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स्त्रीयो को ऊपर वाले ने छठी इंद्री (six sense) सोचने समझने की क्षमता इतनी अधिक दी है की वो किसी भी पुरुष की नजरों से अपने बारे में उसकी नीयत(द्रष्टि) को जान लेती है।
यहाँ तक की अगर कोई उसे छुप कर भी घूर रहा हो तो उसे एहसास हो जाता है की कोई उसे देख रहा है।
ईश्वर ने उसे ये शक्ति इसलिए दी है की वो जान सके की कौन उसके लिए अच्छा है और कौन बुरा।
लेकिन ना जाने क्यों यही औरत, लड़की जब किसी पर विश्वास करती है तो उसकी छठी इंद्री की शक्ति कहाँ चली जाती है?
जो चीज़ सब को नजर आ रही होती है वो उसकी आँखों से कैसे ओझल हो जाती है?
और फिर कोई लाख उसे समझाए लेकिन उस की अक़्ल पर ऐसा पत्थर पड़ता है की उसकी सोचने समझने की शक्ति खत्म हो जाती है।
उसे पैदा करने वाले माँ बाप, उसकी खुशियों का ख्याल रखने वाले भाई-बहन, अच्छा बुरा समझाने वाली सहेलियां और रिश्तेदार सब लोग उसे दुश्मन लगने लग जाते हैं और सिर्फ एक शख्स जो दिल में इरादा लिए हुए उसकी तरफ बढ़ रहा होता है वो उसे सच्चा लागता है।
वो ये नही सोचती की इतने सारे लोग कैसे गलत हो सकते है और जो सारी दुनिया से छुप कर मुझसे सम्बन्ध रखना चाहता है वो कैसे अच्छा व्यक्ति हो सकता है?
फिर आखिर एक दिन पछतावा उसका मुकद्दर बनता है उसकी जिंदगी का एक हिस्सा बनता है !!
सुनो....
माँ बाप गलत फैसला तो कर सकते है लेकिन कभी गलत नही हो सकते।
वो हमेशा अपनी औलाद की भलाई ही चाहते है।
उन्हें कभी अपना दुश्मन न समझें।
अपने आपको अक़्ल मंद समझ कर अपनी दुनिया और अपनी आबरू, अपने भविष्य को बर्बाद मत करो।
समझदारी सारी उम्र के पछतावे से बचा सकती है।
याद रखें जो आपको हासिल करने की जिद में आज आपकी इज्जत की परवाह नही कर रहा,
वो बाद में भी इज्जत नही दे सकता.....

#लड़कियां_जरा_गौर_करे
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This is Jayalakshmi..... grand daughter of MS Subbalaxshmi...... also known as junior Lata mangeskar

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एक गाँव में एक मजदुर रहा करता था जिसका नाम हरिराम था | उसके परिवार में कोई नहीं था | दिन भर अकेला मेहनत में लगा रहता था | दिल का बहुत ही दयालु और कर्मो का भी बहुत अच्छा था | मजदुर था इसलिए उसे उसका भोजन उसे मजदूरी के बाद ही मिलता था | आगे पीछे कोई ना था इसलिये वो इस आजीविका से संतुष्ट था |

एक बार उसे एक छोटा सा बछड़ा मिल गया | उसने ख़ुशी से उसे पाल लिया उसने सोचा आज तक वो अकेला था अब वो इस बछड़े को अपने बेटे के जैसे पालेगा | हरिराम का दिन उसके बछड़े से ही शुरू होता और उसी पर ख़त्म होता वो रात दिन उसकी सेवा करता और उसी से अपने मन की बात करता | कुछ समय बाद बछड़ा बैल बन गया | उसकी जो सेवा हरिराम ने की थी उससे वो बहुत ही सुंदर और बलशाली बन गया था |

गाँव के सभी लोग हरिराम के बैल की ही बाते किया करते थे | किसानों के गाँव में बैल की भरमार थी पर हरिराम का बैल उन सबसे अलग था | दूर-दूर से लोग उसे देखने आते थे |हर कोई हरिराम के बैल के बारे में बाते कर रहा था |

