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C1भारत के कृत्रिम अंग निर्माण निगम (एलिम्को) ने इंग्लैंड के मोटिवेशन चैरिटेबल ट्रस्ट के साथ व्हीलचेयर निर्माण प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (टीओटी) करने हेतु समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं.

एलिम्को सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत कार्यरत भारतीय कृत्रिम अंग निर्माता निगम है. समझौते के तहत ब्रिटेन आधारित मोटिवेशन चैरिटेबल ट्रस्ट भारत में एक्टिव व्हीलचेयर के विनिर्माण के क्षेत्र में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (टीओटी) के साथ परामर्श सेवा भी प्रदान करेगा.

यह समझौता पिछले वर्ष अप्रैल में दोनों फर्मों के मध्य हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन के क्रम में एक कदम आगे बढ़ाने वाला है. समझौता ज्ञापन पर एलिम्को के सीएमडी डी आर सरीन और मै. मोटिवेशन ट्रस्ट ब्रिटेन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रिचर्ड फ्रॉस्ट ने हस्ताक्षर किए.

अनुबंध की मुख्य विशेषताएं-

समझौता भारतीय कंपनी एलिम्को और मै. मोटिवेशन ट्रस्ट को डब्ल्यूएचओ के दिशा निर्देशों के अनुपालन में सस्ती और उन्नत किस्म की व्हीलचेयरों के निर्माण में सहयोग का अवसर प्रदान करेगा.समझौता के तहत ब्रिटेन की मोटिवेशन रफ टैरेन व्हीलचेयर और मोटिवेशन एक्टिव फोल्डिंग व्हीलचेयर हेतु प्रौद्योगिकी हस्तांतरण का प्रस्ताव पास किया गया.



एलिम्को ने उपयोगकर्ता परीक्षण हेतु मोटिवेशन से 140 उत्पाद खरीदे हैं.ब्रिटेन की मोटिवेशन कम्पनी एलिम्को से कम से कम 20 प्रतिशत प्रमात्रा खरीदेगा.समझौते के अनुसार मोटिवेशन एलिम्को के कर्मचारियों को प्रशिक्षित करेगा, जो बाद में एलिम्को के अन्य व्यक्तियों को प्रशिक्षण देंगे. मोटिवेशन भारत में आयोजित विभिन्न कैंपों में प्रदान की जा रही सेवाओं हेतु  एलिम्को द्वारा निर्धारित विभिन्न स्थलों पर 5 सुपरवाइजर भी तैनात करेगा.प्रौद्योगिकी हस्तांतरण से एलिम्को सस्ती और लागत प्रभावी व्हीलचेयरों का उत्पादन करने में समर्थ बन जाएगा.प्रौद्योगिकी रूप से उन्नत व्हीलचेयरों के उत्पादन से देश में समाज के सभी वर्गो के लिए पीडब्ल्यूडी की आत्मनिर्भरता और गतिशीलता में प्रगति होगी.इस अनुबंध से मेक इन इंडिया के तहत भारत की एलिम्को द्वारा बनाए गए उत्पाद, चीन से आयात किए जाने वाले उत्पादों में भी धीरे-धीरे कमी आयेगी.

नेत्रहीन सीईओ जिसने बना दी 50 करोड़ की कंपनी –
Inspirational Story of Blind CEO Srikanth Bolla

भगवान उसे इस रंग-बिरंगी दुनिया में लाये तो सही लेकिन उसके आँखों को वो रौशनी देना ही भूल गए, जिससे वह इन रंगों को देख पाता। जिसकी जिन्दगी कभी आसान नहीं रही। जन्म से ही निराशा के काले बादल उसके जीवन में छाये रहे।

दृष्टिहिनता के कारण बचपन से ही उसने समाज में भेदभाव के व्यवहार का सामना किया।

जिसके जन्म लेते ही गांव के लोगों ने उसके माता-पिता को सलाह दी थी कि –

‘यह बिना आँखों का एक बेकार बच्चा हैं। जो आगे चलकर आप पर ही बोझ बनेगा।’

हम बात कर रहे है, आंध्र-प्रदेश में जन्मे श्रीकांत बोला (Shrikant Bholla) की। जिन्होंने हैदराबाद में Bollant Industries के नाम से एक कंपनी शुरू की है। यह एक ऐसी कंपनी है, जिसका मुख्य उद्देश्य अशिक्षित और अपंग लोगों को रोजगार देना, उपभोक्तोओं को पर्यावरण के अनुकूल Packaging Solutions प्रदान करना हैं।

श्रीकांत ने यह कार्य कर उन सभी बातों को झुठला दिया है, जिसको समाज एक दृष्टिहीन व्यक्ति द्वारा किये जाने को महज़ एक कल्पना मानता हैं। यही नहीं इस कंपनी का सलाना turnover 50 करोड़ से भी ज्यादा का है!

