अगर आप भी जानना चाहते हो अपनी कुंडली मे कमजोर बृहस्पति के फल तो आज ही अपनी रिपोर्ट इस लिंक से https://www.foresightindia.com/basichoro/P1 डाउनलोड करे या हमे call- +917983037674 या whatsapp - 917983037674 करे.

बृहस्पति के प्रथम भाव में कमजोर होने पर होने के कारण जातक के आत्मविश्वास में कमी रहती है. फैसले लेने में संकोची होता है. बलहीन गुरू ज्ञान में कमी देता है व्यक्ति में समझ का दायरा सीमित रह सकता है.

दूसरे भाव में स्थित बलहीन गुरू के होने पर पैतृक संपति का विवाद झेलना पड़ सकता है. धन की हानि हो सकती है. जातक को अपने परिश्रम द्वारा ही कुछ लाभ मिल सकता है. व्यक्ति में वाक चातुर्य नहीं आ पाता. परिवार मे विवाद बने रहते हैं.

तीसरे भाव में बलहीन गुरू के होने पर भाई बहनों का सुख नहीं मिलता या भाई बहनों की स्थिति ठीक नहीं रहती. परिश्रम करने से बचने का प्रयास करता है.

चतुर्थ भाव में होने पर बलहीन गुरू इस भाव के शुभ तत्वों में कमी आती है. इसके प्रभाव से माता का स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है. मन में अशांति का भाव भी बना होता है. सुख सुविधाओं में कमी का अनुभव हो सकता है. माता से दूरी हो सकती है.

पंचम भाव में कमजोर चंद्रमा के होने से जातक को शिक्षा में कमी का अनुभव करना पड़ सकता है. बौद्धिकता का स्तर कम रहता है. एकाग्रता में कमी भी हो सकती है. संतान की ओर से दुख की प्राप्ति होती है. पांचवा भाव कमजोर स्थिति को पाता है.

छठे भाव में बलहीन गुरू के होने से जातक का मामा पक्ष से दूरी रह सकती है. रोग,ऋण व शत्रु आप पर हावी हो सकते हैं. आपका शौर्य कम होता है.

सातवें भाव में बलहीन गुरू के होने से विवाह विलंब से हो सकता है, जीवन साथी के साथ अनबन एवं मतभेद उभर सकते हैं, साथी के सुख में कमी आती है या जीवन साथी से दूरी भी रह सकती है. सामाजिक प्रतिष्ठा को बनाए रखने में काफी परिश्रम करना पड़ता है.

आठवें भाव में गुरू बलहीन होकर ससुराल पक्ष से तनाव की स्थिति दे सकता है. कार्यों में रूकावट देता है, दुर्बलता व स्वास्थ्य में कमी होती है. आयुष को खतरा बना रहता हैं.

नवम भाव कमजोर बृहस्पति के होने से धार्मिक कार्यो मे रुचि नहीं रहती तथा भाग्य में अड़चनें आती हैं. पिता को तनाव या स्वास्थ्य में कमी हो सकती है. गलत कार्यों की ओर झुकाव रख सकता है.

दसवें भाव में बलहीन सूर्य के होने से व्यवसाय के क्षेत्र में उतार चढाव बने रह सकते हैं. कार्य मे सफलता नहीं मिलती हो, काम बदलते रहते हो और एक कार्य में टिकाव नहीं मिल पाता.

एकादश भाव में बलहीन गुरू के होने पर बड़े भाई से तनाव या दूरी रह सकती है. लाभ में कमी होती है.

द्वादश भाव में कमजोर गुरू के होने पर खर्चों में वृद्धि रह सकती है. नेत्र संबंधी तकलीफ भी हो सकती है. शय्या सुख में कमी आती है.
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अगर आप भी जानना चाहते है की इस वर्ष मुंथा आपकी वर्ष कुंडली के किस भाव में स्तिथ है तथा मुंथा,वर्षेश, सहम इन तीनो दशाओ की गड़ना करके इस वर्ष और महीने की घटनाओ जैसे की परीक्षा में सफलता, व्यापार में उतार-चढ़ाव या स्थानांतरण, जॉब,शादी आदि के बारे में वो भी फ्री में तो फ्री में अपनी वर्ष भर की घटनाओ को जान्ने के लिए यहाँ अपनी बिरथ डिटेल भेजे - https://www.foresightindia.com/free-horoscope .
यहाँ से जानिये की वर्ष 2018 आपके लिए कैसा है वो भी फ्री में - https://bit.ly/2GuDRV0

किसी जातक का भविष्यफ़ल बताने के लिए सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण कारक उसकी जन्मपत्रिका के मुख्य व महत्त्वपूर्ण शुभाशुभ योग, ग्रहस्थिति, विंशोत्तरी दशाएं, योगिनी दशाएं, गोचर, और अन्त में उस जातक का वर्षफ़ल होता हैं।

वर्ष फल(varsphal) के द्वारा हम एक वर्ष में होने वाली घटनाओं का अनुमान लगा सकते हैं।

इसमें आपके नवीन वर्ष की वर्ष-कुण्डली बनाकर आपका वर्षफ़ल बताया जाता है।

इसमें एक वर्ष की मुख्य एवं आकस्मिक घटनाओं, स्वास्थ्य रोगादि का विचार, पदोन्नति, स्त्री एवं संतान सुख, परीक्षा में सफलता, व्यापार में उतार-चढ़ाव या स्थानांतरण आदि मुख्य विषयों का समावेश रहता है।

वर्षफ़ल में नवग्रहों के सामान मुंथा(muntha) की भी स्थापना की जाती है।मुंथा, मुन्थेस ,वर्षेश तथा वर्षलग्नेष को भी वर्षफ़ल में बहुत महत्व दिया गया है.

