अन्ना हजारे बहुत बड़े संत है ? खुद को मंदिर में रहने वाला "फ़क़ीर" बताते है ?, बढ़िया है - अभी दिल्ली में अनशन करने के लिए आये हुए है, और जब वो आये तो NDTV के पूर्व एडिटर और मनमोहन सिंह के सलाहकार पंकज पचौरी के साथ चार्टर्ड प्लेन में बैठकर आये, मोदी सरकार के खिलाफ अनशन करके बैठे है, वैसे इस देश में काफी सारे मुद्दे है, जो इस देश को बर्बाद कर रहे है, पर इस समाजसेवी आन्दोलनकारी अन्ना हजारे ने इन तमाम मुद्दों पर आजतक अपनी जबान 1 बार भी नहीं खोली है, ये फिर किस प्रकार का समाजसेवी किस प्रकार का देशभक्त है ये अपने में बड़ा सवाल है ।
आपने कभी अन्ना हजारे को आतंकवाद के खिलाफ, कभी अन्ना हजारे को वामपंथी नक्सालियों के खिलाफ बोलते देखा है ?
क्या आपने अन्ना हजारे को हाफिज सईद के खिलाफ बोलते देखा है,
क्या आपने अन्ना हजारे को को ISIS के खिलाफ बोलते देखा है,
अन्ना हजारे तो खुद सैनिक थे, क्या आपने कभी अन्ना हजारे को कश्मीर में सेना पर जो पत्थरबाजी होती है उसपर बोलते देखा है ?
क्या आपने अन्ना हजारे को सोनिया गाँधी, चिदंबरम जैसे भ्रष्टाचारियों के खिलाफ बोलते देखा है ?
क्या आपने अन्ना हजारे को लालू यादव के खिलाफ, ममाता बनर्जी, रोहिंग्यों अवैध बांग्लादेशियों के खिलाफ बोलते देखा है ?
क्या आपने कभी अन्ना हजारे को गौहत्या, लव जिहाद, जनसँख्या विस्फोट के खिलाफ बोलते देखा है ?
क्या आपने अन्ना हजारे को केरल में हो रहे खून खराबे, बंगाल में होते दंगे, कर्णाटक में 3800 से ज्यादा किसानो की आत्महत्या पर बोलते देखा है ?

अन्ना हजारे फिर काहे के समाजसेवी,
काहे के देशभक्त है,
जो देश के खिलाफ इन तमाम बड़े मुद्दों के खिलाफ आन्दोलन तो छोडिये, 1 शब्द कभी बोलते तक नहीं है, इन तमाम मुद्दों पर अन्ना हजारे की कभी जबान भी नहीं खुली ? जब भी आपके मन में अन्ना हजारे जैसे लोगों के लिए समर्थन का भाव आये आप खुद से पूछ लीजियेगा की ये लोग देश के खिलाफ इतने बड़े बड़े मुद्दों पर जबान क्यों नहीं खोलते !!

शायद नया वाला केजरी बना रहे हैं ....

एक होनहार महिला 💃पहलीबार स्कुटी 🛵चलाकर पेट्रोल पम्प⛽️ पर गई
👧 : भईया । पेट्रोल कितने रूपये लीटर है?
👦 : मैडम 73.74 रूपये
👧 : ठीक ठाक लगा लो , बगल वाला तो 65.71 रुपये लीटर दे रहा है 😰😰
घोर सन्नाटा............😱😱😱😱
👦 : ओ मेडम, बाजू में डीजल की मशीन है
😂😂😂🤣🤣🤣🤣

ચિનગારી.

✒ *જે લોકો ને રામ અને પુષ્પક વિમાન કાલ્પનિક લાગે છે તેના સાન્ટા બાપા આજે રાત્રે બાર વાગ્યે હરણ નો રથ લઇ ને ભેટ આપવા આવશે*😂😂😂😂😂😂

# કટાક્ષ
મુKશ

झाँसी की रानी के जन्मोत्सव की हार्दिक बधाई

सिंहासन हिल उठे राजवंषों ने भृकुटी तानी थी,
बूढ़े भारत में आई फिर से नयी जवानी थी,
गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी,
दूर फिरंगी को करने की सब ने मन में ठानी थी.
चमक उठी सन सत्तावन में, यह तलवार पुरानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी.

