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Rajiv Khatri

Politics  - 
Rajiv Khatri was in a video call
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#Gandhi AND #NonViolence 

#deepthoughts  


Hi,


He who walks on the Path of Non-Violence is the BIGGEST BIGGEST BIGGEST FOOL. I speak from Personal Experience. 

#Violence is NOT the  #evil it is made out to be by extremely FOOLISH people. Violence is nothing but Man-Hood (Action). We loose everything if we stop doing Man-Hood. All  #Religions are nothing but interpretations of  #Reality and NOT Reality. If we over-intellectualize things, we make them meaningless. Taking an Absolute view of things is extremely FOOLISH. 

Those who practice Non-Violence say that we get what we give. By that logic we should stop performing any action as all actions are inherently good and evil at the same time. They forget that even violent persons deserve and do attain  #Moksh by performing the required penance. In Reality, there is no such thing as good and evil. There is only Being and Non-Being.

If we want to become better Human beings, just develop kindness towards others. That is all that is required.

If we practice Non-Violence, we cannot perform the most basic thing of protecting our Women.

On my part, I have never practiced any  #Religion and never will in the future also. I got hooked onto Non-Violence because i am a very violent man and wanted to change myself. Non-Violence destroyed me completely from the inside and today i have been reduced to NOTHING. I have given up Non-Violence and will NEVER practice it again even if  #God tells me to. 

Non-Violence is ABSOLUTE SHIT.



Warm Regards,
Rajeev
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दरवाज़े पर खड़ा था एक नंगा फकीर, कह रहा था- मैं हूं गांधी !

‘ पर यही सत्य है बाबा ! यह देश ठगा गया है। आपने आज़ादी दिलायी। पर इसके मीठे फल खाना हमारे नसीब में नहीं लिखा हुआ है। हम पूरी तरह आज़ाद नहीं है। पहले अंग्रेज़ो के गुलाम थे, अब अपनों के ही गुलाम हो गये हैं। जितना इस देश को अंग्रेज़ो नहीं लूटा, उससे अधिक उसे अपने ही लूट रहे हैं। सर्वत्र लूट मची है। गरीब भारतीय पीसा जा रहा है। गरीब और गरीबी का नाम ले कर दुखी और परेशान भारतीयों को ठगा जा रहा हैं। अब हम रघुपति राघव राजा राम, सबको सनमति दे भगनवान नहीं गाते। हम गाते हैं-ठगों से छुटकारा दिलाओं राजा राम, भारत को बचाओं, है, भगवान !’http://nayabharat.co.in/gandhi-i-am-mohan-das-karamchand-gandhi/
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                      मधेपुरा लोक अभियोजक का अक्षर भैंस बराबर

