Post is pinned.Post has attachment
#दिल्लीप्रदूषण - गोलमाल रिटर्न्स गवर्न्मवेन्ट

#दिल्ली से बहार डिपो के विकल्प पर विचार किये बगैर, अब से करीब 2 साल पहले देश भर से आने वाले ट्रक्स को ग्रीन-टैक्स देने के साथ दिल्ली में प्रेवश की अनुमति दे दी गई ! यानि आप दिल्ली में प्रदूषण तो कर सकते है लेकिन उसके लिए आपको #ग्रीनटैक्स देना होगा ! ताकि आपके द्वारा फैलाए गए #प्रदूषण से बीमार होने वाले गरीबो के लिए सरकार फ्री ईलाज कि व्यवस्था कर सके भले ही उसमे सीमित दाखिले हो पर होंगे जरूर, वो बात अलग है टेस्ट और दवाई आपको बहार से लेने होंगे ! यदि आपके जुगाड़ नहीं है तो एक दिन के काम में एक सप्ताह लगे तो ताजुब की बात नहीं होगी ! इस बीच अमीर लोग से उम्मीद की जाती है वो इस पचड़े में न पड़े और अपने घरो-कार्यालयों में एयर- प्योरिफायर लगा कर रखे !

दिल्ली में हर रोज कोयले व डीज़ल ईधन से चलने वाली सैकड़ो रेलगाड़ी प्रवेश कर सकती है लेकिन आम जनता अपने वाहन का #प्रदूषणरहित प्रमाण पत्र लेने के बावजूद जल्द ही आड़-इवन का फरमान सुनने के लिए तैयार रहे ! ठीक उसी प्रकार जैसे स्वच्छ भारत अभियान के तहत गॉव के बुजुर्गो को अपने खेतो में शौच करने पर गिरफ्तार किया था आप भी गिरफ्तार हो सकते है, वो बात अलग है आज भी #रेलगाड़ियों में शौच करने वालो से स्टेशन ट्रैको पर पड़ी शौच अधिकारियो को सोचने पर मजबूर नहीं करती है ! नहर-नालो में फैक्टरियों का सड़ा हुआ पानी डाल दिया जा रहा है किनारे बसे लोगो और वहां से गुजरने वाले मास्क पहनकर नहीं चल रहे तो अधिकारियो का कोई कसूर नहीं है लोग अपने स्वास्थ्य की रक्षा #योगासन से करे !

जिस प्रकार #श्रीलंका की #क्रिकेटटीम कोटला मैदान में मास्क लगा कर खेलती है हमारे देश के भविष्य भी अपने घरो में मास्क लगा कर खेले, पढ़े ! अंतर्राट्रीय स्तर पर देश की गरिमा एक अलग बात है !

ज्यादातर #किसानों द्वारा धान की पलाई को पशु-चारे के लिए इस्तमाल किये जाने के बावजूद केंद्र-राज्य सरकारों ने दिल्ली के प्रदूषण का ठीकरा उन चुनिंन्दा किसानो सिर फोड़ दिया गया जिन्होंने दिल्ली से सैकड़ो किलोमीटर दूर धान की पलाई जलाई ! लेकिन अब जब किसानो ने बारिश के बाद अपने खेतो में गैंहू फसल की बिजाई कर दी है और आज भी दिल्ली का प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है ! दिल्ली में होने वाले #क्रिकेट मैच को प्रदूषण की वजह से बीच में रोकने दिया जा रहा है इससे अंतर्राट्रीय स्तर पर देश की ख्याति को हुए नुकसान का जिम्मेदार कौन है ? भारतमाता की जय का उद्धघोष करने वाले बंधू भारतमाता की हो रही मानहानि की भारपाई कैसे करायेंगे ? चुनाव अभी दूर है फिल्म 'गोलमाल रिटर्न्स गवर्न्मवेन्ट' की संभावना जरूर है !

लोहित बैसला की कलम से दिल्ली के युवाओ को समर्पित लेख ! प्रयोजित - क्लीन दिल्ली ग्रीन दिल्ली, #भारत माता की जय, #स्वच्छ भारत अभियान, #बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ !
Photo

Post has attachment

#देश की #राजनीति में #चाय और #पकौड़े के बाद अब गरमा-गरम #छोले-भटूरे


#नईदिल्ली [ मनोज झा ] जागरण

कभी #गांधी के उपवास से ब्रितानी हुकूमत हिल जाती थी, जबकि राजघाट पर सोमवार को #कांग्रेस का उपवास उपहास बन गया।

ऐसे तो आमतौर पर रसोई या खान-पान का सियासत से कोई सीधा वास्ता नहीं है, लेकिन इधर कुछ सालों से कोई न कोई डिश या जायका मीडिया की सुर्खियां बटोरता रहा है। 2014 के आम चुनाव के आसपास मोदी की चाय सुर्खियों का सरताज बनी तो इधर कुछ महीने पहले गरमा-गरम पकौड़े चर्चा में आए।