कानपुर के नाना की मुह बोली बहन छब्बिली थी,
लक्ष्मीबाई नाम, पिता की वो संतान अकेली थी,
नाना के सॅंग पढ़ती थी वो नाना के सॅंग खेली थी
बरछी, ढाल, कृपाण, कटारी, उसकी यही सहेली थी.
वीर शिवाजी की गाथाएँ उसकी याद ज़बानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी.

लक्ष्मी थी या दुर्गा थी वो स्वयं वीरता की अवतार,
देख मराठे पुलकित होते उसकी तलवारों के वार,
नकली युध-व्यूह की रचना और खेलना खूब शिकार,
सैन्य घेरना, दुर्ग तोड़ना यह थे उसके प्रिय खिलवाड़.
महाराष्‍ट्रा-कुल-देवी उसकी भी आराध्या भवानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी.

हुई वीरता की वैभव के साथ सगाई झाँसी में,
ब्याह हुआ बन आई रानी लक्ष्मी बाई झाँसी में,
राजमहल में बाजी बधाई खुशियाँ छायी झाँसी में,
सुघत बुंडेलों की विरूदावली-सी वो आई झाँसी में.
चित्रा ने अर्जुन को पाया, शिव से मिली भवानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी.

उदित हुआ सौभाग्या, मुदित महलों में उजियली च्छाई,
किंतु कालगती चुपके-चुपके काली घटा घेर लाई,
तीर चलाने वाले कर में उसे चूड़ियाँ कब भाई,
रानी विधवा हुई है, विधि को भी नहीं दया आई.
निसंतान मारे राजाजी, रानी शोक-सामानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी.

बुझा दीप झाँसी का तब डॅल्लूसियी मान में हरसाया,
ऱाज्य हड़प करने का यह उसने अच्छा अवसर पाया,
फ़ौरन फौज भेज दुर्ग पर अपना झंडा फेहराया,
लावारिस का वारिस बनकर ब्रिटिश राज झाँसी आया.
अश्रुपुर्णा रानी ने देखा झाँसी हुई वीरानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी.

अनुनय विनय नहीं सुनती है, विकट शासकों की मॅयैया,
व्यापारी बन दया चाहता था जब वा भारत आया,
डल्हौसि ने पैर पसारे, अब तो पलट गयी काया
राजाओं नव्वाबों को भी उसने पैरों ठुकराया.
रानी दासी बनी, बनी यह दासी अब महारानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी.

छीनी राजधानी दिल्ली की, लखनऊ छीना बातों-बात,
क़ैद पेशवा था बिठुर में, हुआ नागपुर का भी घाट,
ऊदैपुर, तंजोर, सतारा, कर्नाटक की कौन बिसात?
जबकि सिंध, पंजाब ब्रह्म पर अभी हुआ था वज्र-निपात.
बंगाले, मद्रास आदि की भी तो वही कहानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी.

रानी रोई रनवासों में, बेगम गुम सी थी बेज़ार,
उनके गहने कपड़े बिकते थे कलकत्ते के बाज़ार,
सरे आम नीलाम छपते थे अँग्रेज़ों के अख़बार,
"नागपुर के ज़ेवर ले लो, लखनऊ के लो नौलख हार".
यों पर्दे की इज़्ज़त परदेसी के हाथ बीकानी थी
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी.

कुटियों में भी विषम वेदना, महलों में आहत अपमान,
वीर सैनिकों के मान में था अपने पुरखों का अभिमान,
नाना धूंधूपंत पेशवा जूटा रहा था सब सामान,
बहिन छबीली ने रण-चंडी का कर दिया प्रकट आहवान.
हुआ यज्ञा प्रारंभ उन्हे तो सोई ज्योति जगानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी.

महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी,
यह स्वतंत्रता की चिंगारी अंतरतम से आई थी,
झाँसी चेती, दिल्ली चेती, लखनऊ लपटें छाई थी,
मेरठ, कानपुर, पटना ने भारी धूम मचाई थी,
जबलपुर, कोल्हापुर, में भी कुछ हलचल उकसानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी.

इस स्वतंत्रता महायज्ञ में काई वीरवर आए काम,
नाना धूंधूपंत, तांतिया, चतुर अज़ीमुल्ला सरनाम,
अहमदशाह मौलवी, ठाकुर कुंवर सिंह, सैनिक अभिराम,
भारत के इतिहास गगन में अमर रहेंगे जिनके नाम.
लेकिन आज जुर्म कहलाती उनकी जो क़ुर्बानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी.