बिहार में वर्ष 2011 में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव हुआ। इसी चुनाव के तहत मधेपुरा जिला के ग्वालपाङा प्रखंड अंतर्गत सरौनी ग्राम में भी नये सरपंच का चुनाव हुआ। इस बार ब्राह्मण टोला वार्ड संख्या चार की प्रत्याशी श्रीमती कुमकुम देवी को इस गाँव का सरपंच चुन लिया गया। अभी उन्हें इस पद पर निवार्चित हुए एक साल भी नहीं हुआ था कि प्रखंड विकास पदाधिकारी ग्वालपाङा को किए गए एक आरटीआइ के जवाब में यह बात सामने आई कि नव-निवार्चित सरपंच ने चुनाव के लिए भरे जाने वाले नाम-निर्देशन पत्र या शपथ पत्र में कई गलत सूचनाएँ भरी और कुछ सूचनाओं को छुपाया। यह जवाब पत्रांक संख्या 4487 दिनांक 31.05.2012 को प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा दिया गया।
                                                इस जवाब के साथ श्रीमती कुमकुम देवी के शपथ-पत्र की छाया-प्रति भी याचिकाकर्ता को उपलब्ध करायी गयी। इस नामांकन पत्र में उन्होंने अपने को समाजसेविका बताया। पर ग्रामीण बताते है कि वो अपने चापाकल तक को मुसीबत में छूने नहीं देती तो समाजसेवा क्या खाक करेगी! इस पत्र को पढने पर यह पता चला कि एक कालम में उन्हें यह बताना था कि क्या उनके ऊपर किसी भी न्यायालय में कोई वाद चल रहा है? इसके जवाब में उन्होंने ''शून्य'' लिख दिया। जबकि मधेपुरा जिला न्यायालय में उनके खिलाफ वाद संख्या 594\2007 अब भी लंबित है। अगले कालम में उन्हें यह बताना था कि क्या उनके विरूद्ध किसी वाद में न्यायालय द्वारा कोई संज्ञान लिया गया है? इसके जवाब में भी उन्होंने ''शून्य'' लिख दिया। सच मालूम करने पर यह पता चला कि इसी वाद में मधेपुरा न्यायालय ने संज्ञान भी लिया है। ऐसे ही एक कालम में उन्हें यह बताना था कि क्या उनके द्वारा किसी वाद में ''जमानत'' ली गई है? बिना किसी हिचक के उन्होंने इसके जवाब में भी ''शून्य'' लिख दिया। ज्ञात करने पर पता चला कि वाद संख्या 549\2007 में ही अन्य अभियुक्तों के साथ ही श्रीमती कुमकुम देवी को भी जमानत दी गई थी। इतना ही नहीं उन्होंने अपनी पारिवारिक स्थिति का सही ब्यौरा नहीं दिया। मसलन उन्होंने यह बात छुपाई कि उनके पति ने तीन शादियाँ की है और सिर्फ वो ही अपने बच्चों के साथ अपने पति के घर में रहती है।
                                                                            इस कहानी का दूसरा और दिलचस्प पहलू भी है। दिनांक 28-06-2012 का एक आवेदन जिला पदाधिकारी सह जिला निर्वाचन पदाधिकारी को मिला। इस आवेदन में ऊपर लिखित सारे तथ्यों का साक्ष्यों सहित हवाला देते हुए आवेदनकर्ता की तरफ से यह माँग की गई कि गलत एवं गुमराह करने वाली सूचना देने वाली इस सरपंच की सदस्यता रद्द की जाय। जिला पदाधिकारी ने शुरूआत में यह मामला मधेपुरा न्यायालय के लोक अभियोजक को सौंप दिया। साथ ही यह स्पष्ट किया कि लोक अभियोजक इस मामले में आरोपों की जाँच करे तथा जाँचोंपरांत अपनी राय दे। प्राप्त जानकारी के अनुसार लोक अभियोजक ने सभी आरोपों को सही पाया तथा श्रीमती कुमकुम देवी के प्रस्तावक को भी कटघरे में खङा किया। अपनी राय देते हुए उन्होंने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए श्रीमती कुमकुम देवी की सदस्यता रद्द की जा सकती है। यह जवाब जिला पदाधिकारी को 21-01-2013 को सौंप दिया गया।
                                                                      अब तक इस मामले को उजागर हुए तथा जिला पदाधिकारी को ज्ञात हुए लगभग सात महीने हो गए थे। इस जवाब को जिला प्रशासन द्वारा दबा दिया गया। आवेदक के पूछताछ करने पर हर बार उसे यह भरोसा दिलाया जाता रहा कि मामले को गंभीरता से लिया गया है तथा तेजी से कार्रवाई की जा रही है। परंत् तेजी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दिनांक 21-01-2013 को लोक अभियोजक से जवाब प्राप्त हो जाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। तकरीबन 05 महीने पश्चात पत्रांक संख्या 347 के द्वारा  इस मामले की जाँच जिला पदाधिकारी ने उदाकिशुनगंज के अनुमंडल पदाधिकारी को सौंपी। अनुमंडल पदाधिकारी ने जाँच पदाधिकारी की हैसियत से अपने पत्रांक 1885-2 दिनांक 13-07-2013 के तहत आवेदक को सारे साक्ष्य सात दिनों के अंदर अपने कार्यालय में जमा करने को कहा। गौरतलब है कि अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा यह पत्र 13-07-2013 को लिखा गया था। इस हिसाब से साक्ष्य 21-07-2013 तक उपलब्ध करा दिये जाने थे। जबकि यह पत्र आवेदक को 13-08-2013 को डाक द्वारा भेजा गया। आवेदक द्वारा इसे 17-08-2013 को प्राप्त किया गया और दो दिनों के अंदर सारे साक्ष्य पुन: उपलब्ध कराये गये। यह जाँच का विषय है कि अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा 13-07-2013 को लिखा  गया पत्र एक महीने तक अनुमंडल कार्यालय में ही क्यों दबा कर रखा गया?
         मधेपुरा जिला  प्रशासन अब भी इस मामले पर चुप्पी साधे हुए है। जबकि ऐसे ही एक मामले में दरभंगा जिले में एक नवनिर्वाचित मुखिया की राज्य निर्वाचन आयोग ने सदस्यता रद्द कर दी है। इस मामले में प्रशासन की अब तक की चुप्पी किसी असंवैधानिक साजिश की ओर इशारा कर रही है। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि संवैधानिक पदों पर बैठे अफसरों की ऐसे लोकहित के मसलों पर सुस्ती श्रीमती कुमकुम देवी जैसी चालाक प्रत्याशियों को पद पर बने रहने, कानून व्यवस्था से जब-तब खेलने तथा संवैधानिक आस्थाओं का माखौल उङाने की भरपूर छूट देती है। इस मामले को अब तकरीबन 18 महीने हो चुके है। शायद यह जाँच अगले सरपंच के चुनाव तक पूरी हो जाय!

