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एतना बम मारेंगें इलाका धुआँ धुआँ कर देंगे ।। 😉

#जिया_राजा
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शिव की बनी रहे आप पर छाया,
पलट दे जो आपकी किस्मत की काया;
मिले आपको वो सब अपनी ज़िन्दगी में,
जो कभी किसी ने भी न पाया!
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ना तुम गिरे ना तुम्हारी उम्मीदें गिरी।

लेकिन तुम्हें गिराने वाले आज खुद ही गिर गये।

मान गये @narendramodi जी।
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कुछ लोग पूछ रहे थे BJP ने यूपी मे एक भी मुस्लिम क्यों खड़ा नही किया?
उत्तर दिल्ली ने दिया
MCD मे BJP ने 5 मुस्लिम खड़े किये थे पांचो हार गए
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शेर मारने निकले थे,मरती नहीं है बिल्ली..और..
खाँसी तो ठीक हुई नहीं,ठीक करेंगे दिल्ली..😂
बस यही सच है..श्री श्री 420जी महराज
@ArvindKejriwal
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Good morning frends
Jay shree krishna
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अगर आज नही जागे तो एक दिन हमारे भारत की तस्वीर भी एसी होगी
मुसलमानो के अंदर औरंगजेब जाग चुका है।हिन्दू भी अपने अंदर के शिवाजी महाराणा प्रताप को जगा लो।वर्ना कल पछताओगे ।
70 के दशक में लेबनान अरब का एक ऐसा मुल्क था जिसे अरब का स्वर्ग कहा जाता था और इसकी राजधानी बेरुत को अरब का paris । अरब में व्याप्त इस्लामिक जहालत के बावजूद लेबनान एक Progressive, Tolerant और Multi cultural सोसाइटी थी ........
ठीक वैसे ही जैसे भारत है । लेबनान में दुनिया की बेहतरीन Universities थीं जहां पूरे अरब से बच्चे पढने आते थे और फिर वहीं रह जाते थे । काम करते थे । मेहनत करते थे । लेबनान की banking दुनिया की श्रेष्ट banking व्यवस्थाओं में शुमार थी । Oil न होने के बावजूद लेबनान एक शानदार economy थी ।
60 के दशक में वहाँ इस्लामिक ताकतों ने सिर उठाना शुरू किया .........
70 में जब Jordan में अशांति हुई तो लेबनान ने फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए
दरवाज़े खोल दिए ........
आइये स्वागत है ।
1980 आते आते लेबनान की ठीक वही हालत हो गई थी जो आज सीरिया की है ।
लेबनान की christian आबादी को मुसलामानों ने ठीक उसी तरह मारा जैसे सीरिया के ISIS ने मारा । पूरे के पूरे शहर में पूरी christian आबादी को क़त्ल कर दिया गया । कोई बचाने नहीं आया ।
Brigette Gabriel उसी लेबनान की एक survivor हैं जिन्होंने वो कत्लेआम अपनी आखों से देखा है । Brigette किसी तरह भाग के पहले Israel पहुंची और फिर वहाँ से अमेरिका । आजकल वो पूरी दुनिया में इस्लामिक साम्राज्य वाद और इस्लामिक आतंकवाद से लोगों को सचेत करती हैं।
एक सभा में एक लड़की ने उनसे पूछ लिया .........
सभी मुसलमान तो जिहादी नहीं ? ज़्यादातर peace loving और law abiding citizens हैं। जिहाद तो एक मानसिकता है । आखिर एक मानसिकता का मुकाबला गोली बन्दूक से कैसे किया जा सकता है ?
Brigette ने उत्तर दिया ........
40 के दशक में Germany की अधिकाँश प्रजा भी peace loving थी । इसके बावजूद मुट्ठी भर उन्मादियों नें 6 करोड़ लोग दुनिया भर में मारे ।
Russia की जनता भी अमन पसंद थी । इसके बावजूद वहाँ के चंद उन्मादियों ने 2 करोड़ लोग मारे ।
China की जनता भी अमन पसंद बोले तो peace loving law abiding थी । चीन के उन्मादियों ने 7 करोड़ लोगों को मारा ।
जापान तो बेहद सभ्य सुशिक्षित सुसंस्कृत मुल्क है न । वहाँ की peace loving जनता तो पूरी दुनिया में अपने संस्कारों के लिए जानी जाती है । वहाँ उन्मादियों के एक छोटे से समूह ने सवा करोड़ लोगों का क़त्ल किया ।
अमेरिका के 23 लाख मुस्लिम आबादी भी तो peace loving ही है पर सिर्फ 19 लोगों के एक उन्मादी जिहादी समूह ने अकेले 9 /11 में 3000 से ज्यादा अमेरिकियों का क़त्ल किया ।
किसी समाज का एक छोटा सा हिस्सा भी उन्मादी जिहादी हो जाए तो फिर शेष peace loving society का कोई महत्त्व नहीं रहता । वो irrelevent हो जाते हैं ।