इनकी गाथा छोड़, चले हम झाँसी के मैदानों में,
जहाँ खड़ी है लक्ष्मीबाई मर्द बनी मर्दनों में,
लेफ्टिनेंट वॉकर आ पहुँचा, आगे बड़ा जवानों में,
रानी ने तलवार खींच ली, हुआ द्वंद्ध आसमानों में.
ज़ख़्मी होकर वॉकर भागा, उसे अजब हैरानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी.

रानी बढ़ी कालपी आई, कर सौ मील निरंतर पार,
घोड़ा थक कर गिरा भूमि पर, गया स्वर्ग तत्काल सिधार,
यमुना तट पर अँग्रेज़ों ने फिर खाई रानी से हार,
विजयी रानी आगे चल दी, किया ग्वालियर पर अधिकार.
अँग्रेज़ों के मित्र सिंधिया ने छोड़ी राजधानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी.

विजय मिली, पर अँग्रेज़ों की फिर सेना घिर आई थी,
अबके जनरल स्मिथ सम्मुख था, उसने मुंहकी खाई थी,
काना और मंदरा सखियाँ रानी के संग आई थी,
यूद्ध क्षेत्र में ऊन दोनो ने भारी मार मचाई थी.
पर पीछे ह्यूरोज़ आ गया, हाय! घिरी अब रानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी.

तो भी रानी मार काट कर चलती बनी सैन्य के पार,
किंतु सामने नाला आया, था वो संकट विषम अपार,
घोड़ा अड़ा, नया घोड़ा था, इतने में आ गये अवार,
रानी एक, शत्रु बहुतेरे, होने लगे वार-पर-वार.
घायल होकर गिरी सिंहनी, उसे वीर गति पानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी.

रानी गयी सिधार चिता अब उसकी दिव्य सवारी थी,
मिला तेज से तेज, तेज की वो सच्ची अधिकारी थी,
अभी उम्र कुल तेईस की थी, मनुज नहीं अवतारी थी,
हमको जीवित करने आई बन स्वतंत्रता-नारी थी,
दिखा गयी पथ, सीखा गयी हमको जो सीख सिखानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी.

जाओ रानी याद रखेंगे ये कृतज्ञ भारतवासी,
यह तेरा बलिदान जागावेगा स्वतंत्रता अविनासी,
होवे चुप इतिहास, लगे सच्चाई को चाहे फाँसी,
हो मदमाती विजय, मिटा दे गोलों से चाहे झाँसी.
तेरा स्मारक तू ही होगी, तू खुद अमिट निशानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी।

चिनगारी!

✍ ब्लू व्हेल से भी ज्यादा खतरनाक गेम भारत में सालो से खेली जा रही हैं और उसमे भी लास्ट स्टेज मे खिलाडी आत्महत्या कर लेता है उस गेम का नाम है खेती.... 😥😥😥😥😥😥😥😥😥😥

जीभ काट डाली अंग्रेजी खंजर से
कानों में वेदों का रस कौन घोलेगा जब
नई पीढ़ी को सेमसुंग एप्पल से फुरसत नहीं भविष्य में #गीता_रामायण कौन खोलेगा 🤔🤔

चिनगारी।

✍ मोदी: आपने अमेरिका इतना प्रगतिशील कैसे बनाया??
ट्रम्प: भारत की वजह से!!
मोदी:कैसे??
ट्रम्प: आपके यहाँ आरक्षण वालो को पहले नोकरी मिलती है बाकी जो टेलेन्ट बचता है उसे हम नोकरी देते है।।

चिनगारी।

✍ सादगी किसी श्रृंगार से कम नही है , और हमारी ""चिनगारी"" किसी अँगार ♨ से कम नही है।।।
जैसे कि

सन्नाटा छा जाता है जब भाइयो के बंटवारे के बाद बूढ़े माँ- बाप पूछते है कि हम किसके हिस्से में है💔💔💔

चिनगारी।

✍ जलती रही जोहर में नारिया भेड़िये फिर भी मौन थे,
हमे पढ़ाया गया अकबर महान तो फिर "महाराणा प्रताप" कोंन थे;
सड़ती रही लाशें सड़को पर गांधी फिर भी मौन थे,
हमे पढ़ाया गया गांधी के चरखे से आजादी आयी,
तो फिर फांसी चढ़ने वाले वो 25 -25 साल के नॉजवान कौन थे?????????
सुप्रभातम।

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