Post has shared content
हिंदी शायरी, सुविचार एवं जोक्स के लिए
      फॉलो करे→ +शुद्ध Desi ज्ञान
Photo

Post has shared content
जन्मदिन की हार्दिक बधाई लाल बहादुर शास्त्री जी |शत् शत् नमन
------------------+-----------
ये वही शास्त्री जी हैं, जिन्होंने अपने प्रधानमंत्री रहते लाहौर पर कब्ज़ा जमाया था. पुरे विश्व ने जोर लगा लिया लेकिन लाहौर देने से इनकार कर दिया था | आख़िरकार ताशकंद में उनकी रहस्यमय मौत हो गयी, जिसका आज तक पता नहीं लगाया जा सका है |
1. जब इंदिरा शाश्त्रीजी के घर (प्रधान मंत्री आवास ) पर पहुँची तो कहा कि यह तो चपरासी का घर लग रहा है, इतनी सादगी थी हमारे शास्त्रीजी में...
2. जब 1965 में पाकिस्तान से युद्ध हुआ तो वे भारतीय सेना का मनोबल इतना बढ़ा दिये थे कि भारतीय सेना पाकिस्तानी सेना को गाजर - मूली की तरह काटती चली गयी थी और पाकिस्तान का बहुत बड़ा हिस्सा जीत लिया था।
3. जब भारत पाकिस्तान का युद्ध चल रहा तो अमेरिका ने भारत पर दबाव बनाने के लिए कहा था कि भारत युद्ध खत्मकर दे नहीं तो अमेरिका भारत को गेहूँ देना बंद कर देगा,तो इसके जवाब में शास्त्री जी ने कहा था कि हम स्वाभिमान से भूखे रहना पसंद करेंगे,किसी के सामने भीख मांगने की जगह. वे देशवासियों से निवेदन किये थे कि जब तक अनाज की व्यवस्था नहीं हो जाता, तब तक सब लोग सोमवार का व्रत रखना चालू कर दें और खाना कम खाया करें।
4. जब शास्त्री जी ताशकंद समझोते के लिए जा रहे थे तो उनकी पत्नी ने कहा था कि अब तो इस पुरानी फटी धोती की जगह नई धोती खरीद लीजिये, तो शास्त्री जी ने कहा इस देश मे अभी भी ऐसे बहुत से लोग हैं जो फटी हुई धोती पहनते हैं. इसलिए मै अच्छे कपडे कैसे पहन सकता हूँ? क्योंकि वे उन गरीबों का ही नेता थे अमीरों के नहीं. वे उनकी फटी पुरानी धोती को अपने हाथ से सिलकर ताशकंद समझोते के लिए गए।
5. जब पाकिस्तान से युद्ध चल रहा था तो शास्त्री जी ने देशवासियों से कहा कि युद्ध में बहुत रूपये खर्च हो सकता है. इसलिए सभी लोग अपने फालतू के खर्च कम कर दें और जितना हो सके सेना को धन राशि देकर सहयोग करें । खर्च कम करने वाली बात शास्त्री जी ने अपने खुद के दैनिक जीवन में भी उतारी । उन्होने अपने घर के सारे काम करने वाले नौकरों को हटा दिया था और वे खुद ही अपने काम करते थे.
6. शास्त्री जी दिखने में जरूर छोटे थे, पर वे सच में बहुत बहादुर और स्वाभिमानी थे.
7. जब शास्त्री जी की मृत्यु हुई तो कुछ नीच लोगों ने उन पर इल्ज़ाम लगाया की वे भ्रस्ट थे. पर जांच होने के बाद पता चला कि उनके बैंक खाते में मात्र365/- रूपये थे। इससे पता चलता है कि शास्त्री जी कितने ईमानदार थे.
8. शास्त्री जी अभी तक के एक मात्र ऐसे प्रधान मंत्री रहे हैं जिन्होंने देश के बजट मे से 25 प्रतिशत सेना के ऊपर खर्च करने का फैसला लिया था । शास्त्री जी हमेशा कहते थे कि देश का जवान और किसान सबसे महत्वपूर्ण हैं. इसलिए इन्हे कोई भी तकलीफ नहीं होना चाहिए. शास्त्री जी ने 'जय जवान जय किसान' का नारा दिया.
9. चर्चा है कि जब शास्त्रीजी ताशकंद गए थे तो उन्हें जहर देकर मार दिया गया था और देश मे झूठी खबर फैला दी गयी थी की शास्त्री जी की मृत्यु दिल का दौरा पड़ने से हुई । और आज तक इस बात पर से पर्दा नहीं हटा है.
10 शास्त्री जी जातिवाद के खिलाफ थे. इसलिए उन्होने अपने नाम के आगे श्रीवास्तव लिखना बंद कर दिया था ।
हम धन्य हैं कि हमारी भूमि पर ऐसे स्वाभिमानी और देश भक्त इंसान ने जन्म लिया । यह बहुत गौरव की बात है कि हमें शास्त्री जी जैसे प्रधान मंत्री मिले.
जय जवान जय किसान!
शास्त्री जी ज़िंदाबाद!!
इंकलाब ज़िंदाबाद!!!
Photo