आज उनके पास कंपनी की चार उत्पादन ईकाइयां है – एक हुबली (कर्नाटक में), दूसरी नीजामाबाद (तेलंगना में), तीसरी भी तेलंगना के हैदराबाद में ही और चौथी, जो कि सौ प्रतिशत सौर उर्जा द्वारा संचालित होती हैं, आंध्र-प्रदेश के श्री सीटी में है। जो की चेन्नई से 55 किमी. दूर है।

गरीबी में बचपन – Childhood of Srikanth Bolla

उनका जन्म भी एक ऐसे निर्धन किसान परिवार में हुआ, जिसकी वार्षिक आय 20000 रू. (54रू. प्रति दिन) से भी कम थी| इसका मतलब यह है कि परिवार के सदस्यों को यह भी नहीं मालूम था कि उनको शाम का खाना नसीब होगा भी या नहीं|

जब श्रीकांत बड़े होने लगे, तो उनके किसान पिता उनको अपने साथ खेत में हाथ बटाने के लिए ले जाने लगे। लेकिन वे उनकी खेत में कोई मदद नहीं कर पाते। फिर उनके पिता ने सोचा शायद ये पढ़ाई में अच्छा करे। इसलिए उन्होंने उनका नामांकन गांव के ही स्कूल, जो की उनके घर से लगभग पांच किमी. दूर था, में करवा दिया।

अब वे रोज स्कूल जाने लगे। ज्यादातर स्कूल का सफर उन्हें रोज पैदल ही तय करना पड़ता था। वे ऐसे दो सालों तक स्कूल जाते रहे।

वे कहते है-
“स्कूल में कोई भी मेरी मौजूदगी को स्वीकार नहीं करता था। मुझे हमेंशा कक्षा के अंतिम बेंच पर बिठाया जाता था। मुझे PT की कक्षा में शामिल होने की मनाही थी। मेरे जीवन में वह एक ऐसा क्षण था, जब मैं यह सोचता था कि दुनिया का सबसे गरीब बच्चा मैं ही हूं, और वो सिर्फ इसलिए नहीं कि मेरे पास पैसे की कमी थी, बल्कि इसलिए की मैं अकेला था।”

जब उनके पिता को यह धीरे-धीरे अनुभव होने लगा कि उनका बच्चा इस स्कूल में कुछ सीख नहीं पा रहा है, तो उन्होंने श्रीकांत को हैदराबाद के ही दिव्यांग बच्चों के विशेष विद्यालय में भर्ती कर दिया।
वहां श्रीकांत कुछ ही महीनों के अंदर अच्छा प्रदर्शन करने लगे। वे वहां सिर्फ चेस और क्रिकेट खेलना ही नहीं सीख गए बल्कि वे इन खेलों में निपुण भी हो गये। कक्षा में उन्होंने प्रथम स्थान प्राप्त किया। उतना ही नहीं कक्षा में उनके सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के चलते उन्हें एक बार भारत के पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के साथ Lead India Project में काम करने का भी अवसर प्राप्त हुआ।

स्कूल में अच्छा पदर्शन करने के बावजूद उन्हें ग्यारवीं कक्षा में विज्ञान विषय का चुनाव करने से मना कर दिया गया। श्रीकांत ने दसवीं की परीक्षा आंध्र-प्रदेश स्टेट बोर्ड से 90 प्रतिशत से ज्यादा अंकों के साथ उर्त्तीण की थी। लेकिन फिर भी बोर्ड का कहना था कि ग्यारवीं में दृष्टिहीन बच्चें विज्ञान विषय को नहीं चुन सकते हैं। श्रीकांत अपने मन में सोचते –

‘क्या ये सिर्फ इसलिए कि मैं जन्मांध हूं? नहीं, मुझे लोगों के देखने के नजरियें के द्वारा दृष्टिहीन बनाया गया है।‘

बोर्ड के द्वारा विज्ञान विषय को चुनने कि स्वीकृति नहीं दिये जाने के बाद, उन्होंने निश्चिय किया कि वे इसका विरोध करेंगे। वे कहते है –

“मैंने छः महीनें तक इसके लिए सरकार से लड़ता रहा और अंत में सरकार ने ही र्निदेश जारी कर मुझे ग्यारवीं में विज्ञान लेकर पढ़ाई करने कि अनुमती दे दी, लेकिन अपने बूते पर!”