हरिराम भी अपने बैल से एक बेटे की तरह ही प्यार करता था भले खुद भूखा सो जाये लेकिन उसे हमेशा भर पेट खिलाता था एक दिन हरिराम के स्वप्न में शिव का नंदी बैल आया उसने उससे कहा कि हरिराम तुम एक निस्वार्थ सेवक हो तुमने खुद की तकलीफ को छोड़ कर अपने बैल की सेवा की हैं इसलिये मैं तुम्हारे बैल को बोलने की शक्ति दे रहा हूँ | इतना सुनते ही हरिराम जाग गया और अपने बैल के पास गया | उसने बैल को सहलाया और मुस्कुराया कि भला एक बैल बोल कैसे सकता हैं तभी अचानक आवाज आई बाबा आपने मेरा ध्यान एक पुत्र की तरह रखा हैं मैं आपका आभारी हूँ और आपके लिए कुछ करना चाहता हूँ यह सुनकर हरिराम घबरा गया उसने खुद को संभाला और तुरंत ही बैल को गले लगाया | उसी समय से वह अपने बैल को नंदी कहकर पुकारने लगा | दिन भर काम करके आता और नंदी से बाते करता |

गरीबी की मार बहुत थी नंदी को तो हरिराम भर पेट देता था लेकिन खुद भूखा सो जाता था यह बात नंदी को अच्छी नहीं लगी उसने हरिराम से कहा कि वो नगर के सेठ के पास जाये और शर्त रखे कि उसका बैल नंदी सो गाड़ी खीँच सकता हैं और शर्त के रूप में सेठ से हजार मुहरे ले लेना | हरिराम ने कहा नंदी तू पागल हो गया हैं भला कोई बैल इतना भार वहन कर भी सकता हैं मैं अपने जीवन से खुश हूँ मुझे यह नहीं करना लेकिन नंदी के बार-बार आग्रह करने पर हरिराम को उसकी बात माननी पड़ी |

एक दिन डरते-डरते हरिराम सेठ दीनदयाल के घर पहुँचा | दीनदयाल ने उससे आने का कारण पूछा तब हरिराम ने शर्त के बारे में कहा | सेठ जोर जोर से हँसने लगा बोला हरिराम बैल के साथ रहकर क्या तुम्हारी मति भी बैल जैसी हो गई हैं अगर शर्त हार गये तो हजार मुहर के लिये तुम्हे अपनी झोपड़ी तक बैचनी पड़ेगी |यह सुनकर हरिराम और अधिक डर गया लेकिन मुँह से निकली बात पर मुकर भी नहीं सकता था|

शर्त का दिन तय किया गया और सेठ दीनदयाल ने पुरे गाँव में ढोल पिटवाकर इस प्रतियोगिता के बारे गाँव वालो को खबर दी और सभी को यह अद्भुत नजारा देखने बुलाया | सभी खबर सुनने के बाद हरिराम का मजाक उड़ाने लगे और कहने लगे कि यह शर्त तो हरिराम ही हारेगा | यह सब सुन सुनकर हरिराम को और अधिक दर लगने लगा और उससे नंदी से घृणा होने लगी वो उसे कौसने लगा बार बार उसे दोष देता और कहता कि कहाँ मैंने इस बैल को पाल लिया मेरी अच्छी भली कट रही थी इसके कारण सर की छत से भी जाऊँगा और लोगो की थू थू होगी वो अलग | अब हरिराम को नंदी बिलकुल भी रास नहीं आ रहा था |

वह दिन आ गया जिस दिन प्रतियोगिता होनी थी | सौ माल से भरी गाड़ियों के आगे नंदी को जोता गया और गाड़ी पर खुद हरिराम बैठा | सभी गाँव वाले यह नजारा देख हँस रहे थे और हरिराम को बुरा भला कह रहे थे | हरिराम ने नंदी से कहा देख तेरे कारण मुझे कितना सुनना पड़ रहा हैं मैंने तुझे बेटे जैसे पाला था और तूने मुझे सड़क पर लाने का काम किया | हरिराम के ऐसे घृणित शब्दों के कारण नंदी को गुस्सा आगया और उसने ठान ली कि वो एक कदम भी आगे नहीं बढ़ायेगा और इस तरह हरिराम शर्त हार गया सभी ने उसका मजाक उड़ाया और उसे अपनी झोपड़ी सेठ को देनी पड़ी |
अब हरिराम नंदी के साथ मंदिर के बाहर पड़ा हुआ था और नंदी के सामने रो रोकर उसे कोस रहा था उसकी बाते सुन नंदी को सहा नहीं गया और उसने कहा बाबा हरिराम यह सब तुम्हारे कारण हुआ | यह सुन हरिराम चौंक गया उसने गुस्से में पूछा कि क्या किया मैंने ? तुमने भांग खा रखी हैं क्या ? तब नंदी ने कहा कि तुम्हारे प्रेम के बोल के कारण ही भगवान ने मुझे बोलने की शक्ति दी | और मैंने तुम्हारे लिये यह सब करने की सोची लेकिन तुम उल्टा मुझे ही कोसने लगे और मुझे बुरा भला कहने लगे तब मैंने ठानी मैं तुम्हारे लिये कुछ नहीं करूँगा लेकिन अब मैं तुमसे फिर से कहता हूँ कि मैं सो गाड़ियाँ खींच सकता हूँ तुम जाकर फिर से शर्त लगाओ और इस बार अपनी झोपड़ी और एक हजार मुहरे की शर्त लगाना |