पर ठंडे पड़ चुके #पकौड़े की जगह अब गरमा-गरम #छोलेभटूरे लेते दिखाई दे रहे हैं। चर्चा इसलिए तेज है, क्योंकि कांग्रेस के कुछ नेताओं ने इस जायकेदार डिश को बहुप्रचारित उपवास से ऐन पहले खा लिया और इसके बाद गांधी बाबा के समाधि स्थल राजघाट पहुंच गए।

यह अलग है कि कभी गांधी के उपवास से ब्रितानी हुकूमत हिल जाती थी, जबकि राजघाट पर सोमवार को कांग्रेस का उपवास उपहास बन गया।

विडंबना यह है कि #कांग्रेस #अध्यक्ष #राहुलगांधी के सियासी उपवास की हवा किसी और ने नहीं, बल्कि पार्टी की #दिल्ली प्रदेश इकाई ने ही निकाल दी। चूंकि दिल्ली से निकला संदेश देश-दुनिया तक जाता है, इसलिए भारत बंद की तरह चैना राम के छोले-भटूरे की चर्चा भी अचानक देशव्यापी हो गई है।

हालांकि, #लालकृष्ण #आडवाणी, #शीलादीक्षित, #हर्षवर्धन जैसे जाने-माने #राजनेता भी इस छोले भटूरे के मुरीद हैं, लेकिन माकन और लवली का नाश्ता कुछ अलग हटकर है। सोमवार को पूरा दिन सोशल मीडिया पर माकन-लवली के छोले भटूरे ट्रेंड करते रहे।

दिल्ली कांग्रेस के इन नेताओं ने चैना राम की डिश का बेशक आनंद लिया हो, लेकिन इसने पार्टी और राहुल का जायका बुरी तरह बिगाड़ दिया। उधर, भाजपा इस जायके का अलग ही मजा लूट रही है।

दरअसल, #सियासत के मौजूदा दौर में किसी मुद्दे को हवा उसके समाधान की मंशा से कम, बल्कि उसके जरिये #राजनीतिक लाभ उठाने के मकसद से ज्यादा दी जाती है। इन दिनों अचानक से गरमा रहा दलितों का मुद्दा भी अपवाद नहीं है।



आगामी #लोकसभा #चुनाव के मद्देनजर बड़े मसले तलाशे जारहे हैं। इस क्रम में फिलवक्त #दलितों का मुद्दा सबसे ऊपर आ गया है। #असहिष्णुता, #अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, #नोटबंदी, #जीएसटी जैसे मसले पाश्र्व में चले गए हैं और दलितों का दमन तेज होता दिखाई देने लगा है।

चूंकि मकसद राजनीतिक है, लिहाजा उपक्रम भी सियासी हो चला है। वरना कोई कारण नहीं कि दलित उत्पीड़न जैसे गंभीर मसले के लिए सवेरे के नाश्ते तक का मोह न छोड़ पाए। #छोले-भटूरे खाना कहीं से गलत नहीं, लेकिन दिल्ली की यह बेहद लोकप्रिय डिश अभी इसलिए बेस्वाद हो गई है, क्योंकि इसे सियासत की कढ़ाई में तला-छाना गया। कई बार कुछ शब्द किसी #नेता, दल या संस्था के लिए अप्रिय या मजाकिया से बन जाते हैं।

फिलहाल #कांग्रेस के लिए छोले-भटूरे को भी इस जमात में शामिल किया जा सकता है। शायद यही कारण है कि #भाजपा #प्रवक्ता #संबित पात्र सोमवार को पूरे दिन टीवी पर कांग्रेस को चिढ़ाने के अंदाज में बार-बार छोले-भटूरे का जिक्र करते रहे।
Photo

Post has attachment

7 reasons why BJP's lotus has bloomed in full swing


NewsBytes:

On this day in 1980, two young leaders #AtalBihari #Vajpayee and #LalKrishna #Advani took the bold decision of forming the BJP by dismantling Jan Sangh. As its first party president, Vajpayee gave the party's clarion call "Andhera Chhatega, Suraj Niklega, Kamal Khilega."

About 38 years later, the lotus has bloomed in 21 states. What are the reasons for BJP's success? We elaborate

1.Opposing #Congress actually contributed to #BJP's success:

BJP's massive win comes on the back of 10 years of Congress rule riddled with corruption, failed schemes, a mute PM and an overkill of #Gandhi-worship. Also, BJP tapped into people's pent-up anger against 60 years of Congress hegemony.

Further, Congress continues to be a liability as its scion fails to win people's hearts and the grand old party fails to see beyond him.

