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मन नाम का भयंकर व्याघ्र विषयरूपी वन में घूमता रहता है। जो साधु मुमुक्षु हैं वे वहाँ न जाएँ।

महात्मा आनंन्द स्वामी सरस्वती।

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इस देश की अस्मिता का आधार इस देश की संस्कृति है ! अतः भारत के नवोत्थान के लिए, सांस्कृतिक पुनरुज्जीवन करना होगा ! अब जन जागरण के लिए, जन संगठन के लिए, जन शिक्षण के लिए और जन संस्कार के लिए संस्कृत संभाषण एक सशक्त एवं प्रमुख साधन है, जैसे स्वतंत्रता आन्दोलन में चरखा ! संस्कृत संभाषण एक होम्योपैथिक गोली की तरह है जो देखने में छोटी परन्तु उसका परिणाम दूरगामी है ! वह रोग के मूल को नष्ट कर देती है ! संभाषण ही संजीवनी है ! संस्कृत में संभाषण करना मानो वस्तुतः वह वाग्देवता की उपासना है, सुरसरस्वती का समाराधन है ! http://www.krantidoot.in/2017/08/Why-should-we-talk-in-Sanskrit.html

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गोरखपुर के मेडिकल कॉलेज में 30 मासूम बच्चों की मृत्यु हुई है या हत्या हुई है, यह कौन तय करेगा ? यह मृत्यु नहीं, हत्या है। और यह हत्याकांड इसलिए शर्मनाक है कि यह गोरखपुर में हुआ है, जो मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी का अपना निर्वाचन-क्षेत्र है। योगी अभी तीन दिन पहले इस अस्पताल में एक नए सघन चिकित्सा-कक्ष का उद्घाटन करने गए थे। इतना ही नहीं, इस अस्पताल को उप्र के पूर्वी क्षेत्र का सर्वश्रेष्ठ अस्पताल माना जाता है। योगी ने सांसद के तौर पर इसी अस्पताल में जापानी बुखार के इलाज पर जबर्दस्त हंगामा खड़ा किया था। गोरखपुर के इस अस्पताल में घटी इस दर्दनाक घटना ने योगी सरकार का मुंह काला कर दिया है, हालांकि उसमें योगी का कोई हाथ नहीं है। ऐसी मर्मांतक घटना गोरखपुर में हो जाए, इसका मतलब क्या है ? साफ है। इस अस्पताल के अधिकारियों को सरकार का डर जरा भी नहीं है। उन्हें योगी की इज्जत की परवाह ज़रा भी नहीं है। http://www.krantidoot.in/2017/08/This-is-not-death-of-children-it-is-murder.html

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राम 12 कलाओं के ज्ञाता थे तो श्रीकृष्ण सभी 16 कलाओं के ज्ञाता हैं। चंद्रमा की सोलह कलाएं होती हैं। सोलह श्रृंगार के बारे में भी आपने सुना होगा। आखिर ये 16 कलाएं क्या है? उपनिषदों अनुसार 16 कलाओं से युक्त व्यक्ति ईश्वरतुल्य होता है।आपने सुना होगाकुमति, सुमति, विक्षित, मूढ़, क्षित, मूर्च्छित, जाग्रत, चैतन्य, अचेत आदि ऐसे शब्दों को जिनका संबंध हमारे मन और मस्तिष्क से होता है, जो व्यक्ति मन और मस्तिष्क से अलग रहकर बोध करने लगता है वहीं 16 कलाओं में गति कर सकता है। http://www.krantidoot.in/2017/06/Know-the-secret-of-Kalan.html

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चिर सुहागन मणिमाला के संकेत पर गिलैया ताल किनारे बनी विशाल चिता मे अग्नि प्रज्वलित कर दी गई। महारानी मणिमाला के आदेश पर विशाल चिता मे अग्नि प्रज्वलित कर दी गई। कुछ ही क्षणों मे लपटे आकाश छूने लगीं। गिलैया ताल किनारे 1500 राजपूत रमणियों ने अपने जीवन को होम कर दिया। देखते ही देखते समूचां दुर्ग आग का गोला बन चुका था। जैसे ही तुर्क सैनिक दुर्ग के भीतर जाने को हुये तो बचे हुये दो-चार सैनिकों ने मोर्चा संभाला औऱ बीरता पूर्बक लड़ते हुये वीरगती को प्राप्त हुए और अहमद खॉ बाबर के अगल-बगल खड़े हुये जलती चिता को देख रहे थे। जीवित जलती कोमलांगीयों को देख बाबर वेचैन हो गया। उसका कठोर ह्रदय भी पीडा से कराह उठा ! उसी समय चिता के भीतर से एक सनसनाता हुआ तीर आया और बाबर की पगड़ी मे लगा और वह जमीन पर गिर गई। तुर्कों मे फिर से आतंक छा गया तब बाबर के सभी सैनिक भाग कर चिता के नजदीक पहुचे और देखा कि मणिमाला अपने तरकश के तीर प्रयोग कर खाली धनुष कंधे पर डाल कर उस महाचिता को प्रणाम कर सुहाग के गीत गाती हुई चिता की ओर ऐसे बढ़ती गंई जैसे मुगल बेगम फूलों की सैर करने जाती हैं। यह देख बगल में खड़ी बाबर की चौथी बीबी दिलावर बेगम के मुह से चीख निकली और वेहोश हो गई। http://www.krantidoot.in/2016/10/Johar-of-Chanderi-Queen-manimala.html