वर्ष फल के लिए मुंथा की विशेष आवश्यकता होती है। मुंथा की स्थिति से वर्ष भर में होने वाली घटनाओं को जाना जाता है।मुंथा वर्ष कुंडली का एक विशेष महत्वपूर्ण अंग है।

मुंथा(muntha) यद्यपि कोई ग्रह नहीं है, फिर भी इसका फल अन्य ग्रह के समान ही महत्वपूर्ण है।

जन्म कुण्डली में मुंथा(muntha) जन्म के समय लग्न में स्थित रहती है और यह प्रति वर्ष एक राशि में , एक माह में ढाई अंश तथा एक दिन में ढाई कला चलती है.

अर्थात प्रथम वर्ष मुंथा प्रथम भाव दूसरे वर्ष जन्म कुंडली के दूसरे भाव, तीसरे वर्ष तृतीय भाव और इसी क्रमशः बारह वर्षों में मुंथा सभी राशियों में भ्रमण करता है।
और दोबार लग्न में 13वें वर्ष प्रवेश करता है।

इस तरह जातक के 13वें, 25वें, 49वें....... वर्ष मुन्था लग्न में अपना सभी राशियों में भ्रमण कर पहुंचता है। जिस वर्ष मुंथा जिस राशि में जन्म कुंडली में भ्रमण करता है उस वर्ष वर्ष कुंडली में भी वह उसी राशि में रहता है।

मुंथा वर्ष कुंडली में अपनी भाव स्थिति के अनुसार फल देता है।

वर्ष कुण्डली में जिस भाव में मुन्था स्थित होती है उस भाव तथा भाव के स्वामी कि स्थिति को देखा जाता है। बली हैं या निर्बल है।

वर्ष कुण्डली के ४, ६, ७, ८और १२वे भाव में स्थित मुंथा अशुभ फलदायक होती है। और ४, ६, ७, ८, १२वे भाव में शुभ ग्रह युक्त हो तो इतनी अधिक अनिष्टकारी नहीं होती।

जैसे की यदि आपकी वर्ष कुंडली में मुंथा(muntha) 1 भाव में स्थित हो तो उस वर्ष शत्रु का नाश, भाग्य में वृद्धि, सवारी का सुख, यदि चार राशि में हो तो स्थानपरिवर्तन के भी योग बनते हैं।

यदि आपकी वर्ष कुंडली में मुंथा(muntha) 2 भाव में स्थित हो तो कठिन परिश्रम द्वारा धन लाभ एवं धन प्राप्ति के साधन बनते हैं। मनोरंजन एवं सुख साधनों पर व्यय भी बढता है।

इसके साथ साथ हम वर्षफ़ल में वर्षेश, सहम, तीन प्रकार की दशाओं की स्तिथि और विंशोपक बल या विश्व बल की गणना का भी महत्व होता है।

तथा इसमें तीन प्रकार की दशाओं का प्रयोग किया जाता है। प्रथम दशा विंशोत्तरी मुद्दा दशा है। द्वितीय दशा विंशोत्तरी योगिनी दशा है। तृ्तीय दशा सबसे महत्वपूर्ण दशा है जो पात्यायनी दशा कहलाती है।
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अगर आप भी जानना चाहते है की आपकी कुंडली में शनि कैसा है उसकी सादे साती और ढैया कब चलेगी वो अपना शुभ और अशुभ फल कब देगा उसके लिए आपको क्या उपाय करना चाहिए आदि तो ये जानने के लिए यहाँ से अपनी शनि की रिपोर्ट निकाले - https://www.foresightindia.com/basichoro/STONE
यहाँ से जानिये शनि आपके लिए शुभ है अशुभ - https://bit.ly/2opunmu

इस बात में कोई दो राय नहीं हो सकती कि इंसान का जीवन पूरी तरह उसकी कुंडली पर आधारित है और कुंडली में बैठे ग्रहों की चाल ही उसके भविष्य का निर्धारण करती है।

उन्ही ग्रहो में एक है शनि देव।

अक्सर लोग शनि ग्रह का नाम सुनते ही डर जाते हैं, या फिर शनि की साढ़ेसाती, ढैया, पनौती जैसे नामों को सुनकर ही लोग घबराने लगते हैं।जब किसी जातक पर शनि की साढ़ेसाती, ढैया और पनोती आती है तो व्यक्ति में यह जानने की ख्वाहिश बढ़ जाती है कि उनके ऊपर साढ़ेसाती कब तक बुरा प्रभाव देगी, उसके लिए साढ़ेसाती कितनी बुरी या कितनी अच्छी है आदि.

