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गुजरात को अमूल तो दिया पर दूध गे भेस देती हे जनाब। गुजरात की महिलाए नहीं थोडा सोच समज के बोलिए। और आप अपनी बात केसे करेंगे आप ने किया क्या हे जो बताएँगे।

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Not a HDR, but really like this shot. Took it at Staunberger See, Germany. 
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ऐसा क्या हुआ था ????

की  गांधी जी ने कहा इस काँग्रेस को खत्म कर दो वरना ये देश को अंग्रेज़ो से
ज्यादा लूटेगी !

क्या है किताबों मे पढ़ाये जाने वाले आपके चाचा नेहरू की कहानी ?????

गांधी के जीवन की सबसे बड़ीगलती क्या थी ???

क्या भारत एक स्वतंत्र राष्ट्र  है या एक अधिराज्य  ?????

आज भी इंग्लेंड की महारानी बिना वीजा के अपने मर्जी मेभारत मे कैसे आ जाती है
????

भारत का सविधान कहता है 21 तोपों की सलामी के राष्ट्रपति को दी जाती है !

लेकिन इंग्लेंड की महारानी जब भारत आती है उसे भी दी जाती है ऐसा क्यूँ ?????

नेहरू इस देश का प्रधानमंत्री कैसे बन गया कोई और क्यूँ नहीं बना ????

ऐसे बहुत से सवाल जिसका जवाब श्याद आपके पास नहीं होगा !! जानने के लिए सिर्फ
एक बार यह विडियो देखो और शेयर करे! आपका दिमाग चकराजाएगा !
Fake Independence of INDIA AND Reality of Jawaharlal Nehru Exposed By Rajiv Dixit.

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महाराजा जयसिंह

इंगलैण्ड की राजधानी लंदन में यात्रा के दौरान एक शाम महाराजा जयसिंह सादे कपड़ों में बॉन्ड स्ट्रीट में घूमने के लिए निकले और वहां उन्होने रोल्स रॉयस कम्पनी का भव्य शो रूम देखा और मोटर कार का भाव जानने के लिए अंदर चले गए। शॉ रूम के अंग्रेज मैनेजर ने उन्हें “कंगाल भारत” का सामान्य नागरिक समझ कर वापस भेज दिया। शोरूम के सेल्समैन ने भी उन्हें बहुत अपमानित किया, बस उन्हें “गेट आऊट” कहने के अलावा अपमान करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी।अपमानित महाराजा जयसिंह वापस होटल पर आए और रोल्स रॉयस के उसी शोरूम पर फोन लगवाया और संदेशा कहलवाया कि अलवर के महाराजा कुछ मोटर कार खरीदने चाहते हैं।

कुछ देर बाद जब महाराजा रजवाड़ी पोशाक में और अपने पूरे दबदबे के साथ शोरूम पर पहुंचे तब तक शोरूम में उनके स्वागत में “रेड कार्पेट” बिछ चुका था। वही अंग्रेज मैनेजर और सेल्समेन्स उनके सामने नतमस्तक खड़े थे। महाराजा ने उस समय शोरूम में पड़ी सभी छ: कारों को खरीदकर, कारों की कीमत के साथ उन्हें भारत पहुँचाने के खर्च का भुगतान कर दिया।
भारत पहुँच कर महाराजा जयसिंह ने सभी छ: कारों को अलवर नगरपालिका को दे दी और आदेश दिया कि हर कार का उपयोग (उस समय के दौरान 8320 वर्ग कि.मी) अलवर राज्य में कचरा उठाने के लिए किया जाए।

विश्‍व की अव्वल नंबर मानी जाने वाली सुपर क्लास रोल्स रॉयस कार नगरपालिका के लिए कचरागाड़ी के रूप में उपयोग लिए जाने के समाचार पूरी दुनिया में फैल गया और रोल्स रॉयस की इज्जत तार-तार हुई। युरोप-अमरीका में कोई अमीर व्यक्‍ति अगर ये कहता “मेरे पास रोल्स रॉयस कार” है तो सामने वाला पूछता “कौनसी?” वही जो भारत में कचरा उठाने के काम आती है! वही?