2. BJP acquires its workers from the disciplined, organized RSS:

In 2014, when BJP stormed to power, PM-designate #Modi in his triumphant address thanked "five generations of dedicated workers," referring to the RSS and subsidiaries #VHP, #ABVP, etc.

#RSS calls itself a "cultural" organization, disciplining the country's youth to serve the nation. Of course, its political arm, BJP workers and leaders are nurtured in the RSS nursery. The alma mater also directs whenever required.

3. Micromanagement of #election machinery and rigorous marketing do the trick:

It wouldn't be wrong to say the BJP is always in election mode.

Master strategists like chief #AmitShah and general secretary #RamMadhav along with RSS foot-soldiers work 24*7 for 365 days to strengthen booth management, exploit social media, organize motorcycle rallies and arrange massive glitzy conventions to hammer BJP in people's psyche.

Barring a hiccup or two, this strategy has worked wonders.


4. In dynasty-averse #BJP, hard work and talent assure leadership

BJP has cried itself hoarse emphasizing Congress's dependence on the #Nehru-Gandhis. On its part, though regional units may be guilty of propping up sons/daughters, nationally no single family has dominated the party. Hard work, charisma and ideas can make a common man BJP's prominent leader.

5. Political will and decision-making ensure unmistakable execution:

Be it the #SwachchBharatAbhiyaan, demonetization, roll-out of GST or doggedly pursuing the mission of making #Aadhaar the overall national identity card, #Modi has pursued these agendas with an iron hand.

He demands hard work from his ministers, rewards performance and punishes incompetency.

From fortnightly report cards to precise targets, the BJP government helmed by Modi is always on its toes.

6. Indefatigable saffron stance coupled with aggressive nationalism appeal to people:

BJP seldom hides its "Hindu #Rashtra" agenda. Besides, it has tried to absorb SCs, Dalits and fragmented communities into the broad Hindu fold.

Further, from building #RamMandir in #Ayodhya to clamoring for a Uniform Civil Code, it has fired up India's Hindus.

BJP has combined this with aggressive nationalism characterized by a no-nonsense posture against neighbors Pakistan-China and appeals to abrogate Article 370.

7. India's dynamic PM remains BJP's biggest trump card:

Though slight disillusionment with governance has seeped in, but about one thing there is no ambiguity: Modi remains #BJP's No.1 mascot,

His oratory skills can single-handedly demolish the Opposition, his clean image and hard work win people's support and his bold, decisive stand enhances India's prestige in the world.

BJP understandably relies on Modi and if it does return to power, it'll be because of him.
Photo

Post has attachment
#ArvindKejriwal #apologises to #NitinGadkari, #KapilSibal: #ShivrajSingh Chouhan wants him to do it

News by: Financial express

#MadhyaPradesh #ChiefMinister #ShivrajSingh #Chouhan on Monday shared a ‘suggestion’ for his Delhi counterpart #ArvindKejriwal. Chouhan, referring to #AamAadmiParty chief’s recent #apologies to several opposition #politicians, said the Delhi CM should either come out with one single list, or he should formulate a common apology note. “Arvind ji, if you take my advice then come out with one list, it will be easy to apologise one by one. Or, get a common apology note formulated: ‘To whosoever it may concern’ (Arvind ji, meri salaah maane to ek list bana lijiye, bari bari se sabse maafi mangne mein asaani hogi. Ya fir, ek maafinama tyaar karva lijiye: ‘To whosoever it may concern’),” the Madhya Pradesh CM said.

Chouhan’s suggestion was actually a jibe at Kejriwal’s gesture of apologising to the politicians. Earlier on Monday, Kejriwal had apologised to Union Minister Nitin Gadkari and Congress leader Kapil Sibal for leveling unverified allegations. In his letter to Nitin Gadkari, Kejriwal said, “I have nothing personal against you. I regret the same. Let us put the incident behind us and bring the court proceedings to a closure.”

#Kejriwal and #Gadkari have filed a joint application seeking withdrawal of the defamation case in Delhi’s Patiala House Court. This apology came two days after the AAP chief had sought an apology from senior SAD leader #BikramSingh #Majithia. Kejriwal has also apologised to Congress leader Kapil Sibal.

Aam Aadmi Party and Kejriwal have reportedly contended that a number of defamation cases against him are hampering party’s resources. Speaking to media, Delhi Deputy CM #ManishSisodia said that party will apologise to whoever it has hurt. “We will apologise to people who we have hurt. We’re here to serve the people, we do not have the time to go to courts for such issues. We’re here to build schools and hospitals for the welfare of people,” Sisodia was quoted as saying by ANI.

AAP Chief’s apology to Majithia had turned into a big political controversy. Party’s Punjab unit slammed Kejriwal over his decision, while the state chief #BhagwantMann and co-president, Aman Arora, resigned from their posts. Later, Kejriwal held a meeting with the protesting legislators and explained to them reason behind the apology. Kejriwal reportedly told the MLAs the decision was taken with the aim of investing energy into development-related work for people of Delhi. His apology was reportedly accepted by the legislators.