ज्योतिष में ग्रहों का महत्वपूर्ण स्थान है।सात ग्रह- सूर्य, चंद्र, मंगल , बुध, बृहस्पति ग्रह, शुक्र ग्रह,शनि ग्रह. शनि ग्रह नपुंसक जाति, कृष्ण वर्ण, पश्चिम दिशा का स्वामी, वायु तत्व तथा वात प्रकृति का ग्रह हैं।इसके द्वारा आयु, शारीरिक बल, बीमारी, विपत्ति मोक्ष, नौकरी आदि का विचार किया जाता है।

शनि ग्रह को एक अशुभ ग्रह माना जाता है ।यदि ग्रहों की संबंधों की दृष्टि से देखा जाए तो शनि के बुध तथा शुक्र से मित्र तथा सूर्य, चंद्र, मंगल शत्रु व गुरु ग्रह के साथ शनि का सम संबंध होता है। यह एक बहुत ही धीरे चलने वाला ग्रह है।यह एक राशि को पार करने में लगभग ढाई साल लगाता है।

वैसे तो कुंडली में मौजूद सभी ग्रह अच्छे या बुरे साबित हो सकते हैं| शनि यदि कुंडली में शुभ भावों के स्वामी हैं तब वह कभी बुरा फल नहीं देगें| क्यंकि ज्योतिष में शनि ग्रह को न्यायाधीश माना जाता है।शनि की साढ़ेसाती प्रारंभ होना या शनि की ढैया का लगना, यह सब व्यक्ति के लिए तब ही हानिकारक हो हैं जब शनि की महादशा या अंतर्दशा चल रही हो, जन्मकुंण्डली में खराब भावों का सूचक हो, अगर यह खराब भाव में नहीं है या दशा अंतर्दशा नहीं चल रही हो तो शनि अशुभ नहीं होता, मतलब व्यक्ति को हानि नहीं पहुंचाता। केवल देखता है कि कौन अनुचित और पाप के कार्य कर रहा है, फिर उनको अपनी दशा-अंतर्दशा में या साढ़ेसाती के दौरान ही उन सबका फल देता है।

ज्योतिषशास्त्र में अगर आपकी कुंडली में शनि कमजोर है तो आपको कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। शनि यदि अशुभ होता है तो कई कामों में खराब फल मिलते हैं। शनि से मिलने वाला शुभ या अशुभ फल इस बात पर निर्भर करता है कि शनि हमारी कुण्डली में है किस स्थिति में है।

जैसे की अगर आपकी कुंडली में शनि अशुभ है तो वो अपनी दशा और महादशा में आपको ये अशुभ फल देगा.
आपके जमा धन का नाश हो सकता है।विवाह होते ही ससुराल में कोई हानि हो सकती है।नौकरी-धंधे में किसी भी प्रकार का व्यवधान, नौकरी छूटना, अनचाही जगह पर तबादला, पदोन्नति में बाधाएँ, व्यापार-व्यवसाय में मंदी, घाटा, दिवाला निकलने की स्थिति, बेशुमार कर्ज, कर्ज अदायगी में चूकना आदि.

लेकिन अगर आप शनि के अशुभ प्रभाव को कम करना चाहते है तो उसके लिए आप रत्न धारण क्र सकते है और साथ में कुछ उपाय, क्यूंकि ऐसे ही रतन धारण करने से अनेक समस्याओं का सामना भी करना पद सकता है.

तभी रतन धारण करने से पहले ज्योतिषो की सलाह अवश्य ले क्यूंकि कोई भी रतन धारण करने की ज्योतिष आपको तभी सलाह देते है जब वो आपकी कुंडली में आपका लग्न , शनि की स्तिथि, उसकी डिग्री वो उच्च का है या नीच का वो अस्त है या नहीं उसके नक्षत्र और नक्षत्र के पद क्या है. है उसकी अवस्था कौन सी है वृद्ध, मृत या बाल और वो आपकी कुंडली में कारक है या मारक क्यूंकि मारक ग्रहो के रतन कभी धारण नहीं करना चाहिए , इन सबका गहन अध्ययन करने के बाद ही वो आपको बताते है की आपको कौन सा रतन कैसे किस धातुय में कितने रत्ती का पहनना है।

और साथ ही में शनि के प्रभाव को देखने के लिए की वयक्ति की कौनसी दशा-अंतर्दशा चल रही है। जिस ग्रह की दशा-अंतर्दशा चल रही हो, वह कुंडली में कहां पर स्थित है। शनि कौन से भावों का स्वामी है।शनि किस राशि में गोचर कर रहा है।शनि की कोैनसी दृष्टि उन भावों पर या स्वामी ग्रह पर पड़ रह है। यही दृष्टि उस दशा या अंतर्दशा के मिलने वाले फल को प्रभावित करती है। शनि किस भाव का स्वामी है, किस-किस भाव पर शनि का प्रभाव है जिससे जातक प्रभावित हो सकता है।

