लोग कहते हैं की बलात्कार के खिलाफ कानून बनाओ , जरुर बनाओ पर कानून से पहले इंसान तो बनाओ

देव आनंद, राजेश खन्ना, विनोद खन्ना, अमिताभ, इत्यादि ने नीव रखी , फिर अजय देवगन, अक्षय कुमार , खान बंधू ने इस पर दिवार बनायीं और अब सन्नी लियोने छत रखने की तय्यारी में है , और लोग कहते हैं की बलात्कार के खिलाफ कानून बनाओ , जरुर बनाओ पर कानून से पहले इंसान तो बनाओ , टीवी पर ऐसा दिखाओ जिस से युवा वर्ग देश के लिए जान दे सके ना की लड़कियों के लिए , इतने सरे गाने बन चुके इस प्यार के ऊपर , पर असली प्यार जो की माँ बाप देते हैं भाई बहन देती है उसे कोई नहीं समझ पाया , इससे ज्यादा हास्यास्पद और क्या होगा की इंसान पहले ख़ूबसूरती देखता है , जवानी देखता है और फिर जब उसे लगता है की हाँ वो उसके जिस्म से आकर्षित हो रहा है तो कहने लगता है की मुझे उससे प्यार हो गया , हा हा हा हा , अरे जवानी के खून कभी किसी बदसूरत से तो तुझे प्यार नहीं हुआ , क्या प्यार में भी शर्त लागु होने लग गई . मैंने तो सुना है की प्यार में कोई शर्त नहीं होती . कुछ बेचारे फितरती अच्छे लोग होते हैं वो फिल्मो के दुखी गाने सुनकर खुदको कमजोर कर रहे हैं . अब निर्माता लोग कहते हैं की जिसकी मांग होती है वही बाजार में चलता है , युवा वर्ग अश्लील फिल्मो से जल्दी आकर्षित होता है . पर कोई उन निर्माताओ से पूछे की क्या तुम्हारी देश और समाज के प्रति कोई जिम्मेदारी नहीं है क्या , क्या तुम हर जिम्मेदारी को अपने लालच से दबा दोगे . तुम्हारा छोटा बच्चा भी बहार घूमने की मांग करता है क्या तुम वो मांग पूरी कर दोगे , वो शराब पीने की मांग भी करेगा तुम आसानी से पूरी कर दोगे क्या , चोरी करने से भी पैसा मिलता है , तुम्हारी फिल्मे नहीं चले तो चोरी करना भी तुम्हारी मांग हो जायेगी करोगे क्या पूरी . हर भागने वाली लड़की इन फिल्मो से प्रभावित है , हर बलात्कारी इस अश्लीलता से प्रभावित है . हर सीरियल , विज्ञापन तब तक सफल नहीं होता जब तक उसमे कम कपडे पहने कोई लड़की नहीं आती , और ३ घंटे की फिल्म में लड़की इतनी आसानी से पट जाती है की पूछो मत , विज्ञापनों को देखकर ऐसा लगता है की २०२० का भारत का यही लक्ष्य है की हर लड़के की गर्ल फ्रेंड बने , हनी सिंह कह रहा है की भोग विलास नहीं किया तो तुम्हारा जीना बेकार है , दारू पियो और भोग करो . आपने कभी देशभक्ति की फिल्म तो देखि ही होंगी जब उन्हें देखकर खून गर्म होने लगता है , देशभक्ति आने लगती है तो अश्लील फिल्मो को देखकर भी फर्क तो आएगा ही, ये अश्लील फिल्मे किशोरावस्था में क्या प्रभाव डालती हैं आप समझ सकते हो, इनसे प्रभावित होकर लोग गर्ल फ्रेंड बनाने लगते हैं , और कही न कही ये मज़बूरी भी है हार्मोन्स की जो हमारे समाज में देरी से होती हुई शादियों की देन है . अब किसी लड़के की गर्ल फ्रेंड नहीं बनी तो वो खुदको ठगा ठगा महसूस करता है , तनाव में रहने लग जाता है , ये तनाव लड़कियों के प्रति नफरत में बदल जाता है , वो कहने लगता है की ये लड़किया तो साली होती ही ऐसी हैं , और इन्ही तनाव में आये लोगो में से कोई भी बलात्कार की घटना को अंजाम दे देता है . इसलिए हमें जनसंक्या नियंत्रित करने , समाज का ढांचा बदलने और ये अश्लीलता रोकने की जरुरत है कानून बनाने से कही ज्यादा!!
@pooja pandey..

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