बदनामी के कारण और कारों की बिक्री में एकदम कमी आने से रोल्स रॉयस कम्पनी के मालिकों को बहुत नुकसान होने लगा। महाराज जयसिंह को उन्होने क्षमा मांगते हुए टेलिग्राम भेजे और अनुरोध किया कि रोल्स रॉयस कारों से कचरा उठवाना बन्द करवावें। माफी पत्र लिखने के साथ ही छ: और मोटर कार बिना मूल्य देने के लिए भी तैयार हो गए।

महाराजा जयसिंह जी को जब पक्‍का विश्‍वास हो गया कि अंग्रेजों को वाजिब बोधपाठ मिल गया है तो महाराजा ने उन कारों से कचरा उठवाना बन्द करवाया.
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ભાવનગરના રાજવી વજેસિંહજી ગોહીલ એકવખત
શિકારે નીકળેલા. ધોમધખતા તાપમાં એક હરણ પાછળ
ઘોડો દોડાવ્યો,પણ જંગલની કાટમાં થોડુ છેટુ
પડ્યું,હરણ નીકળી ગયુ, થોડે દુર એક ચારણ
ભેંસો ચારતો હતો, મહરાજે પુછ્યુ કે હરણ કયા મારગે
(વાટે) ગયુ.
હરણનો શિકાર ના ચાહનાર ચારણે દુહો કહ્યો,
કે જે સાંભળતા વજેસિંહે હરણનો શિકાર છોડી દિધો અને
પોતાના રાજ્યમાં હરણના શિકાર પર પ્રતીબંધ
મુક્યો.
રાજાનુ મન પરિવર્તન કરનાર દુહો આ પ્રમાણે હતો,

“પાપી નરકે સિધાવ્યા,ધરમી સરગે ગયા,
વાટું બે જાણુ છું વજા! (હવે)પોસાય એમણો જા.

आज से 50 साल पहले तो कोई रिफाइन तेल के बारे में जानता नहीं था, ये पिछले 20 -25 वर्षों से हमारे देश में आया है | कुछ विदेशी कंपनियों और भारतीय कंपनियाँ इस धंधे में लगी हुई हैं | इन्होने चक्कर चलाया और टेलीविजन के माध्यम से जम कर प्रचार किया लेकिन लोगों ने माना नहीं इनकी बात को, तब इन्होने डोक्टरों के माध्यम से कहलवाना शुरू किया | डोक्टरों ने अपने प्रेस्क्रिप्सन में रिफाइन तेल लिखना शुरू किया कि तेल... खाना तो सफोला का खाना या सनफ्लावर का खाना, ये नहीं कहते कि तेल, सरसों का खाओ या मूंगफली का खाओ, अब क्यों, आप सब समझदार हैं समझ सकते हैं |

ये रिफाइन तेल बनता कैसे हैं ? मैंने देखा है और आप भी कभी देख लें तो बात समझ जायेंगे | किसी भी तेल को रिफाइन करने में 6 से 7 केमिकल का प्रयोग किया जाता है और डबल रिफाइन करने में ये संख्या 12 -13 हो जाती है | ये सब केमिकल मनुष्य के द्वारा बनाये हुए हैं प्रयोगशाला में, भगवान का बनाया हुआ एक भी केमिकल इस्तेमाल नहीं होता, भगवान का बनाया मतलब प्रकृति का दिया हुआ जिसे हम ओरगेनिक कहते हैं | तेल को साफ़ करने के लिए जितने केमिकल इस्तेमाल किये जाते हैं सब Inorganic हैं और Inorganic केमिकल ही दुनिया में जहर बनाते हैं और उनका combination जहर के तरफ ही ले जाता है | इसलिए रिफाइन तेल, डबल रिफाइन तेल गलती से भी न खाएं | फिर आप कहेंगे कि, क्या खाएं ? तो आप शुद्ध तेल खाइए, सरसों का, मूंगफली का, तीसी का, या नारियल का | अब आप कहेंगे कि शुद्ध तेल में बास बहुत आती है और दूसरा कि शुद्ध तेल बहुत चिपचिपा होता है | हमलोगों ने जब शुद्ध तेल पर काम किया या एक तरह से कहे कि रिसर्च किया तो हमें पता चला कि तेल का चिपचिपापन उसका सबसे महत्वपूर्ण घटक है | तेल में से जैसे ही चिपचिपापन निकाला जाता है तो पता चला कि ये तो तेल ही नहीं रहा, फिर हमने देखा कि तेल में जो बास आ रही है वो उसका प्रोटीन कंटेंट है, शुद्ध तेल में प्रोटीन बहुत है, दालों में ईश्वर का दिया हुआ प्रोटीन सबसे ज्यादा है, दालों के बाद जो सबसे ज्यादा प्रोटीन है वो तेलों में ही है, तो तेलों में जो बास आप पाते हैं वो उसका Organic content है प्रोटीन के लिए | 4 -5 तरह के प्रोटीन हैं सभी तेलों में, आप जैसे ही तेल की बास निकालेंगे उसका प्रोटीन वाला घटक गायब हो जाता है और चिपचिपापन निकाल दिया तो उसका Fatty Acid गायब | अब ये दोनों ही चीजें निकल गयी तो वो तेल नहीं पानी है, जहर मिला हुआ पानी | और ऐसे रिफाइन तेल के खाने से कई प्रकार की बीमारियाँ होती हैं, घुटने दुखना, कमर दुखना, हड्डियों में दर्द, ये तो छोटी बीमारियाँ हैं, सबसे खतरनाक बीमारी है, हृदयघात (Heart Attack), पैरालिसिस, ब्रेन का डैमेज हो जाना, आदि, आदि | जिन-जिन घरों में पुरे मनोयोग से रिफाइन तेल खाया जाता है उन्ही घरों में ये समस्या आप पाएंगे, अभी तो मैंने देखा है कि जिनके यहाँ रिफाइन तेल इस्तेमाल हो रहा है उन्ही के यहाँ Heart Blockage और Heart Attack की समस्याएं हो रही है |