इसीलिए Foresight ने एक मॉडल स्टोन (https://bit.ly/2opunmu) बनाया है जिसमे की आपको ज्योतिष के द्वारा आपकी कुंडली में वो इन सबका विस्लेसन करते है फिर बताते है की आपकी कुंडली में शनि की स्तिथि क्या है वो आपके लिए कारक है या मारक उसकी शनि की साढ़े साती, ढैया , पनोती कब कब चलेगी और वो आपको कब क्या फल देगी तथा उसके लिए आपको कौन सा रत्न कैसे धारण करना चाहिए आदि.
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अगर आप भी अपना भूत, भविष्य और वर्तमान, और आने वाली हर समस्या, हर परेशानी का जवाब जानना चाहते है तो आज ही यहाँ से अपनी कुंडली की विस्लेषण की रिपोर्ट यहाँ से -https://www.foresightindia.com/basichoro/p2 डाउनलोड करे

अपना लकी स्टोन (stone), दशा (Dasha), महादशा(mahadasha) और अपना भविष्यफल आदि

जन्म कुण्डली के आधार पर आपको आपके भूत, वर्तमान और भविष्य के बारे में पता चल सकता है.
सभी का भविष्य अलग होता है. कोई सुखी तो कोई दुखी रहता है अथवा किसी को मिश्रित फल जीवन में मिलते हैं.

किसी भी बात के होने में कुण्डली के योग और जिस ग्रह की दशा/अन्तर्दशा (Dasha,Antardasha ) चल रही होती है वह महत्व रखती है.

बहुत बार ऐसा होता है की जन्म कुण्डली में योग अच्छे बने होते हैं और ग्रह भी बली अवस्था में होते है लेकिन फिर भी व्यक्ति को शुभ फल नहीं मिलते हैं.

क्योकि ग्रह वर्ग कुण्डली में कमजोर हो जाता है इसलिए ही vedic astrology में वर्ग कुण्डलियों का अत्यधिक महत्व माना जाता है.

जन्म कुण्डली में मौजूद फलो का स्वाद वर्ग कुण्डलियो , दशा (Dasha), योगिनी दशा , विंशोत्तरी दशा से ही मिलता है,
जैसे की वर्ग कुंडली D1, D2, D3, D4 ,D7,D9 आदि।
और दशा योगिनी दशा , विंशोत्तरी दशा, अष्टकवर्ग टेबल आदि।
इन सबका हमारी जन्मपत्री में बहुत ही महत्व होता है.

क्यूंकि योगिनी दशा का जन्मकुंडली में अत्यधिक महत्वपूर्ण स्थान होता है।बिना योगिनी के भविष्यवाणी की सफलता में संदेह बना रहता है अतः किसी भी जातक को अपनी शुभ-अशुभ योगिनी की जानकारी होना चाहिए तथा अशुभ योगिनी की शांति तुरंत करवाना चाहिए, क्योंकि यह प्रारंभ में ही कष्ट देना शुरू कर देती है।

और विंशोत्तरी दशा का प्रयोग ज्योतिषशास्त्र में परिणाम की प्राप्ति होने का समय जानने के लिए किया जाता है.

https://goo.gl/6WbFgL

जैसे की धन संपत्ति के लिए होरा कुंडली देखते है। होरा कुण्डली से जातक की धन सम्पदा सुख सुविधा के विषय में विचार किया जाता है.

वैसे ही नवांश कुण्डली अथवा D-9 कुण्डली अत्यधिक महत्वपूर्ण कुण्डली है .वैसे तो इसे जीवनसाथी के लिए देखा जाता है कि वह कैसा होगा और उसके साथ संबंध कैसे रहेगे आदि बातें देखी जाती हैं. लेकिन इस कुण्डली को जीवन के हर क्षेत्र के लिए भी देखा जाता है. जो योग जन्म कुण्डली में बनते हैं उनकी पुष्टि इस कुडली में होती है. आपके विवाह के लिए नवांश कुंडली देखते है.

इसीलिए Foresight ने एक मॉडल P2 बनाया है जिसमे की आपको अपनी कुंडली के सारे चार्ट जैसे की (lagan , navamsha , Bhava , Tara chakra, Subh Pap Varga Table , Yogini Dasha , Vimsottari Dasha आदि ) जिसमे की आपको आपकी लगन कुंडली से मांगलिक रिपोर्ट , आपके कुंडली के गृह दशा को शांत करने के लिए आपको कौन सा stone पहनना चाइये और आपके शनि की सादे साती साथ में आपको आपकी महादशा और विंशोत्तरी दशा के अनुसार आपके 10 साल का भविषयफल। इन सबकी एक रिपोर्ट बना कर देते है। इस रिपोर्ट को आप किसी भी ज्योतिष को दिखा सकते है क्युकी इसमें आपकी कुंडली के सारे चार्ट रहते है और आप खुद भी पड़ सकते है क्यूंकि दशा , चार्ट को बारीकी से अध्ययन करके आपको पूरा डिस्क्रिप्शन भी देते है.