हरिराम वही करता हैं और फिर से शर्त के अनुसार सो गाड़ियाँ तैयार कर उस पर नंदी को जोता जाता हैं और फिर से उस पर हरिराम बैठता हैं और प्यार से सहलाकर उसे गाड़ियाँ खीचने कहता हैं और इस बार नंदी यह कर दिखाता हैं जिसे देख सब स्तब्ध रह जाते हैं और हरिराम शर्त जीत जाता हैं | सेठ दीनदयाल उसे उसकी झोपड़ी और हजार मुहरे देता हैं |

कहानी की शिक्षा :

*प्रेम के बोल कहानी से यही शिक्षा मिलती हैं कि जीवन में प्रेम से ही किसी को जीता जा सकता हैं | कहते हैं प्रेम के सामने ईश्वर भी झुक जाता हैं इसलिये सभी को प्रेम के बोल ही बोलना चाहिये |
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दीपक सूर्य का प्रतिनिधित्व करता है। दीपक से हम ऊंचा उठने की प्रेरणा प्राप्त करते हैं।
दीप ज्योति से पापों का क्षय होता है। शत्रुपक्ष शांत होता है। आयु, आरोग्य, पुण्य, सुख की प्राप्ति होती है।
शास्त्रों में कहा गया है दीपक सदैव विषम संख्या 1,3,5, 7 व 9 में जलाने चाहिए।
इससे वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का निर्माण होता है। सम संख्या 2,4,6 व 8 में जलाने से नकारात्मक ऊर्जा का निर्माण होता है, जो सब प्रकार से हानि करती है।
दीपक की लौ पूर्व दिशा की ओर रखने से आयु, दक्षिण की ओर रखने से हानि, पश्चिम की ओर से रखने से दुख, उत्तर की ओर रखने से धन, स्वास्थ्य और समृद्धि आती है।
दीपक एक बार जलाकर बुझाना अनिष्ट को निमंत्रण देना होता है।
घी का दीपक सकारात्मक ऊर्जा को जन्म देता है। आरती का अर्थ है पूरी श्रद्धा के साथ परमात्मा की भक्ति में डूब जाना।
आरती को नीराजन भी कहा जाता है। नीराजन का अर्थ है विशेष रूप से प्रकाशित करना।
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((((((( हमेशा मुस्कुराइए )))))))
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एक कवि एक बाग़ से गुजर रहे थे, बाग़ में हजारों फूल खिले थे सारे फूल मुस्कुराते नजर आ रहे थे, उस बाग़ का नजारा स्वर्ग के समान था।
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कवि महोदय एक फूल के पास गए और बोले – मित्र तुम कुछ दिनों में मुरझा जाओगे, तुम कुछ दिनों में इस मिटटी में मिल जाओगे। तुम फिर भी मुस्कुराते रहते हो, इतनी ताजगी से खिले रहते हो, क्यों ? फूल कुछ ना बोला …….
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इतने में एक तितली कहीं से उड़ती हुई आई और फूल पर बैठ गयी। काफी देर तक तितली ने फूल की ताजगी का आनंद उठाया और फिर उड़ चली।
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अब कुछ देर बाद एक भंवरा आया और फूल के चारों ओर घूमते हुए मधुर संगीत सुनाया फिर फूल पर बैठ कर खुशबू बटोरी और फिर से उड़ चला।
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एक मधुमक्खी झूमती हुई आई और फूल पर आकर बैठ गयी, ताजा और सुगन्धित पराग पाकर मधुमक्खी बहुत खुश हुई और शहद का निर्माण करने उड़ चली।
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एक छोटा बच्चा बाग़ में अपनी माँ के साथ खेलने आया। खिलते फूल को देखकर उसका मन बहुत प्रसन्न हुआ। उसने कोमल हाथों से फूल को स्पर्श किया और खुश होता हुआ फिर से खेल में लग गया।
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अब फूल ने कवि से कहा – देखा, पल भर के लिए ही सही लेकिन मेरे जीवन ने ऐसे ही ना जाने कितने लोगों को खुशियां दी हैं। इस छोटे से जीवन में ही मैंने बहुत सारे चेहरों पर मुस्कान बिखेरी है।
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मुझे पता है कि कल इस मुझे इस मिटटी में मिल जाना है लेकिन इस मिटटी ने ही मुझे ये ताजगी और सुगंध दी है तो फिर इस मिटटी से मुझे कोई शिकायत नहीं है।
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मैं मुस्कुराता हूँ, क्यूंकि मैं मुस्कुराना जानता हूँ
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मैं खिलता हूँ क्यूंकि मैं खिलखिलाना जानता हूँ
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मुझे अपने मुरझाने का गम नहीं है। मेरे बाद कल फिर इस मिटटी में नया फूल खिलेगा, फिर से ये बाग सुगन्धित हो जाएगा। ना ये ताजगी रुकेगी और ना ही ये मुस्कराहट। यही तो जीवन है।
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दोस्तों आपकी एक छोटी सी मुस्कराहट भी कई लोगों के चेहरों पर मुस्कान ला सकती है। हमेशा मुस्कुराइए, जीवन चलता रहेगा। आज आप हैं कल आप की जगह कोई और होगा।
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अगर आप एक अध्यापक हैं और जब आप मुस्कुराते हुए कक्षा में प्रवेश करेंगे तो देखिये सारे बच्चों के चेहरों पर मुस्कान छा जाएगी।
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अगर आप डॉक्टर हैं और मुस्कराते हुए मरीज का इलाज करेंगे तो मरीज का आत्मविश्वास दोगुना हो जायेगा।
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जब आप मुस्कुराते हुए शाम को घर में घुसेंगे तो देखना पूरे परिवार में खुशियों का माहौल बन जायेगा।
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अगर आप एक बिजनेसमैन हैं और आप खुश होकर कंपनी में घुसते हैं तो देखिये सारे कर्मचारियों के मन का प्रेशर कम हो जायेगा और माहौल खुशनुमा हो जायेगा।
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अगर आप दुकानदार हैं और मुस्कुराकर अपने ग्राहक का सम्मान करेंगे तो ग्राहक खुश होकर आपकी दुकान से ही सामान लेगा।
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कभी सड़क पर चलते हुए अनजान आदमी को देखकर मुस्कुराएं, देखिये उसके चेहरे पर भी मुस्कान आ जाएगी।
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मुस्कुराइए, क्यूंकि मुस्कराहट के पैसे नहीं लगते ये तो ख़ुशी और संपन्नता की पहचान है।
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मुस्कुराइए, क्यूंकि आपकी मुस्कराहट कई चेहरों पर मुस्कान लाएगी।
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मुस्कुराइए, क्यूंकि ये जीवन आपको दोबारा नहीं मिलेगा।

