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Eid mubarak all friends
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🌹 #__सवाल_जवाब__# 🌹
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम —

सवाल:- सबसे पहला बादशाह कौन है…? जिसने सूली की सजा दी और किसको दी ?

जवाब:- फ़िरऔन पहला बादशाह है जिसने हाथ पैर काटने और सूली की सजा दी उन जादूगरों को जो हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम पर ईमान लाए थे |
(Khaza-E Nul Irfan,P 9,R 5)

सवाल:- सबसे पहले दुनियां में कौनसा जानवर बीमार हुआ ?
जवाब:- सबसे पहला जानवर “शेर” बीमार हुआ |
जो कश्ती-ए-नूह में सवार था ये शेर पहला जानवर है जो दुनियां में बीमार हुआ |
अबी इब्ने हातिम की रिवायत है कि रसूल अल्लाह सल्ल० ने फ़रमाया: कि हज़रत नूह अलैहिस्सलाम जब तमाम जानवरों को अपनी कश्ती में सवार कर चुके तो लोगों ने कहा कि शेर की मौजूदगी में बाकी जानवर कैसे आराम से रह सकेंगे | तब अल्लाह पाक ने शेर पर बुख़ार डाल दिया जिससे वह चुपचाप बैठा रहा इससे पहले जमीन पर ये बीमारी नहीं थी |

सवाल:- रूह कब्ज करने के लिए “मल्कुल मौत” कितने फ़रिश्तों को अपने साथ लेकर आते हैं ?
जवाब:- मोमिन की रूह कब्ज करने के लिए मल्कुल मौत अपने हमराह “रहमत” के छ: लाख फ़रिश्तों को लेकर आते हैं और काफिर की रूह कब्ज करने के लिए छ: लाख “अजाब” के फरिश्ते उनके साथ होते हैं |
Allahu Akbar
(Ma’rijun Nubuwwa Jild-3 Safa No.105)

सवाल:- उस फरिश्ते का क्या नाम है जो “कयामत” के दिन जमीन को बोरी की तरह लपेट देगा ?
जवाब:- उस फरिश्ते का नाम “रियाफ़ील” अलैहिस्सलाम है जो कयामत के दिन तमाम जमीन को बोरी की तरह लपेट देगा |
(Al Ittiqan Fi Ulumul Quran Jild 1 Safa No. 60)

सवाल: वह कौनसा फरिश्ता है जिसके माथे पर पूरा “कुरआन” लिख दिया गया है?
जवाब:- वह हज़रत इस्राफील अलैहिस्सलाम हैं जिनकी पेशानी पर पूरा कुरआन लिख दिया गया है |
(Tafseer Naimi Jild-2 Safa No. 309)

सवाल:- वह कौनसा फरिश्ता है जो कयामत के दिन लोगों को मैदाने महशर की तरफ बुलाएगा ?
जवाब:- वह हज़रत इस्राफील अलैहिस्सलाम हैं बअज ने कहा है कि निदा तो हज़रत जिब्रील अलैहिस्सलाम देंगे और सूर हज़रत इस्राफील अलैहिस्सलाम फूकेंगे |
(Savi Jild – 3 Safa No. 65)

सवाल:- जन्नत के खजीन फरिश्ते का क्या नाम है ?
जवाब: जन्नत के खजीन फरिश्ते का नाम “रिजवान” अलैहिस्सलाम है |

सवाल:- दोजख के खजीन फरिश्ते का क्या नाम है ?
जवाब:- दोजख के खजीन फरिश्ते का नाम “मालिक” अलैहिस्सलाम है |
(Al Ittiqan Fi Ulumul Quran Jild-1Safa No. 60)

सवाल:- कयामत के दिन यह भी पूछा जायेगा कि अपनी उंगलियों के नाम बताओ ?
जवाब:- अपने हाथ की छोटी उंगली से शुरू करें —
(1) आमीन
(2) अमानत
(3) जन्नत
(4) शहादत
(5) फ़र्ज

पाँच जगहों पर हंसना पच्चीस गुनाहों के बराबर है —
(1) कब्रस्तान में
(2) जनाजे के पीछे
(3) मजलिस में
(4) तिलावत-ए-कुरआन में
(5) मस्जिद में