Get live Stock Prices from BSE and NSE and latest NAV, portfolio of Mutual Funds, calculate your tax by #Income #Tax Calculator, know market’s Top Gainers, Top Losers & Best Equity Funds. Like us on Facebook and follow us on #Twitter.
Photo

Post has attachment
#Modi willing to face no-confidence motion by #TDP, YSRCP, says #BJP; updates

News by- Business standard

The N #Chandrababu Naidu-led #TeluguDesamParty (TDP) and Y S #Jaganmohan Reddy-led Yuvajana Shramika Rythu Congress Party (YSR Congress Party) on Monday were all set to push their notices of no-confidence motion against the #NarendraModi government in the #LokSabha, as they continued their respective agitations for the granting of a special-category status to Andhra Pradesh.

However, the no-confidence motions were not introduced as the Lok Sabha was adjourned till tomorrow. The development comes after the TDP quit the #Bharatiya #Janata #Party (#BJP)-led National #Democratic #Alliance (NDA) and moved a no-confidence motion on Friday, a day after the YSR Congress Party had moved a no-confidence motion against the Modi government.

Several opposition parties including the Congress, #Trinamool #Congress, Nationalist Congress Party, #Samajwadi Party, #AIMIM and #Rashtriya #Janata #Dal (RJD) have expressed their support for the notices. The Speaker called the members to stand up up so that the numbers could be counted to see how many supported it.

But with members from the TRS and #AIADMK holding placards and surrounding the Speaker's dais, Mahajan said she could not count the members who were standing.

"Please go back to your seats. If the House is not in order I will not bring the notices," she said, before adjourning the House for the day. Minutes before #Mahajan made her comments, Home Minister #Rajnath Singh said the #government was ready to face the motion.

"We are ready for any discussion... We are also ready for a discussion on the no-confidence motion. I appeal to all political parties to cooperate," Rajnath Singh pleaded.
The proceedings in Parliament were washed out for the second consecutive week on Friday due to protests by Opposition parties.

Both the parties from #AndhraPradesh have been protesting and agitating as the Centre has refused to grant the state a special-category status. The political tussle in the state and at the national level saw the TDP and the BJP engage in an escalating and heated exchange, which culminated in the end of their alliance. Both parties have been lobbying with opposition parties for support to their respective notices.

However, even if the no-confidence motions are admitted, the Modi government has expressed confidence that they will be defeated given its strength in the Lok Sabha.

Here are the top 10 developments around the #TDP-BJP split and the no-confidence motions against the Modi government: 1) No-confidence motions not introduced: The no-confidence motions against the Narendra Modi government were not introduced today and the Lok Sabha was adjourned till tomorrow after the continuous uproar in the House, news agencies reported. Earlier in the day, the House was adjourned until noon.

Lok Sabha proceedings were disrupted for the eleventh day today as the TDP, YSR Congress, #Telangana Rashtra Samithi (TRS), and All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam (AIADMK) continued protests over issues like the banking scam and the Centre's refusal to grant special-category status to Andhra Pradesh.

Members from these parties stormed the Well of the House carrying placards as soon as Speaker #SumitraMahajan took up Question Hour. While members from the TDP, YSR Congress, TRS, and AIADMK were in the well raising slogans, MPs from the All India Trinamool Congress (TMC) and Congress were seen standing at their seats.

2) BJP ready to face 'no-confidence' motion: Ananth Kumar: Union minister of Parliamentary Affairs #AnanthKumar on Monday said that Bharatiya Janata Party (BJP) is "ready to face the no-confidence motion" to be moved by the YSR Congress in Lok Sabha.
YSR Congress which is an opposition party in #AndhraPradesh on March 18 gave a notice to the Lok Sabha General-Secretary seeking to move a no-confidence motion in the Lower House against the Centre for its refusal to grant special category status to Andhra Pradesh.
Speaking to #ANI, Kumar said, "We are ready to face no-confidence motion as we have support in the House. We are confident."

3) TDP directs MPs to attend Parliament: The TDP on Monday issued a whip to its MPs and directed them to attend Parliament until the end of the Budget session. The party's no-confidence motion was issued following its fallout with the BJP over the demand for special-category status for Andhra Pradesh.
Photo

Post has attachment
Modi seeks #Manik ka saath in Tripura as #Biplab becomes CM

News by TOI

AGARTALA: #BiplabKumar Deb was sworn in as #Tripura's first #BJP #chiefminister at a grand ceremony here on Friday, where PM #Narendra Modi not only walked up to rival #ManikSarkar but also sought “his vast experience to guide the inexperienced new government”.