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((((((( जय जय श्री राधे )))))))
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एक सब्ज़ी वाला था, सब्ज़ी की पूरी दुकान साइकल पर लगा कर घूमता रहता था ।"प्रभु" उसका तकिया कलाम था । कोई पूछता आलू कैसे दिये, 10 रुपये प्रभु । हरी धनीया है क्या ? बिलकुल ताज़ा है प्रभु। वह सबको प्रभु कहता था । लोग भी उसको प्रभु कहकर पुकारने लगे।
एक दिन उससे किसी ने पूछा तुम सबको प्रभु-प्रभु क्यों कहते हो, यहाँ तक तुझे भी लोग इसी उपाधि से बुलाते हैं और तुम्हारा कोई असली नाम है भी या नहीं *?

*सब्जी वाले ने कहा है न प्रभु , मेरा नाम भैयालाल है*।

*प्रभु, मैं शुरू से अनपढ़ गँवार हूँ। गॉव में मज़दूरी करता था, एक बार गाँव में एक नामी सन्त की कथा हुईं कथा मेरे पल्ले नहीं पड़ी, लेकिन एक लाइन मेरे दिमाग़ में आकर फँस गई , उन संत ने कहा हर इन्सान में प्रभु का वास हैं -तलाशने की कोशिश तो करो पता नहीं किस इन्सान में मिल जाय और तुम्हारा उद्धार कर जाये, बस उस दिन से मैने हर मिलने वाले को प्रभु की नज़र से देखना और पुकारना शुरू कर दिया वाकई चमत्त्कार हो गया दुनिया के लिए शैतान आदमी भी मेरे लिये प्रभु रूप हो गया । ऐसे दिन फिरें कि मज़दूर से व्यापारी हो गया सुख समृद्धि के सारे साधन जुड़ते गये मेरे लिये तो सारी दुनिया ही प्रभु रूप बन गईं।*🙏
लाख टके की बात
जीवन एक प्रतिध्वनि है आप जिस लहजे में आवाज़ देंगे पलटकर आपको उसी लहजे में सुनाईं देंगीं। न जाने किस रूप में मालिक☝ मिल जाये

जय राम जी की
🙏🙏🙏
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