किसी समाज का एक छोटा सा हिस्सा भी उन्मादी जिहादी हो जाए तो फिर शेष peace loving society का कोई महत्त्व नहीं रहता । वो irrelevent हो जाते हैं ।
आज दुनिया भर में peace loving मुस्लमान irrelevant हो चुके है
कमान उन्मादियों के हाथ में है ।
लेबनान की कहानी ज़्यादा पुरानी नहीं । सिर्फ 25 - 30 साल पुरानी है ।
लेबनान और सीरिया से बहुत कुछ सीखने की जरुरत है ।
क्या करोगे हिन्दुओं इतनी संपत्ति कमाकर...?
एक दिन पूरे काबूल (अफगानिस्तान) का व्यापार सिक्खों का था, आज उस पर तालिबानों का कब्ज़ा है |
सत्तर साल पहले पूरा सिंध सिंधियों का था, आज उनकी पूरी धन संपत्ति पर पाकिस्तानियों का कब्ज़ा है |
एक दिन पूरा कश्मीर धन धान्य और एश्वर्य से पूर्ण पण्डितों का था, तुम्हारे उन महलों और झीलों पर आतंक का कब्ज़ा हो
गया और तुम्हे मिला दिल्ली में दस बाय दस का टेंट..|
एक दिन वो था जब ढाका का हिंदू बंगाली पूरी दुनियाँ में जूट का सबसे बड़ा कारोबारी था | आज उसके पास सुतली बम भी नहीं बचा |
ननकाना साहब, लवकुश का लाहोर, दाहिर का सिंध,चाणक्य का तक्षशिला, ढाकेश्वरी माता का मंदिर देखते ही
देखते सब पराये हो गए | पाँच नदियों से बने पंजाब में अब केवल दो ही नदियाँ बची |
यह सब किसलिए हुआ ? केवल और केवल असंगठित होने के कारण|
इस देश के मूल समाज की सारी समस्याओं की जड़ ही संगठन का अभाव है |
आज भी इतना आसन्न संकट देखकर भी बहुतेरा समाज गर्राया हुआ है | कोई व्यापारी असम के चाय के बागान अपना समझ रहा है, कोई आंध्र की खदानें अपनी मान रहा है | तो कोई सोच रहा
है ये हीरे का व्यापार सदा सर्वदा उसी का रहेगा |
कभी कश्मीर की केसर की क्यारियों के बारे में भी हिंदू यही सोचा करता था |
तू अपने घर भरता रहा और पूर्वांचल का लगभग पचहत्तर प्रतिशत जनजाति समाज विधर्मी हो गया | बहुत कमाया तूने बस्तर के जंगलों से...आज वहाँ घुस भी नहीं सकता |
आज भी आधे से ज्यादा समाज को तो ये भी समझ नहीं कि उस पर संकट क्या आने वाला है | बचे हुए समाज में से बहुत सा अपने आप को सेकुलर मानता है | कुछ समाज लाल गुलामों का मानसिक गुलाम बनकर अपने ही समाज के खिलाफ कहीं बम बंदूकें, कहीं तलवार तो कहीं कलम लेकर विधर्मियों से ज्यादा हानि पहुंचाने में जुटा है |
ऐसे में पाँच से लेकर दस प्रतिशत समाज ही बचता है जो अपने धर्म और राष्ट्र के प्रति संवेदनशील है | धूर्त सेकुलरों ने उसे असहिष्णु और साम्प्रदायिक करार दे दिया |
भारत के पाँच महापुरुष और उनकी बातें
इनका पालन करना हमारा कर्तव्य है...!!
महाराणा प्रताप :~ " किसी की दासता से कहीं अच्छा है कि उससे लड़ो,मारो,जीतो,
या शहीद हो जाओ ! जीना है तो गर्व से,दासता में जीने से कहीं अच्छा है.एक पल गर्व से जीना "
शिवाजी महाराज :~ " हिन्दू है तो हिन्दू धर्म की रक्षा कर , देश पर धर्म का राज कर,हिंदवी राज्य ही ईश्वर की इच्छा , उठा तलवार , शांति के लिये युद्ध जरुरी है, घुस कर मार "
गुरु गोविंद सिंह :~ " हाथ को तेल के डिब्बे में कोहनी तक डालो , फिर उस हाथ को तिल की बोरी में डालो , जितने तिल हाथ से चिपके उतनी बार भी मुस्लिम कसम खाये तो
भरोसा मत करना "
वीर सावरकर :~ " हिन्दु राष्ट्र से ही भारत का विकास संभव ....
अगर किसी ने दूसरे गाल पर भी थप्पड मार दिया तो तीसरा गाल कहां से लाओगे ,
जुल्म सहोगे तो जुल्म एक दिन खा जायेगा "
नाथूराम गोडसे:~ "जो तुम्हारे देश के खिलाफ बोलता है,उसे तोड़ने की बात करता है,तोड़ता है उसे मार दो ...
धर्म से ही देश बनता है और देश के लिये प्राण लेना देना छोटी बात हैं ॥"तो देश को बर्बाद करने वाले जेहादियों को गोली मारने के लिए सोच विचार की क्या आवश्यकता है...?इसलिए आजादी के बाद एक बार फिर हिंदू समाज दोराहे पर खड़ा है | एक रास्ता है, शुतुरमुर्ग की तरह आसन्न संकट को
अनदेखा कर रेत में गर्दन गाड़ लेना तथा दूसरा तमाम संकटों को भांपकर सारे मतभेद भुलाकर संगठित हो संघर्ष कर अपनी धरती और संस्कृति बचाना |और कोई सीखे न सीखे हिन्दूस्थान को तो सीख ही लेना चाहिए ।
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