Modi walked across to Sarkar who was seated between BJP veterans LK #Advani and #MurliManohar Joshi on the other side of the dais as soon as the oath-taking ceremony ended. Both leaders shook hands and exchanged pleasantries. As #Modi was going back to his seat, #BJPchief #AmitShah stopped him, saying Sarkar would like to leave the function. Modi then turned back, clasped Sarkar's hands and escorted him to the steps of the dais. The former CM, who was escorted onto the dais by BJP general secretary #RamMadhav, left soon after the swearing-in ceremony got over.

Recommended by Colombia “I am not your CM. Treat me as your son, brother, and friend. I dedicate the day to you, I pledge to honor the trust you have bestowed on me and BJP,” 49-year-old Deb, who took oath in Bengali, said, after the star-studded swearing ceremony, where chief ministers of all BJP-ruled states or its allies were present.

#Governor #TathagataRoy administered the oath of office to Jishnu Dev Varma, a tribal and a royal family member, in English. In the newly-inducted ministry of nine, five are from the Bengali community, including Deb, and four from the tribal community. Of the four, two are from BJP — #DevVarma and Santana in the #cabinet, #SantanaChakma — and two from BJP's ally IPFT — NC Debbarma and Mebar Kumar #Jamatia.

TOP COMMENT-

“This was an election which was historic in its outcome Long live Indian unity We welcome the vision of our beloved PM whose act east policy is showing the positive result bringing the NE in the mainstream” #RamanSeth


Promising full support to the state government, Modi said, “We will follow cooperative federalism in letter and in spirit. Good governance, sabka saath #sabka #vikaas, and people's participation are the principles we hold in high regard. Your dreams are the Centre's dreams.”
Photo

Post has attachment
Why #Amarinder Singh #scolded #Narendra Modi in a tweet

News By TOI

NEW DELHI: #Punjab's Congress #chiefminister #AmarinderSingh took to #Twitter to scold Prime Minister #NarendraModi for "frivolous statements" and for attempting to drive a wedge between him and his party.

After it was reported that #Modi said, "The #Congress does not even consider their CM their own" in Punjab, Amarinder sarcastically asked the PM on Twitter whether the party high command had complained directly to him about it.

"Who told you that @narendramodi ji? Not me for sure. Did the @INCIndia high command complain to you against me?" asked the Punjab CM.
Modi had also said that Amarinder "marches on, like an independent soldier". The Punjab CM didn't take kindly to that either and cautioned Modi against making "frivolous" statements.

"Anyways, let me make it clear that such frivolous statements won't help you create a wedge between me and my party, which has full faith in my leadership & vice versa," said Amarinder to Modi +.

@capt_amarinder “Who told you that @narendramodi ji? Not me for sure. Did the @INCIndia high command complain to you against me? Anyways, let me make it clear that such frivolous statements won’t help you create a wedge between me and my party, which has full faith in my leadership & vice versa.”

The Congress party's Punjab unit also took a dig at Modi yesterday, saying that by calling Amarinder an "independent soldier", the PM was acknowledging that the "free and democratic culture" prevailing in the Congress unlike in the BJP.

"This is quite contrary to the autocratic and dictatorial culture prevailing in the #Bhartiya Janata Party (BJP) under Modi, where saner and seasoned voices like those of L K Advani, Murli Manohar Joshi, Yashwant Sinha and Shatrughan Sinha have either been silenced or banished to the Marg Darshak Mandal," said Punjab Congress president Sunil Jakhar yesterday.

He was referring to the fact that both the Sinhas, as well as BJP stalwarts like Joshi and Advani have been publicly given short shrift lately by the party high command.
Photo