                                                                      
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Roshan Jha

Politics  - 
 
AAP should form a govt. in delhi or not? 
Today this question is very critical and highlighted point in every news channels and news papers. and serving on table of every viewer and reader in the form of breaking news. Every scholar's scholasticism will be different on this issue.
Arvind Kejriwas has been trapped in this game, cozz he is looking that govt. can be formed easily but question is of its stability and AAP's promises and dreams which he shown to delhities.  If he unable to comes on that issue and fails to fulfill its promise, then where will be Arvind Kejriwal. So really today AAP is standing on a very humorous part but yes let see. I think everything will be right. 
But yes, one change every one can notice, that politics has been changed after AAP's success. So really it is a very good directive change for Indian politics.
My all wishes is with Arvind Kejriwal Ji.....................
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अंतत: पटना बम ब्लास्ट के पीछे जिन लोगों का हाथ था, उस रहस्य से पर्दा उठ गया। पूरा देश जिन पर संदेह कर रहा था, वह सच साबित हुआ। जिन्हें घटना को अंजाम देने के पीछे भगवा आतंकवाद की गंध आ रही थी, वे मौन हो गये। मीडिया ने भी गिरगिट तरह रंग बदल दिया। पर भगवा आतंकवाद शब्द के प्रणेता अब भी अपनी बात पर कायम है। और पूरी पार्टी उनकी धृष्टता पर मौन है।http://nayabharat.co.in/why-after-every-tragedy-events-they-try-to-find-out-smell-of-hidnu-terrorism-in-it/
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सत्ता का जहर पीने की लिए अकुलाहट है, तो मृत्यु से भय क्यों ?
Web link: http://nayabharat.co.in/if-you-want-governance-why-are-you-fearing-from-death/
सत्ता के शीर्ष पर बैठ कर लिया जाने वाला प्रत्येक निर्णय करोड़ो देशवासियों को प्रभावित करता है। किसी निर्णय से  करोड़ो लोग आहत हो सकते हैं। उनके मन में अपने नेता के प्रति क्रोध का भाव उत्पन्न हो सकता है। क्रोध   विवेक को मंद कर देता और जुनून जागृत करता है। जुनून अंधा होता है, उसे उचित अनुचित का भान नहीं रहता। ब्लयू स्टार ऑपरेशन का निर्णय इंदिरा जी के जीवन के लिए घातक बन गया। उनका सुरक्षाकर्मी भी आहत सिख था, वह अपने अंधे जुनून में वह सब कुछ कर बैठा जो उसे नहीं करना था।
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परन्तु भाजपा है कि मानती नहीं। पता नहीं क्यों वह अपने निश्चित उद्धेश्य से भटक रही है। अपने प्रत़िद्वंद्वी पर करारे वाक्य प्रहार और सोशल मीडिया के नारों से ही यह समझ बैठी है कि ऐसा करने से ही वह कठिन संघर्ष में विजय हो कर, सत्ता के नज़दीक पहुंच जायेगी। अब भी समय है। पानी सिर से ऊपर नहीं गुज़रा है। भाजपा नेताओं को ठंड़े दिमाग से जनता से कैसे जुड़ा जाय, इस संबंध में  सार्थक रणनीति बनानी होगी। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है, क्योंकि भाजपा से वे भारतीय नागरिक आशाएं संजाये बैठे है, जो एक बेहद भ्रष्ट और अलोकतंत्री पार्टी, जिसमें राजनेता के बजाय चापलुसों का बाहुल्य है, देश को निज़ात दिलाना चाहते हैंhttp://nayabharat.co.in/is-bjp-capable-to-change-the-power-in-center/।
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Sangram Petekar's profile photo
 