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अगर आप भी ज्योतिष से बात करके अपनी कुंडली का विस्लेसन करवाना चाहते तो अभी आप ज्योयहाँ पर रजिस्टर करके अपनी अपॉइंटमेंट बुक करे - https://www.foresightindia.com/foresightregister .
क्यूंकि वैसाखी के शुभ अवसर पर Foresight ने एक ऑफर निकाला है की आज हम ज्योतिष से आपकी कुंडली के लग्नकुंडली, नवमांस कुंडली , महादशा, अन्तर्दशा और प्रत्यन्तर्दशा का पूर्ण विस्लेसन कर आपको कॉल पर बतायंगे और उसी की रिपोर्ट बना कर आपको देंगे. तो जल्दी कीजिये

यदि कुंडली के किसी भी भाव में शनि-राहु
कुंडली में राहु और केतु दोष है। क्‍या आपकी कुंडली पर साढ़े साती चल रही है ? ये सब ऐसे प्रभाव है जो व्‍यक्ति के जीवन में बड़ी से बड़ी उथल पुथल हो जाती है।

कहते है की मनुष्य अपने भाग्य द्वारा बंधा हुआ है।और उस पर ग्रहों का जो प्रभाव होता है, उसके अनुसार ही उसका जीवन चलता है।
उन्ही ग्रहो में एक गृह ऐसा होता है शनि, शनि एक ऐसा ग्रह है जिसके प्रति सभी का डर सदैव बना रहता है।क्यंकि जब किसी व्यक्ति पर शनि का प्रभाव पड़ता है तो व्यक्ति बहुत ज़्यादा परेशान हो जाता है। सर्वप्रथम शनि दुष्प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर विभिन्न प्रकार से प्रभाव डालता है। बनते हुए काम बिगड़ जाना, हर काम में नुकसान पहुंचना, जीवन के हर क्षेत्र में असफलता मिलना या अनिष्ट होना।

और अगर आपकी कुंडली में शनि के साथ ही राहु और केतु भी हो तो आपकी परेशानिया और बढ़ जाती है क्यूंकि राहु और केतु की भूमिका एक पुलिस अधिकारी की तरह है जो न्यायाधीश शनि के आदेश पर कार्य करते हैं।शनि का रंग नीला, राहु का काला और केतु का सफेद माना जाता है। शनि के देवता भैरवजी हैं, राहु की सरस्वतीजी और केतु के देवता भगवान गणेशजी है।

अधिकतर ज्योतिषियों का कहना है कि जिन व्यक्ति पर इन ग्रहों का प्रभाव पड़े उससे पहले ही उनका उपचार कर लेना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति ऐसा नहीं करता है तो व्यक्ति को जीवन में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। कहा जाता है कि ये ग्रह व्यक्ति की तर्कशक्ति, बुद्धि, ज्ञान को खत्म करता है। बुद्धि भ्रष्ट होने के कारण व्यक्ति कई गलत कामों में पड़ जाता है, जो भविष्य में व्यक्ति के लिए काफी गलत होता है।

अब बात करते है की अगर आपकी कुंडली में शनि के साथ राहु हो तो इसका प्रभाव हाइपर टेन्सन की बीमारिया देता है,और मानसिक चिंताए अधिक लग जाती है .

कुंडली में शनि और राहु या शनि-केतु की युति है तो प्रेत श्राप योग बनता है। शनि-राहु या शनि-केतु की युति संबंधित भाव के फल को पूरी तरह बिगाड़ देती है। साथ ही, व्यक्ति को धन, संतान, जीवन साथी के संबंध में भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। भाग्य का साथ नहीं मिल पाता है।

आपने कभी कभी ऐसा देखा होगा की किसी परिवार पर अचानक से बहुत परेशानियाँ आ जाती है पुरे परिवार पर एक साथ इसका मुख्य कारण ये है की कुंडली में शनि और राहु का एक दूसरे से संबंध बनाना।
अनेक सदस्यों पर एक साथ साढ़ेसाती या ढैया या शनि की महादशा के राहु का अंतर या राहु की महादशा में शनि का अंतर या अनेक सदस्यों की कुंडली में शनि का नीच होकर त्रिक भाव में बैठना इन सब बजह से ये समस्याएँ आती है.

आपने कभी देखा होगा की ऐसा होता है की जब कभी किसी परिवार के अनेक सदस्यों की कुंडली में शनि की राहु से युति होती है या शनि का राहु से षडाष्टक संबंध बनता है तब पूरे परिवार पर विपत्ति आती है।

और अगर शनि-राहु संबंध के बीच मंगल के आने से पूरा परिवार आगजनी या सड़क दुर्घटना का शिकार होता है।
और इस संबंध में शुक्र के आने से परिवार को दहेज उत्पीड़न या झूठे मुकदमे झेलने पड़ते हैं।
और इस संबंध में केतू के आने से परिवार को जेल होती है।
और इसी संबंध में चंद्रमा के आने से पारिवारिक संपत्ति के विवाद होते हैं तथा सूर्य के आने से सरकारी विभागों के छापे पड़ते हैं व आर्थिक दंड मिलता है।