Post has attachment
#खुलेआम हल्के होते दिखे #मंत्री, कहा- कोई बड़ी बात नहीं

#जयपुर: सौ. फर्स्टपोस्ट

देश की जनता #स्वच्छता को लेकर जहां पहले से ज्यादा जागरूक हुई है, वही कुछ नेता अकसर इन कोशिशों पर पानी फेरते नजर आते हैं. जहां जयपुर #नगरनिगम शहर को #स्वच्छभारतअभियान के तहत शहर को टॉप लिस्ट में लाने के लिए जी जान से जुटा है, वहीं जयपुर के स्वास्थ्य राज्य मंत्री कालीचरण सराफ खुलेआम सड़क किनारे दीवार पर हल्के होते दिख गए. लेकिन अगर #मंत्रीजी की मानें तो ये कोई बड़ी बात नहीं है.
बुधवार को राजस्थान कांग्रेस के आईटी सेल के कोऑर्डिनेटर दानिश अबरार ने ट्विटर पर एक तस्वीर शेयर की, जिसमें स्वास्थ्य राज्य मंत्री को खुलेआम सड़क किनारे पेशाब करते हुए देखा जा सकता है. सोने पर सुहागा ये है कि जिस इलाके में मंत्रीजी हल्के हो रहे थे, वो उनका ही विधानसभा क्षेत्र है.
जब रिपोर्टर्स ने उनकी सफाई मांगी, तो उनका जवाब था कि वो इस मामले पर बात नहीं करना चाहते क्योंकि ये कोई बड़ी बात नहीं है.
देखा जाए, तो सड़क किनारे पेशाब करने पर दोषी पर 200 रुपए का जुर्माना लगता है. लेकिन लगता है मंत्री जी के लिए मसला ही कोई बड़ा नहीं है.
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस ने मंत्री के इस रवैये पर कड़ा विरोध जताया है. #राजस्थानकांग्रेस की #उपाध्यक्ष अर्चना शर्मा ने कहा कि ऐसे वक्त में जब स्वच्छ भारत अभियान पर इतने पैसे लगाए जा रहे हैं, ऐसे में नेता ऐसा शर्मनाक व्यवहार करके लोगों में गलत मैसेज पहुंचा रहे हैं. खासकर उनका अपने ही विधानसभा क्षेत्र में ऐसा करना तो और गैर-जिम्मेदाराना है.
शर्मा ने ऐसी ही एक और घटना का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि ढोलपुर के उपचुनावों के दौरान भी सराफ ने ऐसा किया था, लेकिन वो इसकी फोटो नहीं ले पाई थीं.
Photo

Post has attachment
#राजस्थानचुनाव में बीजेपी बुरी तरह हारी, लेकिन वसुंधरा का विकल्प नहीं

(हर्षा कुमारी सिंह राजस्थान में NDTV की ब्यूरो चीफ)
#बीजेपी सिर्फ 3 उप चुनाव नहीं हारी है, वो 17 विधानसभा सीटों पर बुरी तरह पिछड़ी है. शहरी सीटें जैसे अलवर शहर, अजमेर उत्तर और दक्षिण जिनमें व्यापारी वर्ग का दबदबा रहता है, वहां भी बीजेपी पिछड़ी है. जैसे जैसे नतीजे आ रहे थे, बीजेपी अध्यक्ष अशोक परनामी ने प्रेस वार्ता बुलाई. उन्होंने कहा, "भाजपा कोई छुई-मुई का पौधा नहीं है जो उंगली दिखने से मुरझा जाये, कांग्रेस को इतना भी प्रसन्न होने की ज़रूरत नहीं है." उनसे हार पर ज़्यादा सवाल-जवाब न हो, इसके लिए परनामी जी जल्द ही केंद्रीय बजट की प्रशंसा में जुट गए. लेकिन हार जीत का जो अंतर है वो सिर्फ राज्य इकाई के लिए नहीं बल्कि पूरी पार्टी के लिए चिंता का विषय है.

इस #उपचुनाव में 2 लोकसभा सीटों के लिए यानी 16 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान हुआ. 16 की 16 सीटों में बीजेपी हारी है. यानी एक भी विधानसभा सीट में उसे बढ़त नहीं मिली है. मांडलगढ़ विधानसभा सीट का जो उपचुनाव था उसमें भी कांग्रेस 12000 से ज़्यादा वोटों के अंतर से जीती. बावजूद इसके कि वहां कांग्रेस का ही एक बागी खड़ा हुआ था जो 22% वोट शेयर ले गया.

अलवर शहर से बीजेपी 25,457 वोटों से हारी है जबकि पिछले विधानसभा चुनाव में ये अलवर शहर से 62,129 वोटों से जीती थी. अजमेर में भी यही हाल है. अजमेर उतर और दक्षिण को अगर जोड़ ले तो यहां बीजेपी 19,000 वोटों से पिछड़ी है.

"हम सरकार को सबक सिखाना चाहते थे." लोगों से ज़्यादातर ऐसी बातें सुनने को मिलती हैं. अजमेर के वैशाली नगर में कांग्रेस प्रत्याशी रघु शर्मा के दफ्तर के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने खूब जश्न मनाया. यहीं पर एक ड्राइवर राम स्वरूप, जो यहां एक कोठी में काम करता है, ने कहा, "हम बीजेपी के वोटर हैं." उसने कहा, "इस बार वसुंधरा को सबक सिखाना जरूरी था."

साफ़ है कि इस #उपचुनाव में इस तरह की सोच ने वोटों में परिवर्तन किया है. एंटी इनकम्बेंसी एक फैक्टर बन गया है. साथ ही जीएसटी से आयी मुश्किलों से छोटे दुकानदार और #व्यापारी नाराज़ हैं. लेकिन साथ ही लोग ये भी कहते हैं कि उप चुनाव में सबक सिखा दिया. हो सकता है 2019 के चुनाव में वापस बीजेपी के साथ जुड़ जाएं.

