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सभी रचनाकारों से विशेष तह नये सदस्यों से पुनः अनुरोध है कि इस मंच पर हिंदी स्वरचित काव्य रचना या पद्य रचनाये डाले आप को विशेष कुछ भी कहना हो तो अपनी रचना के कमेंट मे लिख दें पर किसी दुसरे की रचना शेयर ना करें ना गद्य रचना डालें ना पूरे ब्लॉग को शेयर करें ब अपनी रचना ब्लॉग सहित शेयर करें।
सर परासरजी मंच के स्थापक उनका ये आदेश है वो कई महीनों से मंच पर नही आ रहे तो मौडरेटर होने के कारण मेरा उत्तर दायित्व इस और सहज ही ज्यादा बढ जाता है आप सब से अनुरोध है सभी सहयोग करें मेरे कार्य मे।
कुसुम कोठारी।
मंच के सभी प्रबुद्ध पाठकों और रचनाकारों का ध्यान आकृष्ट करना चाहूंगी कि कृपया मंच पर सिर्फ पद्य रचना ही डालें हिंदी पद्य रचनाऐं, ये इस मंच की श्री परासर जी द्वारा निर्देशित पहली शर्त हैं अच्छा हो एक बार नियमावली का पुनः पठन करें आप सभी हमारे महान साहित्यकार श्रेणी के अंतर गत साहित्यकारों के बारे मे ही सिर्फ गद्य रचनाऐं डाल सकते हैं हालांकि जो भी गद्य रचनाऐं आई है बहुत उत्कृष्ट है पर मंच का अपना एक उद्येश्य है और गरिमा है।
कृपा किसी कथन को अनर्थ न लेवें।
शुभ दिवस।
जय श्री कृष्णा ।
कुसुम कोठारी ।

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हाथी हाथ न चाहिये,चाहत और न, फूल ।
आरक्षण जो मेट दे,देना उसको तूल ।।
स्वर्ण सब मिलकर ठानो
देश हित क्या पहचानो

- नवीन श्रोत्रिय उत्कर्ष
श्रोत्रिय निवास बयाना
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ऐ दिल क्यों लौट के, फिर वहीं आता है।

क्या खोया इन राहों मे,
जो ढूंढ नही पाता है,
सूना मन का कोई कोना
खुद भी देख नही पाता है।

ऐ दिल क्यों लौट के....

हर लम्हे की कोई,
पहचान नही होती
फिर भी गुजरा लम्हा
बीत नही पाता है ।

ऐ दिल क्यों लौट के....

कौन सा अनुराग है ये
या कोइ मृगतृष्ना
भटके मन को कैसे
उन राहों से लाऊं ।

ऐ दिल क्यों लौट के....

कुसुम कोठारी ।
ऐ दिल
ऐ दिल
kotharikusum.blogspot.com

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रिश्तों का बहुमूल्य हार

माला टूटी मनके बिखरे
चुन चुन फिर माला गूंथी
रिश्तों के बहुमूल्य हार को
बिखर बिखर क्यों जाने देते
मोती तो गर पास हो पैसे
फिर मोल कर लायेगें
रिश्तों को गर खो बैठे तो
भला कहां फिर पायेगें
सारे दाम चुका कर भी
क्या फिरसे उन को पा जायेगें
टुटी माला फिर से जुड़ जाती
खोया रिश्ता कभी ना मिलता
इस लिये जब लगे टूटने रिश्ते
उन्हें तुरंत नव जीवन दे दो
संभाल उन्हें दो हाथों से
दिल में फिर जगह दे दो ।

कुसुम कोठारी ।
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