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॥ श्री गजानन प्रसन्न ॥

गणनायकाय गणदेवताय गणाध्यक्षाय धीमहि ।
गुणशरीराय गुणमण्डिताय गुणेशानाय धीमहि ।
गुणातीताय गुणाधीशाय गुणप्रविष्टाय धीमहि ।
एकदंताय वक्रतुण्डाय गौरीतनयाय धीमहि ।
गजेशानाय भालचन्द्राय श्रीगणेशाय धीमहि ॥

गानचतुराय गानप्राणाय गानान्तरात्मने ।
गानोत्सुकाय गानमत्ताय गानोत्सुकमनसे ।
गुरुपूजिताय गुरुदेवताय गुरुकुलस्थायिने ।
गुरुविक्रमाय गुह्यप्रवराय गुरवे गुणगुरवे ।
गुरुदैत्यगलच्छेत्रे गुरुधर्मसदाराध्याय ।
गुरुपुत्रपरित्रात्रे गुरुपाखण्डखण्डकाय ।
गीतसाराय गीततत्त्वाय गीतगोत्राय धीमहि ।
गूढगुल्फाय गन्धमत्ताय गोजयप्रदाय धीमहि ।
गुणातीताय गुणाधीशाय गुणप्रविष्टाय धीमहि ।
एकदंताय वक्रतुण्डाय गौरीतनयाय धीमहि ।
गजेशानाय भालचन्द्राय श्रीगणेशाय धीमहि ॥

ग्रन्थगीताय ग्रन्थगेयाय ग्रन्थान्तरात्मने ।
गीतलीनाय गीताश्रयाय गीतवाद्यपटवे ।
गेयचरिताय गायकवराय गन्धर्वप्रियकृते ।
गायकाधीनविग्रहाय गङ्गाजलप्रणयवते ।
गौरीस्तनन्धयाय गौरीहृदयनन्दनाय ।
गौरभानुसुताय गौरीगणेश्वराय ।
गौरीप्रणयाय गौरीप्रवणाय गौरभावाय धीमहि ।
गोसहस्राय गोवर्धनाय गोपगोपाय धीमहि ।
गुणातीताय गुणाधीशाय गुणप्रविष्टाय धीमहि ।
एकदंताय वक्रतुण्डाय गौरीतनयाय धीमहि ।
गजेशानाय भालचन्द्राय श्रीगणेशाय धीमहि ॥
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दिल छू लेगी ये कहानी
एक बार जरूर पढें.......*
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यह बात बचपन की है
उन दिनो घर के हालात थे कि
बडी मुश्किल से घर चलता था
एक दिन मे स्कूल से घर आया तो माँ
ने कहा हाथ धोकर आ जाउ में तेरे लिये
खाना लगाती हूँ
मै हाथ धो कर आया तो देखा कि बहुत
साल बाद माँ ने मेरी पसँद का खाना
बनाया हुआ था
मैने खुश होते हुए माँ से पुछा की क्या
बात है आज इतना अच्छा खाना क्यो??
मेरी खुशी को देखकर माँ मुस्कुराते हुए
बोली :- आज कुछ मेहमान आये थे
उनके लिये बनाया था
जब माँ ने खाना परोसा तो मैने उनको भी
साथ खाने के लिये कहा पर माँ ने नजरें
चुराते हुए कहा मैने उन लोगों के साथ ही
खा लिया था
तेज भूख और अच्छे खाने के चक्कर मे
ज्यादा नही सोचा और खाना शुरु कर दिया
जब खाना खाकर मै अन्दर गया माँ को
बताने कि मै बाहर जा रहा हूँ खेलने तो
अन्दर जो देखा
वो मुझे आज भी उदास कर जाता है
मैने देखा कि मेरी माँ पुरानी सूखी रोटी
पानी में भिगो कर खा रही थी
हम सब की माँ को पता है की हमको खाने
मे क्या पसँद है पर क्या आप को पाता है
माँ को क्या पसँद है शायद नही
माँ तब ही खाना खाती है जब उसके सारे
बच्चे खाना खा लेते है पर क्या आप रोज
माँ से पूछते हो माँ क्या आपने
खाना खा लिया??
माँ का प्यार अनमोल होता है आप भी
माँ का ध्यान जरूर रखे जैसे वो आपका
रखती है उनकी पसँद का खाना भी जरूर
खिलाये और रोज एक बार जरूर पूछे
आप ने खाना खा लिया या नही..!!
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