इसके बाद क्या था। श्रीकांत ने दिन-रात एक कर अपने कठिन परिश्रम के बल पर बारहवीं की परीक्षा में 98 प्रतिशत अंक प्राप्त कर सबको आश्चर्यचकित कर दिया।

जब आईआईटी में दाखिला नहीं मिला – Rejected By IIT

जिन्दगी भी कभी-कभी मजाकिया ढ़ग से रूकावटों की नकल उतारने लगती है। खासकर उन लोगों के साथ जिनका कोई बड़ा उद्देश्य होता हैं। श्रीकांत के साथ भी ऐसा ही हुआ

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सीकर . कहते हैं संगीत सिर्फ भावनाएं ही नहीं पैदा करती है, यह आपके शरीर के रसायन को भी बदल देती है...। और राग अगर एक नन्हें उस्ताद के गले से निकले तो यह आपको सीधे परमात्मा से जोड़ती है। दस साल का नेत्रहीन मोहित के रग-रग में संगीत बसती है। इस उम्र में शास्त्रीय संगीत के आठ रागों में महारथ रखने वाले मोहित का एक सपना है...।  वह हर बच्चे की दुनियां को सुरों से रंगीन करना चाहता है। इसके लिए उसने शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी को पत्र लिखा है। जिसमें उसने सरकारी स्कूल में शास्त्रीय संगीत को अनिवार्य करने की मांग की है। खास बात यह है कि मासूम की पुकार को शिक्षा मंत्री देवनानी ने भी काफी सराहा है। उन्होंने एक जवाबी पत्र बकायदा मोहित को लिखा है। जिसमें मोहित की सोच को सराहनीय बताते हुए इस दिशा में कदम उठाने के लिए विचार शुरू करने की बात लिखी है। बतादें कि मोहित राजकीय हरदयाल उच्च प्राथमिक स्कूल में कक्षा सात का विद्यार्थी है।सम्मानों का सरताजमोहित संगीत में राज्य व जिला स्तर की कई प्रतियोगिताएं जीत चुका है। आकाशवाणी पर उसके दो कार्यक्रम प्रसारित हो चुके हैं। जवाहर कला केंद्र में उन्नत की आंखे कार्यक्रम में भी उसने लीड रोल के साथ अपनी आवाज दी थी।बे्रनलिपी में पढऩे वाला मोहित रिलायंस फाउंडेशन मुंबई से लेखन और जिला स्तरीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता में संगीत में विजेता के साथ सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता में भी दूसरा स्थान हासिल कर अपने हरफनमौला होने का सबूत दे चुका है। मोहित भातखंड संगीत परीक्षा में भी लगातार दूसरी साल प्रथम स्थान से पास कर चुका है।

Article Link: http://rajasthanpatrika.patrika.com/story/rajasthan/blind-artist-mohit-s-heart-touching-performance-in-sikar-2390957.html Seen in the "Rajasthan Patrika" app

KFC India gives jobs to people with disabilities
Business
Dec 08, 2016
The fast food restaurant chain, Kentucky Fried Chicken, KFC, has around 350 outlets in India. The company is giving opportunities to people with disabilities to work and learn.

At present KFC employs 170 people with disabilities at their restaurants across the country.

The company aims to increase this so that people with disabilities make up 10% of its total workforce.

It has created a training program of five to six weeks that gives specialized training. KFC also makes sure that people with disabilities get equal pay and enjoy the same benefits as the other employees.

View On:
Business Insider

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State Divyang Commission has been formed this year and it would start functioning from January, next year, said Uttarakhand Chief Minister Harish Rawat while addressing the gathering at Uttarakhand Divyang Utsav-2016 held at Parade Ground on Saturday. This Utsav was held under the aegis of social welfare department and Hans Foundation to mark the occasion of World Disabled Day. A fixed amount is being spent by the State Government for the welfare of the people belonging to weaker section of the state, CM said, adding that the disabled people should also be involved in policy making and its execution. For this, the State Government would set up a platform for disabled persons, he stated. Source: http://www.dailypioneer.com/state-editions/state-divyang-commission-would-start-from-next-year-cm.html. More at http://www.eyeway.org/?q=state-divyang-commission-would-start-next-year-cm

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2nd Workshop on empowering visually impaired for the cashless economy Workshop on empowering visually impaired for the cashless economyGreetings from NAB Helpline. NAB Delhi will be conducting a series of workshops to empower visually impaired to use internet banking, debit/credit cards, electronic wallets like Paytm etc. Given the currency crunch and the move towards. Workshop on empowering visually impaired for the cashless economy. Date: 24 December 2016 (Saturday). Time 10 AM to 1 PM. Venue: National Association for the Blind, Sector-5, R.K. Puram, New Delhi – 110022. Participation is free of cost. Please register before 22 December 2016 by sending your Name, occupation and contact details to NAB Delhi. Helpline. Send email to helpline@nabdelhi.in or call 011 6455 6968 during office hours. More at http://www.eyeway.org/?q=2nd-workshop-empowering-visually-impaired
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