बीजेपी की जातिगत राजनीति का गणित भी अजमेर में नहीं चल पाया. बीजेपी के अजमेर उम्मीदवार रामस्वरूप लाम्बा को टिकट उनके पिता सांवर लाल जाट की मौत के बाद मिला. अमित शाह जब पिछले साल जयपुर में कार्यकर्ता सम्मलेन में भाषण दे रहे थे तब आगे की पंक्ति में बैठे सांवर लाल जाट वहीं गिर गए. कुछ दिन बाद उनकी मौत अस्पताल में हो गई. सिम्पथी वोट पर बीजेपी खेलना चाहती थी और ये भी सोचा था कि अजमेर में जाट वोट उनके पक्ष में आएगा अगर वो जाट कैंडिडेट को ही उम्मीदवार बनाते हैं. लेकिन 4 बार एमएलए और एक बार एमपी रहे सांवर लाल जाट के बेटे में वो राजनीतिक गुण नहीं हैं जो उनके पिता में थे. रामस्वरूप के लिए तो चुनाव में भाषण देना ही बड़ी चुनौती नज़र आ रहा था. कैंपेन के आखिरी दिन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने उन्हें रोड शो के दौरान कहा, आप भी कुछ बोलो. लेकिन रामस्वरूप ने गर्दन हिला दी. वसुंधरा ने तब मजाकिया अंदाज में कहा था, "सीधा आदमी है आपका उम्मीदवार." उन्होंने कहा, "जब मैं राजनीति में आयी थी तो मैं भी ऐसी ही थी, बहुत कम बोल पाती थी, लेकिन अब मुझसे माइक छीनना पड़ता है." लेकिन साफ़ है कि रामस्वरूप लाम्बा के लिए न सहानुभूति ना सादगी काम आयी.

अलवर में नहीं चला ये दांव

अलवर में बीजेपी ने #हिन्दू-मुस्लिम कार्ड खेलने की कोशिश की थी. चुनाव के 3 दिन पहले अलवर शहर से विधायक बनवारी लाल सिंघला ने फेसबुक पर लिखा था कि मुसलमान ज़्यादा बच्चे पैदा करके विकास की गति को रोकना चाहते हैं. अलवर शहर में पार्टी का चुनावी अभियान उन्होंने संभाल रखा था. जब हम उनसे मिलने गए तो इस तरह के सांप्रदायिक बयान को उन्होंने अपने इंटरव्यू में दोहराया. उन्होंने कहा, "उनका एक ही प्लान है कि हम देश में 2030 तक अपना राज क़ायम करें, और इसको वो प्लान करके अपनी जनसंख्या और अपनी मतदाता संख्या बढ़ा रहे हैं. ये तो बस पागल हो कर इस काम में लगे हुए हैं, इनके पास दूसरा काम नहीं है. बच्चे पैदा करने के अलावा."

इसके पहले कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि अलवर में बीजेपी उम्मीदवार हिन्दू मुस्लिम के नाम पर वोट मांग रहे है. 8 जनवरी को चुनावी सभा में जसवंत यादव ने कथित रूप से एक सभा में कहा था. उन्होंने कहा था, 'बीजेपी हिन्दू की पार्टी है तो इसका मतलब है कांग्रेस मुसलमान की है? तो फिर हिन्दू मुझे दे दो और मुसलमान अपने कांग्रेस ने दियो, फैसला कर लो."

कांग्रेस ने इस बयान की शिकायत चुनाव आयोग में की, लेकिन जसवंत यादव ने बाद में कहा कि उनके खिलाफ ये एक षड्यंत्र था. लेकिन इस तरह के अलगाववादी राजनीतिक बयानों का असर इस उपचुनाव में नहीं दिखा.

इस तरह की राजनीति को #मतदातों ने नकारा है. अलवर शहर में कांग्रेस को 25457 मतों की बढ़त मिली. पूरे अलवर #लोकसभा में कांग्रेस के डॉ. करण सिंह यादव को सबसे ज़्यादा 1,96,496 #वोटों से जीत हासिल हुई. इस चुनाव का ये सबसे बड़ा अंतर है. यहां तक कि उनके खिलाफ खड़े हुए जसवंत यादव जो मंत्री और विधायक हैं, उनको अपनी विधानसभा सीट में भी बढ़त नहीं मिली, बल्कि वो बहरोड़ खुद की विधानसभा से 21,826 मतों से पिछड़ गए. बहरोड़ वो जगह है जहां पिछले साल अप्रैल में दिल्ली जयपुर हाईवे पर बहरोड़ मिड-वे से कुछ गौ-रक्षकों ने पशुपालक पहलु खान को पीट पीटकर मार डाला था.