जब हमने सफोला का तेल लेबोरेटरी में टेस्ट किया, सूरजमुखी का तेल, अलग-अलग ब्रांड का टेस्ट किया तो AIIMS के भी कई डोक्टरों की रूचि इसमें पैदा हुई तो उन्होंने भी इसपर काम किया और उन डोक्टरों ने जो कुछ भी बताया उसको मैं एक लाइन में बताता हूँ क्योंकि वो रिपोर्ट काफी मोटी है और सब का जिक्र करना मुश्किल है, उन्होंने कहा "तेल में से जैसे ही आप चिपचिपापन निकालेंगे, बास को निकालेंगे तो वो तेल ही नहीं रहता, तेल के सारे महत्वपूर्ण घटक निकल जाते हैं और डबल रिफाइन में कुछ भी नहीं रहता, वो छूँछ बच जाता है, और उसी को हम खा रहे हैं तो तेल के माध्यम से जो कुछ पौष्टिकता हमें मिलनी चाहिए वो मिल नहीं रहा है |" आप बोलेंगे कि तेल के माध्यम से हमें क्या मिल रहा ? मैं बता दूँ कि हमको शुद्ध तेल से मिलता है HDL (High Density Lipoprotin), ये तेलों से ही आता है हमारे शरीर में, वैसे तो ये लीवर में बनता है लेकिन शुद्ध तेल खाएं तब | तो आप शुद्ध तेल खाएं तो आपका HDL अच्छा रहेगा और जीवन भर ह्रदय रोगों की सम्भावना से आप दूर रहेंगे |

अभी भारत के बाजार में सबसे ज्यादा विदेशी तेल बिक रहा है | मलेशिया नामक एक छोटा सा देश है हमारे पड़ोस में, वहां का एक तेल है जिसे पामोलिन तेल कहा जाता है, हम उसे पाम तेल के नाम से जानते हैं, वो अभी भारत के बाजार में सबसे ज्यादा बिक रहा है, एक-दो टन नहीं, लाखो-करोड़ों टन भारत आ रहा है और अन्य तेलों में मिलावट कर के भारत के बाजार में बेचा जा रहा है | 7 -8 वर्ष पहले भारत में ऐसा कानून था कि पाम तेल किसी दुसरे तेल में मिला के नहीं बेचा जा सकता था लेकिन GATT समझौता और WTO के दबाव में अब कानून ऐसा है कि पाम तेल किसी भी तेल में मिला के बेचा जा सकता है | भारत के बाजार से आप किसी भी नाम का डब्बा बंद तेल ले आइये, रिफाइन तेल और डबल रिफाइन तेल के नाम से जो भी तेल बाजार में मिल रहा है वो पामोलिन तेल है | और जो पाम तेल खायेगा, मैं स्टाम्प पेपर पर लिख कर देने को तैयार हूँ कि वो ह्रदय सम्बन्धी बिमारियों से मरेगा | क्योंकि पाम तेल के बारे में सारी दुनिया के रिसर्च बताते हैं कि पाम तेल में सबसे ज्यादा ट्रांस-फैट है और ट्रांस-फैट वो फैट हैं जो शरीर में कभी dissolve नहीं होते हैं, किसी भी तापमान पर dissolve नहीं होते और ट्रांस फैट जब शरीर में dissolve नहीं होता है तो वो बढ़ता जाता है और तभी हृदयघात होता है, ब्रेन हैमरेज होता है और आदमी पैरालिसिस का शिकार होता है, डाईबिटिज होता है, ब्लड प्रेशर की शिकायत होती है |