No
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हमें और जख्म न दो, बहुत दर्द होता है- आपके दिये हुए जख्मों की पीड़ा से हम कराह रहे हैं
Web link of post: http://nayabharat.co.in/we-not-need-beg-from-government-we-need-work-and-fair-wages/

आपको  भूख का महामात्य हम क्या समझाए। आपको भूख लगती कहां है। आपका पेट तो हमेशा भरा ही रहता है। आपको पेट भरने के लिए मेहनत भी नहीं करनी पड़ती। पर हम जानते है कि इस पेट को भरने के लिए क्या-क्या जतन नहीं करने पड़ते। हम रोज कुआं खोद कर पानी पीने वाले लोग हैं। कभी कुआं खुदता ही नहीं। कभी उसमें पानी ही नहीं आता। कभी इतना कम आता है कि वह हमारी जरुरते पूरी नहीं कर पाता। हमारा परिवार प्यासा रह जाता है। तात्पर्य यह है कि कभी मजदूरी पर जा नहीं पाते। कभी जाते हैं, तो मजदूरी मिलती नहीं। कभी मिलती है, तो वह इतनी कम होती है कि पेट नहीं भरा पाता।  वजह यह है कि महंगाई ने हमारी कमर तोड़ दी है। धीरे-धीरे हर खाने-पीने की चीज़े हमारी पहुंच से बाहर हो रही है। देशी घी तो खाने की हमारी औकात ही नहीं बची है, किन्तु खाने का तेल भी अब हमारी पहुंच से बाहर हो रहा है। फिर सब्जी, ईधन  और मसाले में से किसी एक को छोड़ना पड़ता है, क्योंकि सभी का जुगाड़ कर नहीं पाते।
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Desh ko bachane ke liye ab media ke sahi role ki jaroorat hai.aur modi ji ki bhi.aur jaroori hai ki youth vote dene nikle
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Rajeev S's profile photoPramod Kumar's profile photo
2 comments
 
den whr do i...
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Bye bye whatzupp ?!
Now introducin new app called TELEGRAM with highspeed msg delivering capable to send files up to 1GB, nd also it features to share Word nd powerpoint files... group capacity 200 people...
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Ajanabi mann's profile photoRiyaz buchh's profile photo
 
IN KASHMIR SMS HAS BEEN BANNED ON PRE PAID MOBILE PHONES BY THE GOVT WHEN THERE IS VARIETY OF OPTIONS TO SUCH THINGS. PLEASE ASK OMER ABDULLA TO LIFT ITS BAN AS THE JUST ASPIRATIONS WITHIN THE HEARTS DON'T DIE BY SUCH THINGS. 
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मोदी लहर जहर नहीं, निरंकुश सत्तातंत्र लोकतंत्र के लिए कलंक है

