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पुरुषों के लिए फायदेमंद है अंकुरित चनों का सेवन, कमजोरी करता है दूर
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अंकुरित चने सेहत के लिए तो फायदेमंद होते ही हैं लेकिन त्वचा के लिए भी इसके अचूक फायदे हैं। इतना ही नहीं पुरुषों के लिए इसका सेवन बहुत अच्छा माना जाता है। अंकुरित चनों से शरीर दुरुस्त होता है और कमजोरी दूर रहती है। आइए जानते हैं कि किस तरह आप इसका लाभ उठा सकते हैं।
चने को रात में भिगोकर रख दें और सुबह उठकर खाएं। भीगे चने खाने से शरीर को ऊर्जा मिलती है और मांसपेशियां मजबूत बनती हैं।
अगर आप कब्ज से परेशान रहते हैं तो सुबह उठकर भीगे चनों में अदरक, जीरा और नमक मिलाकर खाने से ये समस्या दूर हो जाएगी। इसमें फाइबर होता है जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है।
पुरुषों के लिए इसके अचूक फायदे हैं। पुरुष अगर अंकुरित चनों का सेवन करते हैं तो उन्हें तनाव से मुक्ति मिलती है। साथ ही इसे अच्छी तरह से चबाकर खाने से पुरुषों की कमजोरी दूर होती है। अगर भीगे हुए चनों को शहद के साथ मिलाकर खाया जाए तो इससे पौरुषतत्व बढ़ता है और सेक्स लाइफ हेल्दी रहती है।
यूरीन संबंधी रोगों के लिए इसका सेवन फायदेमंद है। गुड़ के साथ इसे खाने से बार-बार यूरीन आने की दिक्कत दूर होती है और पाइल्स की परेशानी से भी निजात मिलती है।
डायबिटीज के मरीजों को सुबह उठते ही अंकुरित चनों का सेवन करना चाहिए। यह शरीर में ग्लूकोज की मात्रा को नियंत्रित करता है।
अगर आप नियमित रूप से अंकुरित चनों का सेवन करते हैं तो इससे त्वचा का निखार बना रहता है और समय से पहले बुढ़ापा आसपास नहीं भटकता।
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स्ट्रेस कम करने के पांच टिप्स
आपकी लाइफ़ में टेंशन डेली आ सकता है। लेकिन कुछ दिन दूसरे दिनों से ज़्यादा बुरे होते हैं, शायद ही कोई ये कह सकता है कि वो 100% स्ट्रेस फ़्री है। स्ट्रेस अमीरी ग़रीबी नहीं देखता है, इसका शिकार कोई भी हो सकता है, इससे बचने का कोई उपाय नहीं है। लेकिन फिर भी आप स्ट्रेस कम करके इससे होने वाले नुक़सान को कम कर सकते हैं।
स्ट्रेस कम करने के उपाय
ये पाँच दमदार टिप्स आपको किसी भी परिस्थिति में स्ट्रेस ख़त्म करने की शक्ति देंगी।
1. हेल्दी खाना खायें
यद्यपि अधिकांश स्ट्रेस मानसिक होती है, लेकिन बहुत से शारीरिक कारण भी इसको बढ़ा देते हैं। स्ट्रेस को कम करने के लिए आपको अपने शरीर का ख़याल रखना चाहिए। इसके लिए सबसे ज़रूरी है कि आप स्वास्थ्यप्रद भोजन करें।
एंटी स्ट्रेस फ़ूड में कोई मैजिक नहीं होता है। आपको एसिडिट फ़ूड की जगह एल्कलाइन डाइट लेनी चाहिए। बेकिंग सोडा, नींबू, प्याज़, अन्नानास, कद्दू के बीज, शकरकंद, सब्ज़ियों का जूस और तरबूज एल्कलाइन फ़ूड के उदाहरण हैं।
2. सुबह जल्दी उठें
इस बात में सच्चाई है कि अगर आप भरपूर नींद लेंगे तो स्ट्रेस से दूर रहेंगे। लेकिन फिर भी सुबह 15 से 20 मिनट पहले उठने से आपको सोने से अधिक फ़ायदा मिलेगा।
अपने आप को थोड़ा समय देने से आप सुबह सुबह जल्दबाज़ी से बचेंगे। जिससे आपको सुबह की तैयारियाँ करने के लिए ज़्यादा समय मिलेगा और आपमें कॉन्फ़िडेंस बढ़ेगा।
सुबह देर से उठें तो तैयारियाँ करने की बात सोचकर ही स्ट्रेस बढ़ जाता है, इसलिए जल्दी उठने की आदत डाल लें।
3. स्ट्रेस को मोटिवेशन बनायें
हममें से कोई भी स्ट्रेस को 100% ख़त्म नहीं कर सकता है, इसलिए आपको स्ट्रेस को मोटिवेशन की तरह देखना चाहिए। स्ट्रेस का मानसिक और शरीरिक प्रतिक्रिया आपको या तो प्रॉब्लम से लड़ने की शक्ति देती है या परिस्थिति को भागने पर मज़बूर कर देती है।