और अगर शनि के साथ राहुदेव शनि + राहुदेव की युति पर यदि मंगल का प्रभाव भी आ जाये तो ऐसा जातक साधारणतया क्रूर एवं आतंकवादी प्रवृत्ति का होता है, यह युति यदि लग्न में आ जाये तो जिन लोगों की कुंडली में यह योग बनता है, वह कभी व्यापार में उन्नति नहीं कर पाता। उसके समक्ष हर इंसान अपना सिर उठाता है, फिर चाहे वह ओहदे में बहुत कम ही क्यों ना हो |
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Free में जाने अपने करियर, बिज़नेस, शादी, विंशोत्तरी दशा , वर्षफल , भाग्य रतन , कुंडली का पूर्ण विस्लेसन , आर्थिक स्तिथि और वैवाहिक जीवन के और अपनी कुंडली में बने दोष जैसे की कालसर्प दोष , नाग दोष आदि दोषो के बारे में

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आपने देखा होगा की कभी-कभी हमारे साथ ऐसा होता है कि हमारे जीवन में इतनी उथल-पुथल और इतनी पैसो से लेकर शारीरिक, मानसिक परेशानी होती है कि हम समझ ही नहीं पाते है कि यह कौन सी समस्या है।

किस वजह से ऐसा हो रहा है बस इसे हम अपनी किस्मत मान लेते है
आपकी जीवन में ये सब आपकी कुंडली में बने योग , दोष के कारण होता है।

जिसके लिए आप ज्योतिष के पास जाकर अपनी कुंडली दिखवाते है और उनसे अपनी समस्या का समाधान पूछते है, क्यूंकि एक ज्योतिषी आपके सभी व्यक्तिगत व परिवारिक , अपने वर्तमान, भूत और भविष्य के बारे में ज्योतिषि के साथ माध्यम से आपको बता सकते हैं। अर्थात भविष्यवाणी कर सकते हैं कि क्या और कब चीज़ें होंगी। तो इसीलिए Foresight ने सिर्फ आज के लिए ये ऑफर निकाला है की आज आप फ्री में अपनी कुंडली का विस्लेसन करवा सकते है , अपना भाग्य रतन जान सकते है, अपनी शादी, करियर , जॉब आदि के बारे में जान सकते है तो जल्दी कीजिये।
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जानिये आपका लकी रतन क्या है.
आज कल सभी लोग अपना लक्की रत्न धारण करना चाहते है.जिससे की वे जीवन में ज्यादा से ज्यादा तरक्की कर सके पर सबकी समस्या यही रहती है की कौन सा रतन तरक्की देगा ?किसे पहनने से लाभ होगा ?अगर आप भी ये सब जानना चाहते है तो आज ही अपनी स्टोन की रिपोर्ट यहाँ से https://www.foresightindia.com/basichoro/Stone डाउनलोड करे सिर्फ 90 rs में या हमे call- +917983037674 या whatsapp - 917983037674 करे.

आज के समय में हर व्यक्ति परेशान रहता है, कोई नौकरी को लेकर कोई शादी , बिज़नेस आदि समस्याओ को लेकर और ये सब हमारी लगन कुंडली में बने अशुभ ग्रहो की दशा, महादशा चलने पर होता है उन ग्रहो को प्रभाव कम करने के लिए रतन को धारण करना एक अच्छा उपाय है.

हर मनुष्य की जन्मपत्री मे कोंई न कोई ग्रह शुभ और अशुभ होते है औंर जिसके कारण ही उनके भाग्य में परिवर्तन आता रहता है।

ज्योतिषो का कहना है की रत्न धारण कर के आप अपनी कुंडली के अशुभ ग्रहों के प्रभाव को कम कर सकते हैं।

कुंडली के द्वारा हमें पता चलता है की हमें कौन सा रत्न पहनना चाहिए और कौन सा रत्न नहीं पहनना चाहिए.

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कई प्रकार के रत्न होते हैं। हर रत्न किसी विशेष परेशानी या किसी खास मकसद से ही धारण किया जाता है। यह बत गौरतलब है कि हर रत्न को धारण करने से पहले किसी ज्ञानी ज्योतिषी की राय ले लेनी चाहिए।
अन्यथा गलत रत्न धारण करना बड़ी मुसीबत ला सकता है।

क्यंकि रत्न दोधारी तलवार की तरह होते हैं जिन्हें उचित जांच परख के बाद ही पहनना चाहिए अन्यथा सकारात्मक की जगह नकारात्मक परिणाम भी देते हैं.इसके लिए कुंडली का निरीक्षण जरूरी होता है।

लग्न कुंडली, नवमांश, ग्रहों, दशा-महादशा आदि का अध्ययन करने के बाद ही रत्न पहनने की सलाह दी जाती है।

जो लोग इन रत्नों को धारण कर रहे है उन्हें जीवन के हर क्षेत्र में लाभ मिल रहा है चाहे व्यवसाय, पढाई, बीमारी या तरक्की क्यों न हो सभी क्षेत्रो में रत्न का विशेष महेत्व है!
बड़े-बड़े उद्योग पति से लेकर फ़िल्मी क्षेत्र की जानी मानी हस्तियों द्वारा इन्हें धारण कर लाभ उठाया जा रहा है!