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हम हे हम हेना कमाल
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कहते के एह उनकी प्राइवेट मुलाकात हे फिर ... शाही ठाठ क्यों दे रहे हो ....
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આપણા રાજકારણીઓને જ્યારે સત્તા મળે એટલે સરકારી પૈસે ભરપૂર ઐશ્વર્ય, સુખ-સુવિધા ભોગવવામાં કશું બાકી રાખતા નથી. રાષ્ટ્રપતિ, ઉપરાષ્ટ્રપતિ, રાજ્યોના રાજ્યપાલો, કેન્દ્રના મંત્રીઓ, રાજ્યોના મુખ્યમંત્રીઓ અને મંત્રીઓને પ્રજાની સેવા કરવા માટે અનેક પ્રકારની સગવડો આપવામાં આવે છે. જ્યારે સત્તા પર હોય ત્યારે સરકારી ગાડી અને આલીશાન આવાસ. તેમાં નોકર-ચાકર, રસોઈયા, માળી, ચોવીસ ક્લાક સિક્યુરિટીની સગવડો આ પ્રજાસેવકોને મળે છે. સરકારી ખર્ચે હવાઈયાત્રા, સરકારી ખર્ચે તબીબી સારવાર અને સરકારી વિશ્રામગૃહોમાં મફતિયું ખાવાનું તથા નફામાં રાજ્યની રાજધાનીમાં આલીશાન બંગલો બાંધવા માટે પ્લોટ તો ખરો જ, વળી આજીવિકા માટે પેન્શન.

લોકસભા અને રાજ્યસભાના સભ્યોને મફત હવાઈ અને રેલવે સફર. પાર્લામેન્ટની કેન્ટીનમાં બિલકુલ રાહત દરે જમવાનું એક એમપીને ૭૨ જેટલી વિશેષ સુવિધાઓ આપવામાં આવે છે. સત્તા ઉપર હોય ત્યારે તો ઠીક પણ જ્યારે હોદ્દાની મુદત પૂરી થાય ત્યારે પણ નેતાઓ ગુંદરની જેમ સગવડોને ચોંટેલા રહે છે. મંત્રી કે ધારાસભ્ય ન હોય તોપણ રોફ જમાવવા માટે તેમના વાહનની નંબરપ્લેટ પર માજીમંત્રી કે પૂર્વ એમએલએ લખવાનું છોડતા નથી. સત્તા પરથી ઊતર્યા પછી નિવૃત્ત મુખ્યમંત્રીઓને ટોકન દરે સરકારી આવાસ, ડ્રાઈવર, પીએ, પીએસની સગવડો આપવામાં આવે છે. સગવડોના આદતીઓ સેવા તો બાજુમાં રહી મેવાની એક પણ તક છોડતા નથી. પ્રજાના પ્રતિનિધિઓને મળતી સગવડો-સુવિધાઓ માટે, તેના વાજબીપણા અંગે હજુ પ્રજા તંદ્રાવસ્થામાં છે. પ્રજાના સેવકો સરકારી કર્મચારીઓની જેમ ક્યારેક પેન્શનની રકમ વધારવા, ભથ્થાં વધારવાની માંગણીઓ કરે છે!

હમણાં ભારતનાં પૂર્વ રાષ્ટ્રપતિ પ્રતિભા દેવીસિંહ પાટિલ તેમના માટે બની રહેલા સરકારી બંગલાથી નારાજ છે. પ્રતિભાદેવી માટે દિલ્હીના પોશ એરિયામાં આલીશાન સરકારી બંગલો બની રહ્યો છે.

સરકારે પૂર્વ રાષ્ટ્રપતિને ૨૦૦૦ ચો.મીટરનો પ્લોટ આપ્યો છે, પરંતુ પૂર્વ રાષ્ટ્રપતિને આવડા મોટા પ્લોટથી પણ સંતોષ નથી. તેમણે સરકારને કહ્યું કે મને ૨૦૦૦ ચો.મી.નો પ્લોટ નાનો પડશે એટલે કુલ ૪૦૦૦ ચો.મીટરનો પ્લોટ આપો. નિવૃત્ત રાષ્ટ્રપતિના પરિવારજનોની દિલ્હીમાં રહેણાક સુવિધાઓ હોવા છતાં તેમને ૨૦૦૦ ફૂટનો પ્લોટ નાનો પડે છે.