इसलिए अगली बार जब आपको स्ट्रेस हो तब आप ज़रूरी क़दम उठायें और स्ट्रेस को अपना हथियार बना लें।
4. हँसने का बहाना ढूँढ़ लें
ये बड़ी ही प्रैक्टिकल बात है कि हँसी मज़ाक़ से स्ट्रेस को कम किया जा सकता है। इसलिए आप जब भी स्ट्रेस में हो तो कॉमेडी सीरियल देखें, चुटकुले पढें और दोस्तों के साथ हँसी मज़ाक में शामिल हों। इससे एंग्ज़ाइटी कम होगी और आप अधिक ख़ुश रहेंगे।
5. बाहर घूमने जाएँ
दिन में घूमने टहलने से आप डॉक्टर के पास जाने से बच सकते हैं। इससे जो कार्डियोवस्कुलर एक्टिविटी होती हैं वह शरीर में एंडोर्फिंस बढ़ाती है, जिससे डिप्रेशन कम हो जाता है और आपका मूड अच्छा रहता है। इस तरह आप स्ट्रेस फ़्री रहते हैं और ज़्यादा सजग बनते हैं।
बहुत से अध्ययनों से पता चला है कि बाहर घूमने जाने से स्ट्रेस कम होता है, इसलिए जब भी घूमने का मौक़ा मिले उसका पूरा लाभ उठायें। यह आपको ऊर्जा देगा और आपकी स्मरण शक्ति को 20% तक बढ़ा देगा।
भारतीय सभ्यता में सुबह हरी घास पर घूमने के अनेक लाभ के बारे में बताया गया है।
इसलिए सच को स्वीकार करें कि स्ट्रेस फ़्री होना मुमकिन नहीं है लेकिन आपको उन ट्रिगर को हटा सकते हैं, जिनसे आपको परेशानी होती है। इसलिए उपरोक्त बातों का ध्यान रखने के साथ साथ आपको सदैव मन को शांत रखने का भी प्रयास करते रहना चाहिए।

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रक्त में हिमोग्लोबिन( Hemoglobin)नामक लाल पदार्थ होता है इसकी विशेषता यह है कि कार्बन डाइऑक्साइड एवं ऑक्सीजन दोनों के साथ प्रति वतर्यता ( Reversibly)से जुड़ सकता है-हिमोग्लोबिन जब शरीर के ऊतकों से कार्बन डाइऑक्साइड को ग्रहण करता है वह कार्बोक्सी हिमोग्लोबिन कहलाता है कार्बोक्सी हिमोग्लोबिन वाला रक्त अशुद्ध होता है जो शिराओं से होकर फेफड़ों में श्वांस लेने की प्रक्रिया में हीमोग्लोबिन कार्बन डाइऑक्साइड को छोड़कर शुद्ध ऑक्सीजन ग्रहण करता है-
क्या होता है वेरीकोज वेन्स( Varicose Veins )-
1. यह शुद्ध रक्त धमनियों द्वारा कोशिकाओं तक पहुंचता है तथा अशुद्ध रक्त का रंग नील लोहित या बैंगनी होता है-शिराओं की भित्तियां पतली होती हैं और ये त्वचा के ठीक नीचे होती हैं-इसीलिए ऊपर से शिराओं को देखना आसान होता है अशुद्ध नील लोहित रंग के रक्त के कारण शिराएं( Veins )हमें नीले रंग की दिखाई देती हैं-शिराओं की तुलना में धमनियों की भित्ति अधिक मोटी होती है और काफी गहराई में स्थित होती है-इस कारण लाल रक्त प्रवाहित होने वाली धमनी हमें दिखाई नहीं देती है-
2. हमारे शरीर में रक्त को वापस ह्रदय तक ले जाने वाली शिराए जब मोटी होकर उभर कर दिखाई देने लगती है तथा सुजन आ जाती है तब व्यक्ति को टांगो में थकान और दर्द महसूस होता है अधिक उभरी शिराओ के होने का मुख्य कारण हृदय की तरफ रक्त ले जाने वाली शिराओं में वाल्व लगे होते हैं जिसके कारण ही रक्त का प्रवाह एक दिशा की ओर होता है-
3. कई प्रकार की बीमरियों( कब्ज, खानपान सम्बन्धी विकृतियां, गर्भावस्था से सम्बन्धित रोग) के कारण शिराओं के रक्त संचार में बाधा उत्पन्न हो जाती है जिसकी वजह से ये शिरायें फैल जाती हैं और रक्त शिराओं में रुककर जमा होने लगता है और सूजन हो जाती हैं और अन्य प्रकार की परेशानियां उत्पन्न हो जाती हैं जैसे-व्यायाम की कमी, बहुत समय तक खड़ा रहना, अधिक तंग वस्त्र, अधिक मोटापा के कारण भी यह रोग हो जाता है यह रोग पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं को अधिक होता है क्योंकि आजकल रसोईघर में खड़े होकर ही भोजन बनाया जाता है-