तमाम ज्योतिषाचार्य तो यहां तक दावा करते हैं कि रत्‍न धारण करने से जिंदगी ही बदल जाती है।

सभी रत्नों का उनके ग्रहों के अनुसार दिन और अंगुलियां निर्धारित की गई है। रत्नों को शुभ समय में धारण करना चाहिए।

किस रत्‍न को किस धातु में पहना जाए। यह भी समझना जरूरी होता है। इसका भी प्रभाव होता है। मोती को चांदी में पहनना चाहिए। वहीं हीरा, पन्ना, माणिक,नीलम,पुखराज जैसे रत्‍न सोना में पहनना चाहिए और लहसुनिया, गोमेद पंचधातु में पहनने से अधिक लाभ होता है .

रत्न को धारण करने के लिए आवश्यक है कि पहली बार पहनते समय शुभ मुर्हूत हो एवं चंद्र बली हो, समय, वार एवं नक्षत्र रत्न के अनुकूल हों।

इसीलिए Foresight ने एक स्टोन मॉडल ( https://www.foresightindia.com/basichoro/Stone ) बनाया है जिसमे आपको रिपोर्ट में आपके लिए कौन सा रतन लकी है, आपको किस दिन किस ऊँगली में किस धातु के साथ कैसे पहनना है और ये आपका भाग्य रतन है जिसे आप जीवनभर धारण करके रख सकते है और इस रिपोर्ट में आपको आपकी शनि की साढ़े साती की दशा और कारक और मारक योग सब कुछ उस रिपोर्ट में हम देते है.
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अगर आप भी अपना भूत, भविष्य और वर्तमान, और आने वाली हर समस्या, हर परेशानी का जवाब जानना चाहते है तो आज ही यहाँ से अपनी कुंडली की विस्लेषण की रिपोर्ट यहाँ से https://www.foresightindia.com/basichoro/P1 डाउनलोड करे
और आज ही ये रिपोर्ट डाउनलोड करने पर आपको आपकी कुंडली (Kundli)के साथ साथ उसका विस्लेसन करके और विंशोत्तरी दशा (Vimsotri dasa) की रिपोर्ट बनाकर फ्री में दी जायगी तो जल्दी कीजिये ये ऑफर सिर्फ आज के लिए है.
हमारे जीवन में बहुत सी ऐसी बाते होती है जो हम जानना चाहते है जैसे कि हमारी राशि क्या है हमारे आने वाले दिन कैसे होंगे, हमारा वैवाहिक जीवन कैसा होगा, नौकरी कब लगेगी बहुत सी ऐसी बाते है जो हमारे दिमाग में चलती रहती है.
इन्ही सब बातो को जानने के लिए हम ज्योतिष के पास जाते है और अपने भविष्य के बारे में पता लगाते है.
ज्योतिषी आपकी जन्म कुंडली बनाकर तथा उसका अध्ययन और स्वयं के ज्ञान द्वारा व्यक्ति की ग्रह जनित समस्याओं का आकलन करके उसका मार्गदर्शन करता है।
ऐसे ही आपको बार बार ज्योतिष के पास अपनी समस्या , परेशानी के लिए कुंडली का विस्लेषण के लिए जाना पड़ता है।
क्यूंकि आपकी कुंडली, जीवन में आने वाली हर समस्या, हर परेशानी का जवाब दे सकती है, साथ ही साथ आपको उपयुक्त समाधान भी उपलब्ध करवाती है।
लेकिन इसके लिए यह बहुत जरूरी है कि जिससे हमारा भाग्य जुड़ा हुआ है हमें उसकी जानकारी हो।जब हमारी कुंडली से ही हमारा भूत, भविष्य और वर्तमान, और आने वाली हर समस्या, हर परेशानी का जवाब जुड़ा हुआ है तो क्यों न हम इसकी पूर्ण जानकारी ले।
भारतीय ज्योतिष में किसी भी व्यक्ति का भूत , भविष्य और वर्तमान उसकी कुंडली (Kundli)से पता चल सकता है। लगन कुंडली में 12 भाव होते है , इन 12 भावो से जीवन के हर रहस्य का पता चलता है. और इन्ही के आधार पर ज्योतिष आपके प्रश्नो का उत्तर देते है.
और इन्ही सब बातो को जानने के लिए आप ज्योतिष के पास जाते है और अपनी कुंडली (Kundli)का विस्लेसन करवाते है।
वैसे तो पहले कुंडली बनाने का कार्य मुख्य रूप से ज्योतिष करते थे.और अगर किसी ज्योतिष द्वारा कुंडली बनाई जाए तो उसमें गणित का हिस्‍सा बहुत ज्‍यादा होता है जिस कारण ग‍लतियां होना बहुत स्‍वाभाविक है।और कुंडली में थोड़ी सी भी गलती होने पर आपकी दशा (Dasa) , महादशा (Mahadasa) की गड़ना गलत हो जाती है जिससे की आप अपना भविष्य सही से नहीं जान पाते है क्यूंकि भविष्य आपकी कुंडली की महादशाओं पर ही निर्भर करता है।