अच्छी बातों को फैलाना सदका जारिया है —
तीस लाख नेकिया लिख दी जाती हैं कयामत के दिन तो ईन्सान एक-एक नेकी के लिए तरसेगा जब तक यह मैसेज आगे बढ़ता रहेगा लोग इसे पढ़ते रहेंगे तो भेजने वालों को सवाबदारैन हासिल होता रहेगा…!!!
--------------------((*))-------------------
🌙🕋-हूमानीटि ओफ-ईस्लाम🌠
# फराज
Talib khan
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वो काग़ज़ आज भी
फूलों की तरह महकता है
जिस पर उसने मज़ाक़ से लिखा था
मुझे तुमसे मोहब्बत है
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मौत के वक़्त की कैफियत
🌌🌌🌌🌌🌌🌌🌌🌌

जब रूह निकलती है तो इंसान का मुंह खुल जाता है होंठ किसी भी कीमत पर आपस में चिपके हुए नही रह सकते... रूह पैर के अंगूठे से खिंचती हुई ऊपर की तरफ़ आती है जब फेफड़ो और दिल तक रूह खींच ली जाती है तो इंसान की सांस एक तरफ़ा बाहर की तरफ़ ही चलने लगती है ये वो वक़्त होता है जब चन्द सेकेंडो में इंसान शैतान और फरिश्तों को दुनिया में अपने सामने देखता है... एक तरफ़ शैतान उसके कान के ज़रिये कुछ मशवरे सुझाता है तो दूसरी तरफ़ उसकी जुबान उसके अमल के मुताबिक़ कुछ लफ्ज़ अदा करना चाहती है अगर इंसान नेक होता है तो उसका दिमाग उसकी ज़ुबान को कलमा ए शहादत का निर्देश देता है और अगर इंसान काफ़िर मुशरिक बद्दीन या दुनिया परस्त होता है तो उसका दिमाग कन्फ्यूज़न और एक अजीब हैबत का शिकार होकर शैतान के मशवरे की पैरवी ही करता है और इंतेहाई मुश्किल से कुछ लफ्ज़ ज़ुबान से अदा करने की भरसक कोशिश करता है...।

ये सब इतनी तेज़ी से होता है की दिमाग़ को दुनिया की फ़ुज़ूल बातों को सोचने का मौका ही नहीं मिलता...। इंसान की रूह निकलते हुए एक ज़बरदस्त तकलीफ़ ज़हन महसूस करता है लेकिन तड़प इसलिए नहीं पाता क्योंकि दिमाग़ को छोड़कर बाकी ज़िस्म की रूह उसके हलक में इकट्ठी हो जाती है और जिस्म एक गोश्त के बेजान लोथड़े की तरह पड़ा हुआ होता है जिसमें कोई हरकत की गुंजाइश बाकी ही नहीं रहती...।

आखिर में दिमाग की रूह भी खींच ली जाती है आँखें रूह को ले जाते हुए देखती हैं इसलिए आँखों की पुतलियां ऊपर चढ़ जाती हैं या जिस सिम्त फ़रिश्ता रूह कब्ज़ करके जाता है उस तरफ़ हो जाती हैं...
इसके बाद इंसान की ज़िन्दगी का वो सफ़र शुरू होता है जिसमें रूह तकलीफ़ों के तहखानों से लेकर आराम के महलों की आहट महसूस करने लगती है जैसा की उससे वादा किया गया है... जो दुनिया से गया वो वापस कभी नहीं लौटा... सिर्फ इसलिए क्योंकि उसकी रूह आलम ए बरज़ख में उस घड़ी का इंतज़ार कर रही होती है जिसमें उसे उसका ठिकाना दे दिया जाएगा... इस दुनिया में महसूस होने वाली तवील मुद्दत उन रूहों के लिये चन्द सेकेंडो से ज़्यादा नहीं होगी भले ही कोई आज से करोड़ों साल पहले ही क्यों न मर चुका हो...।

मोमिन की रूह इस तरह खींच ली जाती है जैसे आटे में से बाल खींच लिया जाता है... और गुनाहगार की रूह कांटेदार पेड़ पर पड़े सूती कपड़े को खींचने की तरह खींची जाती है...।

अल्लाह तआला हम सबको मौत के वक़्त कलमा नसीब फरमाकर आसानी के सात रूह कब्ज़ फ़रमा और नबी ए पाक सल्‍लल्‍लाहु अलैही व-सल्‍लम का दीदार नसीब फरमा...।

आमीन या रब्बुल आलमीन!
Talib khan
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खुदा के बाद नबी का मक़ाम आया है
फिर उसके बाद सहाबा का नाम आया है

कहो यहूद से अक़सा की चाभियाँ दे दे
उमर के साथ उमर का गुलाम आया है

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ख्वाब बनकर आपकी आंखों में समाना है

दवा बनकर आपका हर दर्द मिटाना है

कबूल है मुझे जमाने भर की नफरत

पर आपका प्यार बनकर आपको पाना है
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