4. इस रोग के कारण रोगी व्यक्ति के टांगों में दर्द होता है तथा रोगी व्यक्ति को थकान और भारीपन महसूस होता है इसमें रोगी के टखने सूज जाते हैं और रात के समय टांगों में ऐंठन होने लगती है तथा त्वचा का रंग बदल जाता है और उसके निचले अंगों में त्वचा के रोग भी हो जाते हैं-
प्राकतिक उपचार( Natural Treatments )करे-
1. रोगी व्यक्ति को नारियल का पानी, जौ का पानी, हरे धनिये का पानी, खीरे का पानी, गाजर का रस, पत्तागोभी, पालक का रस आदि के रस को पी कर उपवास रखना चाहिए तथा हरी सब्जियों का सूप भी पीना चाहिए -
2. कुछ दिनों तक रोगी व्यक्ति को फल, सलाद तथा अंकुरित दालों को भोजन के रूप में सेवन करना चाहिए तथा रोगी व्यक्ति को वे चीजें अधिक खानी चाहिए जिनमें विटामिन सी तथा ई की मात्रा अधिक हो और उसे नमक, मिर्च मसाला, तली-भुनी मिठाइयां तथा मैदा नहीं खाना चाहिए-
3. पीड़ित रोगी को गरम पानी का एनिमा भी लेना चाहिए तथा इसके बाद रोगी व्यक्ति को कटिस्नान करना चाहिए और फिर पैरों पर मिट्टी का लेप करना चाहिए तथा यदि रोगी व्यक्ति का वजन कम हो जाता है तो मिट्टी का लेप कम ही करें-
4. जब रोगी व्यक्ति को ऐंठन तथा दर्द अधिक तेज हो रहो हो तो गर्म तथा इसके बाद ठण्डे पानी से स्नान करना चाहिए- रोगी व्यक्ति को गहरे पानी में खड़ा करने से उसे बहुत लाभ मिलता है-
5. इस रोग से पीड़ित रोगी को
सोते समय पैरों को ऊपर उठाकर सोना चाहिए इससे रोगी व्यक्ति को बहुत अधिक लाभ मिलता है
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7. कुछ ये आसन का उपयोग करे तो इसमें निश्चित ही लाभ होता है जैसे-
8. सूर्यनमस्कार,शीर्षासन,सर्वागासन,विपरीतकरणी,पवनमुक्तासन,उत्तानपादासन,योगमुद्रासन आदि ये किसी अच्छे योगाचार्य से सीख सकते है .
9. इसमें समय अवश्य लग सकता है मगर धीरे-धीरे ये रोग चला जाता है-
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अगर आप रोज दलिया खाएंगे तो होंगे ये बेमिसाल फायदे:
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दलिया सुनने में लगता है एक सीधा-सादा नाश्ता। लेकिन यह बेहद पौष्टिक होता है और कई बीमारियों से बचाता है।
दलिया को हमेशा एयरटाइट कंटेनर में स्टोर करके रखें और उसकी कोई डिश बनाने से पहले उसे अच्छी तरह से धोना न भूलें।
चूंकि दलिया साबुत गेहूं से बनाया जाता है इसलिए इसमें पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं। दलिया में फाइबर प्रचुर मात्रा में होता है और इस वजह से यह पाचन तंत्र के लिए अच्छा होता है।
दलिया में प्रोटीन भरपूर मात्रा में होता है और इसमें वसा व कैलोरीज संतुलित मात्रा में होते हैं। यानी इसके नियमित सेवन से आपको भरपूर पोषण तो मिलेगा पर बढ़ते वजन की चिंता नहीं करनी पड़ेगी। अगर आप वजन कम करने की कोशिश में लगी हुई हैं तो इसे अपनी डाइट में जरूर शामिल करें।
दलिया में फाइबर होता है और यह फाइबर शरीर के भीतर ब्रेस्ट कैंसर से लड़ने के लिए सुरक्षा तंत्र विकसित करने में अहम भूमिका निभाता है। 40 वर्ष से ज्यादा आयु की जो महिलाएं अपनी डाइट में दलिया जैसे फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल करती हैं, उन्हें ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा ऐसे खाद्य पदार्थ नहीं खाने वाली महिलाओं की तुलना में कम होता है।
दिन में कम-से-कम एक बार भी दलिया खाने से दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा 21 प्रतिशत तक कम हो जाता है।

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