આપણા નેતાઓને સંતોષ નથી. લોકશાહીની વ્યવસ્થા અને સગવડોનો જો કોઈએ વધુમાં વધુ દુરુપયોગ કર્યો હોય તો તે આપણા નેતાઓ છે. સત્તાના નામે ભરપૂર સગવડો મેળવવામાં ભારતના આજના નેતાઓ નંબરવન છે. દુનિયામાં ભારત જ એકમાત્ર એવો દેશ છે જ્યાં રાજકીય નેતાઓ, પ્રધાનોને ભરપૂર અને વધુ પડતી સગવડો આપવામાં આવે છે. આપણે ત્યાં સગવડો માટે ફરિયાદો કરનારા નેતાઓ છે તેની સામે જોસ-મુજીકા નામની આ વ્યક્તિની જીવનશૈલીને જોઈને લાગે નહીં કે તે ઉરુગ્વેના રાષ્ટ્રપતિ હશે!

૨૦૦૯માં જોસ-મુજીકા ઉરુગ્વેના રાષ્ટ્રપતિ પદે ચૂંટાયા હતા. અગાઉ મંત્રી તરીકેનું પદ તેમણે તરત જ છોડી દીધુ અને દેશવાસીઓ તરફથી મળેલી ભેટસોગાદો રાજકોશમાં જમા કરાવી દીધી.

ઉરુગ્વેની રાજધાની મોનતેવીડિયોથી બે કિલોમીટર દૂર એક સાધારણ ફાર્મહાઉસ પર મુજીકા અને તેમની પત્નીએ ભાડે આવાસ રાખેલું છે. પોતાની સુરક્ષા માટે માત્ર એક પાલતુ શ્વાન રાખતા મુજીકાએ સરકારી પોલીસકર્મીઓને કહ્યું મારે જ રહેવાની સગવડ નથી તો તમને ક્યાં રાખું? મુજીકા ઉરુગ્વેના અન્ય સામાન્ય માણસોની જેમ જિંદગી જીવે છે.

રાજધાનીથી પોતાના વતનમાં જવા માટે મુજીકાએ રેલવે માર્ગનો ઉપયોગ કરે છે. રેલવે સ્ટેશને અન્ય યાત્રાળુઓ સાથેની કતારમાં ઊભા રહીને જ તે પોતાની ટિકિટ ખરીદે છે. પત્ની સાથે ખૂબ જ સાદગીપૂર્ણ અને સામાન્ય નાગરિકની જેમ જીવન જીવે છે. વહેલી સવારે બ્રેડ અને જ્યૂસ લેવા માટે મુજીકા જાતે જ બજારમાં જાય છે. બપોરે પત્નીને રસોઈમાં મદદ અને સાંજે ખેતરના કૂવાની પાળ ઉપર બેસીને રાષ્ટ્રપતિ ઘરનાં કપડાંની ધોલાઈ કરે છે. કોઈ મદદ કરવાનું કહે તો વિવેક સાથે ઇન્કાર કરે છે. ઘરમાં પીવાનું પાણી લેવા માટે કોઈ પણ જાતના સંકોચ વગર રાષ્ટ્રપતિ કૂવે જાય છે. રોજિંદા દરેક કામ પોતાની જાતે જ કરવાનો આગ્રહ રાખે છે. તેઓ રાજકારણી ઓછા અને આમઆદમી વધારે છે. સરકારમાંથી મળતા પેન્શનનો ૯૦ ટકા ભાગ એટલે કે આશરે ૧૨ હજાર ડોલર ગરીબોને દાનમાં આપી દે છે. આજુબાજુના લોકો મુજીકાને માન અને સન્માન આપે છે.

સત્તા પર નહીં હોવા છતાં ભારતમાં એમપી, એમએલએ સરકારી આવાસ ખાલી કરતા નથી. સરકારનું બાકી લેણું ચૂકવતા નથી. પગારમાંથી દાન કરવાની વાત તો વેગળી રહી કેટલાય નિવૃત્તિ પછી સરકારનું ર્ફિનચર પણ ચોરી-છૂપીથી લઈ જાય છે. સેવા કરવાના બદલે સગવડો શોધતા નેતાઓ માટે જોસ-મુજીકાની જીવનશૈલી અને ગરીબો માટેની હમદર્દી પ્રેરણારૂપ છે.
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