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🙌🙏 राम सियाराम 🙏🙌

कुछ जीवन प्रभु ने ऐसे भी बनाये हैं जो अकारण ही अन्य जीव को क्षति पहुचाते हैं,उनका जीवन अर्थहीन होता ,वे इस दुनियां में दुष्ट कहलाते...दुष्ट बिना स्वार्थ के भी दूसरे को हानि पहुंचाता है...जैसे सांप डंक मारता है तो क्या उसको कुछ खाने-पीने को मिलता है? बस, दूसरे के अंदर जहर डालता है...चूहा भी दूसरों के वस्त्र काट देता है तो क्या उसका पेट भरता है? नहीं, वह निरर्थक दूसरों को हानि पहुंचाता है...ओले बरसकर फसल को नष्ट करके स्वयं धरती में मिल जाते हैं...दुसरे की क्षति की और स्वयं मिट्टी में मिल गए....दुष्ट का भी जन्म जगत के अनर्थ के लिए है...हमें ऐसे पापों से सर्वथा बचना चाहिए और प्रयत्न करके स्वयं को मिटा कर भी दूसरों के काम आना चाहिए,जिससे जगत् हमें पुण्यात्मा कहे,यही मानव जीवन का उद्देश्य है....हे प्रभु हम अपने पवित्र उद्देश्यों में सफल हों,इसी अलौकिक प्रार्थना के साथ...
शुभसंध्या
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