क्या लोकतांत्रिक शासन प्रणाली में विपक्ष को सत्ता में आने का संवैधानिक अधिकार नहीं होता है ? क्या संविधान ने उन्हें यह अधिकार भी नहीं दिया है कि सत्ता पक्ष की दुर्बलताओं को जनता के समक्ष उजागर किया जाय ? जिन्हें लोकतंत्र में आस्था नही होती है, वे अपने विरोधियों के तर्कों का जवाब शालिनता और वजनी तर्कों से नहीं दे कर उनके प्रति जहर उगल कर देते हैं। उनके विरुद्ध अपमानजनक शब्दावली का प्रयोग करते हैं। क्या इसे लोकतंत्र की स्वस्थ परम्परा माना जा सकता है ? कौन सही है और कौन गलत ?  किसे शासन करने का जनादेश दिया जाय, यह अधिकार लोकतांत्रिक देश की जनता के पास होता है, किसी व्यक्ति विशेष के पास नहीं log on to read full post: http://nayabharat.co.in/modi-wave-is-not-poison-but-autocratic-power-structure-scourge-of-democracy/
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नेताओं, नौकरशाहों की विदेश यात्राओं, सेर सपाटों और सरकारी कर्मचारियों के वेतन का भार आम भारतीय नागरिक को ढोना पड़ता है।  सरकारी कार्यालयों में अपना काम कराने के लिए उसे रिश्वत और देनी पड़ती है। स्वास्थय, शिक्षा पर जो भी सरकारी खर्च करती है, उसका पैसा आम भारतीय देता हैं, किन्तु उसके बच्चों को सरकारी स्कूल के बजाय प्रार्इवेट स्कूलों में पढ़ने के लिए भेजना पड़ता है, क्योंकि वहां की पढ़ार्इ का स्तर निरन्तर घटिया होता जा रहा है। इसी तरह सरकारी अस्पतालों के बजाय उसे अपना इलाज प्रार्इवेट अस्पतालों के डाक्टरों से कराना पड़ता है, क्योंकि जिस संस्था के ‘आगे’ सरकार शब्द जुड़ा है, उस पर जनता का विश्वास नहीं रहा है। तात्पर्य है कि अपनी जरुरतों के लिए सरकार को पैसा भी दों और जरुरते पूरी करने के लिए अन्य उपाय करों। इस दोहरी मार से आम भारतीय त्रस्त है।http://nayabharat.co.in/if-you-need-our-vote-than-first-you-give-account-of-public-money/
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Nand Kishor Gupta's profile photo
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जीवन में आपने  कर्मयोग से जो कुछ पाया था, राजनीति की गंदगी में डूबकी लगा कर सब कुछ गवां बैठे हैं। आपकी सादगी, सच्चार्इ और र्इमानदारी युक्त उजली छवि पर कालिख पुत गयी। यह भाग्य की विडम्बना ही है कि आत्मविश्वास से लबालब 1991 का दबंग अर्थशास्त्री वित्तमंत्री, जिसका व्यक्तित्व प्रबल संकल्प शक्ति से दैदिप्यमान था, 2013 में एक थकाहारा मुसाफिर लग रहा है। एक ऐसा मुसाफिर, जो राजनीति के सफर में अपने जीवन भर की कमार्इ खो चुका है। अब लुटा-पिटा, थका-हारा, बुझा-बुझा सा अपने घर लौटने को आतुर लग रहा है।http://nayabharat.co.in/prime-minister-please-speak-the-truth-that-whole-country-wants-to-know/
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hey.. check this out.
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भारतीय मुसलमानों की अहमियत सियासी चोरस के बेजान मोहरों से अधिक नहीं है। वे मोहरे हैं, जिन्हें दांव पर लगा कर बाजी जीती जाती है। बदले उन्हें  अशिक्षा, गरीबी, तंगहाली और मजहबी जुनून तोहफे के रुप में बांटा जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है, ताकि उनकी हालत बद से बदत्तर ही बने रहे। वे हमेशा अपने आपको असुरक्षित समझते हुए उनकी शरण में जाते रहें और वे अपने सियासी सुखों के लिए उनका भरपूर फायदा उठाते रहें।http://nayabharat.co.in/why-wreak-chaos-on-madanis-statement/
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LOL!
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A deep look on the current scenario of the lok-sabha election.. What do you think can Narendra Modi led BJP can form government in 2014. And what you think what no of seats Modi can bring of BJP??
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Dr RamNath Dubey's profile photoAnirudh M's profile photo
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NaMo. will do meracle in

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