Post has shared content

Post has shared content

Post has shared content

Post has shared content
दुनिया में सम्मान लेकिन घर में सत्ता के लालचियों से अपमान ....आसान नहीं है मोदी होना ....
Photo

Post has shared content
कोई भी समझदार व्यक्ति मोदी जी की ईमानदारी पर शक नही करेगा ये तो विश्वाश है
Photo

Post has shared content
सारी हकीकत सामने आ जाएंगी
Photo

Post has shared content
विश्वकर्मा पूजा 2018 : विधि विधान से विश्वकर्मा पूजा करने से बढ़ेगा कारोबार, जानें पूजा का मुहूर्त

भगवान विश्वकर्मा को देव शिल्पी कहा जाता है। उन्होंनेसतयुग में स्वर्गलोक, त्रेतायुग में लंका, द्वापर में द्वारका औरकलियुग में जगन्नाथ मंदिर की विशाल मूर्तियों का निर्माणकिया है। ऋगवेद में इनके महत्व का वर्णन 11 ऋचाएंलिखकर किया गया है। 17 सितंबर को विश्वकर्मा जयंतिपर शुभ मुहूर्त में किया गया पूजन कारोबार में इजाफाकरने के साथ ही आपको धनवान भी बना सकता है।आइए जानते हैं क्या है इस साल भगवान विश्वकर्मा कीपूजा  शुभ मुहूर्त 

शुभ मुहूर्त 

इस साल वृश्चिक लग्न जो कि सुबह 10:17 बजे से 12:34 तक है  यह विशेष लाभकारी व सफलतादायी है, क्योंकिमंगल पराक्रम भाव में उच्च का बैठा है।

विधि-विधान से करें पूजा

भगवान विश्वकर्मा की पूजा विधि-विधान से करने पर विशेषफल प्रदान करती है। सबसे पहले पूजा के लिए जरूरीसामग्री जैसे अक्षत, फूल, चंदन, धूप, अगरबत्ती, दही, रोली, सुपारी, रक्षा सूत्र, मिठाई, फल आदि की व्यवस्था कर लें।इसके बाद फैक्ट्री, वर्कशॉप, ऑफिस, दुकान आदि केस्वामी को स्नान करके सपत्नीक पूजा के आसन पर बैठनाचाहिए। कलश को स्थापित करें और फिर विधि—विधान सेक्रमानुसार या फिर अपने पंडितजी के माध्यम से पूजा करें।पूजा धैर्यपूर्वक करें और सम्पन्न होने के बाद अपने ऑफिस, दुकान या फैक्टरी के साथियों व परिवार के साथ प्रसादग्रहण करने के बाद ही पूजा स्थान को छोड़ें।

विश्वकर्मा पूजा का आध्यात्मिक महत्व

भगवान विश्वकर्मा की पूजा हर व्यक्ति को करनी चाहिए।सहज भाषा में कहा जाए कि सम्पूर्ण सृष्टि में जो भी कर्मसृजनात्मक है, जिन कर्मो से जीव का जीवन संचालितहोता है। उन सभी के मूल में विश्वकर्मा है। अतः उनकापूजन जहां प्रत्येक व्यक्ति को प्राकृतिक ऊर्जा देता है वहींकार्य में आने वाली सभी अड़चनों को खत्म करता है।

17 सितंबर को ही क्यों होता है पूजन

भारत के कुछ भाग में यह मान्यता है कि अश्विन मास केप्रतिपदा को विश्वकर्मा जी का जन्म हुआ था, लेकिनआपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि लगभग सभीमान्यताओं के अनुसार यही एक ऐसा पूजन है जो सूर्य केपारगमन के आधार पर तय होता है। इस लिए प्रत्येक वर्षयह 17 सितम्बर को मनाया जाता है।

विश्वकर्मा भगवान का परिचय

स्कंद पुराण के अंतर्गत विश्वकर्मा भगवान का परिचय“बृहस्पते भगिनी भुवना ब्रह्मवादिनी। प्रभासस्य तस्य भार्याबसूनामष्टमस्य च। विश्वकर्मा सुतस्तस्यशिल्पकर्ता प्रजापति” श्लोक के जरिए मिलता है। इस श्लोक का अर्थ है महर्षिअंगिरा के ज्येष्ठ पुत्र बृहस्पति की बहन भुवना ब्रह्मविद्या कीजानकार थीं। उनका विवाह आठवें वसु महर्षि प्रभास केसाथ संपन्न हुआ था। विश्वकर्मा इन दोनों की ही संतान थे।विश्वकर्मा भगवान को सभी शिल्पकारों और रचनाकारों काभी इष्ट देव माना जाता है।
Photo

Post has shared content
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को उनके 68वे जन्मदिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं। ईश्वर आपको लम्बी उम्र व अच्छा स्वास्थ्य प्रदान करें।

आप जिये हजारों हजार साल
साल के दिन हो पचास हज़ार

#Our_Great_PM

via MyNt
Photo
Wait while more posts are being loaded