Post has attachment

Post has attachment
🕉 भजन: जय माँ शैलपुत्री (माँ दुर्गा का पहला रूप)...🚩 अतिसुन्दर #Navratra #Durga #Maa #Shailputri #Bhajan https://goo.gl/7Mzfdi

भजन पढ़ने, सुनने और देखने के लिए क्लिक करें: http://bit.ly/2u3hEud

Post has attachment

Post has attachment

Post has attachment

Post has attachment
भगवान को मानने वाले ज़रूर देखे - Bhagwan Ko Bhagwan Manna Sirf Astikta Hai #DeviChitralekhaji

Post has attachment
देवी जी का बड़ा ही मधुर भजन -- Hey Gopal Radhe Krishna Govind Govind #DeviChitralekhaji

Post has attachment
क्यों आया देवी जी को रोना !! Nishkam Bhakti !! किसी होनी चाहिए निष्काम भक्ति #DeviChitralekhaji

Post has attachment
भजन में डूब जाने का नाम ही समाधि है...........

1. भक्ति की प्राइमरी क्लास - भगवान की सेवा करना.
2. हाई क्लास - जप करना पाँच माला,सात माला,आदि...
3. इंटर क्लास - सुमिरन करना. अर्थात भक्ति में प्रवेश.घर का काम भी कर रहे है और जीभ सुमिरन कर रही है.

4. भजन - देह तो दूकान,मकान,में लगी है,और मन लीलाओ में डूबा हुआ है.इसे ही समाधि कहते है.

भौतिक देह से बाहर के काम करना और सूक्ष्म देह से भगवान की लीलाओ का चिंतन करना.समाधि अर्थात सम +धि बुद्धि स्थिर हो जाए न ऊँची न नीची एकदम स्थिर उसे ही समाधि लगना कहते है.

जैसे एक गोपी जिसका नया-नया विवाह वृंदावन में हुआ था,चौका में रोटी बना रही थी घूँघट डाले हुए है,कान्हा अभी दो ढाई वर्ष के होगे गोपी के चौके में घुस आये और उसके कंधे पर हाथ रखकर बोले - ओं भाभी! ओं भाभी! तेरे हाथ जोडू ,तेरे जुए बीनू,तेरे लाल को खिलाऊ,आधी रोटी दे दे.

मोरे घर में तो अभी बनी नाय है,मईया तो पहले यमुना स्नान को जायेगी फिर रोटी बनाएगी,मोय तो बड़ी जोर से भूख लगी है.आधी रोटी दे दे मोको.

फिर भगवान बड़े हुए,मथुरा और फिर द्वारिका चले गए और वही गोपी अब 5० वर्ष की हो गई,
एक दिन चौके में बैठी रोटी बना रही है, वही कान्हा का द्रश्य आँखों में दिखायी देने लगा,एक रोटी पटे पर पड़ी है, और एक तबे पर है, गोपी तो एकदम जैसे किसी को मिर्गी का दौड़ा आ जाता है
ऐसे मुह फाड़े हाथ पैर फैलाये,उसी भाव में डूबी हुई है.

तभी उसकी सास ने जब रोटी के जलने की बास आई तो झट से चौके में दौडी आई, देखा गोपी तो मुह बाये एकदम पड़ी है,जोर जोर से हिलाने लगी,बहू क्या हो गया.

गोपी झट से जागी सास बोली कहाँ चलि गई थी,गोपी बोली - अपने कृष्ण के पास गई थी काहे को बुला लिया,मै तो अपने गोविंद के चरणों में गई थी.

बस इसी का नाम भजन है.
हर जगह बस उसी का दर्शन हो,जिस रंग का वह वस्त्र पहना करते है उस रंग का यदि कोई फूल भी दिख जाए तो उसकी याद आ जाए.

जैसे राधा रानी जी यदि नीले आकाश को भी देखती थी तो श्याम के वर्ण को याद करने रोने लगती थी.हर पल हर घड़ी उसकी याद अन्तःकरण में समाई रहे यही भजन है.

जै जै श्री राधे........
Photo

Post has attachment
💐💐सुप्रभात दोस्तो💐💐जय श्री राधे श्याम💐💐

💐💐जय श्री राधे कृष्णा💐💐जय श्री राधे गोविंद💐💐
Photo
Wait while more posts are being loaded