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जिन अरुण शौरी ने इंद्रा गांधी, संजय गांधी और कांग्रेसियों के आपातकाल की घज्जिया उड़ायी थी, जिन्होंने महाराष्ट्र में सीमेंट घोटाले को उजागर कर के कांग्रेस के मुख्यमंत्री अब्दुल रहमान अंतुले को इस्तीफा देने को मजबूर किया था, जिन्होंने इंडियन एक्सप्रेस इस लिये छोड़ दिया था क्योंकि मालिक रामनाथ गोयनका से संपादकीय को लेकर मत भेद था, जिन्होंने कांग्रेस में भृष्टाचार व गांधी परिवारवाद के खिलाफ एकाकी मन से लड़ाई लड़ी, जिन्होंने राममंदिर आंदोलन के औचित्य, धर्मनिर्पेक्षिता के नाम पर मुस्लिम तुष्टिकरण और वामपंथियों के सांस्कृतिक और शैक्षणिक संघठनो पर कब्जे के विरोध में बेबाकी से लिखा था, वह आज बीजेपी की मोदी जी की सरकार में मंत्री न बनाय जाने खिन्न होकर वामपंथियों की धर्मनिर्पेक्षिता के प्रचारक और राष्ट्रवादी विचारधारा व हिंदुत्व के विरोधियों के मंच संचालक, प्रन्नौय रॉय को ईमानदार पत्रिकारिता का चरित्र प्रमाणपत्र दे रहे है। कहाँ से कहाँ पहुँच गए | http://www.krantidoot.in/2017/06/Editors-Guild-of-India-arun-shauri-m-j-akbar.html

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पाकिस्तानी बार्डर एक्सन टीम यानी बैट के दुर्दांत हत्यारों ने नायब सूबेदार परमजीत सिंह की न केवल हत्या कर दी, बल्कि उनका सिर भी वे लोग काट कर ले गए |ध्यान देने योग्य बात यह है कि शहीद नायब सूबेदार परमजीत सिंह और उनके चार साथियों ने नवंबर 2016 में एक वीडियो मैसेज बनाया था जिसमें उन लोगों ने पाकिस्तान को युद्ध में बर्बाद करने की धमकी दी थी | इस वीडियो के जवाब में पाकिस्तानी सेना के मेजर रैंक के अधिकारी ने भी एक वीडियो मैसेज बनाया था जिसमें उसने इन चार लोगों की हत्या उनके ही देश में करने की बात कही थी |क्या परमजीत का सिर वे यही जताने के लिए काटकर ले गए, कि देखो काफ़िरो हमें धमकी देने वालों का हम क्या हाल करते हैं ? डूब मरना चाहिए हमें और पाकिस्तानी तो गदगद हैं ही | http://www.krantidoot.in/2017/05/Shahid-Paramjit-Singh-and-indian-jaychand.html

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हमारे जवानों ने वीरगति पाई, उनके शवों के साथ नापाकियों ने बर्बरता की ! ऐसे में गुस्से से खौलते देशवासियों से एक सैन्य अधिकारी अगर सवाल पूछे, तो क्या उत्तर है देश के पास ?
मैं आमतौर पर अपनी पोस्ट साझा करने का अनुरोध नहीं करता हूं लेकिन इसे पढ़ने के बाद अगर उचित लगे तो अवश्य साझा करें ! http://www.krantidoot.in/2017/05/Why-should-a-soldier-alone-sacrifice-for-India.html

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मुस्लिम पर्सनल लॉ के कारण मुस्लिम महिला का जीवन लांछनमय हो गया है । उत्तर भारत के प्रख्यात पत्रकार मुजफ्‌फर हुसैन ने लिखा है तलाक तलाक तलाक के नाम से एक फिल्म हिन्दी भाषा में तैयार हो रही थी हमारे मियांओं ने फिल्म के शीर्षक को लेकर आपत्ति प्रकट की और फिल्म का नाम बदलकर निकाह कर दिया गया । अब आपको बताते है कि फिल्म का नाम बदलने के लिए कौन से कारण बताए गए । मियांओं ने यह कहा कि मानों जब मियांजी फिल्म देख कर घर लौटे और बीवी ने पूछ लिया कि कौन सी फिल्म देख कर आए हो । जवाब में मियां जी ने कहा तलाक तलाक तलाक । तो तीन शब्दों में बीवी का जीवन हलाक हो जाएगा । अजीव तमाशा है फिल्म का नाम भी बताने पर मुस्लिम महिला कष्टमय जीवन बिताने पर मजबूर हो जाएगी । http://www.krantidoot.in/2017/04/The-sadness-of-a-Muslim-woman-in-her-own-words.html

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ईसा की पहली और दूसरी शताब्दी में भारत में भौतिकशास्त्र, रसायनशास्त्र, खगोलशास्त्र, गणित, वनस्पतिशास्त्र इत्यादि विज्ञान की बहुत सी शाखाएं विकसित थी ! उन शाखाओं की केवल प्रगति ही नहीं हुई अपितु वे चरमोत्कर्ष को प्राप्त थीं फिर भी दुर्भाग्य से यह सुनना पड़ता है कि विज्ञान का प्रारंभ और विकास पश्चिम के देशों में हुआ – यह कैसी विडम्बना है ! लोग भी ऐसे मिथ्या वचनों पर सहज ही विश्वास कर लेते है ! हमारे शिक्षा संस्थान भी इसी मिथ्या अंश को पढ़ाने में लगे हुए है ! वैज्ञानिक क्षेत्र में जो भी भारतीय चिंतन है उसे आधुनिक लोगों को अधिकाधिक जानना चाहिए, तथा उस विषय में आदर भाव बढेगा ! यह लेख उस भारतीय चिंतन का स्थूल परिचायक है ! http://www.krantidoot.in/2017/04/contribution-of-India-to-world-science.html
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