मुस्लिम समुदाय, जिसके अलवर में करीब 3 लाख मतदाता हैं, इस बात को लेकर आक्रोशित तो था ही, लेकिन दूसरे मतदाताओं ने भी इस तरह की राजनीति को अलवर में नकारा है. शायद इसलिए सबसे ज़्यादा वोटों की जीत कांग्रेस के लिए अलवर से हुई है.

ये #चुनाव क्या मायने रखते है #वसुंधराराजे और #सचिनपायलट के लिए
वसुंधरा का राजस्थान में विकल्प ढूंढना आसान नहीं होगा. रानी, जैसे उन्हें यहां लोग कहते हैं, रानी में अहंकार है. लेकिन जब रानी लोगों के बीच निकलती है वोट मांगने के लिए तब उनका अंदाजा बिलकुल अलग होता है. चुनरी ओढ़ के वो #महिलाओं और #बुज़ुर्गों का वारना लेती हैं. वारना राजस्थान में आशीर्वाद मांगने का एक तरीका होता है. लोगों से उनका जो तालमेल है शायद ही भैरों सिंह शेखावत के बाद किसी भाजपा नेता में हो. लेकिन हिंदी भाषी राज्य में बीजेपी की ये हार पार्टी के लिए केंद्र में भी चिंता का विषय है और आने वाले दिनों में बीजेपी क्या रणनीति तय करेगी इस पर सबकी नज़र रहेगी.

#कांग्रेस के #कार्यकर्ताओं ने इस जीत में जान तो फूंक डाली है, लेकिन सचिन पायलट के लिए ये एक व्यक्तिगत जीत है. इस पूरे चुनाव की कमान सचिन के हाथों में थी. उम्मीदवारों के चयन से लेकर #चुनावीकैंपेन और #रणनीति, सब कुछ सचिन ने संभाला. अशोक गेहलोत इस चुनाव का चेहरा नहीं थे. पिछले 10 साल में अशोक गेहलोत के सामने उनके क़द का कोई नेता नहीं खड़ा हो पाया है. #अशोकगेहलोत की सादगी की सियासत, #गांधी की राजनीती का एक उदाहरण माना जाता है. लेकिन सचिन ने अब दिखा दिया है की #राजस्थान में एक विकल्प है.


Photo

Post has attachment
PM Modi's Election #Budget May Push Interest Rates Higher

News By: NDTV

Prime Minister #Narendra Modi delivered an election year budget focused on tamping down rural discontent ahead of crucial elections, spending that could prompt the central bank to raise interest rates in the coming months.

With less than a week to go before the Reserve Bank of India meets to decide on policy, #Finance Minister #ArunJaitley unveiled a budget that opens the taps for impoverished farmers, guaranteeing higher minimum crop prices and more spending on infrastructure projects in the country's vast rural hinterland.

That may prompt some of the six-member monetary policy committees to turn more hawkish. A Bloomberg survey expects the RBI to hold rates at 6 percent through this year, but in the swaps market, investors are pricing in a hike to 6.5 percent before the end of 2018.

"Improving growth prospects, rising inflation and lingering fiscal slippage risks all point towards tighter monetary policy this year," said Priyanka Kishore, lead Asia economist at Oxford Economics, Singapore. "We are penciling in two rate hikes."
What Economists Say ...
Finance Minister Arun Jaitley delivered a pre-election budget aimed at boosting rural incomes but at the cost of a larger-than-expected deficit -- likely confirming the central bank's hawkish bias. - Abhishek Gupta of Bloomberg Economics

PM #Modi's Bharatiya Janata Party faces elections in eight states this year and general elections in the first half of 2019.

"The finance minister fails the fiscal consolidation test and this failure will have serious consequences," #Congress leader Palaniappan Chidambaram said. Already, sovereign bond yields have spiked to their highest since June 2016, boding ill for the government's borrowing plans and interest payments. A sustained rise in yields could also see banks raise lending rates, a move that could choke a nascent recovery in Asia's third-largest economy.

Various high-frequency indicators show an economic recovery will gather pace over the next few quarters. That is likely to see a narrowing of the output gap and possibly higher rates.
Spending Boost:
The government hopes this budget will alleviate discontent in the countryside while creating desperately needed jobs.
However, the spending boost means the government missed its fiscal deficit target and disappointed investors with a long-term capital gains tax on equity investments. And while complex initiatives -- from boosting aquaculture to health care -- may not materialize fast enough to alter electoral sentiment, the budget suggests PM Modi's government is attempting to balance deficit targets while not going all out with election freebies.
"It's not a budget that's too populist, it doesn't look like they've thrown caution to the wind," said Reshmi Khurana of Kroll, a risk consultancy. "I don't think it's actually going to trickle down to the point where this means he sweeps elections."

The #budget, as expected, focused heavily on rural India after a voter backlash in PM Modi's home state of Gujarat.

Photo
Wait while more posts are being loaded