।
गुरमीत राम रहीम को आने वाले फैसले का अंदाजा था और वह अपने डेरे से बाहर निकलने के लिए तैयार नहीं था, ऐसी स्थिति में प्रशासन के पास सिर्फ सिर्फ दो विकल्प थे जिसमें पहला था बल प्रयोग -- अगर यह ऑप्शन आजमाया जाता तो निश्चित तौर पर बहुत बड़ी जन हानि होती क्योंकि उसके डेरे में पांच से छह लाख समर्थक मौजूद थे और आगे महिला और बच्चों को रखा गया था। अगर पुलिस या सेना वहाँ प्रवेश करती तो निश्चित तौर पर हथियारों से लैस गुंडे महिला व बच्चों की आर्मी पुलिस व आर्मी पर हमला करते और जाने कितने मासूम भोले लोग महिला व बच्चों के साथ मारे जाते।
ऐसी स्थिति में हरियाणा सरकार और पुलिस प्रशासन ने एक कूटनीतिक फैसला लिया कि राम रहीम को विश्वास में लेकर उसे अपनी किलेबंदी से बाहर निकाला जाए और सी बीआई कोर्ट में जहां पर पुलिस और पैरा मिलिट्री फोर्सेज ने किलेबंदी कर रखी है उसमें लाकर फंसा लिया जाए चाहे उसके लिए उन्हें बदनामी का खतरा मोल ले लेना चाहिए क्योंकि कुछ उनकी बदनामी से ज्यादा कीमती लाखों समर्थकों की जान है और यह साहसिक फैसला मुख्यमंत्री ने अपने स्तर पर लिया।
पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि प्रशासन ने बार-बार बाबा से गुहार लगाई कि उनके साथ कुछ खास नहीं किया जाएगा , डेरा समर्थकों को पंचकूला शहर आने दिया गया। देर रात तक उन पर ज्यादा कार्यवाही नहीं की गई, सिर्फ खतरनाक हथियारों की जब्ती के सिवा ताकि राम रहीम जो सारी कार्रवाई टीवी पर देख रहा था, को विश्वास हो जाए कि प्रशासन उस पर सख्ती नहीं बरतने वाला है।
यही विश्वास दिलाने के लिए मुख्यमंत्री ने अपना विश्वास पात्र निजी सचिव सुबह सुबह राम रहीम से मिलने भेज दिया
और जैसे ही गुरमीत ने बाहर निकलने की इच्छा जताई , हरियाणा सरकार ने उन्हें पंचकूला की ओर अपने काफिले के साथ बढ़ने दिया और पंचकूला में घुसते ही धीरे धीरे उसके काफिले को कम करते गए और अंत में केवल उसकी मुंह बोली बेटी और छह सुरक्षा गार्डों के साथ पुलिस के चक्रव्यूह में घुसने दिया और चक्रव्यूह में घुसते ही उसके सुरक्षा गार्डों को पहले समझा इसे अलग करने की कोशिश करें , परंतु इस से पहले कि वह हिंसक होते , उन्हें बल प्रयोग से काबू में कर लिया गया। अब राम रहीम के पास कोई विकल्प नहीं बचा था सिर्फ प्रशासन की बात को मानने के सिवा।

हरियाणा पुलिस के 6 जवानों पर देशद्रोह का केस:

बाबा रामरहीम को जैसे ही कोर्ट ने दोषी करार दिया, प्रशासन ने तुरंत उन्हें आर्मी के वेस्टर्न कमांड के हेड क्वार्टर की ओर भेज दिया ताकि पैरामिलिट्री आर्मी के चलते बाबा कहीं भाग ना सके । यह खबर पहले ही आ गई थी कि बाबा भागने की कोशिश कर सकते हैं। और ऐसी कोशिश हुई भी। इसी के चलते अब हरियाणा पुलिस के 6 जवानों पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज हो गया है।

इतना ही नहीं प्रशासन ने एक मेक शिफ्ट हवाई पट्टी भी बनाई ताकि लोगों को यह धोखा दिया जा सके कि रामरहीम को यहीं से रोहतक भेजा जाएगा। जैसे ही बाबा को दोषी करार दिया, पैरामिलिट्री फोर्स ने रामरहीम को तुरंत पंचकूला सेशन कोर्ट से आर्मी बेस में स्थित हवाई पट्टी पर खड़े हेलीकॉप्टर पर बिठाकर रोहतक रवाना कर दिया।

गुरमीत के बाद हनी प्रीत करेगी डेरे की अगुवाई :

अधिकारियों का कहना कि रामरहीम के साथ हनीप्रीत को इसलिए भेजा गया क्योंकि रामरहीम के बाद वही डेरे की अगुवाई करने वाली है। प्रशासन नहीं चाहता था कि हनीप्रीत कौर डेरा समर्थकों के सामने आए और समर्थकों को संबोधित करे। इसी के चलते हनीप्रीत को रोहतक जेल के गेस्ट हाउस तक ले जाया गया।

गेस्ट हाउस में जैसे ही रामरहीम को रखा गया उसके तुरंत बाद ही जेल अधिकारियों ने आकर सबसे पहले हनीप्रीत को वहां से हटाया और उसके बाद गुरमीत को रोहतक की सुनहरी जेल में स्थित उनके सेल में ले गए।
जैसे ही दोषी करार होने की सूचना बाहर आई और समर्थकों ने उपद्रव शुरू किया तो पहले से तैयार सुरक्षाबलों ने तुरंत कार्यवाही करते हुए एक से डेढ़ घंटे के भीतर स्थिति पर पूरी तरह काबू पा लिया और इस कार्यवाही में 28 लोगों की जानें गई जो तुलनात्मक रुप से बहुत कम है। यदि यह कार्यवाही राम रहीम को डेरे से बाहर निकालने के लिए बल का प्रयोग किया गया होता क्योंकि पंचकूला में केवल एक से डेढ़ लाख समर्थक थे, वहीं डेरे में पांच से छह लाख लोगों की भीड़ जमा थी हथियारों से लैस और एक चक्रव्यूह इसका प्रमाण है कि बाकी सभी आश्रमों पर प्रशासन कब्जा ले चुका है परंतु मुख्य आश्रम से समर्थकों को धीरे-धीरे संयम के साथ समझाइश के साथ बाहर निकाल रहा है और जैसे ही यह भीड़ कम हो जाएगी उसके कट्टर समर्थकों को बलपूर्वक पकड़कर मुख्य आश्रम पर भी कब्जा कर लिया जाएगा। इन सभी स्थितियों को ध्यान में रखते हुए मैं हरियाणा पुलिस और सरकार को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने अपनी बदनामी झेल कर भी एक बड़ी जनहानि एवं नुकसान से हरियाणा को बचा लिया। आज मीडिया यह सच नहीं बता रहा है क्योंकि पंचकूला में कई मीडिया हाउस का व्यक्तिगत नुकसान हुआ है इसलिए आप अपनी बुद्धि का प्रयोग कीजिए और व्यर्थ में हरियाणा के पुलिस और सरकार पर कम से कम कटाक्ष तो मत कीजिए अन्यथा भविष्य में कोई भी जनप्रतिनिधि अथवा अधिकारी आम हित में ऐसे फैसले लेने से बचेगा जिसका नुकसान आप और हम जैसे आम आदमियों को ही होगा।
जय हिंद।
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