इसीलिए Foresight ने एक P1 मॉडल बनाया है जिसमे की आपको बताया जायगा की आपको कौन सा बिज़नेस करना चाहिए आपको किस चीज के बिज़नेस में लाभ होगा आपकी शादी कैसे होगी कैसा रहेगा आपका वैवाहिक जीवन और अपने भविष्य के बारे में सब कुछ जान सकते है।इसमें आप भविष्यवाणियों के साथ अपनी जन्मकुंडली (Janm kundli) के लग्न और नवमेश चार्ट भी प्राप्त कर सकते हैं। आप अपने राशि प्राप्त कर सकते हैं, अवकहडा चक्र, तारा चक्र लग्न, नवांश और षोडश् वर्ग कुण्डली, ग्रह बल, भाव बल, ग्रह दृष्टी, मित्रत्व, विंशोत्तरी दशा और अपने जन्म चार्ट और ग्रहों की स्थिति के आधार पर अपना भविष्य । और इस कुंडली के द्वारा आप अपना भूत, भविष्य और वर्तमान, और आने वाली हर समस्या, हर परेशानी का जवाब , सब जान सकते है ये सब जानने के लिए आप ये कुंड्ली डाउनलोड कर सक्ते है यहाँ से https://www.foresightindia.com/basichoro/P1
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हमारे जीवन में बहुत सी ऐसी बाते होती है जो हम जानना चाहते है जैसे कि हमारी राशि क्या है हमारे आने वाले दिन कैसे होंगे, हमारा वैवाहिक जीवन कैसा होगा, नौकरी कब लगेगी बहुत सी ऐसी बाते है जो हमारे दिमाग में चलती रहती है.
इन्ही सब बातो को जानने के लिए हम ज्योतिष के पास जाते है और अपने भविष्य के बारे में पता लगाते है.ज्योतिष आपकी कुंडली ( kundli ) बनाते है और उनका विश्लेषण करते है फिर आपको बताते है, ऐसे ही आपको बार बार ज्योतिष के पास अपनी कुंडली का विस्लेषण ( Analysis )के लिए जाना पड़ता है।
वैसे तो पहले कुंडली बनाने का कार्य मुख्य रूप से ज्योतिष करते थे.और अगर किसी ज्योतिष द्वारा कुंडली बनाई जाए तो उसमें गणित का हिस्‍सा बहुत ज्‍यादा होता है जिस कारण ग‍लतियां होना बहुत स्‍वाभाविक है।और कुंडली में थोड़ी सी भी गलती होने पर आपकी दशा , महादशा ( Maha dasa )की गड़ना गलत हो जाती है जिससे की आप अपना भविष्य सही से नहीं जान पाते है क्यूंकि भविष्य आपकी कुंडली की महादशाओं, ग्रहों के दृश्य पर ही निर्भर करता है।
ज्योतिषशास्त्र में बताया गया है कि कुंडली में 12 खाने होते हैं जिनमें 12 राशियां मौजूद होती हैं। इन12 खानों में 9 ग्रहों की अपनी एक खास स्थिति होती है जिससे यह पता किया जाता है कि व्यक्ति के जीवन में कब सुख का समय रहेगा और कब मुश्किल हालातों का सामना करना होगा। इससे यह भी पता चल सकता है की आपको नौकरी में कब प्रमोशन मिलेगा और कब शादी होगी। और आपकी आर्थिक स्थिति और वैवाहिक जीवन के तनाव को भी जाना जा सकता है।
इसीलिए Foresight ने एक ( https://www.foresightindia.com/basichoro/p1 ) बनाया है जिसमे की आपको बताया जायगा की आपको कौन सा बिज़नेस करना चाहिए आपको किस चीज के बिज़नेस में लाभ होगा आपकी शादी कैसे होगी कैसा रहेगा आपका वैवाहिक जीवन और अपने भविष्य के बारे में सब कुछ जान सकते है।इसमें आप भविष्यवाणियों के साथ अपनी जन्मकुंडली के लग्न और नवमेश चार्ट भी प्राप्त कर सकते हैं। आप अपने राशि प्राप्त कर सकते हैं, अवकहडा चक्र, तारा चक्र लग्न, नवांश और षोडश् वर्ग कुण्डली, ग्रह बल, भाव बल, ग्रह दृष्टी, मित्रत्व, विंशोत्तरी दशा ( Vimsottri dasa ) और अपने जन्म चार्ट और ग्रहों की स्थिति के आधार पर अपना भविष्य ।
Foresight की इस रिपोर्ट में आपके ग्रेहो की स्थिति के बारे मे विस्तार पूर्वक लिखा होता है और उन्ही के आधार पर ही आपका भविस्य तय किया जाता है, क्यूंकि हर एक ग्रह का अपना अलग ही महतव होता है, और वो आपकी ज़िंदगी मे अलग ही परभाव पड़ता है|
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