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सिर्फ आपके ह्रदय की विशालता ही,
दूसरे व्यक्ति को छाया दे देती है। उसे किसी परिदृश्य की आवश्यकता उस समय नहीं होती।.........Mishra ji
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प्यारे मित्रो !
यदि आप अच्छा करने या बुराई से लड़ने में सक्षम नहीं है। तो आप अच्छाई के लिए लोगो को जागरूक करे। बुराई से लड़ने के लिए ललकारें।
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आपकी जागरूकता या ललकारने मात्र से ही, शक्ति का उदय हो जाता है। और वही शक्ति एक दृश्य का रूप ले लेती है। जो बुराई को समाप्त करती है। अच्छाई को बढाती है।
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शुभ संध्या ! सुखद रात्रि
जय श्री राधे-कृष्णा जी..सादर प्रणाम।
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!! यशश्वी भवः !!
प्यारे मित्रो,
क्या आपको पता है। सरकार, सड़क तथा तमाम प्रकार के संसाधन क्यों बनाती या उपलब्ध कराती है हम-सब के लिए।
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इसलिए ! जिससे हम-आप साफ़-सुथरे रहकर अपनी मंजिल को पा सके, पहुँच सके।
फिर भी लोग शार्ट-कट रास्ता अपना कर जल्दी पाने या पहुंचने की लालसा में। उबड़-खाबड़ कीचड़ वाले रास्ते पर चल देते है। जिससे 'शरीर' गन्दा भी होता है कपड़ों पर 'धब्बे' भी लग जाते है।
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कीचड़ को दोषी नहीं माना जा सकता है। दोषी तो कीचड़ फ़ैलाने वाले और जल्दी की लालसा से, उसमे पैर रखकर चलने वाले दोषी है।
शार्ट-कट मार्ग से मंजिल तो मिल सकती है, लेकिन शरीर गन्दा तथा कपड़ो पर धब्बे जरूर लगते है।
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मित्रो ऐसा तभी करें जब सड़क मार्ग पर कोई विध्न-बाधा हो और किसी के जान पर बन पड़ी हो। आप द्वारा ही उसकी जान बच सकती है।
अन्यथा ऐसा मत करे। और जितनी जल्दी हो सके अपने आपको साफ़-सुथरा कर ले। अन्यथा यह बीमार करके जान ले लेती है।
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कहने का तातपर्य यह है कि..
चित्र को तो साफ़ किया जा सकता है। लेकिन चरित्र को साफ़ करने में शायद पूरा जीवन कम पड़ जाये। सरकार के नियमानुसार काम करे। अच्छा लगेगा आपको भी। समाज को भी। .... Mishra ji
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शुभ संध्या ! सुखद रात्रि, प्यारे मित्रो
जय श्री राधे-कृष्णा जी.. सादर प्रणाम !
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प्यारे मित्रो,
अच्छे (सही)व्यक्तियों का इतना उत्साहवर्धन ना करो, की वह बुरा (गलत) करने लगे।
और बुरे (गलत) व्यक्तियों को इतना बहिष्कार कर दो, की वह अच्छा (सही) करने पर विवश हो जाए।
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यह एक सर्वश्रेष्ठ फार्मूला है।
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अच्छे घर के लिए।
अच्छे वर के लिए।
अच्छे समाज के लिए।
अच्छे देश के लिए।
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क्योकि ?
अक्सर जन-समूह को लोग अपना चहेता, अपना हमसफ़र, समझकर अपनी मनमानी शुरू कर देते है।
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फिर चाहे वह फ़िल्मी स्टार हो,
गाँव का प्रधान हो,
समाज का ठेकेदार हो... या कोई,
धर्मगुरु ही क्यों ना हो।
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सभी को यह समझ होनी चाहिए कि, हमारे अच्छाई के लिए ही, जन-समूह हमारे साथ होता है। जैसे ही गलतियां करूँगा अकेला हो जाऊंगा।
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यह तभी संभव है जब हम सब इसी फॉर्मूले को लेके चले।
कोशिश किया जा सकता है। कभी करके भी देख लीजिये,
सफल होंगे। .... जय हिन्द !
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शुभ संध्या ! सदर प्रणाम
जय श्री राधे-कृष्णा जी
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यदि आप घर-समाज-राज्य तथा देश के प्रथम नागरिक या मालिक है।
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तब आपका पहला हथियार आप खुद है।
दूसरा हथियार आपके विचार है।
तीसरा हथियार आपकी सम्पदा है।
चौथा हथियार आपके परिवार या सैनिक होते है।
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प्यारे मित्रो।
किसी भी परिस्थित में पहले खुद को महफूज करो। आपका विचार न्याय-प्रिय तथा समृद्धि प्रदान करने वाला होना चाहिए। आप अपनी सम्पदा की हर कीमत पर रक्षा करे। अंत में अपने सैनिको या परिवार पर ध्यान देना चाहिए। तभी आप एक अच्छा शासक, मालिक, बन सकते है।
हो सके तो सभी बिन्दुओ पर एक साथ काम करे। यह श्रेष्ठता की पहचान है।
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यदि आप खुद को महफूज रखने में असफल हो जाते है तो। देश-समाज-परिवार में आत्मबल की कमी हो जाती है, कोई रास्ता दिखाने वाला उस समय नहीं रह जाता है। धन-सम्पदा की लूट मच जायेगी। परिवार या सेना में विद्रोह मच जायेगा और आपका परिवार-समाज-राज्य या देश। बहुत कमजोर, गुलाम या दूसरो पर निर्भर हो जायेगा।
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Take care friend's.
जय श्री राधे-कृष्णा जी..सादर प्रणाम।
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मन-वेदना...
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आ जाओ अब लौट के तुम
घर के आंगन में भी धन है।
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मन व्याकुल है, अश्रु आँख भरे,
आँचल में बरसी बूंदे है।
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तन-मन में सिहरन दौड़ रही,
जो बागन में ना फूल खिला।
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जब साँझ ढले, तब झुरमुट में बच्चो संग चिडिया हँसती है।
यह देख मेरा दिल घबराता अंखिया राहे फिर तकती है।
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बह खूब रही है पुरवईया, ठंढ-ठंढ सी लगती है।
गांव-पड़ोसी सोवत है, हम जागत है बस जागात है।
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आ जाओ अब लौट के तुम
घर के आंगन में भी धन है।
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प्यारे मित्रो।
'धन' जीवन के लिए आवश्यक है। लेकिन उस धन से खुशियों के साथ गम भी हो तो उससे अच्छा है निर्धन ही रहे।
इश्लीये जितना 'धन' आवश्यक है उतना ही परिवार आवश्यक है। यदि ऐसा नहीं कर पाते है तो शादी ना करे।
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पति-पत्नी एक दूसरे के, मन होते है। वह किसी और से मन शेयर नहीं कर सकते है। क्योकि बहकाने या बहकने का डर होता है।
कोशिश करे, प्रेम करें, साथ रहे। शुभकामना !
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जय श्री राधे कृष्णा जी. सादर प्रणाम।
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29/07/2017
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